मे और मेरे अह्सास - 8 Darshita Babubhai Shah द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ होम किताबें हिंदी किताबें कविता किताबें मे और मेरे अह्सास - 8 मे और मेरे अह्सास - 8 Darshita Babubhai Shah द्वारा हिंदी कविता (12) 1.3k 4.9k मे और मेरे अह्सास (8) जब उसकी आवज सुनता हूं lबेहोशी के आलम से लौट आता हूं llजब उसकी सांसो की महक आती है lउसे महसूस करने दौड़ा जाता हूं llवो क्या शै खुदा ने बनाई है lदेखकर उसे ...और पढ़ेदिमाग लुटाता हूं ll ******* सुर कुदरत के है निराले सुन जरा lखेल कुदरत के है निराले देख जरा ll ******* खुदा भी आज रूठ कर बैठा है lमंदिर - मस्जिद बंध कर बैठा है llइंसानो के बीच तो दूरी रखनी है lखुदा भी दूर जाकर के बैठा है ll ******* कितना आसाँ है कहना ये पल गूजर जायेगा lकितना कम पढ़ें पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें मे और मेरे अह्सास - 8 में और मेरे अहसास - उपन्यास Darshita Babubhai Shah द्वारा हिंदी - कविता (321) 67.8k 273.4k Free Novels by Darshita Babubhai Shah अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी उपन्यास प्रकरण हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी Darshita Babubhai Shah फॉलो