में और मेरे अहसास - 40 Darshita Babubhai Shah द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

में और मेरे अहसास - 40

सीने में दफन यादो का मेला है l
कई सदियों से दिल ने जेला है ll

दिन तो गूजर जाता है जेसे तैसे l
शाम ढले अब लगता ठेला है ll

आज फिर बाढ़ आई निगाहों में l
सो गालों पे अश्कों का रेला है ll

दर्द का साया ऐसे लिपटा है कि l
देख भीतर रूह तक फैला है ll

हमेशा नाखुश रहीं हैं मुहब्बत l
प्यार गुरु दर्द उसका चेला है ll

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में अपने गमो मेऔर गम मुजमे खुश है।
खुशीया ही अब मुजसे थोडी नाखुस है।|


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बड़े चाव से गुज़रे गली से उनकी तो l
मुद्दतों के बाद दीदार ए यार हुआ है ll

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प्यार सोने का पिंजरा होता है l
कभी गले का फंदा लगता है ll

टूट के प्यार करने वाला इन्सां l
जीते जी वो मुर्दा लगता है ll

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गजब का शुकुन मीलता है मुजे तेरी बाहोमे l
चाहते हैं फूलों की चादर बिछा दे तेरी राहोमे ll

इस तरह बेपनाह बेइंतिहा प्यार मे डूबॉ हों l
प्यार ही प्यार नज़र आता है तेरी निगाहों मे ll

तुम से मिल कर लग रहा है जन्नत मिल गई l
अजीब सा सुकून पा रहे हैं तेरी चाहतों मे ll

हिरनों से भी हसीन निगाहों से देख रहे हैं l
दिल करता है समाँ जाए तेरी पलकों मे ll

चाहत की सारी हदें तोड़कर बस युही l
हरपाल डूबे तेरे ख्यालो मे तेरी यादों मे ll

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बिन कहे जो समज जाये, वो ही प्यार है।
आहट से जो पहचान ले, वो ही प्यार है।l

रूह का रिष्ता रखने वाले जिगर रखते हैं l
दिल की जो बात जान ले, वो ही प्यार है।l

प्यार मे कहने सुनने की ज़रूरत ना हो l
बिना सुनें जो बात मान ले, वो ही प्यार है।l

जन्मों जन्म का साथ निभाने के वादे मे l
हरपल का जो साथ ठान ले, वो ही प्यार है।l

सब के दिलों पे राज वहीं कर सकता है l
मान दे जो वही शान ले, वो ही प्यार है।l

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इश्क के झूले मे झूल रहे हैं l
प्यार के सोले भड़क रहे हैं ll

हुश्न की अदाओं को देख के l
आँखों से जाम छलक रहे हैं ll

फिजाओ मे मस्ती छाई हुई है l
नशीले पायल खनक रहे हैं ll

बेहद और बे पनाह प्यार मे l
दो दिल साथ धड़क रहे हैं ll

युगों की प्यास बुझाने को l
आज बाहों में सरक रहे हैं ll

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सावन के झूले से धरती सज उठी l
साजन की याद से सजनी सज उठी ll

झिलमिल सितारों की रोशनी मे l
चांदनी के प्यार से रजनी सज उठी ll

बूंद बूंद आसमाँ से बरसा सोना l
ओस की बूँदों से गजनी सज उठी ll

कई दिनों से प्यास का आचल ओढ़ा l
रिमझिम बारिस से अवनी सज उठी ll

मुहब्बत मे दीवानी बनी फिरती थी l
दुल्हन के जोड़े में पगली सज उठी ll

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सुहाना गम पाला है l
निराला गम पाला है ll

बड़ी हिफाजत से रखा हुआ l
पुराना  गम पाला है ll

दिल को जी जान से प्यारा l
लुभाना  गम पाला है ll

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अरमान धड़क रहे हैं l
ज़ज्बात मचल रहे हैं ll

कवि की कविता मे l
अल्फ़ाज़ खनक रहे हैं ll

धड़कन की गति से l
रफ़्तार परख रहे हैं ll

चांद और चांदनी के l
दरमिया गरज रहे हैं ll

ठंड के मौसम में देख l
सजनिया बरस रहे हैं ll

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चोट लगी है l
आग लगी है ll

रूह छू ने की l
प्यास जगी है ll

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ख्वाबो को जला के आया हूँ l
साथ अपने मे राख़ लाया हूँ ll

भागती दोड़ती जिंदगी में l
मायावी नगरी की माया हूँ l

आईने देखता हू जब खुद को l
लगता है तेरा ही साया हूँ ll

दिल का बोझ उतर गया है l
चैन की साँसों को पाया हूँ ll

चेहरा बदल गया है अब l
जिंदा लाश की छाया हूँ ll

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अपनो ने दिये हैं जखम,अब छुपावुं कैसे?
हजार ददँ है सीने मे, तुम्हे बतावु कैसे?

दिल बिखर कर तार तार हो गया है l
लाश को ख़ुद की, बताओ सजाउ कैसे?

दुनिया ने कोई कसर नहीं छोड़ी है l
खुद सताया हुआ हूँ, तुझे सातउ कैसे?

दिलों जान से प्यार करते हैं तुम्हें l
चाहतें हुए भी अपनी, चाहत जताउ कैसे?

सालो से गम को गले लगाया है मैने l
जगा दी नहीं रहीं तुझे, गले लगाउ कैसे?

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किसके प्यार मे झरना बह रहा है निगाहों से l
किसकी याद मे झरना बह रहा है निगाहों से ll

न जाने किसको युगों से ढूँढता है पागल मन l
किसकी राह मे झरना बह रहा है निगाहों से ll

बार बार दस्तक दे रहा है दूर से कोई दिल मे l
किसके नाद मे झरना बह रहा है निगाहों से ll

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आवाज ही पहचान है
किसकी बात मे झरना बह रहा है निगाहों से ll

किसकी राख़ मे झरना बह रहा है निगाहों से ll

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अनपढ़ होते हुए भी
माँ
बच्चों का चहरा पढ़ लेती है ll

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कभी मेरे अश्क की बुंदो मे देखना,
तुम्हारी तसवीर तुम्हे नजर आयेगी।

कभी मेरी आँखों के नूर को देखना l
तुम्हारी तकदीर तुम्हें नज़र आयेगी ll

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दर्द पुरानी शराब की तरह मजेदार होगा l
जी जान से चाहेंगे उसे,  उदास ना रहो।l

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Asha Saraswat

Asha Saraswat मातृभारती सत्यापित 10 महीना पहले