मे और मेरे अह्सास - 8 Darshita Babubhai Shah द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

मे और मेरे अह्सास - 8

मे और मेरे अह्सास

(8)

जब उसकी आवज सुनता हूं l
बेहोशी के आलम से लौट आता हूं ll
जब उसकी सांसो की महक आती है l
उसे महसूस करने दौड़ा जाता हूं ll
वो क्या शै खुदा ने बनाई है l
देखकर उसे दिलों दिमाग लुटाता हूं ll

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सुर कुदरत के है निराले सुन जरा l
खेल कुदरत के है निराले देख जरा ll

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खुदा भी आज रूठ कर बैठा है l
मंदिर - मस्जिद बंध कर बैठा है ll
इंसानो के बीच तो दूरी रखनी है l
खुदा भी दूर जाकर के बैठा है ll

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कितना आसाँ है कहना ये पल गूजर जायेगा l
कितना कठिन पल को लम्हा लम्हा गुजारना ll

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रातभर एक खयाल दिल को पिघला ता रहा l
उन्हें भी हमारी याद आती भी होगी क्या ?

चांदनी छाई हुई है जहां भी देखो हरकही l
देखते है आरज़ू हमारी रंग भी लाती क्या ?

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मेरी दुनिया में सबसे अधिक महत्वपूर्ण है l
तुम्हारे साथ चलते हुए जिंदगी को गुजारना ll

तुज से ही नहीं तेरी जफ़ा से भी प्यार किया है l
तेरी हर एक मनभावन अदा से प्यार किया है l

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याद तेरी दिल में हमेशा रखूगी l
स्वाद आसुओ का हमेशा चखूगी l

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अजनबी सी दुनिया लगने लगी है l
अनदिखी सी दुनिया लगने लगी है ll

शोर एकदम शांत हुए, क्या वज़ह है?
अनसुनी सी दुनिया लगने लगी है ll

१४-४-२०२०

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हदय मे आश लेके आई हू l
दिल की दास्ताँ लेके आई हू ll

प्रेम का इज़हार करने के लिए l
फूल गुलाबी लेके आई हू ll

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ह्दय का शृंगार तुम हो l
नजर की रोशनी तुम हो ll

नज्म की मॉस्की तुम हो l
ग़ज़ल की शाय री तुम हो ll

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अमूल्य

"माँ का प्रेम "

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भीड़ में घूम ने वाला आज घर में कैद है l
आसमाँ मे उड़ ने वाला आज घर में कैद है ll

बांगो मे जूम ने वाला आज घर में कैद है l
पानी मे तैर ने वाला आज घर में कैद है ll

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मुजे तू चाहिए l
तेरा प्यार चाहिए l
तेरा साथ चाहिए l
तेरा कंधा चाहिए l
ख्वाबो मे सही l
खूबसूरत जिंदगी l
मुजे तू चाहिए ll

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आखरी साँस तक साथ निभाना तुम l
अनकहीं दिलकी वो बात निभाना तुम ll

चांद तारो की बारात की साक्षी मे l
साथ बीती हुईं रात निभाना तुम ll

प्यार की राहों मे चलते चलते कभी l
गर बिछड़ भी गये याद निभाना तुम ll
९-४-२०२०

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हर वक्त मुलाकात का बहाना ढूंढ़ते है l
बस तुम्हें देखने का बहाना ढूंढ़ते है ll

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लोकडाउन को सज़ा ना समज l
साथ अपनों के मजा तू समज ll

भागता फिरता ना जाने कहाँ ?
भागदोड़ो से रजा तू समज ll

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ख़ामोशी की अपनी जुबां होती है l
अनकहीं बात महसूस करनी है ll

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एक मुद्दत से कैद थे अपने ही बनाये हुए पिंजरे मे l
तब जाके घर के उल्लू आज घर लौट के आये हैं ll

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दुनिया में सबसे नरम
कोई शै है तो
वो है
माँ का "दिल ".

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प्रेम मेरा धर्म है l धर्म मेरा प्रेम है ll

कर्म मेरा धर्म है l धर्म मेरा कर्म है ll

सेवा मेरा धर्म है l धर्म मेरा सेवा है ll

मानवता मेरा धर्म है l धर्म मेरा मानवता है ll

निष्ठा मेरा धर्म है l धर्म मेरा निष्ठा है ll
५-४-२०२०

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इश्क करने मे कुछ जल्दबाज़ी हो गई l
जरासी नासमझी जांकी दुश्मन बन गई ll

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गम छुपाना भी एक कला है l
दिल बहलाना एक कला है ll

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अब तो अनकहे जज्वात को होठो पे आने दो l
गर घुटन और बढ़ गई दिल तारतार हो जाएगा ll

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जो बात हम ने कही
नहीं है l
वो अनकही बात को
आपने समजा कैसे?

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मेरी दुनिया में सबसे अधिक महत्वपूर्ण है l
तुम्हारा साथ चलते हुए जिंदगी को गुजारना ll

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कल तक ना मिलने के सो बहाने ढूंढ़ता था l
आज कोरोना ने अच्छा बहाना दे दिया ll

उम्रभर दिन रात मारा मारा फिरा करता था l
घर की दिवालो ने अच्छा सहारा दे दिया ll

चांदनी रातभर साथ देती रही जगराता मे l
चांद तारोकी रातने अच्छा नजारा दे दिया ll

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Monika kakodia

Monika kakodia मातृभारती सत्यापित 2 साल पहले

pallavi mehta

pallavi mehta 2 साल पहले

Bhagvati Jumani

Bhagvati Jumani 2 साल पहले

M. Sohil shaikh

M. Sohil shaikh 2 साल पहले

Urmi Chauhan

Urmi Chauhan मातृभारती सत्यापित 2 साल पहले