में और मेरे अहसास - 47 Darshita Babubhai Shah द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

में और मेरे अहसास - 47

Darshita Babubhai Shah मातृभारती सत्यापित द्वारा हिंदी कविता

आरज़ू मेरी इस तरह मुकम्मल हुईं l याद उनकी दीदार ए यार दे गईं ll *********************** हर लम्हा हर पल हर वक्त मैं ग़ज़ल लिखता हूँ l हिमाकत तो देख इबादत मैं ग़ज़ल लिखता हूँ ll ...और पढ़े


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