कैसा ये इश्क़ है.... - (भाग 48) Apoorva Singh द्वारा उपन्यास प्रकरण में हिंदी पीडीएफ

कैसा ये इश्क़ है.... - (भाग 48)

अर्पिता की बात सुन शान कहते है तो तुम्हे पता चल गया कि मैं आ गया हूँ।कैसे?

कैसे क्या शान अपना हाथ देख लो न जाने कैसे इसे पता चलता है कि तुम आसपास हो जो हर बार तुम्हारे आसपास होने पर तुमसे ही उलझ जाता है।अर्पिता की बात सुन कर प्रशांत अपना हाथ देखते है तो सब समझ कर धीरे से कहते है बात तो शि है तुम्हारी अप्पू।इससे एक बात साफ हो गयी कितनी ही भीड़ हो अगर हम आसपास होंगे तो दूर नही जा पाएंगे।हम्म अर्पिता ने कहा।शान और अप्पू की खुसर फुसर वाली बात सुन गार्ड बोला ए लड़के अपनी खैरियत चाहते हो तो इस लड़की को छोड़ कर दफा हो जाओ।इससे हमे अपनी मैम के बारे में पूछताछ करनी है।अगर इसने नही बताया तो इसे हम अपने मालिक के पास ले जाएंगे फिर वो ही इससे पूछेंगे कि पूर्वी मैम कहां है।

गार्ड की बात सुन कर प्रशांत ने सवालिया नजरो से अर्पिता की ओर देखा तो अर्पिता नजर झुकाते हुए धीमे से बोली लम्बी कहानी है हम बैठ कर सब बताएंगे लेकिन अभी इनसे बस पूर्वी को लेकर अंजान रहना और कुछ मत कहना क्योंकि आपको अभी तक कुछ नही पता है।

अर्पिता गार्ड की ओर मुखातिब हो कर बोली अब तो आपके उस सवाल का जवाब भी मिल गया कि हम यहां रेलवे स्टेशन पर क्यों आये हैं।हम इन्हें लेने आये थे।तो प्लीज अब हमे जाने दीजिये हमे बहुत प्यास लगी है।शान चलिये बड़े सिरफिरे लोग है तबसे रोक कर सवाल जवाब किये जा रहे हैं।अरे एक लड़की को लिफ्ट क्या दे दी हमने ये तो पीछे ही पड़ गये हैं।कहते हुए वो आगे बढ़ती है तो एक गार्ड फुर्ती से आगे बढ़ शान के पीछे जा कर एक छोटी गन सटा कर कहता है या तो तुम सच बताओगी या फिर हमारे साथ हमारे मालिक के पास बिन शोर किये सामान्यतः चुप चाप चलोगी।नही तो ये, शान जिसे तुम लेने आई थी वो कहीं नही जा पायेगा।गार्ड की बात सुन अर्पिता घबरा जाती है और शान की ओर देखती है जो अपनी पलके झपका हल्की गर्दन झटके से हिलाते है।अर्पिता उनसे कहती है हम चल रहे हैं लेकिन शान को छोड़ दो।

अर्पिता की बात सुन शान घूरते हुए अर्पिता को देखते हैं और गार्ड से कहते है वो अकेली नही जायेगी मैं भी चलूंगा जरा देखे तो तुम्हारे मालिक क्या बला है।जो एक लड़की चीख चीख कर सच बोल रही है तुम्हे यकीन ही नही हो रहा।

ठीक है देख लेना हमारे मालिक को।अभी ज्यादा समय वेस्ट नही करो चलो यहां से कहते हुए वो शान से चलने को कहते है तो शान कहते हैं अभी तो बोला की हम लोग चल रहे हैं तुम लोग फिर भी टॉर्चर किये जा रहे हो।हम लोग शांति से चल रहे है तुम्हे समझ नही आ रहा है अभी शोर मचा दिये न तो निकल तुम भी नही पाओगे यहां से।तो बात को समझो और शरीफ अच्छे लोगों की तरफ चलो समझे की नही।

प्रशांत की बात सुन अर्पिता को हंसी आ जाती है लेकिन वो होठों में दबा हंसते हुए चलने लगती है।उसे हंसता हुआ देख शान मन ही मन कहते हैं बहुत हंसी आ रही है एक बार घर पहुंच जाये तब तुम्हे बताऊंगा।मेरे जरा सा ध्यान न देते ही कांड कर लेती हो और मुसीबत में फंस जाती हो।न जाने क्या कांड कर बैठी हो।समझ ही नही आ रहा मुझे कुछ भी।

दोनो अपनी गाड़ी के पास पहुंचते है तो गार्ड कहता है हम सब इसी गाड़ी से ही जाएंगे गाड़ी ये(दूसरा गार्ड) ड्राइव करेगा तुम दोनो पीछे बैठोगे।
ये सुन शान मन ही मन कहते है शुक्र है कुछ समय मिल जायेगा मुझे पूरी बात जानने के लिए।और तेज आवाज में कहते है हमे मंजूर है।और वो दोनो पीछे बैठ जाते हैं अर्पिता आगे से कैरी बैग उठा अपने पास रख लेती है।दोनो गार्ड आगे बैठ जाते है और गाड़ी सड़क पर दौड़ने लगती है।

मौका देख शान अप्पू से पूछते है तो अर्पिता प्रशांत के करीब जाकर हौले से कहती है,शान हमने पूर्वी को यहां से कहीं दूर उसके प्रेम के पास भेज दिया।

मतलब!शान ने पूछा तो अप्पू बोली मतलब क्या, "भगा दिया उसे"

क्या..!शान ने चौंकते हुए कहा।
तो अर्पिता ने मासूम सा फेस बनाया और बोली जी शान!वो प्रेग्नेंट थी।यहां वो ऐसी फॅमिली से थी कि उसके दिल की पुकार किसी को सुनाई नही देती तो हमने उसकी मदद कर उसे भगा दिया।

ये सुन शान सोचते है सारे अजूबे हमारी ही फॅमिली में जोड़ने थे आपको ठाकुर जी।एक भाभी (स्नेहा) जो समझदार होने के साथ बातूनी है।बातों की कला में महारत हासिल है।दूसरी उनसे एक कदम आगे समझदार, बातूनी,होने के साथ साथ फाइटर भी हैं। तीसरी ये इन सबसे एक कदम आगे समझदार भी हंसमुख भी फाइटर भी और कांडी भी।कांड करने में महारत हासिल है।हर बार कोई न कोई मुसीबत में पड़ ही जाती है।और किरण उसका तो मुझे कुछ पता भी नही है।न जाने कैसी होगी वो।कहीं वो इससे भी आगे न निकले।

प्रशांत को इतनी देर से खामोश देख अर्पिता कहती है सारी बातें तो इन सब झमेलों से निकलने के बाद घर ही बता सकते हैं।अभी प्लीज गुस्सा मत कीजियेगा।प्लीज।अर्पिता की बात सुन शान ने एक बार उसकी ओर देखा तो अर्पिता ने एक हाथ से अपना कान पकड़ लिया और होंठ हिलाते हुए कहा सॉरी।तभी उसकी नजर बेग में से झांक रहे बुके पर पड़ती है तो वो उसे निकाल कर शान की ओर बढ़ा कर कहती है सॉरी शान।अब माफ भी कर दीजिये।

प्रशांत मुस्कुराते हुए कहते है तुम्हे सॉरी कहने की जरूरत नही है।हक़ है तुम्हारा गलतिया करने का और मेरा तुम्हे माफ करने का।

शान की बात सुन अर्पिता हौले से कहती है हमारा ही तरीका हम पर आजमा रहे हैं आप।

शान :- तुम्हारे नही मेरे!ये तरीके मेरे हैं।
अप्पू :- सफेद झूठ शान।आपके नही हमारे हैं।

शान :- तुम्हारे थे अब मेरे हैं।
अप्पू :- कैसे हुए भला हमे भी तो पता चले।

अप्पू की बात सुन शान कहते हैं हां तो जब तुम मेरी तो ये तरीके भी मेरे हुए।हुए की नही जवाब दो।

हम्म अर्पिता इतना ही कह पाती है और खामोश हो शान की ओर देखने लगती है।उसे यूँ देख शान उसके कान के पास आ कहते है --

थैंक यू!मुझे मेरी पहले वाली अर्पिता लौटाने के लिए।।और पीछे हट कर वो बुके ले कहते है दोनो ही मेरे पसंदीदा फूल है।

अर्पिता :- जानते हैं हम!और खिड़की से बाहर देखने लगती हैं।

शान मन ही मन कहते है तुम ही जानोगी और कौन जानेगा..!

दोनो की ऐसी ही बातचीत के साथ नोकझोंक चलती जाती है।कुछ ही देर में गाड़ी एक बंगले के सामने रुकती है।दोनो गार्ड उतरते हुए कहते है मंजिल आ गयी है अब आप दोनो भी उतर कर अंदर चलिये।

ओके कह शान और अर्पिता दोनो गाड़ी से नीचे उतर आते हैंऔर बंगले के अंदर की ओर बढ़ जाते हैं।गार्ड अंदर जाकर अपने मालिक को प्रणाम कह एक ओर जाकर खड़े हो जाते हैं।शान और अप्पू दोनो अंदर जाकर खड़े हो जाते है और सामने खड़े शख्स को देखने लगते हैं।उसके साथ मिस्टर खन्ना भी होते है जिन्हें देख शान के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है और वो अप्पू से कहते है अब हम यहां से जब चाहे तब जा सकते हैं वो जो सामने खड़ा इंसान है न धोती कुर्ता पहने हुए वो हमारे लिए रोशनी की वो किरण है जो हमें हर हाल में मुसीबत से निकाल ही लेगी।

हम कुछ समझे नही शान!आप उन्हें जानते हो?
अर्पिता ने हैरान हो पूछा तो शान बोले हां कुछ ऐसा ही समझ लो।उसके चेहरे पर फैली मुस्कुराहट को मिस्टर खन्ना देख लेते है और हैरान हो कहते है अरे तो मिश्रा साहब है जिन्होंने मेरी इज्जत के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश की है।मिश्रा जी पिछली बार तो बक्ष दिया था आपको लेकिन इस बार नही छोडूंगा।साफ साफ बता दो कि पूर्वी कहां है।मिस्टर खन्ना की बात सुन शान कुछ कदम आगे बढ़ उसके सामने जाकर खड़े हो गये।और बोले पहली बात मैंने और अर्पिता ने कुछ नही किया है आपके ये गुलाम हमे जबरन उठा कर यहां ले आये।

अर्पिता कौन...!कहते हुए मिस्टर खन्ना उसकी तरफ देखते है और मुस्कुराते हुए कहते है तो ये है अर्पिता।वैसे तुम्हारी लगती कौन है ये काहे कि तुम्हारा स्टेट्स तो सिंगल है नई।

ये तुम्हारी समस्या तो नही कि मैं सिंगल हूँ या नही।मेरी निजी बातें है सो इसका जवाब देना जरूरी नही है जरूरी है तो अभी एक बात कि हमे यहां से जाने दो और अपनी इज्जत यानी पूर्वी को आप खुद तलाश करें।अब अगर आपने हमे परेशान करना बन्द नही किया तो परिणाम भुगतने के लिए भी तैयार रहें आप।प्रशांत की बात सुन मिस्टर खन्ना आगे कदम बढ़ा कहते हैं उस दिन भी ऐसे ही कुछ कह कर निकले थे तुम और आज भी ऐसा ही बोल रहे हो परिणाम भुगतना वगैरह।अब साफ साफ बोलोगे या फिर यूँ ही कोरी धमकी देते रहोगे।

तो आप मेरे न डरने का कारण जानना चाहते हैं मिस्टर खन्ना ठीक है कारण भी बताता हूँ कहते हुए वो अपना फोन निकालते है और उसमे गैलरी में जा कर उस दिन वाली वीडियो निकालते हैं जो राधिका ने चुपके से बनाई थी।वीडियो मिस्टर खन्ना के सामने करते हुए कहते हैं इसमे आपके द्वारा कहे हुए शब्द स्पष्ट सुनने में आ रहे हैं।जिसमे आप किसी को ब्राइब देते हुए दिख रहे हैं।दूसरी मुझसे जो फोन के जरिये बातचीत की है उसके ऑडियो चाहिए सोच लीजिये अच्छी तरह से कि आपको कौन सी इज्जत ज्यादा प्रिय है।

प्रशांत की बात सुन मिस्टर खन्ना के सर्दी में भी पसीने छूटने लगते है और वो कुछ कदम पीछे हट पूर्वी के पिता से कहते है इन दोनो को सच में पूर्वी के बारे में नही पता है।आप अपनी तरह से खोजबीन कीजिये।या हो सकता है कि वो उन्ही लोगों के पास गयी हो जिस घर में वो विवाह करना चाहती थी।

ये आप क्या कह रहे है पूर्वी के पिता ने कहा तो मिस्टर खन्ना कांपते हुए बोले, कड़वा है मगर सच है एक दिन पहले वो लोग यहां रिश्ता लेकर आये और आज लड़की ही गायब हो गयी।कैसे और क्यों?चाहे किसी भी तरह गयी हो लेकिन पूर्वी वहीं गयी होगी उन्ही लोगों के पास।मिस्टर खन्ना की बात सुन कर पूर्वी के पिता गार्ड की ओर इशारा कर शान और अर्पिता को बाहर छोड़ने के लिए कहते हैं।
ये देख प्रशांत मुस्कुराते हुए आगे बढ़ते है और अर्पिता को साथ ले अपनी गाड़ी में जाकर बैठ जाते है और स्ट्रेट गाड़ी ड्राइव करने लगते हैं।वो एक बार भी अर्पिता की ओर नही देखते हैं और सीधे ड्राइव करते जाते हैं।

शान को ऐसे देख अर्पिता मन ही मन सोचती है अर्पिता आज तो शान का गुस्सा जायज है हर बार हम कोई न कोई बेवकूफी कर ही देते है और इन्हें नाराज कर देते हैं।अब हम क्या करे?एक नम्बर की पगली है हम कुछ नही सोचते बस मुसीबत मोल लेने खुद से कूद पड़ते हैं।वो एक बार फिर से शान की ओर देखती है और धीरे धीरे कहती है नाराज है आप!
शान :- नाराजगी की कोई वजह!
अर्पिता:- वजह शान!
शान :- हां!
क्या सच में आप वजह नही जानते या फिर जान कर अंजान बन रहे हैं।
शान:- मुझे पता है लेकिन तुम भूल रही हो।
अर्पिता :- तो फिर सजा दे लो लेकिन यूँ खामोश मत रहो।
शान कुछ नही कहते और सामने देख ड्राइव करने लगते हैं।उनकी चुप्पी देख अर्पिता फिर सोच में पड़ जाती है और गर्दन घुमा कर खिड़की से बाहर देखने लगती है।अर्पिता को खिड़की से बाहर झांकता हुआ देख प्रशांत एक बार फिर अर्पिता की ओर देखते है और कहते है नाराजगी क्यों होगी तसे अप्पू बस दुख हुआ ये जान कर कि तुम यूँ परेशानियों को हंसती हुई गले लगा लेती हो।एक बार भी खुद के बारे में नही सोचती।और वो एक बार फिर से सामने देखने लगते हैं।गाड़ी में खामोशी फैल जाती है जिसे तोड़ने के लिए शान गाड़ी में म्यूजिक चला देते हैं।
अर्पिता एक बार फिर शान की ओर देखती है और फिर सामने देखने लगती है।थोड़ा ही आगे आइसक्रीम पार्लर होता है जिसे देख शान गाड़ी रोक देते हैं।गाड़ी के अचानक रुकने से अर्पिता शान की ओर देखती है जो अपनी सीट बेल्ट खोलते हुए गाड़ी से उतर रहे होते हैं।

अर्पिता भी सीट बेल्ट खोलने लगती है जिसे देख वो कहते है शांति से चुपचाप यहीं बैठो मैं अभी आया।जी कह अर्पिता हां में गर्दन हिला देती है और गाड़ी में चलता हुआ म्यूजिक सुनने लगती है।शान जाकर एक आइसक्रीम का पूरा पैकेट और दो चोको विथ वनीला कोन ले आते हैं और एक कोन अर्पिता की ओर बढ़ाते हुए गाड़ी गाड़ी में बैठ जाते हैं।अर्पिता चुपचाप कोन ले लेती है और शान की ओर देखने लगती है और सोचती है ये बात अभी अभी हमारे मन में आई थी काश शान गाड़ी रोक दे तो हम एक आइसक्रीम पैक करा लाये।और देखो ये तो सच में ले भी आये।

शान :- मेरी तरफ नही आइसक्रीम देखो कहीं मेल्ट न हो जाये।।
ओके कह अर्पिता आइसक्रीम खाती है और बीच बीच में खिड़की से बाहर देखने लगती है।अर्पिता को दूसरी ओर देखता पा शान अपना कोन उसके हाथ में पकड़ा उसके हाथ से लेकर खुद से खाने लगते हैं उनकी इस हरकत पर अर्पिता एक नजर उसे देखती है और फिर बाहर मुंह कर मुस्कुराते हुए बड़बड़ाती है बोल नही सकते बस!लेकिन कर सकते हैं। कर के दिखाएंगे।

शान :- सही समझी अब तुम।बोलना सुनना मेरे वश का नही सीधा करता हूँ।
शान को सुन अर्पिता कहती है लो कान भी इतने तेज हैं तुरंत सुन लेते हैं।हम इतने धीमे स्वर में कहते है फिर भी न जाने कैसे हर बात सुन लेते हैं।

ये सुन शान मुस्कुरा देते हैं।और मन ही मन कहते हैं कैसे क्या ये ही तो प्रेम है अर्पिता इसकी पुकार इतनी तीव्र होती है कि मन में कही हुई बात ईश्वर तक पहुंच जाती है हम तो फिर भी इंसान है।

कुछ ही देर में दोनो घर पहुंचते है जहां श्रुति दरवाजे पर ही खड़ी हो इंतजार कर रही होती है।
दोनो अंदर जाते है जहां शान आइसक्रीम का पैकेट श्रुति को देते है तो श्रुति उसे ले जाकर फ्रिज में रख देती है।

शान कमरे में चले जाते है और अर्पिता भी चेंज करने लगती है।अर्पिता और शान को एकसाथ देख श्रुति कहती है लगता है मेरी कही हुई बात सच हो रही है मेरी चोरनी।

ये सुन अर्पिता कहती बची रहियो कहीं तुम्हे भी न चुरा ले हम।

श्रुति :- चुराओगी क्या ये बताओ तुम और भाई साथ साथ कैसे।मतलब भाई तो घर से आ रहे हैं और तुम अकैडमी से और ये गाड़ी तो परम भाई की है न।

हां जी उन्ही की है और वो अभी किसी कार्य से बाहर गये हैं।कल तक आ जाएंगे।अर्पिता ने कहा।तो श्रुति बस मुस्कुरा देती है।वहीं शान चेंज कर चुपचाप रसोई में चले आते हैं।अर्पिता भी चेंज कर वहीं पहुंचती है और शान की मदद करने लगती है।साथ ही बात करना भी शुरू कर देती है।

शान आपकी परम जी से बात हुई कहां तक पहुंचे वो।शान ने कुछ नही कहा और चुपचाप कार्य करने लगे।उनकी चुप्पी देख अर्पिता फिर बोली अपना फोन दीजिये हम खुद ही फोन कर पूछते है।शान अपना फोन निकाल कर नही देते तो अर्पिता शान के थोड़ा करीब आती है और उनकी आंखों में देखते हुए उनकी पॉकेट से फोन निकाल लेती है।उसकी ये हरकत देख शान दूसरी तरफ हो मुस्कुरा देते है।
अर्पिता ये देख लेती है लेकिन बिन कुछ कहे शान की अंगुली उठा फोन का लॉक खोल परम को फोन लगा उससे हालचाल पूछ लेती है।और फोन कट कर उसमे एक संदेश टाइप कर प्रशांत की आंखों के सामने कर देती है जिसे पढ़ शान न में गर्दन हिला अपने कार्य में ही रत रहते हैं।तो अर्पिता फोन उठा उसमे दुबारा एक संदेश(तो ऐसा क्या करे कि आपका गुस्सा शांत हो) लिख फिर से उसके सामने कर देती है तो शान कहते है कुछ ज्यादा नही बस एक वादा कि मुझे बिन बताये ऐसा कोई काम नही करोगी।इस बार किस्मत अच्छी थी अप्पू लेकिन आगे का क्या पता कब कौन सी मुसीबत हमारा इंतजार कर रही हो।
अर्पिता:-ठीक है।हमे स्वीकार है।ये देख शान मुस्कुरा कर कहते है ये की न तुमने समझदारी वाली बात।
हम्म।कह दोनो हल्का स मुस्कुरा देते हैं और बातचीत करते हुए कार्य समाप्त करते हैं।

क्रमशः...


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Janvi

Janvi 6 महीना पहले

hansaben Mayani

hansaben Mayani 7 महीना पहले

Suresh

Suresh 1 साल पहले

ArUu

ArUu मातृभारती सत्यापित 1 साल पहले

Ranjan Rathod

Ranjan Rathod 1 साल पहले