Mr. Ms. Fake - एपिसोड 10 kajal jha द्वारा हास्य कथाएं में हिंदी पीडीएफ

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Mr. Ms. Fake - एपिसोड 10

Mr. & Ms. Fake

Episode 10 – Jealous Hearts 

सुबह के आठ बजे...

दिल्ली की ठंडी हवा सिंह हाउस के बगीचे में लगे गुलाबों को हिला रही थी। घर में हमेशा की तरह चहल-पहल थी।

रसोई से दादी की आवाज़ आई—

"सान्वी आज नाश्ते पर आ रही है। कोई भी बाहर का खाना ऑर्डर नहीं करेगा।"

चिंटू खुशी से उछल पड़ा।

"येस! आज भाभी के हाथ की चाय मिलेगी!"

आर्यवीर ने तुरंत टोका—

"चिंटू... उन्हें परेशान मत करना।"

चिंटू मुस्कुराया।

"भैया... अब तो आप भी उनकी साइड लेने लगे हो!"

पूरा परिवार हँस पड़ा।

आर्यवीर ने नज़रें झुका लीं।

उधर...

सान्वी अपने कमरे में अलमारी के सामने खड़ी थी।

रिया ने पीछे से पूछा—

"आज इतनी तैयारी किसलिए?"

सान्वी ने सामान्य बनने की कोशिश की।

"कुछ नहीं... बस सिंह हाउस जाना है।"

रिया शरारती मुस्कान के साथ बोली—

"सिर्फ़ एक्टिंग के लिए... या किसी से मिलने का भी मन है?"

सान्वी ने तकिया उठाकर उसकी तरफ फेंका।

"पागल!"

लेकिन तकिया फेंकने के बाद वह खुद आईने में देखने लगी।

"मैं इतनी देर से तैयार क्यों हो रही हूँ?"

यह सवाल उसके अपने दिल में भी उठ रहा था।

ऑफिस...

रिया मल्होत्रा अपने केबिन में बैठी थी।

उसने अपनी दराज़ खोली।

अंदर एक पुराना फोटो एल्बम रखा था।

उसने पहला फोटो निकाला।

उसमें कॉलेज के दिनों का आर्यवीर और रिया साथ हँस रहे थे।

दूसरे फोटो में दोनों बाइक पर थे।

तीसरे में...

रिया ने आर्यवीर के कंधे पर सिर रखा हुआ था।

रिया की आँखों में अजीब-सी चमक आ गई।

"आज देखते हैं... मिस सान्वी कितना भरोसा करती हैं अपने 'बॉयफ्रेंड' पर।"

दोपहर...

आर्यवीर और सान्वी एक कैफ़े में मिले।

दोनों मंदिर जाने की तैयारी और परिवार के बारे में बात कर रहे थे।

सान्वी हँसते हुए बोली—

"तुम्हारी दादी तो मुझे सच में बहू मानने लगी हैं।"

आर्यवीर ने कॉफी का घूंट लेते हुए कहा—

"मुझे लगता है... अगर उन्हें सच्चाई पता चली तो सबसे पहले मुझे घर से निकालेंगी।"

दोनों हँस पड़े।

तभी...

"हाय आर्य!"

रिया की आवाज़ सुनते ही दोनों का ध्यान उसकी तरफ गया।

रिया मुस्कुराते हुए उनके पास आई।

उसके हाथ में वही पुराना एल्बम था।

"मैं बैठ सकती हूँ?"

आर्यवीर ने मजबूरी में कहा—

"हाँ..."

रिया कुर्सी पर बैठ गई।

"सान्वी... तुम्हें पता है? कॉलेज में आर्यवीर कितना शर्मीला था।"

सान्वी मुस्कुराकर बोली—

"अभी भी है।"

रिया हँस दी।

"लेकिन मेरे सामने नहीं।"

यह सुनते ही सान्वी की मुस्कान हल्की पड़ गई।

रिया ने एल्बम खोला।

"देखो..."

उसने पहला फोटो सान्वी के सामने रखा।

"ये हमारी पहली ट्रिप की तस्वीर है।"

दूसरा फोटो...

"ये मेरे बर्थडे का है।"

तीसरा फोटो...

"और ये..."

"...जब आर्यवीर ने मुझे पहली बार गुलाब दिया था।"

सान्वी का दिल एक पल के लिए धड़कना भूल गया।

उसने चोरी-छिपे आर्यवीर की तरफ देखा।

आर्यवीर असहज था।

उसने धीरे से कहा—

"रिया... पुरानी बातें रहने दो।"

रिया मासूम बनते हुए बोली—

"अरे! मैं तो बस यादें शेयर कर रही हूँ।"

कुछ देर बाद...

रिया किसी बहाने से वहाँ से चली गई।

कैफ़े में फिर सिर्फ़ आर्यवीर और सान्वी रह गए।

लेकिन अब माहौल पहले जैसा नहीं था।

दोनों चुप थे।

आख़िर सान्वी ने पूछा—

"तुमने कभी बताया नहीं... कि तुम्हारी कोई सीरियस गर्लफ्रेंड थी।"

आर्यवीर ने गहरी साँस ली।

"क्योंकि वो अतीत है।"

"लेकिन वो तुम्हें अभी भी भूल नहीं पाई।"

"और मैं उसे भूल चुका हूँ।"

सान्वी ने धीरे से पूछा—

"सच?"

आर्यवीर उसकी आँखों में देखकर बोला—

"बिल्कुल सच।"

सान्वी ने सिर हिला दिया...

लेकिन उसके मन में हल्की-सी चुभन रह गई।

शाम...

सिंह हाउस में सभी मंदिर जाने की तैयारी कर रहे थे।

दादी ने सान्वी को वही साड़ी पहनाई जो आर्यवीर ने उसके लिए खरीदी थी।

जब सान्वी सीढ़ियों से नीचे उतरी...

पूरा घर कुछ पल के लिए उसे देखता ही रह गया।

दादी की आँखें चमक उठीं।

"नज़र न लगे मेरी बहू को!"

आर्यवीर भी उसे देखता रह गया।

आज पहली बार उसने सान्वी को साड़ी में देखा था।

सान्वी ने मुस्कुराकर पूछा—

"कैसी लग रही हूँ?"

आर्यवीर बिना सोचे बोल पड़ा—

"बहुत... बहुत खूबसूरत।"

दोनों की नज़रें मिलीं।

एक पल के लिए समय जैसे ठहर गया।

तभी...

चिंटू बीच में आ गया।

"भैया... मुँह बंद कर लो। मक्खी चली जाएगी!"

पूरा घर ठहाके मारकर हँस पड़ा।

आर्यवीर शर्म से लाल हो गया।

सान्वी भी हँसी रोक नहीं पाई।

लेकिन...

दूर खड़ी रिया यह सब देख रही थी।

उसने धीरे से अपनी मुट्ठी भींच ली।

"नहीं... ये दोनों एक-दूसरे के इतने करीब नहीं आ सकते।"

उसी समय उसके मोबाइल पर एक मैसेज आया।

"काम हो गया मैम। जिस जानकारी के लिए आपने कहा था, सब मिल गई है।"

रिया के चेहरे पर एक रहस्यमयी मुस्कान फैल गई।

"अब असली खेल शुरू होगा..."

उसे सान्वी के अतीत के बारे में कुछ ऐसा पता चल चुका था...

जो अगर सिंह परिवार के सामने आ गया...

तो सिर्फ़ कॉन्ट्रैक्ट ही नहीं...

आर्यवीर और सान्वी का भरोसा भी टूट सकता था।