Mr. & Ms. Fake
Episode 8 – The First Trap
अगली सुबह...
सिंह हाउस में नाश्ते की मेज़ पर हमेशा की तरह चहल-पहल थी।
दादी अख़बार पढ़ रही थीं, चिंटू ब्रेड पर जैम की जगह अचार लगाकर खा रहा था और सब उसे देखकर हँस रहे थे।
आर्यवीर जल्दी-जल्दी नाश्ता खत्म करके ऑफिस जाने लगा।
तभी दादी बोलीं,
"आर्य... शाम को सान्वी को लेकर शॉपिंग जाना।"
आर्यवीर रुक गया।
"शॉपिंग?"
"हाँ। अगले हफ्ते मंदिर जाना है। बहू के लिए एक अच्छी-सी साड़ी खरीदनी है।"
"दादी... उसकी पसंद—"
"इसलिए तो तुझे साथ भेज रही हूँ।"
चिंटू तुरंत बोला,
"भैया... पैसे ज़्यादा लेकर जाना। लड़कियाँ 'बस एक ड्रेस' बोलती हैं और पाँच बैग लेकर लौटती हैं।"
पूरा घर हँस पड़ा।
ऑफिस...
रिया अपने केबिन में बैठी थी।
उसके सामने कॉफी थी, लेकिन उसकी नज़र मोबाइल स्क्रीन पर थी।
स्क्रीन पर आर्यवीर और सान्वी की तस्वीर थी।
उसी समय उसकी दोस्त नेहा अंदर आई।
"रिया... तू सच में उस लड़के को वापस पाना चाहती है?"
रिया मुस्कुराई।
"वापस नहीं..."
उसने तस्वीर पर उँगली रखी।
"...उसे किसी और का भी नहीं होने दूँगी।"
"प्लान क्या है?"
रिया ने धीरे से कहा,
"अगर ये दोनों सच में कपल हैं, तो एक छोटा-सा टेस्ट उन्हें पास करना होगा।"
उसकी मुस्कान देखकर नेहा भी समझ गई कि कुछ बड़ा होने वाला है।
शाम...
आर्यवीर और सान्वी एक बड़े मॉल पहुँचे।
जैसे ही दोनों अंदर गए...
सान्वी बच्चों की तरह हर दुकान देखने लगी।
"वाह... ये ड्रेस कितनी सुंदर है!"
"ये जूते भी!"
"ओह... ये बैग!"
आर्यवीर मुस्कुराते हुए उसे देख रहा था।
उसने पहली बार सान्वी को इतना खुलकर खुश देखा था।
अचानक सान्वी रुक गई।
एक महँगी साड़ी उसके सामने टंगी थी।
उसने उसे हाथ से छुआ...
फिर तुरंत हाथ पीछे खींच लिया।
"बहुत महँगी होगी..."
आर्यवीर ने उसकी आँखों की चमक देख ली।
वह बिना कुछ बोले सेल्समैन के पास गया।
"भैया... ये पैक कर दीजिए।"
सान्वी चौंक गई।
"अरे... नहीं!"
"दादी की तरफ़ से गिफ्ट समझ लो।"
"लेकिन—"
"नो आर्ग्युमेंट।"
सान्वी पहली बार बिना कुछ बोले मुस्कुरा दी।
उसी समय...
दूसरी मंज़िल से रिया सब देख रही थी।
उसने तुरंत अपना मोबाइल निकाला।
"अब देखते हैं... ये दोनों कितना एक-दूसरे को जानते हैं।"
वह नीचे आई और जानबूझकर दोनों के सामने आ गई।
"अरे वाह!"
सान्वी ने चौंककर देखा।
"रिया?"
रिया मुस्कुराई।
"क्या संयोग है!"
फिर उसने अचानक कहा,
"चलो... एक छोटा-सा गेम खेलते हैं।"
आर्यवीर समझ गया...
रिया कुछ करने वाली है।
"कैसा गेम?"
रिया बोली,
"बहुत आसान। अगर तुम दोनों सच में कपल हो..."
"...तो एक-दूसरे का मोबाइल अनलॉक करके दिखाओ।"
आर्यवीर और सान्वी एक-दूसरे को देखने लगे।
दोनों के चेहरों पर हल्की घबराहट आ गई।
रिया मुस्कुराई।
"क्या हुआ? डर गए?"
उसी समय...
सान्वी अचानक हँस पड़ी।
"बस इतनी-सी बात?"
उसने अपना मोबाइल आर्यवीर को दे दिया।
आर्यवीर हैरान रह गया।
उसे पासवर्ड ही नहीं पता था।
रिया के चेहरे पर जीत वाली मुस्कान आ गई।
लेकिन अगले ही पल...
सान्वी ज़ोर से बोली,
"अरे यार... पासवर्ड तो मैं हर दूसरे दिन बदल देती हूँ।"
उसने झट से मोबाइल लिया, खुद अनलॉक किया और फिर आर्यवीर के हाथ में दे दिया।
"लो... अब देख लो।"
रिया की पहली चाल नाकाम हो गई।
वह अंदर ही अंदर झुंझला उठी।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
जैसे ही तीनों एस्केलेटर की तरफ बढ़े...
चिंटू का वीडियो कॉल आ गया।
आर्यवीर ने कॉल उठाया।
उधर से चिंटू चिल्लाया—
"भैया... दादी पूछ रही हैं, भाभी को लाल रंग पसंद है या नीला?"
आर्यवीर कुछ बोलता, उससे पहले सान्वी ने फोन पकड़ लिया।
"दादी... मुझे दोनों पसंद हैं।"
दादी हँस पड़ीं।
"अच्छा... तो दोनों ही खरीद लेना।"
सान्वी मुस्कुराने लगी।
रिया दूर खड़ी सब देख रही थी।
उसने महसूस किया...
ये दोनों भले नकली रिश्ता निभा रहे हों या असली...
लेकिन हर मुश्किल में एक-दूसरे का साथ देना सीख चुके हैं।
और यही बात उसे सबसे ज़्यादा परेशान कर रही थी।
उसने मन ही मन कहा—
"अब छोटी चालों से काम नहीं चलेगा... अगली बार ऐसा वार करूँगी कि ये दोनों खुद एक-दूसरे पर शक करने लगेंगे।"
दूसरी तरफ...
आर्यवीर और सान्वी को बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि उनकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा इम्तिहान अब शुरू होने वाला है।