कहानी संग्रह - भाग 2 - समझदारी Shakti Singh Negi द्वारा उपन्यास प्रकरण में हिंदी पीडीएफ

कहानी संग्रह - भाग 2 - समझदारी

मेरे पास एक 32 कमरों का मकान है। एक दिन मैंने सोचा की बेरोजगारी तो है ही क्यों न इस मकान का कुछ सदुपयोग किया जाये। मैंने बाजार से कुछ चूना लिया और सारे मकान का सामान एक जगह रख लिया। सारे मकान को खुद चूना किया और फालतू सामान व पुराने सामान को कबाड़ी को दे दिया। इससे मुझे ₹2000000 की इनकम हुई। तीन चार कमरों को अपने परिवार के लिए रखकर मैंने बाकी मकान को किराए पर चढ़ा दिया। अब मुझे हर महीने 200000 किराया आने बैठ गया।
मेरे पास कुछ छोटे-छोटे छितरे हुए खेत भी थे। मैंने उन सब को बेच दिया। प्राप्त धन में कुछ धन अपनी तरफ से मिलाकर मैंने एक बड़ा सा उपजाऊ खेत खरीदा और कुछ अच्छी नस्ल की गाय भैंस खरीदी। खेत में पानी की अच्छी व्यवस्था की। अब मुझे खेती व पशुपालन से भी हर महीने ₹300000 के करीब इनकम होने लगी। इस तरह अब मैं हर महीने कुल ₹500000 कमाने लगा। बोलिए किया ना मैंने समझदारी का काम।







रजनी एक अच्छी लड़की है। उसके मोहल्ले के बगल में एक पुरानी सी बस्ती है। यह बस्ती झुग्गी झोपड़ी वालों की है। रजनी बहुत अच्छी नौकरी करती है। उसके पास काफी पैसे जमा हो गये । अब वह झुग्गी झोपड़ी वालों की मदद करने लग गई। उसकी मदद झुग्गी झोपड़ी के बच्चों के लिए किसी तोहफे से कम नहीं है। आप क्या सोचते हैं?






उत्तरी ध्रुव में छह माह की रात और 6 माह का दिन होता है यह कुदरत का चमत्कार ही है ।
नॉर्दन लाइट एक किस्म से भगवान का चमत्कार ही है।






जब-जब कॉफी पीता हूं। सब टेंशन साफ हो जाता है। इसलिए कहता हूं एक प्याला काफी सब टेंशन साफी।




प्रिय लेखक- गण कृपया बताएं कि प्रतिलिपि ऐप किस माध्यम से बढ़िया चलेगा। मोबाइल से पीसी से या लैपटॉप से।








शतरंज एक बहुत अच्छा खेल है। इसमें हर प्यादा वजीर घोड़ा हाथी ऊंट सभी अपने राजा की रक्षा करते हैं और दूसरे पक्ष के राजा को कैद करने की कोशिश करते हैं। जो पक्ष सफल होता है वही जीतता है। जिंदगी भी शायद शतरंज का ही खेल है। वैसे शतरंज खेलने से दिमाग तेज होता है ऐसा अनुभव में आया है।








दीप्ति हमेशा नाव में बैठकर अपने स्कूल पढ़ने जाती थी। नाव को चलाने वाला नदी पार का एक नाव वाला था। धीरे-धीरे दीप्ति नाव वाले उस दीपक से प्यार कर बैठी।


सहेलियां उसे चिढ़ाती थी, वह तो तेरा नदी पार का साजन है। आखिर जैसे ही दीप्ति 18 बरस की हुई, नदी पार का साजन उससे शादी करके उसे अपने घर ले गया।










कर्म सर्वश्रेष्ठ है। कर्म से ही किस्मत बनती है। कर्म चाहे इस जन्म का हो या पूर्व जन्म का, इन्हीं से किस्मत का निर्धारण होता है।










अकेलापन एक अभिशाप भी है तो एक वरदान भी है। अगर आप अकेलेपन से बोर होते हैं, तो आपके लिए यह एक अभिशाप है।


और यदि अकेले में आप कुछ अच्छा काम करते हैं। जीवन में कुछ आगे बढ़ते हैं, तो आपके लिए यह एक वरदान है।









सोनू की मेहनत

सोनू एक कुशल कारीगर था। वह एक योग्य रसोइया था। वह अच्छा कमाता था। परंतु उसे नशे की लत थी। फल - स्वरुप वह गरीब ही रहा। एक बार उसकी पत्नी बीमार पड़ी। इलाज के लिए ₹200000 की जरूरत थी। सोनू के पास यह रकम न थी। उसकी नशे की आदत सभी जानते थे। अतः किसी ने उसे कर्जा नहीं दिया सोनू की पत्नी मरते-मरते बची।

इस घटना से सोनू ने सबक लिया और अचानक ही उसने सभी नशे छोड़ दिए। कुछ ही वर्षों में उसके पास 3000000 रूपए बचत के बच गए। सोनू ने अपना सभी छोटा बड़ा कर्जा चुका दिया। घर के लिए फ्रिज, टीवी, कपड़े, राशन सभी सामान आ गया। सोनू ने एक कुछ वर्ष पुराना घर खरीद लिया। उसने इसे रेनोवेट भी करवा दिया। दो छोटे-छोटे सस्ते प्लॉट भी खरीद लिए। कुछ कमरे सोनू ने स्वयं को रहने के लिए रखे। कुछ कमरे उसने किराए पर चढ़ा दिये। सोनू ने एक रेस्टोरेंट भीड़भाड़ वाली जगह पर भी खरीद लिया।

अब सोनू की अच्छी इनकम होने लगी।।

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Shakti Singh Negi

Shakti Singh Negi मातृभारती सत्यापित 5 महीना पहले