कुछ महीने बीत गए थे। सब कुछ सामान्य लग रहा था। विराट और संयोगिता के बीच एक अजीब सा समझौता हो गया था। वे एक-दूसरे से दूर रहते, लेकिन विवान के लिए साथ आते। वर्षा सुरक्षित थी और उसका बच्चा भी स्वस्थ था।
लेकिन शांति हमेशा झूठी होती है। महक जमानत पर बाहर आ गई थी। कानूनी खामियों और रिश्वत की वजह से उसे छोड़ना पड़ा था। और जैसे ही वह बाहर आई, उसने बदला लेने की कसम खाई।
एक शाम, जब विराट और संयोगिता ऑफिस से वापस लौट रहे थे, घर का माहौल अचानक बदल गया। जैसे ही उन्होंने मुख्य दरवाजा खोला, उनके सामने का नजारा देखकर उनका खून जम गया।
ड्राइंग रूम में गंगा जी, काजल, वर्षा और घर के नौकर-चाकर बंधे हुए थे। उनके मुंह पर टेप लगा हुआ था और आँखों में खौफ था। और बीच में खड़ी थी महक। उसके चेहरे पर एक विकृत मुस्कान थी। उसके पीछे चार-पांच गुंडे हथियारों के साथ खड़े थे।
लेकिन सबसे दिल दहला देने वाला नजारा विवान का था।
विवान महक की पकड़ में था। महक ने उसके नाजुक हाथ को इतनी जोर से पकड़ रखा था कि वह लाल पड़ गया था और फूल रहा था। विवान दर्द से रो रहा था, लेकिन महक ने उसके मुंह पर हाथ रख दिया था ताकि वह चीख न सके। विराट का चेहरा गुस्से से तमतमा गया। वह आगे बढ़ने ही वाला था कि महक ने विवान के सिर पर पिस्तौल रख दी।
महक बोली-
एक कदम भी आगे बढ़ा, तो तेरे बेटे का दिमाग उड़ जाएगा!
विराट रुक गया। उसकी साँसें तेज हो गईं। संयोगिता वहीं खड़ी थी। लेकिन इस बार, उसके चेहरे पर डर नहीं था। उसके चेहरे पर एक भयानक शांति थी। उसकी आँखों की पुतलियां फैल चुकी थीं। वह 'साइको किलर' जाग चुका था। संयोगिता ने विराट की तरफ देखा। उसकी आवाज़ इतनी ठंडी थी कि कमरे का तापमान गिर गया लग रहा था।
संयोगिता (गुस्से में, लेकिन धीमी आवाज में)बोली -
बोला था ना पुलिस इसे छोड़ देगी। अब मुझे ही कुछ करना पड़ेगा।
विराट ने संयोगिता की आँखों में देखा। वहां कोई इंसानियत नहीं थी। सिर्फ मौत थी।
संयोगिता आगे बोली -
आप कैसे भी विवान को यहां से दूर ले जाओ। क्योंकि यहां जो होगा, इससे उसके मन पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। यह नजारा कोई बच्चा नहीं देख सकता।
विराट समझ गया। संयोगिता अब नियंत्रण से बाहर थी। अगर विवान वहां रहा, तो या तो वह मारा जाएगा, या फिर वह अपनी माँ को खून से लथपथ देखकर टूट जाएगा। विराट ने मौके का फायदा उठाया। उसने ध्यान भटकाने के लिए महक से बात शुरू की।
विराट बोला-
महक, तुम चाहती क्या हो? पैसा? जायदाद? बताओ, सब मिल जाएगा। बस बच्चे को छोड़ दो।
महक हँसी।
महक बोली-
मुझे पैसा नहीं चाहिए विराट। मुझे तुम्हारा दर्द चाहिए।
इसी बीच, विराट ने धीरे से पीछे की तरफ कदम बढ़ाए। वह विवान के करीब पहुंचा। महक का ध्यान विराट की बातों पर था। अचानक, विराट ने झपट्टा मारा और विवान को महक की पकड़ से छीन लिया। विवान ने जोर से चीख मारी, लेकिन विराट ने तुरंत उसका मुंह ढक लिया और उसे गोद में उठाकर भागा।
महक चिल्लाई -
पकड़ो उसे!
लेकिन विराट तेजी से ऊपर की तरफ भागा। वह विवान को अपने बेडरूम में ले गया, दरवाजा बंद किया और कुंडी लगा दी। उसने विवान को बिस्तर पर लिटाया और उसके कानों को हाथों से ढक दिया।
विराट (फुसफुसाते हुए) बोला-
शांत रहो बेटा। कुछ मत सुनना। बस आँखें बंद करो।
विवान रो रहा था, लेकिन विराट ने उसे कसकर गले लगा लिया। नीचे, ड्राइंग रूम में अब सिर्फ संयोगिता और महक आमने-सामने थे।
संयोगिता ने अपना कोट उतारकर एक तरफ फेंक दिया। उसके हाथों में अब कोई हथियार नहीं था, लेकिन उसकी उंगलियां मुट्ठियों में बंधी हुई थीं। महक ने पिस्तौल संयोगिता की तरफ तान दी।
महक बोली-
अब तू अकेली है, संयोगिता। तेरा हीरो चला गया। अब क्या करोगी?
संयोगिता मुस्कुराई। एक ऐसी मुस्कान जिसने महक के रोंगटे खड़े कर दिए।
संयोगिता बोली-
हीरो? नहीं महक। हीरो तो वह होता है जो बचाता है। मैं... मैं तो बस सफाई करती हूँ।
संयोगिता की आँखों में अब पूरा पागलपन था। वह धीरे-धीरे महक की तरफ बढ़ी। महक ने ट्रिगर दबाया।
*धायें!*
गोली संयोगिता के कंधे को छूती हुई निकल गई। संयोगिता ने दर्द की परवाह नहीं की। वह बिजली की तेजी से आगे बढ़ी और महक के हाथ पर वार किया। पिस्तौल जमीन पर गिर गई।
अब शुरू हुआ असली खेल। संयोगिता ने महक का गला जकड़ लिया। उसकी पकड़ इतनी मजबूत थी कि महक की साँसें अटकने लगीं। महक के गुंडे आगे बढ़े, लेकिन संयोगिता ने महक को ढाल बना लिया।
संयोगिता (चिल्लाते हुए) बोली -
आओ! गोली मारो अपनी लीडर को!
गुंडे हिचकिचाए। इसी बीच, संयोगिता ने महक के पैर पर जोर से लात मारी और उसे जमीन पर गिरा दिया। फिर उसने पास पड़ी एक भारी कांच की वैस उठाई और महक के सिर पर दे मारी।
*धड़ाम!*
महक बेहोश होकर गिर पड़ी। खून बहने लगा। बाकी गुंडे हैरान थे। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक महिला इतनी बर्बरता से लड़ सकती है। संयोगिता ने उनकी तरफ देखा। उसकी आँखों में खून उतर आया था।
संयोगिता बोली-
अगली बारी किसकी है?
गुंडों ने भागना शुरू कर दिया। वे संयोगिता के उस पागलपन से डर गए थे। संयोगिता ने महक के शरीर को लात मारी।
संयोगिता बोली -
तुमने विवान को छुआ था। अब तुम कभी नहीं चल पाओगी।
तभी, विराट नीचे आया। उसने देखा कि संयोगिता खून से लथपथ है और महक बेहोश पड़ी है। विराट दौड़कर संयोगिता के पास आया।
विराट बोला-
संयोगिता! तुम ठीक तो हो?
संयोगिता ने विराट की तरफ देखा। उसकी आँखों में अभी भी वह पागलपन था।
संयोगिता बोली -
मैं ठीक हूँ। लेकिन वह... वह अभी जिंदा है।
विराट ने संयोगिता के कंधे को पकड़ा।
विराट बोला-
बस करो संयोगिता। पुलिस आ रही है। अब और खून नहीं।
संयोगिता ने विराट को धक्का दिया।
संयोगिता बोली-
पुलिस? फिर वही कहानी? फिर वह छूट जाएगी? नहीं विराट। आज यह खत्म होगा।
उसने फिर से महक की तरफ कदम बढ़ाया। लेकिन तभी, विवान की आवाज़ आई।
विवान (ऊपर से चिल्लाते हुए) बोला-
मम्मा!!!
संयोगिता रुक गई। उसने ऊपर देखा। विवान सीढ़ियों के पास खड़ा था, रो रहा था। संयोगिता का पागलपन एक पल के लिए थम गया। उसने देखा कि उसका बच्चा उसे देख रहा है। एक ऐसे रूप में, जिससे वह डर सकता था। संयोगिता ने हाथ नीचे कर दिए। उसकी आँखों से आंसू बहने लगे।
संयोगिता (मन में) बोली -
मैंने वादा किया था कि उसे यह नहीं देखना होगा। लेकिन मैं असफल हो गई।
विराट ने संयोगिता को गले लगा लिया।
विराट बोला -
चलो संयोगिता। अब सब खत्म हो गया।
लेकिन संयोगिता जानती थी कि यह खत्म नहीं हुआ था। महक जिंदा थी। और जब तक वह जिंदा थी, खतरा बना हुआ था।और अब, विराट भी जानता था कि संयोगिता सिर्फ एक साधारण महिला नहीं है। वह एक खतरनाक शिकारी है। सवाल यह था कि क्या विराट इस सच को स्वीकार कर पाएगा?
तभी महक की आँखें खुलीं। उसका सिर फट गया था, खून बह रहा था, लेकिन मौत के करीब होने का अहसास उसे और भी खतरनाक बना रहा था। उसने धीरे से जमीन पर पड़ी अपनी पिस्तौल उठाई और संयोगिता की तरफ तान दी।
महक (हांपते हुए, कमजोर लेकिन क्रूर आवाज में) बोली-
Hands up, संयोगिता... कोई नहीं हिलेगा।
संयोगिता गुस्से में उसे घूर रही थी। उसकी सांसों की गति तेज थी, लेकिन चेहरे पर वही भयानक शांति थी।
संयोगिता (विराट की तरफ देखते हुए) बोली-
विराट! विवान को यहाँ से ले जाओ... अभी!
विराट तुरंत भागा। महक ने उस पर गोली चलाने की कोशिश की, ट्रिगर दबाया, लेकिन संयोगिता ने बिजली की फुर्ती से महक के हाथ पर लात मारी। पिस्तौल हाथ से छूटकर दूर जा गिरी। महक दर्द से चीखी और जमीन पर लोट गई।
पूरा परिवार—गंगा जी, अर्जुन अंकल, काजल, वर्षा—सब बंधे हुए यह नजारा देख रहे थे। उनकी आँखों में डर था, लेकिन अब हैरानी भी थी। महक ने संयोगिता को देखा और एक आखिरी चाल चली। उसकी आवाज़ में अब जान थी, क्योंकि वह जानती थी कि अब उसके पास सिर्फ शब्द बचे हैं।
महक (जोर से चिल्लाते हुए) बोली-
देखो! अगर तुमने कुछ भी किया, तो मैं तुम्हारा सच सबको बता दूंगी!
संयोगिता ठंडी पड़ गई। वह महक के चेहरे के बहुत करीब झुकी।
संयोगिता बोली-
बता। अभी बता। चुप क्यों है? यही तेरी आखिरी इच्छा है तो बोल।
इसी बीच, विराट विवान को बेडरूम में बंद करके वापस नीचे आ गया था। वह सीढ़ियों के पास खड़ा होकर यह सब देख रहा था। महक ने अपनी आखिरी ताकत जुटाई और पूरे परिवार की तरफ देखकर चिल्लाई।
महक बोली-
"आप लोगों को पता है? शहर की famous 'Psycho Killer' कौन है? जिसे पुलिस 5 सालों से ढूंढ रही है? जो लोगों को बेरहमी से मार देती है? जिसने ना जाने कितने लोगों को बर्बरता से नोच-नोच कर मारा? और फिर दीवारों पर मुहावरे लिखे?
महक ने संयोगिता की तरफ उंगली उठाई।
महक बोली-
"गंगा आंटी, अर्जुन अंकल... आपकी ये बहु। विराट, तुम्हारी बीबी। वर्षा भाभी, आपकी देवरानी। काजल, तुम्हारी जेठानी। और ऋषि और राघव... तुम्हारी भाभी। ये ही है वो Psycho Killer!
कमरे में सन्नाटा छा गया। एक सुई गिरने की आवाज़ भी सुनाई दे सकती थी। गंगा जी की आँखें फटी रह गईं। काजल का मुंह खुला का खुला रह गया। वर्षा सहम गई। अर्जुन अंकल स्तब्ध थे।
विराट के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसे वह रात याद आ गई। वह ब्लेड। वह खून। वह ठंडक। सब कुछ सच था। संयोगिता कोई साधारण महिला नहीं थी। वह एक सीरियल किलर थी।
संयोगिता ने इस सन्नाटे का फायदा उठाया। उसे अब किसी छिपाव की जरूरत नहीं थी। उसका राज खुल चुका था। अब बस एक ही काम बाकी था—सफाई।
संयोगिता (मुस्कुराते हुए, लेकिन आँखों में पागलपन से) बोली-
बस? अब बता दिया ना? मिल गई शांति? चल, अब तेरी बारी। आजा, हो जा लिस्ट में शामिल।
विराट चीखा।
विराट बोला -
संयोगिता, नहीं! रुक जाओ!
लेकिन संयोगिता अब इंसान नहीं रही थी। वह गुर्राई।
संयोगिता (गुर्राते हुए) बोली-
गुर्र... बस विराट! अब कोई नहीं रोकेगा।
उसने अपनी जेब से वह छोटा, नुकीला चाकू निकाला जो वह हमेशा रखती थी। और फिर... वह महक पर टूट पड़ी। एक वार। दूसरा वार। तीसरा वार। संयोगिता ने लगातार वार किए। हर वार के साथ उसका गुस्सा, उसका डर, और उसका पागलपन बाहर निकल रहा था। महक चीखती रही, लेकिन संयोगिता नहीं रुकी। जब तक महक का शरीर पूरी तरह खून से लथपथ नहीं हो गया। जब तक वह हिलना बंद नहीं कर दी।
महक के गुंडे, जो अब तक होश में आए थे, यह नजारा देखकर बुरी तरह डर गए। वे कभी नहीं सोच सकते थे कि एक महिला इतनी बर्बरता से हत्या कर सकती है। वे चीखते हुए वहां से भाग खड़े हुए। अब कमरे में सिर्फ खून की गंध थी।
संयोगिता खड़ी थी, हाथ में खून से सना चाकू लिए। उसकी सांसें तेज चल रही थीं। उसने धीरे से सिर उठाया और अपने परिवार की तरफ देखा। विराट वहीं खड़ा था, कांप रहा था।
गंगा जी रो रही थीं। काजल और वर्षा डर से थर-थर कांप रही थीं। अर्जुन अंकल शॉक में थे।
संयोगिता ने चाकू जमीन पर गिरा दिया। *छन...*
उसने विराट की आँखों में देखा। उसकी आँखों में अब कोई पछतावा नहीं था।
बस एक सवाल था—
अब क्या?
पूरा परिवार बंधा हुआ था, लेकिन असली बंधन अब उनके दिमाग में था। वे जान चुके थे कि जिस महिला को वे अपनी बहु, बेटी और भाभी मानते थे, वह असल में एक मशीन थी। एक खतरनाक मशीन।
संयोगिता ने धीमे स्वर में कहा—
अब... कोई पुलिस नहीं। कोई सबूत नहीं। बस हम हैं। और यह राज... हमेशा के लिए दफन।
लेकिन विराट की आँखों में अब प्रेम नहीं, बल्कि एक गहरा, अनसुलझा खौफ था।