मे और मेरे अह्सास - 11

मे और मेरे अह्सास

भाग-११

आँख से बरस रहीं हैं बारिसे l
किस ने की है धूप मे साजिसे ll

मिलन की आश लगाए बेठे है l
जाने कब पूरी होगी ख्वाइशे ll

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आज प्यार की बारिश होने वाली है l
जाम-ए-इश्क की बारिश होने वाली है ll

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गुस्सा आता है कि वो बिना वज़ह के गुस्सा है l
प्यार आता है कि वो बिना वज़ह के गुस्सा है l

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मे और मेरे अह्सास ही काफी है जीने के लिए l
फूल गुलाबी रंग का ही काफी है देने के लिए ll

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वो मेरा नसीब है l
जो मेरे करीब है ll

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आज गुस्से में प्यार छलक रहा था l
पहेली बार मे प्यार छलक रहा था ll

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पास आके तुम पल दो पल ठहरो जरा l
मिले ना मिले फिर ये पल ठहरो जरा ll

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याद तो उसे किया जाता है l
जिसे दिल से भुला दिया हो ll

हरपाल हर लम्हा साथ ही है l
सांसो की रफ़्तार मे जिया है ll

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अजीब सा रिसता है हमारे दरमियाँ l
ना वो जान पाये कभी, ना हम भी ll

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याद उनको आती भी होगी हमारी क्या?
दिन रात यही सोच के पल बिताते हैं ll

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क्या लिखू? कैसे लिखू? खत लिखूं क्या?
जब के लिखने की आदत भी छूट गई है ll

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बड़ी मुद्दतों के बाद तुम्हें पाया है l
मांग के तक़दीर से तुम्हें लाया है ll

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लोकडाउन
मे और मेरे अह्सास लिखते लिखते l
मेरी डॉकडाउन हो गई है ll
लोकडाउन है खत्म हो ही नहीं रहा l
मेरी डॉकडाउन हो गई है ll

सुबह देरी से उठाना, रात को देरी से सोना l
आदत सब बिगड़ती जा रही है l
दूध - शब्जी - राशन की डिमांड बढ़ गई है l
मेरी डॉकडाउन हो गई है ll

बस ट्रैन, प्लेन, मोल, थियेटर, होटल l
पानीपुरी सब कुछ बंध है l
घर का काम करते करते कमर टूट गई l
मेरी डॉकडाउन हो गई है ll

आफिस, बैंक, पोस्ट, कूरियर, दुकाने l
सलून - पार्लर सब बंध है l
चाय,दूध,नास्ता,लंच,डिनर चालू रहता है l
मेरी डॉकडाउन हो गई है ll

लूडो, केरम,तास, हाऊसी कितना खेले l
ऑनलाइन - ऑफलाइन भी खेला l
कविता लिखी, किताबे पढ़ी, पेंटिंग किया l
मेरी डॉकडाउन हो गई है ll

बेडरूम - ड्राइंग रूम - किचन - बाल्कनी l
के चलकर काट लिये l
नीद से उठकर खाना खाया फिर सो गया l
मेरी डॉकडाउन हो गई है ll

स्कूल की छुट्टियां इतनी लंबी हो गई l
मम्मी की हालत खास्ता हुई l
घर-घरवालों को सँभालते कमर दर्द हुआ l
मेरी डॉकडाउन हो गई है ll

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चलो घर चले अपने अपने l
शहर में कुछ नहीं हमारा l।

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बसाना चाहते थे आशियाना l
जीना चाहते चार दिन खुशी के l
न घर बसा, न खुशी मिली l
भूख प्यास से तड़पकर रह गये l
चलो घर चले अपने अपने ll

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शूरवीरता कमजोर को ऊँचा उठाने मे है l
न कि मजबूरी के हाल में छोड़ने मे है ll

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आखरी अर्ज़ है सदा दिल में रखना l
हरपल हर लम्हा दुआओ मे रखना ll

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कुछ भी नया सीखने की उम्र नहीं होती l
कभी भी कुछ भी सीख जाता है l
गर सीख की तमन्ना, उमंग और चाहत हो ll

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कोशिश ही कर रहे हैं जीने की l
जिंदगी तो ना जाने कहां खो गई ll

अपनी मस्ती में जी रहे थे बेफ़िक्र l
बंदगी तो ना जाने कहां खो गई ll

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उदासी का लिबास कब तक पहने रखोगे l
चांदनी मे खुशी के ज़ेवर पहनो हुस्न ए जाना l।

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आनंद दिल में होना चाहिए l
जीवन खुलकर जीना चाहिए ll

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मन पतंगा उड़ाउड़ क्यों कर रहा है आज?
दिल हमारा उड़ाउड़ क्यों कर रहा है आज?

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खुद का रास्ता खुद ही बना l
ताकि मनचाही मंजिल मिले ll

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वो मेरा नसीब है l
जो मेरे करीब है ll

हाथ की लकीर में है l
वो मेरे नसीब में है ll

दर्द देने वाला ही l
वो मेरे तबीब मे है ll

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इश्क का दुश्मन l
वो मेरे हबीब मे है ll

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आधी जिंदगी अर्थ थुथने मे बीरा दी l
बाकी आधी जी ले वर्ना वो भी गवा देगा ll

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खुद का प्रकाश खुद ही बनो l
अपनी दुनिया को जगमगाओ ll

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चहेरे पे नूर छाया है l
सनम का पैगाम आया है ll

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मौन मे वो ताक़त है जो दिलों को हिला देती है l
जो काम शब्द नहीं करते वो मौन कर देता है ll

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किसीको हराने के लिए तीर - ए - नजर काफ़ी है l
दिलों दिमाग को जीतने तीर - ए - नजर काफ़ी है ll

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सब के कर्मों का न्याय उपरवाला करता है l
उस शक्ति पे भरोसा रख बड़ा दिल रखता है ll

*******समाप्त़़********

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Swatigrover

Swatigrover सत्यापित यूजर 7 महीना पहले

Rupal

Rupal 7 महीना पहले

Doshi Gaurangkumar

Doshi Gaurangkumar 7 महीना पहले

Zalak Mehta

Zalak Mehta 7 महीना पहले