मे और मेरे अह्सास - 4 Darshita Babubhai Shah द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

मे और मेरे अह्सास - 4

मे और मेरे अह्सास

(4)

सफर मे चल पड़े है l
यकी है हमे पहचान
मिल ही जाएगी ll

***

गर तू वादा करता है l
कि तू ताउम्र खुश रहेगा l
तेरे लिए टेड़ी बनना
मुजे ताउम्र मंजूर है ll

***

दिल की धड़कनों मे रहते हो l
जिस्मों की दूरी कोई माईने नहीं रखती ll

***

किसी का वेलेंटाइन
होना किस्मत की बात है ll
इस लिए खुद के
वेलेंटाइन खुद ही बनो ll

***

इतने नादा नहीं है कि
खामोशी तेरी समज ना पाए l
बस थोड़ी दुनियादारी
बीच मे आ जाती है ll

***

एक ही रोजगार रह गया है l
तुजे हरपल चाहते रहना है ll

***

स्नेहेस्वर हो तुम l
शायद इसी कारण l
तुम्हें छोड़ नहीं पाते l
वर्ना हम किसी से l
हाथ नही आते हैं ll

***

चाय तो एक बहाना है l
तुजे याद करने का l
तुजे महसूस करने का ll

***

स्मार्ट फोन क्या आए l
डाक डाकिए ही खो गए ll

***

स्त्री गर जिद्दी ना होती l
राधाकृष्णकी मुरत ना होती ll
दिल लगाकर सोचना क्या l
चैन खोकर सोचना क्या ll

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दिल दर्द से भर गया जब उसने कहा l
बीमार ना होना हम तुम्हें देखने l
तुम्हारे घर ना आ सकेंगे ll

***

प्यार की हद पर कर दी तेरी चाहत में l
जिंदगी आबाद कर दी तेरी चाहत में ll

***

खो गये हैं जानबूझ कर l
उन्हे गली में ढूढ़ना क्या ll

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सांस को महका दो तुम l
रात को भटका दो तुम ll

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प्रेमपूर्वक कहीं हुई हर l
बात को बहका दो तुम ll

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सुबह से शाम तेरा ही नाम होठो पे रहेगा l
आखरी साँस तेरा ही नाम होठो पे रहेगा ll

***

तुज़े चाहते रहेना मेरी जिद्द नहीं l
ये शिद्दत से निभाने का शोख है ll

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नीद हमारी ख्वाब आपके l
दिल हमारा यादे आपकी ll

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सारा क़ुसूर नज़ रो का था l
खामखा दिल बदनाम हुआ ll

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तू ही मेरी जिंदगी l
तू ही मेरी बंदगी l
तू ही मेरी आवरदगी l
तूजी से ही मेरी आ आबादी ll

***

किताबों ने मीटिंग रखीं है l
गूगल की छुट्टी करने को ll

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शिव ही जीवन है l
जीवन ही शिव है ll

***

आज मेरी सांस को महका दो तुम |
प्रेमपूर्वक सांस को भटका दो तुम ||

***

जिंदगी की तलाश करने का फैसला लिया है l
इसी बहाने तुजे दिल ने फिर से याद किया है ll

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कोई तो रिसता है जमनोजन्म का l
वर्ना दुनिया की भीड़ में कैसे मिले l
वो आज तक समज नहीं पाए l
ख़ैर खुदा का तोहफा जी जान से l
गले से लगाए रखना है ताउम्र ll

***

उसे बीमारी हमारी सही नहीं जाएगी l
इस लिए बीमार होना नहीं चाहते ll

***

सांस को महका दो तुम l
रात को भटका दो तुम ll

***

प्रेमपूर्वक कहीं हुई हर l
बात को बहका दो तुम ll

***

प्यार दो आत्मा का मिलन है l
जिसको खुदा ने मिलाया है ll
रूह से रूह अजीब रिसता है l|

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हमेशा खुश रहते हैं l
ताकि
मेरे चाहने वाले खुश रहें ll

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Ankush

Ankush 2 साल पहले

shashikant misal

shashikant misal 2 साल पहले

A.H.P

A.H.P 2 साल पहले

Bhavna Jadav

Bhavna Jadav मातृभारती सत्यापित 2 साल पहले

Amit R Parmar

Amit R Parmar मातृभारती सत्यापित 2 साल पहले