जाली नोट Ved Prakash Tyagi द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

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जाली नोट

जाली नोट

गाँव में और कोई काम नहीं मिला तो रवि अपनी पत्नी और दोनों बच्चों को लेकर दिल्ली चला आया। जमीन जायदाद तो थी नहीं जो खेती बाड़ी करके ही गुजारा कर लेता, किसी तरह दसवीं तक पढ़ भी लिया था, खेतों में मजदूरी का काम भी कभी कभी मिलता था। एक चाचा दिल्ली में नौकरी करते थे तो उनसे बात कर ली रवि ने, पत्नी और बच्चों को लेकर चाचा के पास ही आया था। चाचा ने अपने विभाग में ही दैनिक मजदूरी पर रखवा दिया था, महीना भर हो जाने पर चाचा ने रवि को किराए पर अलग कमरा लेकर दे दिया और कह दिया, “भाई रवि अब तुम खुद कमाओ और खुद खाओ, मैं तो बस इतनी ही सहायता कर सकता था इससे ज्यादा न तो मैं कर सकूँगा और न ही मुझसे आशा रखना, यह दिल्ली है, यहाँ पर तो अपनी कमाई अपना ही पेट भरने के लिए पूरी नहीं पड़ती।”

रवि अलग से किराए के मकान में रहने लगा, लेकिन उसको धन कमाने की बड़ी लालसा थी। दिन में नौकरी करता और रात में एक प्रिंटिंग प्रैस में काम करने लगा। रवि नौकरी से आकर खाना खाने के बाद अपने कमरे में बच्चों के साथ खेल रहा था तभी उनका एक पड़ोसी रहमान आ गया। रवि ने रहमान को बैठने के लिए मूढ़ा दिया। रहमान से रवि का अच्छा मिलना जुलना हो गया था और आपस में एक दूसरे के सुख-दुख की बात भी कर लिया करते थे। रवि की पत्नी सुषमा दोनों बच्चों को लेकर बाहर बैठ गयी, रवि और रहमान आपस में बात चीत करने लगे। रवि ने कहा, “भाई, मैं तो बस अब चलूँगा, दूसरी नौकरी पर जाने का टाइम हो रहा है।” रहमान बोला, “रवि भाई ऐसा कैसे चलेगा? इस तरह तो तुम बीमार पड़ जाओगे।” रवि बोला, “रहमान भाई, घर का खर्च चलाने के लिए मेहनत करके पैसा तो कमाना ही पड़ेगा।” रहमान बोला, “हाँ, रवि भाई घर गृहस्थी का खर्च पूरा करने के लिए मेहनत तो करनी ही पड़ती है, लेकिन सोचो इस तरह मेहनत करके तुम बीमार पड़ गए तो क्या होगा। दिन रात काम में जुटे रहते हो, आराम करते नहीं, सोने का भी समय नहीं मिलता, कब तक यह शरीर भी साथ देगा? शरीर को आराम और खुराक दोनों चाहिए तभी यह स्वस्थ रह सकता है।” रवि बोला, “यह सब तो ठीक है लेकिन इसके सिवा चारा भी तो नहीं है।” रहमान बोला, “रवि भाई मैं एक ऐसे आदमी को जानता हूँ जो तुम्हें रातों रात अमीर बना सकता है, एक बार मेरे साथ चल कर देख लो, तुम्हारा मन मान जाए तो आगे बात करेंगे।” इतनी बात कह कर रहमान तो चला गया लेकिन रवि के मन में रातों रात अमीर बनने का बीज बो गया।

कुछ दिन सोच विचार करने के बाद रवि ने रहमान से बात की और काम के बारे में पूछा। रहमान रवि को लेकर आगरा हुसैन के पास आ गया, हुसैन ने दोनों के ठहरने का प्रबंध किया और रवि को दस हजार रुपए बिलकुल कोरे नोट खर्चे के लिए देकर कहा, “तुम लोग पूरा दिन आगरा घूमो, खर्चा करो, फिर शाम को मिलते हैं और काम के बारे में बात करते हैं।” रहमान रवि को लेकर आगरा घूमने निकल गया, दोनों ने घूमने में खुल कर खर्च किया, कुछ सामान भी खरीदा और शाम को वापस उस जगह आ गए जहां हुसैन ने उनको ठहराया था। हुसैन ने रवि से पूरे दिनचर्या और खर्चे के बारे में पूछा और यह भी पूछा कि तुम लोगों को खर्चा करने में कोई परेशानी तो नहीं आई? किसी ने कहीं नोट लेने से मना किया हो? रवि बोला, “ऐसा तो कुछ नहीं हुआ, नोट तो आराम से चल गए।” हुसैन बोला, “रवि बेटा ये सब जाली नोट हैं, लेकिन असली की तरह चलते हैं, अब मैं तुम्हें काम की बात बताता हूँ, तुम मुझे जितने असली नोट दोगे मैं उससे दो गुने जाली नोट तुम्हें दूंगा।”

रवि तो रातों रात अमीर बनने के सपने देख रहा था और उस समय उसने जो उसके पास 50 हजार रुपए थे हुसैन को देकर बदले में एक लाख रुपए ले लिए। दिल्ली आकर रवि ने रूपय चलाये तो उसको किसी तरह की समस्या नहीं आई, घर का खर्च भी ठीक से चलने लगा। रवि ने रहमान से एक लाख रुपए बदलवाने की बात की तो रहमान फिर से रवि को लेकर हुसैन के पास आगरा चला गया। इस बार हुसैन ने रवि से एक लाख रुपए लेकर रख लिए और कहा, “रवि बेटा, ऐसा करो तुम डेढ़ लाख रुपए और लेकर आओ और पाँच लाख मुझसे ले जाना।” रवि ने सोचा कि अगर ढाई लाख रुपए के बदले मुझे पाँच लाख मिल जाएंगे तो मैं अपना घर भी खरीद लूँगा और यह सोच कर रवि दिल्ली आ गया। रवि ने सुषमा को समझाया तो उसने कहा, “देख लो जी कहीं कुछ गड़बड़ न हो जाए।” लेकिन रवि ने तो तय कर लिया था और किसी भी तरह उसने डेढ़ लाख रुपए का प्रबंध करके रहमान को साथ लेकर आगरा हुसैन के पास चला गया। हुसैन ने रवि से डेढ़ लाख रुपए लेकर रख लिए एवं पाँच लाख की डिलिवरी देने के लिए शहर से बाहर मथुरा रोड पर बुला लिया। रवि और हुसैन मथुरा रोड पर हुसैन के आदमियों से पाँच लाख डिलिवरी ले ही रहे थे कि पुलिस की जीप गाड़ी के सामने आकर रुकी। बड़ी तेजी से पुलिस वालों ने उतर कर हुसैन की गाड़ी को घेर लिया और पैसे समेत सब को थाने ले जाने लगे तभी रहमान ने कहा, “रवि भाई तुम जाओ, मैं सारा मामला अपने ऊपर ले लूँगा। तुम पकड़े गए तो सरकारी नौकरी भी छूट जाएगी।” इस तरह रवि वहाँ से निकल आया और उदास सा स्टेशन की तरफ चला जा रहा था कि उसको उसका एक पड़ोसी रामसिंह मिल गया। उदासी का कारण पूछने पर रवि ने पहले तो बताने में आनाकानी की, लेकिन जब रामसिंह ने कहा कि कुछ दिनों से रहमान तुम्हारे घर के चक्कर लगा रहा था, मैं तभी समझ गया था कि दाल मे कुछ काला है। मैं तुमसे उसके बारे में कुछ बात कर पाता तब तक मेरी पोस्टिंग यहाँ आगरा हो गयी, तब रवि बोला, “नहीं भाई रामसिंह, रहमान के बारे में तो ऐसा सोचना भी पाप है, उसने तो सारा गुनाह अपने ऊपर ले लिया है और मेरी जगह जेल चला गया है, नहीं तो मैं कहीं का नहीं रहता।” रामसिंह ने रवि से कुछ सवाल किए, “अच्छा रवि बताओ रहमान जब तुम्हें हुसैन के पास लाया तो हुसैन ने तुम्हें खर्चने को कुछ रुपए दिये होंगे और बाद में बताया होगा कि ये जाली नोट हैं।” रवि ने हाँ में सिर हिलाया तो रामसिंह बोला “वो सारे नोट असली थे, जितने नोट हुसैन ने तुम्हें दिये सब असली थे, सिर्फ तुम्हें फँसाने के लिए दिये गए थे कि तुम लालच में आकर ज्यादा से ज्यादा रुपए दोगुने करवाने के लिए लेकर आओ और तुम्हारे सब रुपए ठग लिए जाएँ। और हाँ रवि वह जो पुलिस थी वह भी नकली थी।” रामसिंह की बातें सुनकर रवि को बहुत पछतावा हो रहा था कि जिन से उधार लिया था उनका कर्ज़ कैसे चुकाऊंगा।

अब रामसिंह बिना देर लगाए रवि को थाने ले गया, थाने मे एक उपनिरीक्षक उसके जानकार थे, सारी बात उनको बताई। उपनिरीक्षक कुछ और सिपाहियों को साथ लेकर रामसिंह व रवि के साथ हुसैन के ठिकाने पर पहुंचा, जहां पर हुसैन, रहमान और नकली पुलिस वाले सब पकड़े गए। रवि को उसका पैसा भी ज्यों का त्यों वापस मिल गया जो उसने घर जाकर जिससे उधार लिए थे उसको वापस कर दिये और राम सिंह को बार-बार धन्यवाद देते हुए रवि बोला कि अब कभी भी जाली नोटों के झांसे मे नहीं आऊँगा। महत्वाकांक्षी होना बुरा नहीं लेकिन महत्वकांक्षा पूरी करने के लिए गलत लोगों के साथ फंस कर गलत काम करना बुरा है।