एपिसोड 47: S-21 के कमरे में छुपा सच
दरवाजा धीरे-धीरे खुल चुका था।
उसके पीछे घना अंधेरा था।
इतना गहरा अंधेरा कि सामने खड़े इंसान की सिर्फ परछाईं दिखाई दे रही थी।
लेकिन उसकी उंगली में मौजूद नागमुद्रा की रिंग साफ चमक रही थी।
साँवी ने अनजाने में आर्यवीर का हाथ और कसकर पकड़ लिया।
“ये कौन है?”
आर्यवीर ने कोई जवाब नहीं दिया।
उसकी नजरें लगातार उस आदमी पर थीं।
राघव आगे बढ़ने लगा।
“कौन हो तुम?”
अंधेरे में खड़ा आदमी हल्का-सा हँसा।
“तुम्हें सच में लगता है कि मैं अपना नाम बताकर तुम्हारा काम आसान कर दूँगा?”
राघव रुक गया।
राजवीर ने तुरंत अपनी जेब से फोन निकाला।
“मैं पुलिस को—”
“पुलिस?”
आदमी फिर हँसा।
“राजवीर… तुम अब भी यही सोचते हो कि इस खेल को पुलिस रोक सकती है?”
राजवीर के हाथ से फोन लगभग छूट गया।
“तुम मुझे जानते हो?”
“मैं तुम्हें नहीं…”
आदमी कुछ पल रुका।
“…तुम्हारे अतीत को जानता हूँ।”
राजवीर की आँखें सिकुड़ गईं।
“सामने आओ।”
“बहुत जल्दी है।”
तभी साँवी आगे बढ़ी।
“मेरे बारे में तुम्हें क्या पता है?”
आदमी बिल्कुल शांत रहा।
“तुम्हारे बारे में?”
वह धीरे से बोला,
“तुम्हें जितना तुम्हारे बारे में बताया गया है… उससे कहीं ज्यादा।”
साँवी के चेहरे पर बेचैनी आ गई।
“तो फिर बताओ।”
“नहीं।”
“क्यों?”
“क्योंकि सच सुनने के बाद तुम्हारी दुनिया बदल जाएगी।”
साँवी ने आर्यवीर की तरफ देखा।
आर्यवीर ने उसका हाथ छोड़ने के बजाय और मजबूती से पकड़ लिया।
“मेरी दुनिया पहले ही बदल चुकी है।”
साँवी ने उसकी तरफ देखा।
“अब जो भी सच है, मैं जानना चाहती हूँ।”
अंधेरे में खड़ा आदमी कुछ पल चुप रहा।
फिर उसने कहा—
“तुम बिल्कुल अपनी माँ जैसी हो।”
साँवी की आँखें फैल गईं।
“तुम… मेरी माँ को जानते थे?”
आदमी ने कोई जवाब नहीं दिया।
इसके बजाय उसने अपनी रिंग उतारी और जमीन पर रख दी।
रिंग के जमीन से टकराते ही पूरा कमरा नीली रोशनी से भर गया।
दीवारों पर एक-एक करके पुरानी तस्वीरें दिखाई देने लगीं।
पहली तस्वीर—
मीरा।
दूसरी—
राजवीर।
तीसरी—
अनन्या।
और चौथी तस्वीर देखकर तीनों बहनें बिल्कुल स्थिर रह गईं।
उस तस्वीर में तीनों बच्चियाँ थीं।
लेकिन उनके पीछे एक चौथा व्यक्ति खड़ा था।
चेहरा धुंधला था।
साँवी ने स्क्रीन के करीब जाकर पूछा,
“ये कौन है?”
आदमी ने कहा,
“जिसकी वजह से तुम तीनों को अलग किया गया था।”
आरोही ने तुरंत पूछा,
“Founder?”
कुछ सेकंड तक कोई आवाज नहीं आई।
फिर—
“Founder उसका नाम नहीं है।”
राघव ने चौंककर पूछा,
“तो क्या है?”
“एक पद।”
कमरे में सन्नाटा छा गया।
“Project S-21 को किसी एक आदमी ने नहीं बनाया था।”
आदमी ने आगे कहा,
“हर Founder के बाद एक नया Founder आता है।”
नैना ने अपनी रिंग को देखा।
“तो विक्रम?”
“विक्रम सिर्फ एक हिस्सा था।”
“और जिसने उसे आदेश दिए?”
“वो भी सिर्फ एक हिस्सा था।”
आर्यवीर ने गुस्से में कहा,
“तो असली आदमी कौन है?”
अंधेरे में खड़ा आदमी चुप रहा।
आर्यवीर आगे बढ़ा।
“तुम जानते हो।”
“हाँ।”
“तो नाम बताओ।”
आदमी की आवाज पहली बार गंभीर हुई।
“अभी नहीं।”
आर्यवीर उसके सामने पहुँच गया।
“तुम्हारे लिए शायद ये खेल होगा।”
“नहीं।”
“तो क्या है?”
आदमी ने आर्यवीर की आँखों में देखते हुए कहा,
“युद्ध।”
अचानक कमरे की सारी स्क्रीन बंद हो गईं।
और उसी पल—
धड़ाम!
पीछे का दरवाजा बंद हो गया।
साँवी चौंक गई।
“हम अंदर फँस गए!”
आर्यवीर ने दरवाजा खोलने की कोशिश की।
लेकिन दरवाजा नहीं खुला।
कबीर ने घबराकर कहा,
“भाई… ये वो वाला टाइम है ना जब फिल्मों में कोई बोलता है कि ‘हम सब मरने वाले हैं’?”
चिंटू ने उसे घूरा।
“चुप रहो!”
“मैं तो माहौल हल्का कर रहा था।”
“माहौल नहीं, अपनी जान हल्की करोगे।”
साँवी के चेहरे पर हल्की मुस्कान आई।
इतने तनाव के बीच भी उसकी हँसी निकल गई।
आर्यवीर ने उसे देखा।
“तुम ठीक हो?”
साँवी ने सिर हिलाया।
“हाँ।”
फिर उसने धीरे से कहा,
“तुम हो ना।”
आर्यवीर की आँखों में कुछ बदल गया।
“हाँ।”
दोनों की नजरें कुछ पल के लिए मिलीं।
लेकिन तभी—
बीप… बीप… बीप…
कमरे में अलार्म बजने लगा।
लाल रोशनी जल उठी।
राघव चिल्लाया,
“सब पीछे हटो!”
दीवार पर एक टाइमर दिखाई दिया।
05:00
कबीर की आँखें फैल गईं।
“पाँच मिनट?”
चिंटू ने पूछा,
“क्या होगा पाँच मिनट बाद?”
कबीर ने उसे देखा।
“मुझे नहीं पता।”
“तो डर क्यों रहे हो?”
“क्योंकि फिल्मों में कभी भी पाँच मिनट का टाइमर अच्छी खबर नहीं देता!”
आर्यवीर ने कमरे को ध्यान से देखा।
“कोई exit जरूर होगा।”
राघव ने दीवारों को देखना शुरू किया।
“यह कमरा पुराने Project S-21 facility का हिस्सा है। यहाँ emergency passage होना चाहिए।”
आरोही ने अचानक कहा,
“रुको।”
सब उसकी तरफ देखने लगे।
वह दीवार के पास गई।
“यहाँ कुछ है।”
उसने दीवार पर हाथ रखा।
एक हल्की सुनहरी रोशनी उसकी हथेली से निकलने लगी।
साँवी भी उसके पास आई।
नैना ने जैसे ही अपना हाथ दीवार पर रखा—
तीनों के निशान एक साथ चमक उठे।
क्लिक।
दीवार का एक हिस्सा खुल गया।
उसके पीछे एक छोटी सी सुरंग थी।
राघव हैरान रह गया।
“ये रास्ता…”
राजवीर ने पूछा,
“क्या?”
“ये Project S-21 के पुराने नक्शे में नहीं था।”
आर्यवीर ने तुरंत कहा,
“तो शायद Founder ने इसे बाद में बनाया।”
साँवी ने पीछे मुड़कर उस अंधेरे आदमी को देखा।
लेकिन वहाँ कोई नहीं था।
“वो आदमी कहाँ गया?”
सबने पीछे देखा।
वह गायब हो चुका था।
सिर्फ जमीन पर नागमुद्रा की रिंग पड़ी थी।
नैना ने उसे उठाने के लिए हाथ बढ़ाया।
लेकिन साँवी ने उसका हाथ रोक दिया।
“नहीं।”
“क्यों?”
“क्योंकि हमें नहीं पता ये किसकी है।”
आर्यवीर ने रिंग को देखा।
“और शायद इसी वजह से वो इसे हमारे लिए छोड़कर गया है।”
राघव ने तुरंत कहा,
“हमें यहाँ से निकलना होगा।”
सब सुरंग में जाने लगे।
आर्यवीर सबसे पीछे था।
साँवी ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“तुम मेरे पीछे रहना।”
आर्यवीर मुस्कुराया।
“मैं हमेशा तुम्हारे पीछे ही रहता हूँ।”
साँवी ने भौंहें उठाईं।
“मतलब?”
“मतलब…”
वह थोड़ा झुककर बोला,
“तुम जहाँ जाती हो, मैं पीछे-पीछे आ जाता हूँ।”
साँवी हँस पड़ी।
“बहुत चालाक हो गए हो।”
“तुम्हारी संगत का असर है।”
दोनों सुरंग में आगे बढ़े।
लेकिन कुछ कदम बाद साँवी अचानक रुक गई।
“आर्यवीर।”
“हम्म?”
“एक बात पूछूँ?”
“पूछो।”
“अगर ये सब खत्म हो गया…”
वह कुछ पल रुकी।
“…तो क्या तुम मेरे साथ रहोगे?”
आर्यवीर कुछ सेकंड चुप रहा।
साँवी ने उसकी तरफ देखा।
“क्या हुआ?”
आर्यवीर धीरे से उसके करीब आया।
“तुम्हें अभी भी लगता है कि मैं सिर्फ इस fake relationship की वजह से तुम्हारे साथ हूँ?”
साँवी की आँखें नम हो गईं।
“मुझे नहीं पता।”
आर्यवीर ने उसका हाथ अपने दोनों हाथों में ले लिया।
“तो याद रखो…”
उसकी आवाज बेहद धीमी थी।
“शुरुआत fake थी।”
साँवी की धड़कन तेज हो गई।
“लेकिन…”
आर्यवीर ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा—
“अब जो महसूस करता हूँ… वो fake नहीं है।”
साँवी कुछ बोल नहीं पाई।
उसकी आँखों से एक आँसू निकल गया।
आर्यवीर ने उसे अंगूठे से पोंछ दिया।
“डरो मत।”
साँवी हल्के से मुस्कुराई।
“मैं डर नहीं रही।”
“झूठ।”
“हाँ…”
वह मुस्कुराई।
“…थोड़ा।”
आर्यवीर भी मुस्कुरा दिया।
“मैं हूँ।”
“पता है।”
दोनों कुछ पल वैसे ही खड़े रहे।
फिर पीछे से कबीर की आवाज आई—
“अगर आपका romantic scene खत्म हो गया हो तो आगे भी चलें? पाँच मिनट का टाइमर है!”
साँवी झेंप गई।
आर्यवीर ने कबीर को घूरा।
“तुम्हें बाहर जाकर मैं बताता हूँ।”
कबीर हँसते हुए आगे भाग गया।
“पहले बाहर निकलो, फिर मार लेना!”
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कुछ देर बाद सुरंग उन्हें एक पुराने कमरे में लेकर आई।
कमरे के बीचोंबीच एक मेज थी।
उस पर एक फाइल रखी थी।
राघव ने फाइल उठाई।
उस पर लिखा था—
PROJECT S-21
लेकिन नीचे एक और लाइन थी।
FINAL SUBJECT — NOT THE SISTERS
राजवीर का दिल बैठ गया।
“तो फिर Final Subject कौन है?”
राघव ने फाइल खोली।
पहले पन्ने पर सिर्फ एक नाम लिखा था।
नाम देखकर राजवीर के हाथ काँपने लगे।
“नहीं…”
साँवी ने पूछा,
“क्या हुआ?”
राजवीर ने फाइल उसकी तरफ बढ़ा दी।
साँवी ने नाम पढ़ा।
और उसके चेहरे का रंग उड़ गया।
क्योंकि उस फाइल में लिखा था—
SUBJECT: ARYVEER SINGH
आर्यवीर कुछ पल उस नाम को देखता रहा।
फिर उसने धीरे से कहा—
“मैं?”
राघव ने फाइल के अगले पन्ने पलटे।
वहाँ एक पुरानी तस्वीर थी।
एक बच्चा।
लगभग पाँच-छह साल का।
उस बच्चे के हाथ में वही नागमुद्रा बनी हुई थी।
और तस्वीर के नीचे लिखा था—
“The boy was never meant to protect the sisters.”
आर्यवीर की आँखें तस्वीर पर जम गईं।
अगली लाइन ने सबको हिला दिया—
“He was created to control them.”
साँवी ने तुरंत आर्यवीर की तरफ देखा।
“नहीं…”
आर्यवीर ने भी उसकी तरफ देखा।
लेकिन उससे पहले कि वह कुछ कहता—
कमरे की स्क्रीन अपने आप जल उठी।
और उस पर एक आखिरी संदेश दिखाई दिया—
“Hello, Aryveer.”
कुछ सेकंड बाद अगली लाइन आई—
“Welcome back, Son.”
आर्यवीर के चेहरे से सारी मुस्कान गायब हो गई।
और साँवी के पैरों तले जमीन खिसक गई।
जारी रहेगा…