Mr. Ms. Fake - एपिसोड 11 kajal jha द्वारा हास्य कथाएं में हिंदी पीडीएफ

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Mr. Ms. Fake - एपिसोड 11

Mr. & Ms. Fake

Episode 11 – Trust Over Lies

सुबह के दस बजे...

सिंह हाउस में मंदिर जाने की तैयारियाँ चल रही थीं।

दादी पूजा की थाली सजा रही थीं।

आर्यवीर सफेद कुर्ते में तैयार होकर नीचे आया।

तभी उसकी नज़र सीढ़ियों की तरफ गई।

लाल साड़ी पहने सान्वी धीरे-धीरे नीचे उतर रही थी।

कुछ पल के लिए पूरा घर शांत हो गया।

दादी ने मुस्कुराकर कहा,

"अरे... मेरी बहू को किसी की नज़र न लगे।"

आर्यवीर बिना पलक झपकाए सान्वी को देख रहा था।

सान्वी ने मुस्कुराकर पूछा,

"क्या हुआ?"

आर्यवीर हड़बड़ा गया।

"क... कुछ नहीं।"

चिंटू तुरंत बोला,

"भैया को तो प्यार वाला वायरस हो गया है!"

पूरा घर हँसी से गूँज उठा।

आर्यवीर ने शर्माते हुए चिंटू के सिर पर हल्की-सी चपत लगा दी।

मंदिर

पूजा शुरू हो चुकी थी।

पंडित जी ने सभी को आरती के लिए बुलाया।

आर्यवीर और सान्वी साथ खड़े थे।

दादी ने दोनों के हाथ में एक ही आरती की थाली दे दी।

"पति-पत्नी साथ में आरती करेंगे तो शुभ होता है।"

दोनों एक-दूसरे को देखने लगे।

सान्वी ने धीरे से कहा,

"ये एक्टिंग अब बहुत महँगी पड़ रही है।"

आर्यवीर मुस्कुरा दिया।

"अब पीछे हटने का रास्ता भी नहीं है।"

दोनों ने साथ में आरती की।

दूर खड़ी रिया गुस्से से उन्हें देख रही थी।

रिया की नई चाल

पूजा खत्म होते ही रिया एक महिला को लेकर दादी के पास पहुँची।

"दादी जी... ये मिसेज़ कपूर हैं।"

महिला ने सान्वी को देखते ही कहा,

"अरे... मैं इस लड़की को जानती हूँ!"

सान्वी चौंक गई।

रिया मुस्कुरा रही थी।

"सच?"

महिला बोली,

"हाँ। कुछ महीने पहले ये एक होटल में किसी आदमी के साथ पत्नी बनकर रह रही थी।"

पूरा माहौल एकदम शांत हो गया।

दादी का चेहरा उतर गया।

आर्यवीर ने हैरानी से सान्वी की तरफ देखा।

सान्वी के चेहरे का रंग उड़ चुका था।

दादी ने धीरे से पूछा,

"बेटा... ये क्या कह रही हैं?"

सान्वी कुछ बोल ही नहीं पाई।

रिया ने तुरंत बात आगे बढ़ाई।

"मैं तो पहले ही कह रही थी कि इस लड़की के बारे में हमें कुछ नहीं पता।"

महिला ने फिर कहा,

"मैंने अपनी आँखों से देखा था।"

सिंह परिवार के सभी लोग सान्वी को देखने लगे।

उसकी आँखों में आँसू आ गए।

उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह कैसे समझाए।

तभी...

आर्यवीर आगे बढ़ा।

उसने शांत लेकिन मज़बूत आवाज़ में कहा,

"बस!"

सब उसकी तरफ देखने लगे।

"पहले पूरी बात सुनी जाएगी।"

रिया बोली,

"आर्य... सबूत सामने है।"

आर्यवीर ने उसकी तरफ देखा।

"सिर्फ़ किसी के कह देने से कोई गुनहगार नहीं हो जाता।"

फिर उसने सान्वी की तरफ देखा।

"तुम बताओ... सच क्या है?"

सान्वी की आँखों से आँसू बह निकले।

उसने काँपती आवाज़ में कहा,

"हाँ... मैं उस होटल में गई थी।"

दादी का दिल बैठ गया।

रिया के चेहरे पर जीत की मुस्कान आ गई।

लेकिन अगले ही पल...

सान्वी बोली,

"क्योंकि मैं थिएटर आर्टिस्ट हूँ।"

सब चुप हो गए।

"एक वेब सीरीज़ की शूटिंग थी। उसमें मुझे एक शादीशुदा महिला का किरदार निभाना था।"

उसने अपने बैग से एक पुराना आईडी कार्ड और शूटिंग की कुछ तस्वीरें निकालकर दिखाईं।

"ये उसी प्रोजेक्ट के फोटो हैं।"

महिला ने तस्वीरें देखकर माथा पकड़ लिया।

"अरे... अब याद आया। सच में वहाँ शूटिंग चल रही थी। मुझे लगा था ये असली पति-पत्नी हैं।"

रिया के चेहरे की मुस्कान गायब हो गई।

दादी ने राहत की साँस ली।

"हे भगवान... मैं तो डर ही गई थी।"

सान्वी ने सिर झुका लिया।

"मुझे माफ़ कर दीजिए... मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरा काम एक दिन मेरे खिलाफ़ इस्तेमाल होगा।"

दादी आगे बढ़ीं और उसके सिर पर हाथ रखा।

"गलती तुम्हारी नहीं है, बेटा।"

रिया गुस्से में वहाँ से जाने लगी।

तभी आर्यवीर ने आवाज़ दी,

"रिया!"

वह रुक गई।

आर्यवीर पहली बार उसके सामने सख़्त लहज़े में बोला,

"अगर किसी के अतीत के बारे में कुछ जानना हो, तो पहले सच पता कर लिया करो।"

"झूठ और अधूरी जानकारी से किसी की इज़्ज़त पर सवाल उठाना सही नहीं है।"

रिया के पास कोई जवाब नहीं था।

वह चुपचाप वहाँ से चली गई।

मंदिर के बाहर

सान्वी सीढ़ियों पर अकेली बैठी थी।

उसकी आँखें अब भी नम थीं।

आर्यवीर उसके पास आकर बैठ गया।

कुछ देर दोनों चुप रहे।

फिर आर्यवीर ने कहा,

"मुझे तुम पर भरोसा था।"

सान्वी ने उसकी तरफ देखा।

"अगर तुम्हें भी मुझ पर शक हो जाता... तो शायद मैं खुद को कभी माफ़ नहीं कर पाती।"

आर्यवीर हल्के से मुस्कुराया।

"रिश्ता चाहे नकली हो..."

"...लेकिन भरोसा नकली नहीं होना चाहिए।"

सान्वी की आँखों में फिर आँसू आ गए।

लेकिन इस बार ये आँसू दुख के नहीं...

सुकून के थे।

पहली बार उसे महसूस हुआ कि इस दुनिया में कोई ऐसा भी है...

जो बिना सबूत, बिना सवाल...

उसके साथ खड़ा हो सकता है।

दूर खड़ी दादी दोनों को देख रही थीं।

उन्होंने धीरे से भगवान की मूर्ति की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए कहा,

"लगता है... इन दोनों का रिश्ता ऊपर वाला खुद लिख रहा है।"

लेकिन उन्हें क्या पता था...

रिया इतनी आसानी से हार मानने वालों में से नहीं थी।

उसने अपनी कार में बैठते ही किसी को फोन लगाया।

"अब प्लान-बी शुरू करते हैं।"

"इस बार सिर्फ़ सान्वी नहीं..."

"...आर्यवीर भी टूटेगा।"

उसके चेहरे पर एक खतरनाक मुस्कान फैल गई।