में और मेरे अहसास - 53 Darshita Babubhai Shah द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

में और मेरे अहसास - 53

जवान दिखने के जिंदा शौक़ रख l
दुनियावालो के सामने रौब रख ll

सब के साथ मिलझुल कर रह l
दिल मे ख़ुदा का तू खौफ़ रख ll

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अच्छे कर्म सना बन गया
श्राप भी दुआ बन गया ll

मुहब्बत मे मिला हुआ l
दर्द भी दवा बन गया ll

इश्क ने सालो से की हुई l
बेवफाई अदा बन गया ll

कई युगों से तलाश थी वो l
तेरा प्यार जहा बन गया ll

आज रूठे हुए यार का l
मौन भी सदा बन गया ll
१६-४-२०२२
सना – प्रार्थना

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इश्क रज़ा है l
इश्क़ क़ज़ा है ll

एक तरफ़ा हो तो l
इश्क़ सजा है ll

दो तरफा हो तो l
इश्क मजा है ll

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ना जाने क्या खोने से डर रहा हूँ l
ख़ुद की किस्मत से लड़ रहा हूँ ll

अब किस कसूर की सजा दे रहे हैं l
खुदासे बारबार प्रश्न कर रहा हूँ ll

रोज ख़ुद की खुशियों की खातिर l
फ़िर से कर्म का घड़ा भर रहा हूँ ll

जिंदगी मे कई धूप छाँव देख ली l
आखरी पड़ाव की और बढ़ रहा हूँ ll

मौसमो का बदलता मिजाज देख l
लम्हा लम्हा पल पल मर रहा हूँ ll

सुनने सुनाने के दिन बीत गये हैं l
चुपचाप सब का मन पढ़ रहा हूँ ll
१५-४-२०२२

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मौसम का बदलता मिजाज देख लिया l
हुश्न के चहेरे पर हिजाब देख लिया ll

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आज दिल में हलचल है l
हवाए महकती संदल है ll

हुश्न बेपर्दा हुआ शहर में l
चारो ओर खलबल है ll

ख़ुदाई छलक रहीं हैं l
चहरे का नूर असल है ll

महबूब की याद में सुन l
ताजा लिखी ग़ज़ल है ll

नसीब वाले है जिनकी l
याद आती पलपल है ll
१२-४-२०२२

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मेरे सपनों की उड़ान ऊँची है l
हिम्मत ए हौसलों से सीची है ll

जीवन का सफ़र आसान करने l
सांसो की दोर कसके खींची है ll

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चोट दिल पर लगी फिर हम ख़ामोश हुए l
होश मे आने से पहले ही हम बेहोश हुए ll

पर्दानशीं पलभर के लिए बेपर्दा होते l
नजरो का जाम पीते ही मदहोश हुए ll

हुस्न की महफ़िल में मुद्दतों के बाद एक l
प्यारी सी मुस्कराहट से फरामोश हुए ll

एक इशारे की जुस्तजू थी कई दिनों से l
यार के इर्शाद क्या कहा पुरजोश हुए ll

आज गुपचुप ईशारे मे दिल ने दिल से l
मिलते मिलाने के वादे से जोश हुए ll
१०-४-२०२२

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जल्द ही ज़िंदगी की पहेली सुलझाओ l
चलो दिलों से नफ़रत के दीप बुझाओ ll

लोग भूल गए हैं दुनिया दुनियादारी l
मायने साथ साथ जीने के बताओ ll

कई रस्मों की ज़ंजीरो से जकड़े है l
धीरज करके प्यार से समझाओ ll

बड़ी गुमसुम हो गई है महफ़िले  l
फ़िर से प्यार भरे नग्मे गुनगुनाओ ll

ज़माना गूजर गया कुछ अच्छा सुने l
मीर - ग़ालिब  की ग़ज़ल सुनाओ ll
९--४-२०२२

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प्यार का रिसता टूट सकता है l
दर्द का रिसता कभी नहीं टूटता है ll

रेत पर लिखा नाम मीट जाता है l
दिल मे लिखा नाम नहीं मिटता है ll

जन्म जन्म का साथ निभाने आए हैं l
तुम्हारे थे तुम्हारे है बताने आए हैं ll

अटूट बंधन में ऐसे बांध लेगे की l
उम्रभर के लिए गले लगाने आए हैं ll

अजीब से रिसते मे बाँध दिया है l
दामन  खुशियो को भर दिया है ll

बैठे बिठाए ख़ज़ाना दे दिया है ll
देखो ख़ुदा ने ये क्या कर दिया है?
७-४-२०२२

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बारिश के पानी मे बह रहीं कागज़ की क़श्ती l
जान से प्यारी बचपन की अनमोल सी दोस्ती।

न कल की चिंता ना आज की फ़िकर होती थी l
सुबह शाम रात दिन करते रहते थे मस्ती ll

एक दूसरे पर जान निसार करते थे लोग l
मिलझुल कर रहनेवाली कहा गई वो बस्ती?
५-४-२०२२

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याद आता है गुजरा हुआ ज़माना l
दिल गुनगुनाता है भुला तराना ll

नादानी मे कहा सुनी हो जाती l
प्यारा होता था रूठना मनाना ll

निगाहें नाज़ से नज़र मिलते ही l
हथेली सी चहेरे को छुपाना ll

क्यूँ कई घंटों मौन हो जाते हो?
बंध कर दो इस तरह सताना ll

बचपन मे किया करते उस तरह l
छोटी सी बातेँ दिल से लगाना ll

बारबार मिलने की उम्मीद होती है l
कठिन अपने आप को समझाना ll
४-३-२०२२

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लम्हो की कैद से निकलना नामुमकिन है l
दर्दों की कैद से निकलना नामुमकिन है ll

साथ जिएंगे साथ ही मरेंगे कसमें खाई थी l
वादों की कैद से निकलना नामुमकिन है ll

वो सुबह शाम, रात दिन बातेँ करते थे l
यादों की कैद से निकलना नामुमकिन है ll

छोटे से छोटा वाकिया बताया करते हैं l
बातों की कैद से निकलना नामुमकिन है ll

याद मे रातभर करवते बदलते रहना l
रातों की कैद से निकलना नामुमकिन है ll
३-३-२०२२

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नया साल है आया l
नया ज़माना लाया ll

खुशियो का खज़ाना l
और सुकून है पाया ll

पिछले साल का अब l
न पड़ने देगे साया ll

देखो हर लम्हा चाहिए l
एकदूसरे की छाया ll

ख़ुदा से यही दुआ l
सलामत रहे काया ll

सादगी से जीते रहेगे l
न छू सके कोई माया ll
२-४-२०२२

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ये ज़िंदगी है तब तक जंग है l
आंसूंओं का कारोबार बंद है ll

परिस्थितिओ के मारे है सब l
यहां जिसे भी देखो वो तंग है ll

बशीरों लेके आया क़ासिद l
आशा उम्मीदों की तरंग है ll

तौफ़ीक़ियाँ से है दामन भरा l
आज दिलों दिमाग में उमंग है ll

सदाक़तों के साथ जीते रहो l
जिवन मे तरह तरह के रंग है ll
१-४-२०२२
सदाक़तों - सच्चाईयों
तौफ़ीक़ियां - हौसले
बशीरों - शुभ- संदेशों

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देख लेने दो नज़र भरके l
चाहते रहेगे जिगर भरके ll

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