में और मेरे अहसास - 47 Darshita Babubhai Shah द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

में और मेरे अहसास - 47

 

आरज़ू मेरी इस तरह मुकम्मल हुईं l

याद उनकी दीदार ए यार दे गईं ll

 

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हर लम्हा हर पल हर वक्त मैं ग़ज़ल लिखता हूँ l

हिमाकत तो देख इबादत मैं ग़ज़ल लिखता हूँ ll

 

मौसम की तरह बदलते देखा है हसीनो को l

बेवफा ओ की मुहब्बत मैं ग़ज़ल लिखता हूँ ll

 

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दुनियावाले क्या कहेगे परवाह नहीं l

अब किसी के डर से मोड़ेगे राह नहीं ll

 

बस एक बार दीदार ए यार हो जाए l

दिल मे इस के सिवाय कोई चाह नहीं ll

 

अजनबी जहाँ मे सिर्फ़ तुमसे मतलब l

किसी और से यहां सरोकार नहीं ll

 

आज तुम बुलाओ और हम ना आए l

सुनो इतना भी बड़ा कारोबार नहीं ll

 

छिपते छिपाते कहा भागे जा रहे हो l

प्यार करने वाले है गुनेहगार नहीं ll

२७-१२-२०२१ 

 

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वादा करके वो मुकर गया वो अफ़वाह थी,

जाम पीकर वो बहक गया वो अफ़वाह थी।

 

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चांद को बादलों का हिजाब है l

चांदनी में छाया रुआब है ll

 

तेरे आने से रोशन हुई रात l

आभ में सितारा भी शादाब है ll

 

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जीवन है ज्ञान का भंडार l

जिंदगी मे करो सत्कार ll

 

एक एक शब्द की झंकार l

भरपूर मिलता है संस्कार ll

 

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गर एक बार समझो सार l

उम्रभर का चाहिए आधार ll 

 

इसके कई तरह के प्रकार l

विचार को मिलते आकर ll

 

भाव को जानो आर पार l   

सब सपने होते हैं साकार ll

 

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नासमझ को समझा ना बेकार है l

इशारो मे समझें वो समझदार हैं ll

 

आपत्ति से पहेले ही तैयारी रखे l

हरवक्त चौकन्ना वो ख़बरदार है ll 

 

बिना मतलब के कही हुई हर l

दम वाली बातेँ ही असरदार है ll

 

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तबाही का मंझर देखने के बाद भी इंसान संभलने वाला नहीं l

तुम चाहे कितनी भी कोशिशे कर लो नादान सुधरने वाला नहीं ll

 

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दिलों मे मुहब्बत की आग भड़कानी पड़ेगी l

बुझी हुईं चिनगारी फ़िर सुलगानी पड़ेगी ll

 

नफरत को दिल मे लिए सालो से जीते हैं l

दुनिया को नई दिशा दिखलानी पड़ेगी ll

 

न जाने किस आधी में फंसे हुए हैं ये l

घिसी-पिटी सोच को बदलवानी पड़ेगी ll

 

अपने आप मे गुम रहते हैं हर वक्त l

कैसे भी करके बात मनवानी पड़ेगी ll

 

नस्ल गुमराह हो न जाए इसलिए l

क़ीमत एकता की समझानी पड़ेगी ll

 

चलो आओ पहले सरहदों को मिटा दे l

भाइचारे की ज्योत को जलानी पड़ेगी ll

 

औरों का हौसला बढ़ाने के लिए l

खुद की हिम्मत आजमानी पड़ेगी ll

२१-१२-२०२१ 

 

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मेरी साँस तुम, मेरा उच्छ्वास तुम l 

मेरी अगन तुम, मेरी लगन तुम ll

 

मेरी चाहत तुम, मेरी राहत तुम l 

मेरी रात तुम, मेरी चांदनी तुम ll

 

मेरा चांद तुम, मेरा सितारा तुम l 

मेरी आंख तुम, मेरा काजल तुम ll

 

मेरी दिवानगी तुम, मेरी आवारदगी तुम l 

मेरी बाँकपन तुम, मेरा अल्हड़पन तुम l

 

मेरे आचार तुम, मेरे विचार तुम l 

मेरा मान तुम, मेरी जान तुम ll

 

मेरे ख्वाबों मे तुम, मेरे ख्यालो मे तुम l 

मेरी नीदो मे तुम, मेरी यादो मे तुम ll

 

मेरे पास तुम, मेरे साथ तुम l 

मेरी राह तुम, मेरी मंजिल तुम ll

 

मेरी आरज़ू तुम, मेरी जुस्तजू तुम l 

मेरी यार तुम, मेरी यारी तुम ll

 

मेरी माही तुम, मेरी संगिनी तुम l

मेरी साथी तुम, मेरी संजीवनी तुम ll

२०-१२-२०२१ 

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जिंदगी की नई शुरुआत की है l

दुनिया को राज़ की बात की हैll

 

मुहब्बत मे दो दिलों का मिलना l

प्यारे लम्हों ने रोशन रात की है ll

 

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आज कल कलम क्यों रुक गई है l

दुनिया की बातें क्यो चुभ गई है ll

 

प्यार भरे लम्हे याद कर के l

शरम के मारे क्यों झुक गई है ll

 

क्या तुम्हें भी नीद आने लगी हैं ? 

किताबों के भीतर क्यों छुप गई है ll

 

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मुहब्बत से दूर रहती सदा ही l

अहसाने प्यारे क्यों लिख गई है ll

 

एक हाथ में जाम काफी नही था l

साथ सिगरेट के क्यों फुक गई है ll

 

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जूठे दोस्त को पहचान गई हूँ में l

जालिम है दुनिया मान गई हूँ में ll

 

सालों से लगातार छुपाया हुआ l

अनजाना  राज़ जान गई हूँ में ll

 

रिश्ते हर हाल में निभाते रहेगे l

दिलों दिमाग में ठान गई हूँ में ll

 

हर वक्त नज़रे बिछा के रहते हैं l

ये दुनियारी पे कुर्बान गई हूँ में ll

 

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अब सह नहीं सकते तेरी ये नादानियाँ l

जान लें लेंगी एक दिन, ये शैतानियाँ ll

 

किसी भी तरह से बात अपनी मनाते हो l

आज से छोड़ दो करना ये मनमानियाँ ll

 

जो दिल में आता है बंध कर दो बोलना l

चुप कर लो, दो गज लम्बी ये जबानियाँ ll

 

बिना बात के मुँह फूलाए फिरती रहती हो l

कब तक रूठी रहोगी ओ दिलजानियाँ ll

 

हद से ज्यादा लाड़ पान अब न मिलेगा l

बहोत सह ली मैंने तेरी ये नादानियाँ ll

 

14.12.2021

 

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याद तेरी इस तरह सता रही है l

दिलो दिमाग हच मचा रहीं हैं ll

 

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हर वक्त अपनी मनमानी ना किया करो l

औरों की बात को अहमियत दिया करो ll

 

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Mitesh Shrimali

Mitesh Shrimali 6 महीना पहले