क्या यही प्यार है Rajesh Kumar द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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क्या यही प्यार है

प्रेम एक अजीब सा एहसास होता है जिसे हम सब जिंदगी के साथ महसूस करते है। इसे हम प्यार, प्रीत कहते है। वैसे तो यह किसी के लिए भी जागृत हो सकता है लेकिन प्रेम जब किसी विशेष के लिए हमारे ह्रदय में जगता है तो वह हमारे लिए दुनिया में सबसे खास होता है यहां तक की हम, हमें बनाने वाले भगवान से भी उसके लिए बगावत कर लेते है। ऐसा क्या होता इस एहसास में जो हमें इतना जज़्बाती बना देता है, दुनिया की कोई कलम ऐसी नही जो प्रेम को पन्नो पर उतार सके। ऐसा कोई व्यक्ति नही जो शब्दों में पूरा पूरा बयां कर सकें। ये तो होता है तो होता चला जाता है इसके बारे में किसी से पूछना तो ऐसे है मानो हम किसी गूंगे से एक फल के स्वाद के बारे में पूछे इसे तो वही महसूस करता है जिसके हृदय में जागृत हो जाए।

        जब प्रेम की सुरुआत होती है वो छण किसी के लिए भी बहुत ही असमंजस वाले होते है सामने वाला भी उसे उतना ही चाहता है या नही ये विचार भी आते रहते है और दूसरे ही पल उसके प्रत्येक क्रियाकलाप को प्रेमी अपने लिए जोड़ कर देखता है। अपने प्रेम को सामने वाले के सम्मुख प्रस्तुत करना तो मानो आसमान से तारे तोड़ने जैसा होता है।

अगर आप ने किसी से प्यार किया है और अभी आप ने अपने प्यार को सामने वाले से सीधे सीधे प्रस्तुत नही किया है लेकिन आप को पूर्ण विश्वास है कि वो भी आप को उतना ही प्यार करता है तो महसूस करिए वो छण जब सामने वाले ने आपको पहली बार प्यार भरी मुस्कान से  छण भर को देखे। आह क्या खुशी के पल है दिल में गुदगुदी सच्चे प्यार का आनन्द, हम जिस मित्र को खास मानते है उसके साथ इस अविस्मरणीय पल का वर्णन करने का तरीका। मानों दुनियां की सारी खुशी इन प्यार के छणों से तुच्छ हैं। अब तो उसकी यादों में दिन भर खोएं रहन, हर काम को उसके एहसास के साथ करना। कहीं जा रहे है तो ये मानना कि वो हमें देख रहा है। रातों को उसका सपनों में आना और सुबह को उसकी याद में मुस्कुराते हुए उठना। सुबह को तैयार होते समय ठीक से सजना जो पहले कभी खुद पर ध्यान भी नही देते होंगे लेकिन उनके लिए जो सजना होता है। अगर वो साथ पढ़ती/पढ़ता है तो समय से पहुँचना, और उसका आते हुए दीदार करने वो भी चुप चुप के। फिर उसे तिरछी नजरों से देखना। कभी कभार उसका सामने आ जाने से दिल की धड़कनों का तेज हो जाना।

      हर दिन ये सोचना की आज मैं उससे अपने प्यार का इजहार कर दूंगा, लेकिन रोज की तरह एक दिन और बढ़ जाना। अगर दूसरा कोई उसे देखे तो दिल में मानों उसके लिए ईर्ष्या होना। ये डर सतना कि कहीं उसका प्यार दूसरा न छीन लें।

इन्ही सब एहसासों के बीच शुरुआती प्यार पनपता है।

न जाने कब और कैसे? एक व्यक्ति जो हमारे लिए दुनिया में सबसे अनूठा और प्रिय बन जाता है। अब जिसके बिना सब कुछ सुना लगा है। पता ही नही चलता।

     

 शेष अगले भाग में

                               - राजेश कुमार

                                9354264676