कहानी संग्रह - 11 - त्रिया राज्य Shakti Singh Negi द्वारा उपन्यास प्रकरण में हिंदी पीडीएफ

कहानी संग्रह - 11 - त्रिया राज्य

मैंने त्रिया राज्य की बहुत बातें सुनी थी. सुना था कि त्रिया राज्य पूर्वोत्तर भारत में असम के नजदीक है. एक दिन मैंने अपने बैग में कुछ कपड़े रखे. खाने के लिए बिस्कुट, काजू, बादाम आदि रखे. एक लाइसेंसी रिवाल्वर और एक मोटा सोटा भी रखा. उसके बाद में त्रिया राज्य की ओर चल पड़ा.


लोगों से बहुत पूछा वहां जाकर. तो किसी ने बताया यह झूठ है. किसी ने बताया सच है. किसी ने बताया कि नदी के पार त्रिया राज्य है और रात को पूर्णिमा के दिन वहां जाना पड़ता है. उसी दिन त्रिया राज्य दृष्टिगोचर होता है. मैं पूर्णिमा के दिन पूरी तैयारी कर नहा - धोकर दाढ़ी - मूंछ ठीक कर व मेरे बैग में रिवाल्वर और हाथ में एक मोटा सा सोटा लेकर नदी किनारे पहुंचा .


नदी किनारे पहुंचने पर मुझे एक सुंदर सी छोटी सी नौका दिखाई दी. उसमें एक सर पर कपड़ा डाले सुंदर सी युवती बैठी हुई थी. मैं जाकर नाव में बैठ गया. युवती मुझसे कुछ न बोली. अचानक हवा से उसके सर का कपड़ा हट गया. मैंने देखा कि वह एक 16 बरस की बहुत ही सुंदर लड़की थी. कुछ ही देर में नाव नदी के दूसरे तट पर आ पहुंची. कल मैंने वहां देखा था तो वहां कुछ भी नहीं था.


लेकिन इस समय वहां एक सुंदर सा गांव बसा हुआ था. गांव में एक भी पुरुष नहीं था, लेकिन कई सुंदर-सुंदर लड़कियां और स्त्रियां वहां थी. स्त्रियों ने मुझ पर जादू करना शुरू कर दिया. लेकिन मैं गायत्री मंत्र का उच्चारण कर रहा था और मन ही मन हनुमान चालीसा भी पढ़ रहा था. इस कारण उनके जादू का असर मुझ पर जरा भी ना हुआ. आखिर में सभी स्त्रियां मेरे पैरों पर गिर पड़ी और बोली हे महात्मा! आप कौन हो? आप पर हमारे जादू का असर क्यों नहीं हो रहा है? मैं बोला मैं सूर्यवंश का अंतिम उत्तराधिकारी हूं. मुझ पर जादू और सैन्य शक्ति का जल्दी कुछ असर नहीं होता है.


आखिर में उन्होंने हाथ पैर जोड़कर मुझे अपने साथ रहने के लिए विवश कर दिया. यह वही त्रिया राज्य था जहां स्त्रियां सुंदर और मजबूत पुरुषों को अपने जादू से पशु, पक्षी, गधा, घोड़ा बना देती थी. और रात में उन्हें पुरुष बनाकर उनके साथ संभोग करती थी. स्त्रियों के हाथ - पैर जोड़ने से मजबूर होकर मुझे उन सब के साथ गंधर्व विवाह करना पड़ा.


आपकी क्या राय है? मैंने गलत किया या सही?









देखो जी सरकार कहती है और मुस्लिम कहते हैं कि उनके कुरान में लिखा है कि वह 4 शादियां कर सकते हैं. सरकार कहती है कोर्ट कहता है कि हिंदू तो केवल एक ही शादी कर सकता है. अगर दूसरी शादी करेगा तो उसे 7 साल की सजा होगी.


तो भाई मुस्लिम चार शादी क्यों करते हैं. तो सरकार बोलती है कुरान में लिखा है वह चार शादी कर सकते हैं. तो भाई मैं कहता हूं हमारी रामायण में भी तो लिखा है कि दशरथ ने तीन शादियां की थी. रावण ने हजारों शादियां की थी और कई राजाओं ने तो सैकड़ों शादियां की थी. तो इस प्रकार हमारे धर्म ग्रंथों में तो लिखा है कि हिंदू कई शादियां कर सकता है.


तो सरकार कुरान के अनुसार मुस्लिमों को चार शादियों की इजाजत देती है, तो हमारे धर्म - ग्रंथों के अनुसार हम हिंदुओं को हजारों शादियां करने की इजाजत क्यों नहीं देती है? आपकी क्या राय है? क्या मैं सही हूं?


तो अब समय आ गया है धर्म के आधार पर सरकार किसी भी मामले में भेदभाव न करें.










एक बार मैं बेरोजगार था. मैं इधर-उधर घूमता रहता था और सेहत बना कर रहता था. और घूम घूम कर प्रैक्टिकल नॉलेज हासिल करता रहता था. एक बार में घूमते - घूमते हुए एक सुंदर से गांव में पहुंचा.


खुदा की कसम वहां मुझे एक भी मर्द और एक बच्चा भी नहीं दिखा. वहां सुंदर - सुंदर परी सी लड़कियां चारों तरफ गांव में बिखरी हुई थी. जैसे ही मैं गांव में पहुंचा सब ने मुझे चाय, पानी, खाना वगैरह खिलाया पिलाया.


उसके बाद अचानक सब मुझ पर टूट पड़ी और जबरदस्ती पकड़कर मुझे दूल्हे के कपड़े पहना दिए. फिर उन्होंने जबरदस्ती मेरी शादी अपने गांव की 10 - 12 सबसे हसीन लड़कियों से कर दी. उसके बाद में 8 -10 साल वहीं रहा और बड़ी मुश्किल से गांव छोड़कर वहां से भागा.


आपकी क्या राय है? मैंने सही किया या गलत?











तब मैं 18 वर्ष का था. मेरी शादी नहीं हुई थी. मेरे घर के सामने एक नदी थी. एक रात मुझे पायलों की छन-छन की आवाज सुनाई दी. मैं उठ गया. मैं आवाज के पीछे पीछे गया. आवाज नदी के तट से आ रही थी. मैं नदी के तट पर पहुंचा तो अचानक मुझे लगा कि कोई लड़की नदी के दूसरे किनारे पर घुंगरू पहने हुए रात की चांदनी रात में नाच रही है.


मैंने ध्यान से देखा तो लड़की बहुत खूबसूरत दिखाई दी. मैं सम्मोहित सा हो गया. मैंने इस किनारे पड़ी एक नाव खोली और उसमे़ बैठकर पतवार चलाते हुए दूसरे किनारे पहुंच गया. जैसे ही मैं दूसरे किनारे पहुंचा. उस लड़की ने मुझे अपने आलिंगन में भर लिया. मैं भी मदहोश हो गया. अचानक मुझे अपनी पीठ पर कुछ चुभता हुआ नजर आया और गर्दन पर भी किसी के दांत चुभते हुए नजर आए.


मैंने लड़की को धक्का मारा तो देखा कि वह लड़की ने एक भयंकर चुड़ैल है. मैं हनुमान जी का नाम लेते हुए नदी में कूद पड़ा और बड़ी मुश्किल से इस किनारे पहुंचा. वह भयंकर चुड़ैल मुझे आवाज देते देते थक गई. लेकिन मैं वहां से भाग के घर आ गया. आपकी क्या राय है? क्या मैंने सही किया?












मैं एक वैज्ञानिक भी हूं. एक बार मैंने एक एक्सपेरिमेंट किया और मैंने एक ऐसी दवाई बनाई जिससे इंसान अमर हो सकता था. इस दवाई को खाने के बाद मेरे पूरे गांव के लोग अमर हो गये.


लेकिन अब एक दिक्कत आ गई. धीरे-धीरे गांव की जनसंख्या बढ़ने लगी और अमृत के कारण कोई मरता भी न था. अब किसी को किसी चीज का डर ना था. यह देख मैं बहुत पछताया. कई चोर, डाकू, लुटेरे भी अमर हो गए थे. बड़ी मुश्किल से इस दवाई का मैंने एंटीडोट तैयार किया.


फिर सभी पहले की तरह हो गये और धीरे-धीरे गांव की जनसंख्या घटने लगी और सब कुछ ठीक-ठाक हो गया.


मैंने यह सब किया, तो क्या सही किया? आपकी क्या राय है?

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Shakti Singh Negi

Shakti Singh Negi मातृभारती सत्यापित 5 महीना पहले