Mr. & Ms. Fake
Episode 40 – The Man Who Never Died
“Hello, Rajveer.”
हवेली के पुराने हॉल में उस आदमी की आवाज़ गूँजी।
राजवीर जैसे अपनी जगह जम गया था।
उसकी आँखें सामने खड़े आदमी पर टिकी थीं।
चेहरा उम्र से बदल चुका था।
बालों में सफेदी आ चुकी थी।
चेहरे पर एक गहरा निशान था।
लेकिन आँखें…
वही थीं।
राजवीर के चेहरे पर डर उतर आया।
“तुम…”
उसके होंठ काँपे।
“तुम जिंदा हो?”
आदमी हल्का-सा मुस्कुराया।
“तुम्हें क्या लगा था?”
“कि मुझे मारकर तुम ये कहानी खत्म कर दोगे?”
Saanvi कुछ समझ नहीं पा रही थी।
उसने Aryveer की तरफ देखा।
“तुम जानते हो इसे?”
Aryveer ने सिर हिलाया।
“नहीं।”
Saanvi ने फिर अपने पिता की तरफ देखा।
“पापा?”
राजवीर ने कुछ नहीं कहा।
आदमी धीरे-धीरे अंदर आया।
Naina उसके पीछे खड़ी थी।
Saanvi की नजर तुरंत Naina पर गई।
“तुम इसके साथ आई हो?”
Naina ने कोई जवाब नहीं दिया।
Saanvi की आवाज़ में दर्द था।
“तुम मेरी बहन हो।”
Naina ने धीरे से कहा—
“हाँ।”
“तो फिर इसके साथ क्यों?”
Naina की आँखों में आँसू आ गए।
“क्योंकि तुम लोग मुझे पूरी कहानी नहीं बता रहे थे।”
Saanvi कुछ कहती, उससे पहले उस आदमी ने कहा—
“क्योंकि तुम्हारे पिता ने उसे भी उतना ही झूठ बताया है जितना तुम्हें।”
राजवीर गुस्से में आगे बढ़ा।
“चुप रहो!”
आदमी हँस पड़ा।
“आज भी वही गुस्सा।”
“तुम नहीं बदले।”
राजवीर ने दाँत भींचकर कहा—
“तुम्हें मर जाना चाहिए था।”
आदमी की आँखों में अचानक ठंडापन आ गया।
“और तुम्हें मेरे मरने की खबर पर यकीन नहीं करना चाहिए था।”
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नाम जो मिटा दिया गया था
Aryveer आगे आया।
“बहुत हो गया।”
उसने उस आदमी की आँखों में देखते हुए पूछा—
“तुम हो कौन?”
आदमी ने उसकी तरफ देखा।
कुछ पल तक वह चुप रहा।
फिर बोला—
“मेरा नाम है…”
उसने राजवीर की तरफ देखा।
“…रुद्र मल्होत्रा।”
Saanvi चौंक गई।
“मल्होत्रा?”
रुद्र ने सिर हिलाया।
“हाँ।”
“और तुम्हारे पिता का नाम?”
रुद्र ने कहा—
“मेरे पिता का नाम विक्रम मल्होत्रा था।”
Aryveer ने तुरंत राजवीर की तरफ देखा।
राजवीर ने धीमे से कहा—
“रुद्र मेरा छोटा भाई है।”
Saanvi की आँखें फैल गईं।
“आपका भाई?”
“हाँ।”
रुद्र मुस्कुराया।
“और मैं वही आदमी हूँ जिसे तुमने पच्चीस साल पहले मर चुका मान लिया था।”
Aryveer ने पूछा—
“लेकिन आप मरे कैसे नहीं?”
रुद्र ने जवाब दिया—
“क्योंकि जिस रात मेरी मौत की खबर फैली…”
“मैं अस्पताल में था।”
“और मेरे मरने का प्रमाणपत्र किसी और के नाम पर बना था।”
Aman ने पहली बार बीच में कहा—
“रुद्र…”
रुद्र ने उसकी तरफ देखा।
“तुम भी बहुत अच्छे निकले, Aman।”
Aman चुप हो गया।
Saanvi ने उसे देखा।
“आप जानते थे?”
Aman ने धीरे से कहा—
“हाँ।”
“रुद्र के बारे में?”
“हाँ।”
“और आपने मुझे नहीं बताया?”
Aman की आँखों में अपराधबोध था।
“अगर बताता…”
“तो तुम आज यहाँ तक नहीं पहुँच पाती।”
Saanvi ने दर्द से कहा—
“आप हर बार यही कहते हैं।”
“मुझे बचाने के लिए झूठ बोलना पड़ा।”
“लेकिन मुझे किससे बचाया जा रहा था?”
अचानक रुद्र ने कहा—
“मुझसे।”
Saanvi उसकी तरफ मुड़ी।
रुद्र बोला—
“तुम्हें मुझसे बचाया गया था।”
“क्यों?”
“क्योंकि उस वक्त मैं सही नहीं था।”
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पच्चीस साल पहले
रुद्र ने धीरे-धीरे पुरानी कहानी बतानी शुरू की।
“जब तुम्हारी माँ गर्भवती थी, तब तीन लोगों को पता था कि वह तीन बच्चों को जन्म देने वाली है।”
“तुम्हारी माँ।”
“राजवीर।”
“और मैं।”
“हमने तय किया था कि तीनों बच्चियों को सुरक्षित रखा जाएगा।”
Saanvi ने पूछा—
“फिर क्या हुआ?”
रुद्र की आवाज़ भारी हो गई।
“किसी ने Project S-21 की जानकारी बाहर पहुँचा दी।”
“और उस प्रोजेक्ट में…”
वह रुका।
“तीनों बच्चियों के जन्म से जुड़ा एक ऐसा रहस्य था जिसे कुछ लोग अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना चाहते थे।”
Aryveer ने पूछा—
“किस तरह का फायदा?”
रुद्र ने कहा—
“वो मैं अभी नहीं बता सकता।”
Aryveer ने गुस्से में कहा—
“क्यों?”
“क्योंकि तुम जितना जानोगे…”
“उतने खतरे में पड़ोगे।”
Aryveer ने बिना डरे जवाब दिया—
“मैं पहले ही खतरे में हूँ।”
उसने Saanvi की तरफ देखा।
“क्योंकि वो मेरे साथ है।”
Saanvi ने उसकी तरफ देखा।
उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई।
रुद्र ने दोनों को देखा।
“तुम दोनों…”
उसने हल्का सा सिर हिलाया।
“इन सबके बीच भी प्यार ढूँढ़ लेते हो।”
Aryveer ने कहा—
“हमारी आदत है।”
Saanvi ने तुरंत कहा—
“हम प्यार नहीं—”
वह रुक गई।
Aryveer ने मुस्कुराकर कहा—
“हाँ, हाँ। Fake relationship।”
Aarohi ने धीरे से कहा—
“अब ये Fake कम और Real ज्यादा लग रहा है।”
Saanvi का चेहरा लाल हो गया।
“तुम भी?”
Aarohi हँस पड़ी।
कुछ पल के लिए तनाव कम हुआ।
लेकिन Naina बिल्कुल चुप थी।
वह लगातार रुद्र को देख रही थी।
Saanvi ने उसकी तरफ देखा।
“तुम परेशान हो?”
Naina ने कहा—
“नहीं।”
“तुम कुछ छुपा रही हो।”
Naina ने नजरें झुका लीं।
“मैंने Samar के साथ इसलिए काम किया…”
वह रुक गई।
“क्योंकि उसने मुझे बताया था कि अगर मैंने उसका साथ नहीं दिया तो वो तुम्हें मार देगा।”
Saanvi की आँखें भर आईं।
“तुमने मुझे बचाने के लिए उसका साथ दिया?”
Naina ने सिर हिलाया।
“हाँ।”
Saanvi तुरंत उसके पास गई और उसे गले लगा लिया।
Naina कुछ पल स्थिर रही।
फिर उसने भी अपनी बहन को गले लगा लिया।
आरोही की आँखें भी नम हो गईं।
तीनों पहली बार एक साथ खड़ी थीं।
लेकिन तभी…
रुद्र ने उन्हें देखा और धीरे से कहा—
“काश ये मिलन इतना आसान होता।”
राजवीर ने उसकी तरफ देखा।
“क्या मतलब?”
रुद्र ने कहा—
“क्योंकि Project S-21 का आखिरी हिस्सा अभी बाकी है।”
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तीन निशान
रुद्र ने एक पुराना लकड़ी का डिब्बा निकाला।
उसमें तीन छोटी धातु की प्लेटें थीं।
हर प्लेट पर एक अलग निशान बना था।
पहली प्लेट Saanvi को दी।
उसका निशान उसकी कलाई पर बने निशान जैसा था।
दूसरी Aarohi को।
तीसरी Naina को।
तीनों निशान आपस में बिल्कुल अलग थे।
Aryveer ने पूछा—
“इनका क्या मतलब है?”
रुद्र ने कहा—
“ये तीनों अलग-अलग नहीं हैं।”
“जब इन्हें एक साथ रखा जाएगा…”
“तो एक रास्ता खुलेगा।”
Saanvi ने पूछा—
“कहाँ का रास्ता?”
रुद्र ने जवाब दिया—
“उस जगह का, जहाँ तुम्हारी माँ ने तुम्हारे जन्म की असली सच्चाई छुपाई थी।”
Saanvi ने धीरे से कहा—
“माँ ने?”
“हाँ।”
“लेकिन माँ तो…”
“मरने से पहले उसने सबकुछ तैयार कर दिया था।”
Aman ने अचानक कहा—
“हमें यहाँ से जाना होगा।”
रुद्र ने उसे देखा।
“अब?”
“हाँ।”
“क्यों?”
Aman ने खिड़की की तरफ देखा।
“क्योंकि बहुत देर हो चुकी है।”
बाहर अचानक गाड़ियों की आवाज़ आने लगी।
एक नहीं…
कई गाड़ियाँ।
Aryveer ने खिड़की से देखा।
“हम घिर चुके हैं।”
रुद्र ने तुरंत अपनी जेब से बंदूक निकाली।
“कितने?”
“कम से कम दस।”
राजवीर ने कहा—
“Samar?”
रुद्र ने सिर हिलाया।
“नहीं।”
“फिर कौन?”
अचानक Naina ने खिड़की के बाहर देखा।
उसका चेहरा सफेद पड़ गया।
“वो…”
Saanvi ने पूछा—
“कौन?”
Naina ने काँपते हुए कहा—
“वो आदमी…”
“जिससे मुझे हमेशा डराया गया था।”
Saanvi ने पूछा—
“कौन आदमी?”
Naina ने धीरे से एक नाम लिया—
“विक्रम मल्होत्रा।”
राजवीर चौंक गया।
“लेकिन वो तो…”
रुद्र ने उसकी बात पूरी की—
“मर चुका है।”
बाहर से एक आदमी की आवाज़ आई—
“राजवीर!”
सभी खिड़की की तरफ देखने लगे।
एक बूढ़ा आदमी गाड़ी से उतर रहा था।
उसके हाथ में छड़ी थी।
लेकिन उसके कदम बिल्कुल स्थिर थे।
वह हवेली की तरफ देखकर मुस्कुराया।
“बहुत साल हो गए।”
रुद्र की आँखों में डर उतर आया।
“पापा…”
Saanvi ने Aryveer का हाथ पकड़ लिया।
“ये सब खत्म क्यों नहीं होता?”
Aryveer ने उसका हाथ थाम लिया।
“क्योंकि अभी कहानी बाकी है।”
Saanvi ने उसकी तरफ देखा।
“और अगर मुझे सबकुछ खोना पड़ा तो?”
Aryveer ने बिना एक पल सोचे कहा—
“तो जो बचा रहेगा…”
उसने उसकी आँखों में देखते हुए कहा—
“वो मैं रहूँगा।”
Saanvi कुछ बोल नहीं पाई।
तभी बाहर से विक्रम की आवाज़ आई—
“मेरी पोतियों को मेरे हवाले कर दो।”
तीनों बहनें एक-दूसरे को देखने लगीं।
राजवीर ने कहा—
“उसे नहीं पता कि तुम तीनों के पास वो निशान हैं।”
विक्रम की आवाज फिर गूँजी—
“मुझे सब पता है, राजवीर।”
“क्योंकि…”
वह मुस्कुराया।
“मैंने ही Project S-21 शुरू किया था।”
कमरे में सन्नाटा छा गया।
और पहली बार…
Saanvi को समझ आया कि उसकी पूरी जिंदगी जिस रहस्य से भाग रही थी…
उस रहस्य का असली मालिक उसके सामने खड़ा था।
क्रमशः...