में और मेरे अहसास - 31 Darshita Babubhai Shah द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

में और मेरे अहसास - 31

Darshita Babubhai Shah मातृभारती सत्यापित द्वारा हिंदी कविता

दूरिया तुम्हारी ख्वाइश थी lहमने तो सिर्फ़ हुक्म माना है ll ***************************************** ख्वाबो मे भी नहीं सोचा था lवो हसीं तोहफ़ा पाया है ll ***************************************** ख्वाब हक़ीक़त बन गया है lबाद मुद्दतों के साथ मिला है ll ...और पढ़े


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