कैसा ये इश्क़ है.... - (66) Apoorva Singh द्वारा उपन्यास प्रकरण में हिंदी पीडीएफ

कैसा ये इश्क़ है.... - (66)

सोफे पर बैठने के बाद शान ने बड़ी मां को संदेश भेज दिया, 'हम मसूरी पहुंच चुके है ताईजी'! अर्पिता और मैं दोनो ही बिल्कुल ठीक हैं।संदेश भेज कर वो फोन रख देते है।अर्पिता जो वहीं खड़ी शान को ही देख रही है उनके जल्दी फोन रखने पर बोली शान क्या हुआ बड़ी मां से बात नही की आपने।

शान बोले, "अप्पू अभी सुबह के साढ़े चार बज रहे हैं।कहीं ऐसा न हो मैं फोन करूँ और उनकी नींद खुल जाये तो बस किया नही फोन।

'ठीक है शान तो आप भी रेस्ट कर लीजिये थक गये होंगे आप' अर्पिता ने कहा तो शान बोले हम्म तुम करो मैं बस हाथ पैर धुल कर आता हूँ।शान ने कहा और शूज उतार कर वहां से चले जाते हैं।अर्पिता उन्हें उठाकर एक ओर रख देती है वहीं एक ओर बैठ जाती है।वो अपना सर पीछे टिका सोच में डूब जाती है।शान की अच्छाई उसकी परवाह अब उसके जेहन में घूमने लगता है।जिसे देख उसकी आँखे भर आती है।
शान!आपकी अर्पिता को अब आपसे दूर हम नही रख सकते।हम नियति के हाथ से विवश है हमे जाना पड़ेगा ही पड़ेगा।लेकिन उससे पहले हमे हमारा पत्नी धर्म भी पूर्ण करना ही होगा।आपके साथ जीना हमारी किस्मत में नही है लेकिन आपकी होकर मरना ये हमारी किस्मत में अवश्य होगा।शान के बिन उसकी अर्पिता कुछ नही है।यही सही भी होगा।मां को हम स्वीकार नही।आपको छोड़कर हम कहीं जा कर रह भी नही सकते!क्योंकि आप जमीन आसमान एक कर देंगे लेकिन हमे ढूंढ कर ही रहेंगे।जो शीला मां को पसंद नही होगा।उन्हें तो हमारी आवाज तक पसंद नही है तो फिर कहानी वहीं से शुरू होगी शान।हमारे पास अब कोई अन्य विकल्प नही है।अंतिम विकल्प स्वीकार करने से पहले हमे आपको आपकी अर्पिता को सौपना ही होगा हम नही चाहते हमारा इश्क़ पूर्ण होकर भी अधूरा रहे।हमारे पास अभी इतना समय है कि हम इन तीन दिनों में तीन जन्मो को साथ जी सके।सोचते हुए उसके आंसू छलक आते हैं।जिन्हें वो जल्दी से पोंछ लेती है।शान बाहर आ जाते है तो अर्पिता अपने कपड़े निकाल अंदर चली जाती है।शॉवर ले बाहर आ कर बालो को सुखाने लगती है।शान थकान की वजह से सो चुके हैं।वहीं अर्पिता बालों को सुखा कर उन्हें सलीके से संवार लेती है।शान की पसंद के रंग की साड़ी उससे मैचिंग हल्की सी ज्वैलरी, हल्का सा मेकअप और चूड़ियों से भरी हुई कलाई,आलता से रचे पैर और उनमें शान की दी हुई पायल सजा ली है।वो आईना देखती है तो मुस्कुराते हुए कहती है तो शान की अर्पिता का श्रृंगार पूर्ण हो गया।

आपकी नींद तो अभी खुलने से रही शान हम तब तक यहीं खिड़की पर बैठ ताजी हवा का आनंद ही ले ले।यूँ ही खाली क्यों बैठना शान हम सॉन्ग ही सुन लेते हैं आपके हेडफोन से।कहते हुए वो उठी ती उसकी पायलें छम छम कर बजने लगी जिसे सुन शान नींद में ही बोले, अप्पू अभी सो जाओ उजाला होने पर हमे घूमने निकलना है।

हमे नींद नही आ रही शान आप आराम करिये।हम आपके हेडफोन से सॉन्ग ही सुन लेते है।ठीक है।अर्पिता ने कहा।

हम्म ठीक है सुनो लेकिन अकेले कमरे से बाहर नही जाना अप्पू!शान ने कहा तो अर्पिता बोली नही जाएंगे शान!और हेडफोन उठा खिड़की के पास पसे सोफे पर बैठ जाती है और सॉन्ग सुनने लगती है।सॉन्ग सुनते हुए वो कुछ पलों के लिए सब भूल जाती है।भूल जाती है कि वो किसी परिवार की बहु है किसी की बेटी है या किसी की पत्नी है।अभी वो बस शान की अर्पिता बन ही मगन हो रही है।वो आँखे बन्द कर अपना सर पीछे टिका लेती है।वहीं कुछ समय बाद शान की आंख खुलती है तो वो अर्पिता को सोफे पर बैठकर आँखे बन्द कर सोया देख बोले, "पगली है पूरी वहीं सो गयी"!कहते हुए वो उठते है और अर्पिता को उठाकर बेड पर लिटा देते हैं।अर्पिता बड़बड़ाती है शान!ये दुनिया बहुत बहुत बुरी है यहां प्रेम का कोई अस्तित्व नही है।लेकिन आप बहुत अच्छे हैं इतने कि हमारे पास शब्द नही है शान..!बड़बड़ाते हुए वो चुप हो जाती है।ये सुन शान बोले, तुम्हारे अंदर दबे इसी दर्द को ही तो बाहर निकालने के लिए मैं तुम्हे यहां लाया हूँ अप्पू।जो तुम मुझसे भी नही शेयर करना चाहती।

शान उसे वहीं लिटा उसके माथे को चूमते है हेडफोन हटा साइड से रखते है और वहां से बाहर निकल जाते हैं।

भोर हो जाती है चिड़ियों की कलरव की ध्वनि वहां गूंजने लगती है।अर्पिता की आंख खुल जाती है वो खुद को बेड पर देख फुसफुसाती है लगता है शान ने हमे यहां छोड़ा है।लेकिन शान वो खुद कहां है सोचते हुए हुए वो उठती है उसका सर दर्द करने लगता है।तभी उसकी नजर बाहर से आ रहे शान पर पड़ती है।

शान :- गुड मोर्निंग अप्पू! सर दर्द हो रहा है?
अर्पिता :- हम्म!गुड मोर्निंग शान!

शान :- ओके तो अगर तुम्हे कोई परेशानी न हो तो लाओ तुम्हारा सर मैं दबा देता हूँ।

अर्पिता मुस्कुराते हुए बोली :- 'नेकी और पूछ पूछ पतिदेव जी'।अर्पिता आकर शान के पास बैठ जाती है।

अच्छा सुनो, अभी थोड़ा और उजाला हो जाये फिर यहां से हम लोग घूमने चलेंगे यहां आसपास के इलाके में प्रकृति ने दिल खोल कर खजाना लुटा रखा है तो जितना लूट सको लूट लेना।फिर न कहना शान आप इतनी दूर लेकर गये लेकिन हमने कुछ घूम भी नही पाया।

हम नही बोलेंगे शान आप चलिये!अर्पिता ने कहा तो शान अर्पिता को साथ ले गर्म कपड़ो के साथ घूमने निकल जाते हैं।मौसम ठंडा होता जा रहा है।वहीं शान अर्पिता को घुमाने ले जाते है वहां के झरने को देख अर्पिता के मन में उसमे अंदर जाने का ख्याल आने लगता है और वो शान से अंदर जाने को पूछती है। जिसे सुन शान बोले अभी नही अप्पू कल मैं फिर लेकर आऊंगा तब अपनी ये ख्वाहिश पूरी कर लेना।अभी के लिए दूर से काम चलाओ।ठीक।

हम्म ठीक है अर्पिता ने कहा तो शान उसे पहाड़ी के खूबसूरत दृश्यों को दिखाते हुए आगे ले जाते है।जहां दूर तक हरा भरा दृश्य उस पर कोहरे नुमा ढंके पहाड़िया दूर कहीं बर्फ से ढंकी हिमालय की चोटियां सारे दृश्य देखते हुए अर्पिता मुस्कुराते हुए कहती है शान!यहां कहीं आसपास बर्फ नही पड़ती।हमे बर्फ पर आपके साथ चलना है।

बर्फ तो पता करनी पड़ेगी अप्पू।लेकिन अगर बर्फ पर चलना है तो मैं लेकर चल सकता हूँ।शान ने अर्पिता की आंखों में देखते हुए कहा।आज अर्पिता ने शान से नजरे नही चुराई।वो बोली ठीक है फिर कभी चलेंगे शान अभी के लिए हमे इन लम्हो को संजोना है।

शान :-हम्म अप्पू।चलो आगे चलते है कहते हुए शान ने अर्पिता का हाथ थामा।अर्पिता भी मुस्कुराते हुए शान के साथ पहाड़ी सड़क पर चलती जाती है।आगे रेस्टॉरेंट होता है वहां कुछ देर आराम कर दोनो देवदार के वृक्षो से होते हुए एक और झरने के पास जाकर बैठते है।

शान अगर आपको ठीक लगे तो कुछ देर यहीं रुकते है इसी झरने के पास यहां कितनी शांति है।अर्पिता ने कहा।
ठीक है अप्पू तुम्हे अगर यहीं रुकना है तो रुकते है फिर यहां से वापस रिसोर्ट के लिए निकलते है।

ठीक है कह अर्पिता शान एक पत्थर पर बैठ जाते है तो अर्पिता वही शान की पीठ से सटकर बैठ जाती है।अच्छा शान अब हम यहां से सीधा रिसोर्ट ही जाएंगे न।अर्पिता ने पूछा।

हम्म अप्पू।क्यों?

शान क्यों का जवाब अभी मिल जायेगा कहते हुए अर्पिता उठती है और अपनी पैरो के मोजे जुते और लोंग स्वेटर उतार कर शान की ओर बढ़ाते हुए कहती है शान इन्हें आप सम्हालो हम चले झरने के पानी का आनंद लेने।कहते हुए अर्पिता वहां से दौड़ पड़ती है।

उसकी ये बात सुन शान चौंकते हुए बोले, नही अप्पू रुको सर्दी बहुत है और रिसोर्ट दूर है भीगना नही।

अच्छा रोकना है हमे तो आलसियों की तरह वहां क्यों बैठे हो रोक कर दिखाइये पतिदेव।अर्पिता ने कहा और वहीं शान को तंग करने के लिए दौड़ती है।कभी दाये तो कभी बाये कभी झुककर एक तरफ बीच कर निकल आती है।शान भी मुस्कुराते हुए उसका साथ देने लगते हैं।

शान,रोक कर दिखाइये।हम चले पानी में कहते हुए वो झरने में उतर जाती है।उसे पानी में देख शान बच्चो के जैसे हाथ बांध मुंह फेर खड़े हो जाते हैं।ये देख अर्पिता मन ही मन कहती है हमारे पास इतना ही समय है शान उसमे भी अगर हम सोचते हुए निकाल लेंगे तो फिर कैसे चलेगा।क्या पता कल हो न हो...!शान पानी इतना भी ठंडा नही है।अर्पिता ने आवाज देते हुए कहा।

शान कुछ नही बोले।कुछ सेकण्ड झरने में भीगने के बाद वो बाहर निकल आती है।

शान अब चलो अर्पिता ने कहा! तो शान बिन अर्पिता की ओर देखे उसके साथ चलने लगते है।शान उसके साथ है ये सोच अर्पिता मन ही मन बहुत खुश हो रही है।जिस कारण बाहरी सर्दी का उसे आभास ही नही हो रहा है।

सांझ होने लगती है और मौसम में परिवर्तन भी हो रहा है देखते ही देखते स्नो फॉल होने लगता है।ये देख अर्पिता खुशी से घूमते हुए कहती है शान देखो स्नो फॉल।हमारा ये सपना भी पूरा हो गया।कहते हुए वो स्नो फॉल को अपने चेहरे पर महसूस करने लगती है।लगातार सर्दी में रहने के कारण उसके शरीर का तापमान गिरने लगता है।ये देख शान उसका बाकी समान अपने एक हाथ में पकड़ते है और दूसरे से उसका हाथ पकड़ते है लेकिन झटके से छोड़ देते हैं।अप्पू इतने ठंडे हाथ शान ने अर्पिता को रोकते हुए पूछा?
शान अब ठंडा मौसम है तो ठंडे ही होंगे न अर्पिता ने मासूमियत से कहा।जिसे सुन शान बोले मतलब तुम ..!ओह गॉड हे ठाकुर जी।ये कौन सा एंटीक पीस मेरी झोली में डाल दिया।शान ने कहा जिसे सुन अर्पिता शान के पास आई और बोली हमे जीवन जीना है शान क्या पता कल हो न हो..!

चलो बीबी जी!शान ने कहा और अर्पिता को वहां से ले जाते हैं।कुछ ही देर में वो रिसोर्ट पहुंच जाते है और अर्पिता को वहां छोड़ किसी कार्य से जाने लगते हैं।
अर्पिता :- शान कहां जा रहे है आप!
शान तंग करने के उद्देश्य से बोले :- जा रहा हूँ किसी समझदार लड़की को ढूंढने।
अर्पिता :- नही आप झूठ बोल रहे है हमे चिढ़ाने के लिए बताओ न कहां जा रहे है आप।

शान :- अभी तो बताया।अब तुम्हे तो अपने पति की कोई परवाह है नही तो मन में ख्याल आया किसी को ..

अर्पिता :- कुछ सोचते हुए बोली।ठीक है शान जैसा आपको ठीक लगे।कहते हुए वो खामोश हो जाती है और अपने कपड़े निकाल आगे बढ़ती है।शान मुस्कुराकर आगे बढ़ते है और सोचते है निरी पगली हो तुम अप्पू!लेकिन स्वीट हो तुम्हारे अलावा मुझे कोई नही चाहिए।तभी उन्हें कुछ गिरने की धमक सुनाई देती है।वो पीछे मुड़ कर देखते है उनसे कुछ ही दूरी पर अर्पिता नीचे फर्श पर बेहोश पड़ी होती है।अप्पू क्या हुआ वो घबरा जाते है और दौड़कर उसके पास पहुंचते है।वो उसे उठाते है तो एक पल को सिहर जाते है।अर्पिता तुम्हारा शरीर तो बर्फ की तरफ बिल्कुल ठंडा है मुझसे उठाया भी नही जा रहा।इतना ठंडा नही।अप्पू सुनो न मुझसे बाते करो अप्पू कुछ बोलो न अर्पिता उठो सुनो न।शान उसे आवाज लगाते हुए बोले।चेंज कपड़े ठंडे...अप्पू उठो न मैं कैसे करूँ ये सब उठ जाओ अप्पू।शान हड़बड़ाने लगते हैं।उन्हें कुछ समझ नही आता तो उसके हाथ पैर मलने लगते हैं लेकिन एक इंसान कैसे क्या करे वो अपना फोन निकालते हैं और रिजॉर्ट के रिसेप्शन पर कॉल कर फौरन डॉक्टर को अरेंज करने के लिए कहते हैं।
शान :- अभी के अभी डॉक्टर को प्रशांत मिश्रा रूम में भेजिये प्लीज!

यस यस सर!फोन के दूसरी ओर से आवाज आयी।

अर्पिता देखो उठ जाओ अब मुझसे धैर्य नही रखा जा रहा बहुत हो गया है।उठ जाओ अप्पू! शान ने कहा।उनके चेहरे पर डर और दर्द दोनो दिख रहे हैं।वहीं अर्पिता बेहोशी में शान!बस इतना ही कह पाती है।

डॉक्टर वहां आ जाते है और अर्पिता की नव्ज़ चेक कर इकविमेंट्स उपयोग कर बताते है इनकी पल्स कम हो रही है इनकी चेतना खो रही है।ये किसी बात को लेकर बहुत तनाव में है।किसी अपने को खोने का डर इनके हृदय में हावी हो रहा है।आप इतना समझिये दवा से ये बस मशीन की तरह चल फिर लेंगी लेकिन इनकी चेतना नही जागेगी।प्रेम की दवा प्रेम ही होता है अब जो भी कीजिये आप खुद कीजिये।डॉक्टर ने कहा और अपने सारे इकविमेंट्स लेकर वहां से निकल जाता है।

अब मैं क्या करूँ अप्पू तुम ही बोलो न इतनी परवाह केयर करने के बाद भी तुम ये नही समझी कि शान ने सिर्फ तुमसे प्रेम किया है और तुम मेरे मजाक को सीरियस ले गयी।अप्पू उठ जाओ न मैं आगे से ऐसा मजाक कभी नही करूँगा उठ जाओ न।

शान! हम नही जाना चाहते लेकिन मां..!आप उनसे कहिये न हमे एक्सेप्ट कर ले..!शान हम कैसे रहेंगे .हम ..शान मां ..बड़बड़ाने लगती है।शान सुनो न..!
अर्पिता मां ने फिर तुमसे कुछ कहा है।तुम इतना डर गयी हो नही।उठ जाओ न मेरे लिए प्लीज यार!शान की आँखे भर आती है।वो अर्पिता का हाथ थामते है तो अर्पिता अपनी अंगुलियों को कस लेती है।
सॉरी अप्पू!अब कोई विकल्प नही है प्रेम की दवा प्रेम ही हो सकता है।मुझे तुम सही सलामत चाहिए बस।मैं जो कर रहा हूँ उसके बाद तुम मुझे माफ नही करोगी लेकिन ये जरूरी है अप्पू शान ने कहा और उन्होंने अर्पिता को गले से लगा लिया।गुजरते पल के साथ शान अर्पिता को खुद में समेटते हुए अपने रिश्ते को पूर्ण करते हैं।समय गुजरता जाता है अर्पिता की मूर्छा टूटती है वो आँखे खोलती है और शान को अपने इतने करीब देख खुद की ओर देखती है।स्वयम को अस्त व्यस्त पा कर सब समझ जाती है और खुद को व्यवस्थित कर उठ कर घड़ी देखती है सुबह के पांच बज चुके है शॉवर ले बाहर चली आती है जहां शान खामोशी से उससे नजरे चुरा कर शॉवर लेने जा रहे है।सब समझ कर अर्पिता शान के पास जा कर कहती है गिल्टी फील करने की जरूरत नही है पतिदेव!आपका अधिकार है।अर्पिता की बात सुन शान ने अर्पिता की ओर देखा जो मुस्कुरा रही होती है।

उसकी मुस्कुराहट देख शान बोले तो तुम्हे सच में कोई परेशानी नही अप्पू!
अर्पिता (मुस्कुराते हुए) :- न पतिदेव जी!पत्नी है हम आपकी नाराजगी का प्रश्न ही नही है।
अर्पिता की बात सुन शान उसके गले लग जाते है और बोले मै कल कितना डर गया था अर्पिता तुम कुछ नही बोल रही थी!आगे से मत करना ऐसा अप्पू।

शान!सुनिये न!शान जो हुआ उसे भूल जाओ न।और इतना याद रखो शान कि आपकी अर्पिता सांसे छोड़ सकती है लेकिन शान को नही।

आकर इसका जवाब देता हूँ अप्पू शान ने मुस्कुराते हुए कहा और अंदर चले जाते है।अर्पिता तैयार हो जाती है और मन ही मन कहती है हमे इस बात की खुशी हुई शान कि हमारा रिश्ता अपूर्ण नही रहा।अब हमे जाना होगा इस जहां से दूर उसकी रिवायतों से दूर।अर्पिता उठी और आगे दरवाजे की ओर बढ़ती है उसकी पायलों की आवाज सुन शान बोले अप्पू, अकेले बाहर नही जाना मैं बस अभी आया ठीक है।

हम्म शान!अर्पिता रुकते हुए बोली और बड़बड़ाते हुए पायलों को देख कर बोली तुम हर बार हमारी चुगली कर देती हो।शान बाहर चले आते है अर्पिता को देख उसके पास आकर उससे कहते है बहुत बहुत सुन्दर लग रही हो।अर्पिता शरमा जाती है।शान को रात की बेहोशी वाली बातें याद आती है वो गंभीर होकर बोले अप्पू,सच सच बताओ मां ने तुमसे कुछ कहा है न।मां ने तुम्हे अपनी बहू के रूप में एक्सेप्ट नही किया न।

शान की बाते सुन अर्पिता चौंकते हुए बोली, आपको कैसे पता शान?
शान :- क्योंकि कल तुम यही बड़बड़ा रही थी।
अर्पिता :- वो बस यूँ ही।

शान उसके पास आये और उससे बोले अर्पिता किसी के मानने या न मानने से हमारा सच नही बदलेगा तुम मेरी पत्नी हो ये बात सच है।उन्हें जो समझना है समझने दो तुम ठीक है।

हम शान अर्पिता ने कहा।मसूरी के प्राकृतिक सौन्दर्य में शान और अर्पिता अपने जीवन के कुछ अतरंग लम्हे चुराते है उन्हें अपने हृदय में सदा के लिए संजो लेते है।

घड़ी पल क्षण कुछ समय बाद दोनो मसूरी की वादियो में गुनगुनाते हुए घूमते है।शान चलो न वहां चलते हैं वो देखो पैराशूट की मदद से आसमान में उड़ते लोग।ये दृश्य कितना अच्छा लग रहा है।अर्पिता ने खुश होते हुए शान से कहा।उसके चेहरे की खुशी देख शान बोले तुम्हे घूमना है ऐसे?

अर्पिता :- हम!न शान नही हमे डर लगता है।
शान :- ठीक है।अगर मन हो तो चल सकती हो मैं साथ तो हमेशा ही हूँ न।

हम जानते है शान फिलहाल हमे अब कहीं नही जाना।क्योंकि अभी हमारा मन आपको तंग करने का है तो अलसाओ नही पकड़ कर दिखाओ!कहते हुए अर्पिता क्लिफ की एंड की ओर देखती है और उस तरफ दौड़ती जाती है।थोड़ा आगे बढ़ पीछे मुड़ देखती है शान मुस्कुराते हुए उसके पीछे ही आ रहे हैं।दौड़ते हुए उसकी आँखे भर आती है।उसे एक ही दिशा में दौड़ते हुए देख शान रुक कर तेज आवाज में कहते है, अर्पिता रुक जाओ, मैं हार गया प्लीज वापस आ जाओ।लेकिन अर्पिता नही रुकती दृढ़ निश्चय कर आगे दौड़ती जाती है।और मन ही मन कहती है शान हम अब नही रुक सकते आप और आपकी मां एवं हमारे परिवार के मान के लिए हमे अब ये कदम उठाना ही होगा।हमारा साथ इतना ही था शान!नियति को हमारा साथ ही मंजूर नही है।

अर्पिता तुम रुक क्यों नही रही हो!क्या चल रहा है तुम्हारे मन में।अप्पू आगे पहाड़ी का एंड है रुको अप्पू! शान ने अर्पिता की ओर देखते हुए खुद से कहा।और तेज आवाज में बोले अर्पिता रुको प्लीज़! उनकी आवाज सुन आसपास मौजूद लोगों का ध्यान उनकी ओर आता है।और वो भी अर्पिता की ओर दौड़ कर आते हैं।

अर्पिता रुक जाओ..शान ने कहा और वो वहां से दौड़ लगा देते हैं।अर्पिता आगे बढ़ती है आगे पत्थर पड़ा होता है जिससे ठोकर खा कर वो वहीं गिर जाती है।उसके पैर से एक पायल निकल जाती है।जिस पर वो ध्यान नही देती। वो दोबारा उठती है और आगे बढ़ती है एवं क्लिफ के किनारे पहुंच कर ही रुकती है और मुड़ कर शान की ओर देखती है।अपनी आंखों के आंसू पोंछते हुए कहती है ठाकुर जी आपने हमे सब कुछ दिया लेकिन हमारे प्रेम का साथ नही दिया।इतनी मजबूरी और परेशानियां भर दी आपने हमारे जीवन में कि हम ये आत्महत्या जैसा अपराध करने पर विवश हो गये।हम आपको नही मानते थे लेकिन शान के कारण आप पर विश्वास होने लगा है हमे।हमारी आपसे इतनी विनती है शान को टूटने नही देना।उनका साथ मत छोड़ना।इस जहां में अच्छे लोग बहुत मुश्किल से मिलते है उन पर इतनी कृपा रखना कि वो अपनी अच्छाई को कभी न छोड़े।धन्यवाद!कह उसने हाथ जोड़ माथे से नवाये और शान की ओर देखा जो उसके पास आ चुके हैं।अपना हाथ उठा कर कान पकड़ती है भरे हुए नैनो से शान को देखती है फिर तुरंत मुड़ती है और नीचे क्लिफ से कूद जाती है।

अर्पिता नही...शान शॉक्ड हो चीखते है।वो समझ ही नही पाते है क्या से क्या हो गया..!अर्पिता चिल्लाते हुए वो आगे बढ़ते है और क्लिफ के एंड पास पहुंचने से पहले ही कुछ लोग आकर उन्हें पकड़ लेते हैं।

अरे भाई छोड़ो मुझे शान ने लोगों से झुझते हुए कहा और नीचे की।ओर देख चिल्लाते हुए बोले ..अर्पिता कहां हो तुम ठीक तो हो न अप्पू तुम कुछ बोल क्यों नही रही हो अप्पू आवाज दो देखो बहुत हो गया सुन रही हो न...अर्पिता...।अर्पिता वो लोगों की पकड़ से छूटने की पूरी कोशिश करते हैं लेकिन कामयाब नही हो पाते। वो तेज आवाज में कहते है अर्पिता कहां हो तुम देखो मत तंग करो आ जाओ अप्पू....प्लीज़ आ जाओ...!

क्रमशः....


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Shakti Singh Negi

Shakti Singh Negi मातृभारती सत्यापित 1 साल पहले

Sarita Sharma

Sarita Sharma मातृभारती सत्यापित 1 साल पहले

Aruna Patel

Aruna Patel 1 साल पहले

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Dip 1 साल पहले

v good

Vandnakhare Khare

Vandnakhare Khare 1 साल पहले