में और मेरे अहसास - 54 Darshita Babubhai Shah द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

में और मेरे अहसास - 54

Darshita Babubhai Shah मातृभारती सत्यापित द्वारा हिंदी कविता

आश टूट रहीं हैं ख्वाइशों की lसाजिश हैं आझमाईशो की ll बड़ी मुद्दतों के बाद मिले है तो lलंबी सूची है फ़रमाइशों की ll रेत सा तपिश हो गया है दिल मेरा lइंतज़ार हैं प्यार की बारिशों की ll ...और पढ़े


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