कहानी संग्रह - 15 - आज के पति पत्नी Shakti Singh Negi द्वारा उपन्यास प्रकरण में हिंदी पीडीएफ

कहानी संग्रह - 15 - आज के पति पत्नी

पति - अरे भाई मुझे नौकरी नहीं मिली तो क्या करूं? बेरोजगार हूं तो क्या हुआ? थोड़ा बहुत तो कमा ही लेता हूं.


पत्नी - तुमसे शादी करके तो मेरी किस्मत फूट गई है. तुम्हारी कुछ इनकम तो है नहीं.


पति -अरे भाई तुम भी तो ₹ 8000 महीने का कमाती हो. बैंक में फील्ड ऑफिसर का काम करके. तुमने तो मुझे अपनी इनकम में से कभी ₹1 नहीं दिया.


पत्नी - यह तो पति का फर्ज होता है. पत्नी को खिलाने का. मेरी इनकम तो मेरे शौक पूरा करने के लिए है. अच्छा तुमने दिल्ली में जो 40 लाख का प्लाट बेचा, उसका पैसा कहां है. उसके पैसे मुझे दो पूरे. मैं ऐश करूंगी और अपने लिए गहने वगैरा बनाऊंगी.


पति - जब मैंने 10 साल पहले 20 लाख का प्लॉट लिया था तो 15 लाख मां और पिताजी ने दिया था. 5लाख मैंने अपनी जेब में डाले थे तुम्हारे पास तो बहुत पैसे थे. तुमने तो ₹1 भी नहीं दिया. मैंने 15 लाख अपने मां पिताजी को वापस कर दिए और बाकी के पैसे मैंने अपना कर्जा चुकाने में लगा दिये. जब तुमने ₹1 खर्च नहीं किया तो तुम्हें लेने से क्या मतलब.




पत्नी -अगर मुझे पैसे खर्च करने ही थे तो मैं अपने मायके में ही रहती. और तुमने ₹1500000 सास ससुर जी को वापस क्यों किए. ओर ले लेते उनसे. वापस करने की क्या जरूरत थी? वह कितना दिन और जिएंगे?



पति - तुम तो कभी मेरे लिए शादी के बाद एक रुमाल तक नहीं लाई. मैंने तो तुम पर बहुत खर्चा किया है. और मेरे माता पिता भाभी बहुत जिएंगे. अगर मैं तुम्हें कह दूं कि तुम्हारे माता-पिता कितने दिन और जाएंगे तो?


पत्नी - मेरे माता-पिता को ऐसा बोलते हो और यह तो तुम्हारा फर्ज है. घर परिवार की देखभाल करना और तुम मुझसे ₹1 मांगते हो. मैं तुम पर दहेज का केस कर दूंगी.


पति - मैं भी तुम पर मानसिक उत्पीड़न का केस कर दूंगा.


पत्नी - मैं दहेज केस में तुम्हारे पूरे परिवार ननद जी सास जी और ससुर जी को फंसा दूंगी.



पति - तेरे बाप ने तो ₹1 नहीं दिया ना मैंने मांगा तो झूठा ही केस कर देगी.



पत्नी - कानून वाले तो मेरी ही बात सुनेंगे. तुम्हारी बात कौन सुनेगा कोर्ट में.



पति - तो तुम दहेज कानून का गलत यूज करोगी. तो मैं भी कुछ ना कुछ धारा तुम्हारे ऊपर लगवा ही दूंगा.


पत्नी - शर्म नहीं आती कानून का गलत प्रयोग करते हुए


पति - जब तुम्हें नहीं आती तो मुझे क्यों आएगी.






कुछ दिन बाद दोनों पति-पत्नी कोर्ट में होते हैं.


पत्नी - मी लोर्ड मेरा पति और उसके मां-बाप मुझसे दहेज मांगते हैं.


पति - नहीं मी लोर्ड मैंने कभी दहेज नहीं मांगा इससे.


पत्नी - मी लोर्ड ये झूठ कह रहा है. यह हमेशा मुझसे दहेज मांगते हैं.


पति - यह बताओ तुमने आज तक दहेज में क्या-क्या दिया?



पत्नी - मेरे पिताजी के पास तो कुछ है ही नहीं. हम कहां से देंगे हमने तो ₹1 भी नहीं दिया.



पति - मी लोर्ड यह औरत मेरा मानसिक उत्पीडन करती है. मुझे कहती है कि होटल में बर्तन मांज और जो पैसा मिलेगा उसे मेरे हाथ में दे. मैं बैठे-बैठे खाऊंगी.



पत्नी - तो क्या हुआ मैंने बोला भी तुम्हारा फर्ज है हमें बैठे-बैठे खिलाना. और जज साहब इसमें 40 लाख में एक प्लॉट भेजा है मुझे आधा 20 लाख रुपए चाहिए.




पति - प्लॉट में तो पैसा मैंने लगाया था. तुमने एक रुपए भी लगाया क्या और तुम ₹20 लाख की बात करती हो. तेरे दादा परदादा ने भी देखा 20 लाख रुपया कभी. तेरा दिमाग फिर खराब हो गया है . मैंने तो गरीब घर का समझ कर लड़की को ही दहेज समझकर तुमसे शादी की थी. मैं तो दहेज प्रथा का बहुत विरोधी रहा हूं. तुमने मेरी इंसानियत का यह सिला दिया मुझे?



जज - आप लोग सब शांत रहिए. मुझे सब पता लग गया है. आप लोग दहेज कानून का गलत प्रयोग मत कीजिए. नहीं तो आपको उल्टे ही जेल में बंद कर दिया जाएगा.



पत्नी घबरा जाती है और जज से कहती है - मी लोर्ड फिर तो मुझे इससे अलग रहने की अनुमति दीजिए. और इससे कहिए कि कैसे भी कमा कर मुझे ₹5000 महीना दे, गुजारा भत्ता के रूप में.




पति - आजकल मैं बेरोजगार हूं. तुझे तो 8000 महीने के मिलते हैं. जज साहब इस से कहिए कि ₹4000 यही मुझे दे दे हर महीने गुजारे भत्ते के रूप में.



जज - अब दोनों शांत रहिए और मिलजुल कर रहें. नहीं तो हमें आप दोनों पर कठोर कार्यवाही करनी पड़ेगी. मैं सब समझ गया हूं. आप दोनों थोड़ा - थोड़ा कमाते हैं. तो मिलकर घर चलाइए. दहेज लेना गुनाह है. लेकिन गुजारा भत्ते के रूप में जो पैसा लिया जाता है, वह भी गलत रूप में लेना दहेज से बड़ा गुनाह है.


दहेज निरोधक कानून तो दहेज से उत्पीड़ित महिलाओं की रक्षा करने के लिए बनाया गया है न कि इसका दुरुपयोग करने के लिए. और गुजारा भत्ता की व्यवस्था भी पति से परेशान या पत्नी से परेशान लोगों के लिए बनाया गया है ना की नौटंकी के लिए. आजकल तो 99% केस झूठे ही आते हैं. हम सब समझ जाते हैं.




जज साहब की फटकार के बाद दोनों पति-पत्नी अपना - अपना केस वापस ले लेते हैं और शांति से मिलजुल कर रहने बैठ जाते हैं. अपना खर्चा भी दोनों मिलजुल कर करते हैं. अब उनका परिवार खुशहाल हो जाता है.

रेट व् टिपण्णी करें

Shakti Singh Negi

Shakti Singh Negi मातृभारती सत्यापित 5 महीना पहले