ध्रुव की तारा - भाग 17 Anamika द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

ध्रुव की तारा - भाग 17

ध्रुव की तारा

 भाग  -  १७

लेखिका "अनामिका"

​दिन पंख लगाकर उड़ रहे थे और आखिरकार वो दिन आ ही गया जब 12वीं के नतीजों की घोषणा हुई। तारा शुरू से ही पढ़ाई में होशियार थी, और जब रिजल्ट आया तो उसने उम्मीद से भी शानदार अंक हासिल किए थे। घर में जश्न का माहौल था। मम्मी-पापा अपनी बेटी की इस कामयाबी पर फूले नहीं समा रहे थे और एक-दूसरे को मिठाई खिला रहे थे।

​अभी यह खुशियाँ मनाई ही जा रही थीं कि तारा का फोन बज उठा। स्क्रीन पर 'ध्रुव' का नाम चमक रहा था। तारा ने मुस्कुराते हुए फोन उठाया।

​"बधाई हो टॉपर! मुझे पता था तू कमाल करेगी," ध्रुव की उत्साहित आवाज सुनाई दी।

​"थैंक यू ध्रुव!" तारा ने अपनी खुशी दबाते हुए कहा।

​ध्रुव ने आगे कहा, "अब सुन, जब कॉलेज के ऑनलाइन एडमिशन फॉर्म भरेगी न, तो मेरे कॉलेज का नाम सबसे ऊपर रखना ताकि पहली ही लिस्ट में तुझे सीट मिल जाए।"

​तारा मन ही मन तो उसी कॉलेज में जाने का सपना संजोए बैठी थी, लेकिन ध्रुव को सताने का मौका वह कैसे छोड़ देती? उसने नखरे दिखाते हुए एक दूसरे नामी कॉलेज का नाम लिया और बोली, "मैंने उस कॉलेज में जाने का सोचा है, तो फॉर्म में वही भरूँगी।"

​यह सुनते ही ध्रुव का दिल बैठ गया। उसे गहरा धक्का लगा, लेकिन उसने खुद पर काबू रखा। तारा के करियर का सवाल था और वह टॉपर थी, इसलिए ध्रुव ने उसके फैसले के बीच आना सही नहीं समझा। उदास मन से उसने बस इतना कहा, "जैसा तुझे सही लगे..." और फोन रख दिया। ध्रुव को दुखी करके तारा को थोड़ा बुरा तो लगा, लेकिन उसने सोचा कि असली सरप्राइज का मज़ा तो अब आएगा।

​कुछ हफ्तों बाद, ध्रुव के कॉलेज में नए सेशन के दाखिले और 'फ्रेशर्स' के आने का दिन आ गया। ध्रुव अब दो साल सीनियर हो चुका था। कॉलेज मैनेजमेंट ने उसे और उसके दोस्तों को जूनियर्स का मार्गदर्शन करने के लिए वॉलंटियर (Field Duty) की जिम्मेदारी सौंपी थी, ताकि वे नए छात्रों को उनके हॉस्टल और कमरे ढूंढने में मदद कर सकें।

​ध्रुव हमेशा की तरह अपने शांत और गंभीर रूप में एक जूनियर को रास्ता समझा रहा था। कॉलेज आने के बाद से वह काफी संजीदा हो गया था और ज्यादातर अपनी पढ़ाई और काम से ही मतलब रखता था।

​तभी पीछे से एक बेहद जानी-पहचानी, खट्टी-मीठी सी आवाज आई—

"एक्सक्यूज मी सीनियर! क्या आप मुझे गर्ल्स हॉस्टल का रास्ता बता सकते हैं?"

​ध्रुव का दिल एक पल के लिए धड़कना भूल गया। उसने झटके से पीछे मुड़कर देखा। सामने चश्मा ठीक करती, चेहरे पर एक नटखट मुस्कान लिए तारा खड़ी थी!

​तारा को अपने सामने देखकर ध्रुव की खुशी का कोई ठिकाना न रहा। वह सब कुछ—माहौल, नियम और दुनिया—भूल गया। इससे पहले कि तारा कुछ समझ पाती, ध्रुव ने आगे बढ़कर उसे दोनों हाथों से हवा में उठा लिया और गोल घुमा दिया।

​अचानक हुए इस वाक्ये से पूरा कैंपस सन्न रह गया। एडमिशन के लिए आए नए छात्र और ध्रुव के क्लासमेट्स फटी आँखों से यह नज़ारा देख रहे थे। जो लड़का हमेशा चुपचाप और लड़कियों से दूरी बनाकर रहता था, उसका यह रूप देखकर सब हैरान थे। हर किसी की नज़रें अब सिर्फ उन दोनों पर ही टिक चुकी थीं।

​अचानक आसपास की खामोशी का अहसास होते ही ध्रुव की नज़रें चारों तरफ गईं। उसने देखा कि पूरे कैंपस के छात्र, उसके दोस्त और नए जूनियर्स आँखें फाड़े सिर्फ उन्हीं दोनों को ताक रहे थे।

​होश आते ही ध्रुव का चेहरा एकदम लाल हो गया। उसने तुरंत तारा को नीचे उतारा। तारा ने भी हड़बड़ी में अपना चश्मा ठीक किया और अपनी नटखट मुस्कान के पीछे अपनी झेंप छिपाने लगी। ध्रुव, जो हमेशा कॉलेज में अनुशासन की मिसाल बना रहता था, आज पहली बार इस तरह सबके सामने बिल्कुल निरुत्तर और शर्मिंदा खड़ा था।

​"उम्म... वो... तारा," ध्रुव ने अपनी अड़खड़ाती आवाज़ पर काबू पाने की कोशिश करते हुए कहा, "चल, मैं तेरा सामान उठाता हूँ।"

​उसने बिना कोई और मौका दिए तारा का भारी ट्रॉली बैग और बैगपैक खुद उठा लिया। तारा के चेहरे पर एक विजयी मुस्कान तैर गई। दोनों चुपचाप गर्ल्स हॉस्टल के रास्ते पर आगे बढ़ने लगे। रास्ता भले ही छोटा था, लेकिन दोनों के बीच बिन कहे कई बातें हो रही थीं। तारा मन ही मन ध्रुव के इस बेपरवाह और जुनूनी रूप को देखकर फूली नहीं समा रही थी, वहीं ध्रुव अब भी अपने इस अप्रत्याशित कदम से पूरी तरह उबर नहीं पाया था।

​गर्ल्स हॉस्टल के मुख्य गेट पर पहुँचकर ध्रुव ने सामान नीचे रखा।

​"ये रहा तेरा हॉस्टल," ध्रुव ने सीधी नज़रें मिलाने से बचते हुए कहा, "अब अंदर जा और फ्रेश हो जा। शाम को मिलता हूँ तुमसे।"

​"थैंक यू सीनियर!" तारा ने फिर से वही शरारती लहजा अपनाया।

​ध्रुव मुस्कुराते हुए अपने हॉस्टल की तरफ मुड़ गया और तारा अपने कमरे की ओर बढ़ गई—यह जाने बिना कि अगले ही पल से कॉलेज के नियम, नए चेहरे और कैंपस की गपशप उनकी इस मासूम सी दुनिया की नई परीक्षा लेने वाले थे।

सत्रहवाँ भाग समाप्त, ​कहानी जारी है....