Mr. Ms. Fake - एपिसोड 41 kajal jha द्वारा हास्य कथाएं में हिंदी पीडीएफ

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Mr. Ms. Fake - एपिसोड 41

Mr. & Ms. Fake

Episode 41 – The Secret Behind Three Marks

“मैंने ही Project S-21 शुरू किया था।”

विक्रम मल्होत्रा के ये शब्द हवेली के अंदर मौजूद हर इंसान के लिए किसी धमाके से कम नहीं थे।

Saanvi की नजर खिड़की के बाहर खड़े उस बूढ़े आदमी पर थी।

वह आदमी…

जिसे देखकर राजवीर के चेहरे से सारी रंगत गायब हो गई थी।

जिसे रुद्र अपना पिता कह रहा था।

और जो अब दावा कर रहा था कि तीनों बहनों की जिंदगी बर्बाद करने वाली पूरी कहानी उसी ने शुरू की थी।

Saanvi ने धीरे से पूछा—

“आपने ये सब क्यों किया?”

विक्रम ने मुस्कुराकर कहा—

“क्योंकि तुम तीनों साधारण बच्चियाँ नहीं थीं।”

Aarohi ने गुस्से से कहा—

“हम कोई प्रयोग नहीं हैं।”

विक्रम ने उसकी तरफ देखा।

“तुम्हें अभी बहुत कुछ समझना बाकी है।”

Naina आगे बढ़ी।

“हमारे साथ जो हुआ, उसका जवाब देना पड़ेगा।”

विक्रम हँसा।

“तुम्हें लगता है तुम तीनों मुझे रोक सकती हो?”

तभी Aryveer आगे आया।

“तीन नहीं।”

विक्रम की नजर उस पर गई।

Aryveer ने Saanvi का हाथ पकड़ लिया।

“चार।”

Saanvi ने उसे हैरानी से देखा।

Aryveer ने धीमे से कहा—

“मैं भी हूँ।”

Aarohi ने धीरे से मुस्कुराते हुए कहा—

“वाह।”

Saanvi ने उसे घूरा।

“क्या?”

“कुछ नहीं।”

Aryveer ने पूछा—

“क्या हुआ?”

Aarohi ने मासूमियत से कहा—

“कुछ नहीं जीजू।”

Saanvi का चेहरा तुरंत लाल हो गया।

“जीजू?”

Aryveer के चेहरे पर मुस्कान आ गई।

“मुझे पसंद आया।”

“तुम दोनों चुप रहो!”

Saanvi ने झुंझलाकर कहा।

तनाव के बीच पहली बार हल्की-सी हँसी फैल गई।

लेकिन विक्रम का चेहरा बिल्कुल गंभीर था।

“मजाक कर लो।”

“कुछ देर बाद शायद ये मौका न मिले।”

---

तीन निशानों का रहस्य

रुद्र ने तुरंत तीनों बहनों को पीछे किया।

“विक्रम को अंदर आने मत देना।”

राजवीर ने पूछा—

“तुम क्या करने वाले हो?”

रुद्र ने जेब से वही तीन धातु की प्लेटें निकालीं।

“इनका इस्तेमाल करने का वक्त आ गया है।”

Saanvi ने अपनी प्लेट हाथ में ली।

उस पर बना निशान हल्की रोशनी देने लगा।

Aarohi की प्लेट भी चमक उठी।

Naina की प्लेट भी।

तीनों बहनों ने एक-दूसरे को देखा।

Aryveer ने कहा—

“ये पहली बार हो रहा है?”

रुद्र ने सिर हिलाया।

“हाँ।”

“इसका मतलब?”

“मतलब तीनों पहली बार एक साथ हैं।”

तीनों प्लेटों को एक साथ रखते ही कमरे के बीचोंबीच जमीन पर एक गोल निशान उभर आया।

धम्म!

फर्श हल्का-सा काँप गया।

Saanvi पीछे हट गई।

“ये क्या है?”

रुद्र ने कहा—

“दरवाजा।”

“कहाँ जाता है?”

“तुम्हारी माँ के पास।”

Saanvi की आँखें भर आईं।

“माँ…?”

“उसने अपने मरने से पहले इस हवेली में एक जगह छुपाई थी।”

राजवीर ने तुरंत कहा—

“मैंने कभी नहीं देखा।”

रुद्र बोला—

“क्योंकि ये सिर्फ तुम्हारी बेटियाँ खोल सकती थीं।”

Aryveer ने जमीन की तरफ देखा।

“तो खोलिए।”

रुद्र ने सिर हिलाया।

“इसे सिर्फ तीनों बहनें खोलेंगी।”

तीनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा।

फिर Saanvi ने अपना हाथ उस निशान पर रखा।

Aarohi ने भी।

Naina ने कुछ पल हिचकिचाने के बाद अपना हाथ रख दिया।

अचानक…

तीनों निशान एक साथ चमक उठे।

पूरा कमरा सफेद रोशनी से भर गया।

Saanvi ने आँखें बंद कर लीं।

उसे किसी महिला की आवाज सुनाई दी।

“अगर मेरी बेटियाँ कभी एक साथ ये दरवाजा खोलें…”

Saanvi की आँखें खुल गईं।

“माँ!”

आवाज फिर आई—

“तो इसका मतलब है कि सच सामने आने का वक्त आ गया है।”

Saanvi रोने लगी।

“माँ…”

आवाज आगे बोली—

“तुम्हें सबसे पहले ये जानना होगा कि मैंने तुम्हें अलग क्यों किया।”

फिर अचानक रोशनी गायब हो गई।

फर्श पर एक पुराना लोहे का संदूक दिखाई दिया।

Saanvi उसके पास गई।

उसने ढक्कन उठाया।

अंदर कुछ तस्वीरें थीं।

कुछ कागजात।

एक पुराना लॉकेट।

और एक छोटी-सी डायरी।

Saanvi ने डायरी उठाई।

पहले पन्ने पर लिखा था—

“मेरी तीन बेटियों के नाम…”

उसकी आँखें नम हो गईं।

---

माँ की डायरी

Saanvi ने पहला पन्ना खोला।

“अगर तुम ये पढ़ रही हो, तो शायद मैं तुम्हारे पास नहीं हूँ।”

उसके हाथ काँपने लगे।

Aryveer उसके पास खड़ा हो गया।

Saanvi पढ़ती गई।

“मैंने तुम्हें अलग किया क्योंकि कुछ लोग तुम्हें ढूँढ रहे थे। लेकिन मेरी सबसे बड़ी गलती ये थी कि मैंने सोचा था कि तुम तीनों अलग रहकर सुरक्षित रहोगी।”

अगले पन्ने पर लिखा था—

“तुम्हारे पिता राजवीर तुम्हें बचाना चाहते थे। Aman ने तुम्हें छुपाने में मेरी मदद की। लेकिन मैं नहीं जानती थी कि मेरे अपने परिवार में से कोई हमें धोखा दे रहा है।”

Saanvi ने पढ़ना रोक दिया।

उसने राजवीर की तरफ देखा।

“अपने परिवार में से?”

राजवीर ने सिर झुका लिया।

रुद्र की आँखें अचानक कठोर हो गईं।

Saanvi ने अगला पन्ना खोला।

“जिस व्यक्ति पर मैंने सबसे ज्यादा भरोसा किया…”

आगे की लाइन स्याही से काट दी गई थी।

Saanvi ने पन्ना पलटा।

अगले पन्ने पर सिर्फ एक नाम था—

R.

Aryveer ने पूछा—

“R?”

रुद्र ने डायरी देखते ही कहा—

“ये मेरा नाम नहीं है।”

Saanvi ने उसकी तरफ देखा।

“लेकिन R से…”

रुद्र बोला—

“इस परिवार में R से सिर्फ मैं नहीं हूँ।”

राजवीर ने धीरे से कहा—

“राघव।”

Aarohi ने पूछा—

“कौन राघव?”

राजवीर चुप हो गया।

रुद्र ने कहा—

“हमारा तीसरा भाई।”

Saanvi ने हैरानी से पूछा—

“तीसरा?”

“हाँ।”

“तो मल्होत्रा परिवार में तीन भाई थे?”

रुद्र ने कहा—

“राजवीर, मैं और राघव।”

Saanvi ने डायरी को देखा।

“और ये R…”

“राघव हो सकता है।”

लेकिन तभी बाहर से जोरदार आवाज आई।

धड़ाम!

विक्रम ने हवेली का मुख्य दरवाजा तोड़ दिया था।

उसके आदमी अंदर घुसने लगे।

Aryveer ने Saanvi का हाथ पकड़ लिया।

“हमें निकलना होगा।”

Saanvi ने डायरी अपने बैग में रख ली।

Aman ने कहा—

“पीछे का रास्ता।”

सब लोग तेजी से आगे बढ़े।

लेकिन Naina वहीं खड़ी रही।

Saanvi ने उसका हाथ पकड़ लिया।

“चलो!”

Naina ने कहा—

“मैं नहीं जाऊँगी।”

“क्या?”

“मुझे पता करना है कि विक्रम क्या चाहता है।”

Saanvi ने गुस्से से कहा—

“तुम अकेली नहीं जाओगी।”

Naina ने हल्की मुस्कान दी।

“यही तो फर्क है।”

“किस चीज़ का?”

“पहले मैं अकेली थी।”

उसने Saanvi का हाथ पकड़ लिया।

“अब मेरी दो बहनें हैं।”

Aarohi ने तुरंत दोनों का हाथ पकड़ लिया।

“तो फिर साथ चलेंगे।”

Aryveer ने कहा—

“अब ये family meeting बाद में करना।”

Saanvi ने उसे घूरा।

“तुम्हें हर वक्त मजाक करना जरूरी है?”

Aryveer ने कहा—

“नहीं।”

“फिर?”

“तुम जब गुस्सा करती हो तो बहुत cute लगती हो।”

Saanvi का चेहरा लाल हो गया।

“तुम…”

Aarohi हँस पड़ी।

“जीजू, अभी मौका सही नहीं है।”

Aryveer ने कहा—

“तुम फिर जीजू बोल रही हो?”

Naina पहली बार खुलकर हँसी।

“मुझे भी पसंद आया।”

Saanvi ने माथे पर हाथ रख लिया।

“भगवान मुझे इन तीनों से बचाए।”

Aryveer मुस्कुराया।

“भगवान ने तुम्हें मुझसे बचाने की कोशिश की थी।”

“लेकिन?”

“लेकिन तुमने मुझे खुद चुन लिया।”

Saanvi कुछ पल उसे देखती रही।

उसकी आँखों में इस बार गुस्सा नहीं था।

कुछ और था।

कुछ ऐसा जिसे दोनों लंबे समय से नाम देने से बच रहे थे।

---

अचानक हमला

पीछे के रास्ते से निकलते ही एक गोली दीवार से टकराई।

धाँय!

Aman ने सबको नीचे झुकाया।

“भागो!”

सभी तेजी से जंगल की तरफ भागे।

लेकिन अचानक Naina का पैर फिसल गया।

वह गिरने ही वाली थी कि Aryveer ने उसे पकड़ लिया।

Saanvi ने तुरंत पूछा—

“तुम ठीक हो?”

Naina ने सिर हिलाया।

“हाँ।”

लेकिन उसकी नजर पीछे किसी चीज़ पर टिक गई।

“वो…”

सबने पीछे देखा।

विक्रम दूर खड़ा था।

उसने गोली नहीं चलाई।

वह सिर्फ मुस्कुरा रहा था।

राजवीर ने कहा—

“ये हमला नहीं कर रहा।”

रुद्र बोला—

“क्योंकि इसे पता है कि हमें कहाँ जाना है।”

Aryveer ने पूछा—

“कहाँ?”

रुद्र ने सामने पहाड़ी की तरफ इशारा किया।

“Project S-21 की असली लैब।”

Saanvi चौंक गई।

“वो कहाँ है?”

रुद्र ने कहा—

“यहीं।”

“इस जंगल में।”

Saanvi ने पूछा—

“और वहाँ क्या है?”

रुद्र ने गंभीर आवाज़ में कहा—

“तुम्हारी माँ की आखिरी रिकॉर्डिंग।”

“और…”

वह कुछ पल रुका।

“उस रिकॉर्डिंग में उस इंसान का नाम है जिसने तुम्हारी माँ की मौत की साजिश रची थी।”

Saanvi की आँखें फैल गईं।

“कौन?”

रुद्र ने कहा—

“हमें वहाँ पहुँचकर पता चलेगा।”

लेकिन तभी पीछे से विक्रम की आवाज आई—

“तुम्हें वहाँ जाने की जरूरत नहीं है।”

सभी पलटे।

विक्रम उनके सामने खड़ा था।

उसके चेहरे पर मुस्कान थी।

“क्योंकि जिस सच को तुम ढूँढ रहे हो…”

उसने Saanvi की तरफ देखा।

“वो सच मैं तुम्हें यहीं बता सकता हूँ।”

Saanvi ने पूछा—

“क्या?”

विक्रम धीरे-धीरे उसके करीब आया।

“तुम्हारी माँ की मौत के पीछे…”

उसने रुककर कहा—

“राजवीर नहीं… Aman था।”

Saanvi की आँखें फैल गईं।

Aman का चेहरा सफेद पड़ गया।

Aryveer ने तुरंत Saanvi को अपने पीछे कर लिया।

“ये झूठ है।”

विक्रम हँसा।

“तो फिर Aman से पूछो।”

Saanvi ने धीरे-धीरे Aman की तरफ देखा।

उसकी आँखों में सवाल था।

“अमन पापा…”

“क्या आपने माँ को मारा था?”

Aman की आँखों से आँसू निकल आए।

वह कुछ बोल नहीं पाया।

और Saanvi के लिए…

उसकी ये खामोशी ही सबसे बड़ा जवाब बन गई।

क्रमशः...