Mr. Ms. Fake - एपिसोड 46 kajal jha द्वारा हास्य कथाएं में हिंदी पीडीएफ

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Mr. Ms. Fake - एपिसोड 46

एपिसोड 46: The Founder — असली खेल
मिल की सारी लाइटें अचानक बंद हो चुकी थीं।
चारों तरफ सिर्फ अंधेरा था।
साँवी ने घबराकर आर्यवीर का हाथ पकड़ लिया।
“आर्यवीर…”
“मैं यहीं हूँ।”
आर्यवीर की आवाज़ शांत थी, लेकिन उसकी पकड़ साँवी के हाथ पर और मजबूत हो गई थी।
कुछ सेकंड तक किसी को कुछ समझ नहीं आया।
फिर—
टक!
मिल की पुरानी दीवार पर लगी स्क्रीन दोबारा जल उठी।
स्क्रीन पर वही शब्द चमक रहे थे—
THE FOUNDER
और उसके नीचे एक लाइन थी—
“Project S-21 was never about the sisters.”
साँवी ने स्क्रीन को देखते हुए धीरे से पढ़ा,
“Project S-21… कभी हमारे बारे में था ही नहीं?”
आर्यवीर की नजरें स्क्रीन पर जम गईं।
“तो फिर किसके बारे में था?”
तभी अगली लाइन दिखाई दी—
“It was about the person who would control them.”
आरोही के चेहरे का रंग उड़ गया।
“कंट्रोल… हमें?”
नैना ने अपने हाथ में पकड़ी नागमुद्रा रिंग को देखा।
अचानक रिंग हल्की-सी गर्म होने लगी।
“आह!”
नैना ने तुरंत हाथ पीछे खींच लिया।
साँवी उसके पास आई।
“नैना, क्या हुआ?”
“ये रिंग…”
नैना ने रिंग को देखा।
उस पर बनी नाग की आकृति पहले से ज्यादा चमक रही थी।
तभी स्क्रीन पर तीन छोटे निशान दिखाई दिए।
एक साँवी के नाम के सामने।
दूसरा आरोही के सामने।
तीसरा नैना के सामने।
और तीनों निशानों के नीचे एक चौथा निशान था।
जिसे देखकर राघव अचानक चौंक गया।
“ये…”
राजवीर ने उसकी तरफ देखा।
“क्या हुआ?”
राघव ने स्क्रीन के करीब जाकर उस निशान को देखा।
“मैंने इसे पहले देखा है।”
आर्यवीर ने तुरंत पूछा,
“कहाँ?”
राघव कुछ पल चुप रहा।
फिर उसने धीमी आवाज़ में कहा,
“विक्रम के पुराने ऑफिस में।”
साँवी का दिल तेजी से धड़कने लगा।
“तो इसका मतलब विक्रम ही Founder था?”
“नहीं।”
राघव का जवाब तुरंत आया।
“विक्रम Founder नहीं था।”
सबकी आँखें उसकी तरफ उठ गईं।
“वो सिर्फ एक मोहरा था।”
कमरे में सन्नाटा छा गया।
आरोही ने घबराकर पूछा,
“तो फिर असली Founder कौन है?”
राघव ने सिर उठाकर स्क्रीन की तरफ देखा।
“यही तो हमें पता करना है।”
अचानक स्क्रीन पर एक वीडियो चल पड़ा।
वीडियो में एक अंधेरा कमरा था।
एक आदमी कुर्सी पर बैठा था।
चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था।
सिर्फ उसकी आवाज सुनाई दे रही थी।
भारी और शांत आवाज।
“तीनों लड़कियाँ अब एक साथ हैं।”
साँवी के शरीर में सिहरन दौड़ गई।
आवाज आगे बोली—
“जितना समय मैंने इंतजार किया है… उतना शायद किसी ने नहीं किया होगा।”
आर्यवीर ने चारों तरफ देखा।
“ये वीडियो अभी रिकॉर्ड नहीं हुआ है।”
राघव ने तुरंत कहा,
“नहीं… ये live transmission है।”
“क्या?”
राघव ने स्क्रीन के नीचे चमकती लाल लाइट की तरफ इशारा किया।
“कोई हमें अभी देख रहा है।”
साँवी ने घबराकर चारों तरफ देखा।
“कहाँ से?”
आर्यवीर ने तुरंत उसे अपने पीछे कर लिया।
“जो भी है, उसे सामने आने दो।”
स्क्रीन पर बैठे आदमी ने जैसे आर्यवीर की बात सुन ली हो।
उसकी हल्की-सी हँसी सुनाई दी।
“आर्यवीर सिंह…”
आर्यवीर की आँखें सिकुड़ गईं।
“उसे मेरा नाम कैसे पता?”
आवाज फिर आई।
“तुम्हें लगता है तुम साँवी की रक्षा कर रहे हो?”
कुछ सेकंड का सन्नाटा।
“असल में… तुम वही कर रहे हो जो मैं चाहता हूँ।”
साँवी ने आर्यवीर की तरफ देखा।
“इसका क्या मतलब है?”
आर्यवीर कुछ बोल पाता, उससे पहले स्क्रीन पर अगली लाइन दिखाई दी—
THE PROTECTOR
और उसके नीचे—
ARYVEER SINGH
फिर—
THE KEY
और उसके नीचे—
SAANVI
आर्यवीर के चेहरे पर पहली बार चिंता साफ दिखाई दी।
“Key?”
साँवी ने धीमे से कहा,
“मैं… Key हूँ?”
तभी तीसरी लाइन आई—
THE THREE SISTERS ARE THE DOOR.
आरोही पीछे हट गई।
“हम… दरवाजा हैं?”
नैना की आँखें फैल गईं।
“और अगर हम दरवाजा हैं…”
राघव ने बात पूरी की।
“तो कोई उस दरवाजे के पीछे मौजूद चीज तक पहुँचना चाहता है।”
राजवीर ने गहरी सांस ली।
“लेकिन आखिर वो चाहता क्या है?”
स्क्रीन पर बैठे आदमी ने जैसे इसी सवाल का इंतजार किया था।
“तुम लोग बहुत देर से गलत सवाल पूछ रहे हो।”
फिर उसने कहा—
“तुम्हें ये पूछना चाहिए कि… दरवाजे के पीछे क्या है?”
स्क्रीन अचानक बंद हो गई।
पूरा कमरा फिर अंधेरे में डूब गया।
---
कुछ मिनट बाद मिल की लाइटें वापस आईं।
लेकिन अब किसी के चेहरे पर पहले वाली राहत नहीं थी।
साँवी चुपचाप एक कोने में खड़ी थी।
आर्यवीर उसके पास आया।
“क्या सोच रही हो?”
साँवी ने उसकी तरफ देखा।
“अगर मैं सच में इस पूरे Project S-21 की Key हूँ तो?”
आर्यवीर ने कुछ नहीं कहा।
“अगर मेरी वजह से तुम सब खतरे में हो?”
“साँवी।”
“अगर मैं तुमसे दूर हो जाऊँ तो शायद…”
आर्यवीर ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“बस।”
साँवी चुप हो गई।
आर्यवीर उसकी आँखों में देखते हुए बोला,
“तुम्हें हर बार खुद को समस्या समझना बंद करना होगा।”
“लेकिन…”
“कोई तुम्हें इस्तेमाल करना चाहता है, इसका मतलब ये नहीं कि गलती तुम्हारी है।”
साँवी की आँखें भर आईं।
“तुम्हें डर नहीं लगता?”
आर्यवीर कुछ पल उसे देखता रहा।
फिर हल्की मुस्कान उसके चेहरे पर आई।
“लगता है।”
साँवी हैरान हुई।
“सच?”
“बहुत।”
“फिर तुम इतने शांत कैसे रहते हो?”
आर्यवीर ने उसका हाथ और कसकर पकड़ लिया।
“क्योंकि जब तुम मेरे साथ होती हो… तो डरने का टाइम ही नहीं मिलता।”
साँवी हल्का-सा मुस्कुराई।
“तुम्हें हर बात में dialogue मारना जरूरी है?”
आर्यवीर हँस पड़ा।
“और तुम्हें हर serious moment में मजाक करना जरूरी है?”
“हाँ।”
“क्यों?”
“क्योंकि अगर मैं मजाक नहीं करूँगी ना…”
उसकी मुस्कान अचानक गायब हो गई।
“…तो शायद मैं डर जाऊँगी।”
आर्यवीर कुछ पल उसे देखता रहा।
फिर उसने धीरे से कहा,
“तो मजाक करती रहो।”
साँवी ने उसकी तरफ देखा।
“क्यों?”
“क्योंकि तुम्हारी ये हँसी…”
वह थोड़ा रुका।
“…मुझे अच्छी लगती है।”
साँवी का दिल एक पल के लिए रुक-सा गया।
दोनों की नजरें मिलीं।
कुछ सेकंड तक दोनों कुछ नहीं बोले।
तभी पीछे से कबीर की आवाज आई—
“वाह! Mystery solve हो या ना हो, romance की investigation तो full speed पर चल रही है।”
दोनों एक साथ पलटे।
कबीर हाथ में चाय का कप लिए खड़ा था।
चिंटू उसके पीछे खड़ा था।
“मैंने कहा था ना,” चिंटू बोला, “भैया और साँवी दीदी को अकेला छोड़ना खतरनाक है।”
आर्यवीर ने घूरकर देखा।
“तुम दोनों यहाँ कब आए?”
कबीर ने चाय की चुस्की ली।
“जब से तुम्हारी love story ने thriller का रूप लिया है, तब से हम भी supporting cast हैं।”
साँवी हँस पड़ी।
आर्यवीर ने सिर पकड़ लिया।
“हे भगवान!”
कबीर ने तुरंत कहा,
“भगवान को मत बुलाओ। पहले Founder को ढूँढो।”
साँवी की हँसी फिर लौट आई।
और आर्यवीर उसे देखकर बस मुस्कुरा दिया।
लेकिन उसी समय—
मिल के बाहर एक काली कार आकर रुकी।
कार के अंदर एक आदमी बैठा था।
उसके हाथ में वही नागमुद्रा बनी रिंग थी।
उसने फोन कान से लगाया।
“वे तीनों एक साथ हैं।”
कुछ सेकंड बाद दूसरी तरफ से आवाज आई—
“और आर्यवीर?”
आदमी ने स्क्रीन की तरफ देखा।
“वो भी उनके साथ है।”
दूसरी तरफ कुछ पल खामोशी रही।
फिर आवाज आई—
“उसे अभी मत छूना।”
“लेकिन क्यों?”
“क्योंकि Founder ने उसके लिए भी एक जगह तय की है।”
आदमी चुप हो गया।
“और साँवी?”
आवाज धीमी हो गई।
“साँवी को जिंदा चाहिए।”
“और बाकी दोनों?”
“उन्हें भी।”
फिर एक आखिरी आदेश आया—
“लेकिन अगर तीनों बहनें अपनी शक्ति पहचान गईं…”
कुछ पल की खामोशी।
“…तो उन्हें रोकने की कोशिश मत करना।”
“क्यों?”
दूसरी तरफ से सिर्फ एक जवाब आया—
“क्योंकि तब Project S-21 खत्म नहीं होगा… शुरू होगा।”
फोन कट गया।
कार धीरे-धीरे अंधेरे में गायब हो गई।
---
उधर मिल के अंदर राघव को एक पुरानी फाइल मिली।
उसने फाइल खोली।
पहले पन्ने पर सिर्फ एक तारीख थी।
21 YEARS AGO
दूसरे पन्ने पर एक फोटो लगी थी।
मीरा।
राजवीर।
अनन्या।
और उनके बीच तीन नवजात बच्चियाँ।
साँवी, आरोही और नैना।
लेकिन फोटो के पीछे किसी ने हाथ से कुछ लिखा था।
राघव ने उसे पढ़ते ही अपनी सांस रोक ली।
“ये…”
राजवीर उसके पास आया।
“क्या लिखा है?”
राघव ने धीरे से फोटो पलटी।
पीछे लिखा था—
“तीनों बच्चियाँ Project S-21 की शुरुआत नहीं हैं।”
उसके नीचे एक और लाइन थी—
“वे सिर्फ उस इंसान तक पहुँचने का रास्ता हैं… जिसे हमने 21 साल पहले छुपाया था।”
राजवीर का चेहरा सफेद पड़ गया।
“किस इंसान को?”
राघव ने कोई जवाब नहीं दिया।
क्योंकि उसी पल—
नैना की नागमुद्रा रिंग फिर चमक उठी।
साँवी के कंधे पर हल्की सुनहरी रोशनी दिखाई दी।
आरोही की आँखों में भी वही चमक उभरी।
तीनों बहनें एक-दूसरे की तरफ देखने लगीं।
और मिल की दीवार पर अचानक एक छुपा हुआ दरवाजा दिखाई देने लगा।
उस पर केवल एक शब्द लिखा था—
S-21
आर्यवीर ने साँवी का हाथ पकड़ लिया।
“अब लगता है…”
वह दरवाजे की तरफ देखते हुए बोला,
“…हमारी असली कहानी शुरू होने वाली है।”
साँवी ने उसकी तरफ देखा।
“और अगर दरवाजे के पीछे Founder हुआ?”
आर्यवीर ने हल्की मुस्कान के साथ कहा—
“तो इस बार वो भागेगा।”
लेकिन दरवाजे के पीछे से अचानक एक धीमी आवाज आई—
“नहीं, आर्यवीर…”
सबके कदम रुक गए।
आवाज फिर आई—
“इस बार तुम मेरे पास आओगे।”
और दरवाजा अपने आप खुल गया।
अंदर घना अंधेरा था।
और उस अंधेरे में…
एक आदमी खड़ा था।
उसका चेहरा अभी भी दिखाई नहीं दे रहा था।
लेकिन उसकी उंगली में वही नागमुद्रा की रिंग थी।
जारी रहेगा…