Mr. & Ms. Fake
Episode 9 – Love Test Gone Wrong
शाम के लगभग सात बजे...
मॉल से लौटते समय कार में अजीब-सी ख़ामोशी थी।
आर्यवीर ड्राइव कर रहा था, जबकि सान्वी खिड़की से बाहर शहर की चमचमाती रोशनियाँ देख रही थी।
कुछ मिनट पहले तक दोनों हँस रहे थे, लेकिन अब दोनों अपने-अपने ख़यालों में खोए थे।
आख़िरकार आर्यवीर ने ही चुप्पी तोड़ी।
"थैंक यू..."
सान्वी ने उसकी तरफ देखा।
"किसलिए?"
"आज तुमने जिस तरह रिया के सामने बात संभाली... अगर तुम नहीं होती तो हमारी पोल वहीं खुल जाती।"
सान्वी हल्का-सा मुस्कुराई।
"मैं एक्टर हूँ मिस्टर आर्यवीर... ऐसे मौके पर एक्टिंग करना मेरी जॉब है।"
आर्यवीर भी मुस्कुरा दिया।
"फिर भी... शुक्रिया।"
सान्वी ने मज़ाक में कहा,
"थैंक यू बोलकर काम नहीं चलेगा।"
"तो?"
"कॉफी पिलानी पड़ेगी।"
"डन।"
दोनों हँस पड़े।
उन्हें बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि उसी समय...
दूसरी तरफ़ रिया अपनी अगली चाल की तैयारी कर चुकी थी।
सिंह हाउस
रिया अपनी कार लेकर सीधे सिंह हाउस पहुँच गई।
डोरबेल बजते ही नौकर ने दरवाज़ा खोला।
"जी?"
"मैं आर्यवीर की दोस्त हूँ।"
दादी ने उसे अंदर बुला लिया।
"अरे बेटा, आओ... आर्य और सान्वी अभी आते ही होंगे।"
रिया ने मासूमियत से मुस्कुराते हुए कहा,
"असल में मैं एक ज़रूरी बात बताने आई थी..."
दादी का चेहरा गंभीर हो गया।
"क्या हुआ?"
रिया ने झूठी चिंता जताते हुए कहा,
"मुझे शायद नहीं कहना चाहिए... लेकिन मैं आर्यवीर की दोस्त हूँ, इसलिए..."
"सीधे-सीधे बोलो बेटा।"
रिया ने धीरे-धीरे अपना जाल बुनना शुरू किया।
"आज मैंने मॉल में आर्यवीर और सान्वी को देखा था..."
दादी मुस्कुराईं।
"अच्छा! दोनों शॉपिंग कर रहे थे?"
"जी..."
रिया कुछ पल रुकी।
"...लेकिन मुझे ऐसा लगा जैसे दोनों एक-दूसरे को ठीक से जानते ही नहीं।"
दादी की मुस्कान हल्की पड़ गई।
"मतलब?"
"मैंने उनसे कुछ पुरानी बातें पूछीं... लेकिन दोनों अलग-अलग जवाब दे रहे थे।"
दादी कुछ सोच में पड़ गईं।
उसी समय...
बाहर कार आकर रुकी।
आर्यवीर और सान्वी घर पहुँच चुके थे।
जैसे ही दोनों अंदर आए...
उन्हें हॉल का माहौल बदला-बदला लगा।
सबके चेहरे गंभीर थे।
सान्वी धीरे से बोली,
"लगता है... कुछ गड़बड़ है।"
आर्यवीर ने भी सिर हिलाया।
दादी ने गहरी आवाज़ में कहा,
"दोनों बैठो।"
दोनों सोफ़े पर बैठ गए।
रिया एक कोने में मासूम चेहरा बनाकर बैठी थी।
लेकिन उसकी आँखों में जीत की चमक साफ़ दिखाई दे रही थी।
दादी बोलीं,
"रिया कह रही थी कि तुम दोनों एक-दूसरे को ठीक से जानते ही नहीं।"
आर्यवीर तुरंत समझ गया।
"तो ये इसकी नई चाल है..."
उसने मुस्कुराकर कहा,
"दादी... ऐसा कुछ नहीं है।"
रिया बीच में बोली,
"तो फिर एक छोटा-सा टेस्ट हो जाए?"
चिंटू उछल पड़ा।
"वाह! गेम!"
दादी भी बोलीं,
"हाँ... इससे सब साफ़ हो जाएगा।"
आर्यवीर ने मन ही मन सिर पकड़ लिया।
"हे भगवान..."
पहला सवाल
दादी ने पूछा—
"सान्वी की जन्मतिथि क्या है?"
आर्यवीर के चेहरे का रंग उड़ गया।
सान्वी भी घबरा गई।
दोनों एक-दूसरे को देखने लगे।
रिया मुस्कुरा रही थी।
तभी...
चिंटू अचानक बोला,
"भैया! अगर नहीं पता तो गूगल कर लो!"
पूरा हॉल ठहाकों से गूँज उठा।
आर्यवीर को जैसे आइडिया मिल गया।
वह मुस्कुराकर बोला,
"दादी... मैं डेट कभी याद नहीं रखता।"
फिर सान्वी की तरफ देखकर बोला,
"इस बात पर ये मुझसे हमेशा नाराज़ रहती है।"
सान्वी तुरंत एक्टिंग में आ गई।
उसने गुस्से वाला चेहरा बनाया।
"हाँ! तीन महीने पहले भी मेरा बर्थडे भूल गए थे।"
आर्यवीर ने दोनों हाथ जोड़ दिए।
"सॉरी बाबा..."
पूरा परिवार हँस पड़ा।
दादी भी मुस्कुरा दीं।
रिया के चेहरे की मुस्कान गायब हो गई।
दूसरा सवाल
अब आर्यवीर की माँ बोलीं,
"चलो ये बताओ... आर्यवीर को सबसे ज़्यादा किस चीज़ से डर लगता है?"
सान्वी सोच में पड़ गई।
उसे सच में नहीं पता था।
अचानक...
ऊपर से छिपकली दीवार पर दौड़ी।
आर्यवीर ने अनजाने में उसकी तरफ देखा और हल्का-सा पीछे हट गया।
सान्वी ने तुरंत जवाब दिया,
"छिपकली!"
पूरा परिवार हक्का-बक्का रह गया।
कबीर ज़ोर से हँस पड़ा।
"भाई... तेरी इज़्ज़त गई।"
आर्यवीर शर्म से बोला,
"यार..."
दादी हँसते-हँसते बोलीं,
"इतना बड़ा लड़का... और छिपकली से डरता है!"
रिया झुँझला गई।
उसकी दूसरी चाल भी उलटी पड़ चुकी थी।
तीसरा सवाल
रिया ने खुद पूछा,
"आर्यवीर की पहली मुलाक़ात सान्वी से कहाँ हुई थी?"
अब दोनों फँस गए।
क्योंकि पहली बार वे सड़क पर टकराए थे...
लेकिन घरवालों को बताया था कि मुलाक़ात कैफ़े में हुई थी।
दोनों कुछ बोल पाते...
उससे पहले...
चिंटू फिर बोल पड़ा—
"भाभी! सच-सच बताना... कहीं फ़िल्मी स्टाइल में टक्कर तो नहीं हुई थी?"
सान्वी की आँखें चमक उठीं।
उसने हँसते हुए कहा,
"हाँ..."
रिया चौंक गई।
सान्वी आगे बोली,
"पहली बार सड़क पर टक्कर हुई थी।"
आर्यवीर भी तुरंत बोला,
"लेकिन वहीं सिर्फ़ टक्कर हुई थी... पहली ढंग से बात कैफ़े में हुई।"
दादी मुस्कुराईं।
"अच्छा... तो दोनों सही बोल रहे थे।"
रिया ने अपने होंठ भींच लिए।
"ये हर बार कैसे बच जाते हैं?"
इसी बीच...
नौकर मिठाई लेकर आया।
चिंटू ने प्लेट उठाई और भागने लगा।
लेकिन उसका पैर फिसल गया।
पूरी मिठाई सीधा...
रिया की महँगी सफेद ड्रेस पर गिर गई।
"ओह नो!"
रिया चीख पड़ी।
चिंटू डर गया।
"सॉरी दीदी..."
लेकिन अगले ही पल...
सान्वी अपनी हँसी नहीं रोक पाई।
फिर कबीर...
फिर आर्यवीर...
और देखते ही देखते पूरा परिवार हँसने लगा।
रिया का चेहरा गुस्से से लाल हो गया।
उसने पहली बार महसूस किया...
इस घर में सान्वी सिर्फ़ एक मेहमान नहीं रही।
वह धीरे-धीरे इस परिवार का हिस्सा बनती जा रही थी।
और यही बात उसे सबसे ज़्यादा चुभ रही थी।
उसने मन ही मन कसम खाई—
"अब अगली बार मैं ऐसा दाँव खेलूँगी कि इन दोनों के बीच ही गलतफ़हमी पैदा हो जाएगी।"
रिया गुस्से में वहाँ से निकल गई।
लेकिन उसके जाते ही...
दादी ने मुस्कुराकर दोनों की तरफ देखा।
"अब मुझे पूरा विश्वास हो गया है..."
"तुम दोनों एक-दूसरे के लिए ही बने हो।"
आर्यवीर और सान्वी ने एक-दूसरे की तरफ देखा...
और पहली बार...
दोनों की मुस्कान बिल्कुल नकली नहीं थी।