में और मेरे अहसास - 31 Darshita Babubhai Shah द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

में और मेरे अहसास - 31

 

दूरिया तुम्हारी ख्वाइश थी l
हमने तो सिर्फ़ हुक्म माना है ll

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ख्वाबो मे भी नहीं सोचा था l
वो हसीं तोहफ़ा पाया है ll

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ख्वाब हक़ीक़त बन गया है l
बाद मुद्दतों के साथ मिला है ll

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होली के रंग में रंगना चाहती हूं l
तेरे ही रंग में रंगना चाहती हूं ll

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तेरे इश्क में जोगन बन गई l
प्रीत के रंग में रंगना चाहती हूं l

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इश्क ए जाम आँखों से पिया है ll

तुम क्या जानो नशा प्यार का l
कभी किया है नशा प्यार का ll

आँखों से पिया करते हो सदा l
कभी पिया है नशा प्यार का ll

किसी के दिल में बसेरा किया है?
कभी जिया है नशा प्यार का ll

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लबों पे हसी देने वाले कम मिलते हैं l
कोहिनूर की तरह उसे सम्भाले रखना ll

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चहेरे की थकान दिखती है l
अंदर की घुटन कौन देखे?

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आईना सच दिखाने से कभी नहीं डरता है l
जो कुछ भी हो साफ और सच्चा दिखाता है ll

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चहरे पे ज़ुरिया देखकर घबरा ना जाना l
सुनो तुम्हारा भी आने वाला कल होगा ll
 

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इतने नादाँ नहीं हो के खामोशी मेरी ना सुन सको l
इतने दूर नहीं हो के धड़कने मेरी ना सुन सको ll

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काटे नहीं कटते ये पल इंतजार के l
ना जाने कैसे होगे पल इज़हार के ll

चुपचाप देखा किया जी भर कर l
पलकों मे छुपा लेगे पल दीदार के ll

रह रहकर याद आती है मुलाकातें l
कभी ना भूल पाएगें पल प्यार के ll

थाम कर हाथ बेठे थे कई घंटों l
बड़े खूबसूरत थे पल अधिकार के ll

निगाहें बंधकर के किया जाये l
न जाने कब लौटेंगे पल एतबार के ll

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वापिस जाने के लिए ना आना तुम l
बार बार दिल नहीं संभाला जाता ll

एक बार वापिस बुलाना तो है पर l
दूर रहनेवाले को नहीं बुलाया जाता ll

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बता दे दिल नादाँ तुझे हुआ क्या है l
रोज किसके लिए करता दुआ क्या है ll

आँखों से नीद की दुश्मनी हो गईं हैं l
भीगी चांदनी रात मे हंगामा क्या है ll

दिलों दिमाग लुटाये बेठे है प्यार मे l
मेरे मोहसिन ये सिलसीला क्या है ll

डूब जाने दो बाहों में प्यारे मौसम में l
बेकार की बातों मे रखा क्या है ll

तेरे लिए कब से नज़रे बिछाएं बेठे है l
आज कह भी दो फ़ैसला क्या है ll

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बहकी नज़रों से तस्वीर हटती क्यों नहीं l
दिल से प्यारी सी यादें मिटती क्यों नहीं ll

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बाँकपन का वो ज़माना छूटा l
दोस्तों के साथ मिलना छूटा ll

कभी शाला में ना जाने के लिए l
पेट दर्द का जूठा बहाना छूटा ll

शहरों को बसाने के चक्कर में l
पेड़ोंसे लटकनेका ठिकाना छूटा ll

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आंगन में खेलते बच्चे की हसी ने जगा दिया l
अरे चल नादाँ छोटी छोटी खुशी मे कर जिया ll

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तन से अपाहिज के साथ जीया जाता है l
मन से अपाहिज जिंदगी दोजख बनाता है ll

किसी के हर एहसास मे जिंदा रहना है l
कोशिश, कशिश, दिल पे फिदा रहना है ll

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हाथ पकड़ लो वर्ना पीछे हम छुट जाएँगे l
प्यार मे जकड़ लो तुम से हम रूठ जाएँगे ll

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Parul

Parul मातृभारती सत्यापित 1 साल पहले

Zainab Makda

Zainab Makda 1 साल पहले

Jignesh Shah

Jignesh Shah मातृभारती सत्यापित 1 साल पहले