Her Silent Secret - 8 Sonam Brijwasi द्वारा नाटक में हिंदी पीडीएफ

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Her Silent Secret - 8

चौहान हवेली के बाहर स्कूल बस आकर रुकी। काजल हमेशा की तरह विवान को लेने बाहर आई। उसकी आँखें अब भी रो-रोकर सूज चुकी थीं। लेकिन वो खुद को संभाल रही थी… सिर्फ विवान के लिए। बस का दरवाज़ा खुला। एक-एक करके सारे बच्चे नीचे उतरने लगे। लेकिन…विवान नहीं उतरा।
काजल पहले कुछ सेकंड इंतज़ार करती रही। फिर जल्दी से बस के अंदर चढ़ गई। उसकी आवाज़ काँप रही थी।

काजल बोली - 
विवान कहाँ है?

Bus conductor चौंक गया।

Conductor बोला - 
मैडम… वो तो छुट्टी के बाद एक uncle के साथ चला गया।

काजल के पैरों तले जमीन खिसक गई।

काजल बोली - 
क… कौन uncle?

Conductor ने याद करने की कोशिश की।

Conductor बोला - 
उन्होंने कहा था वो बच्चे के रिश्तेदार हैं… बच्चा भी उनके साथ आराम से चला गया…।

काजल का चेहरा सफेद पड़ गया। उसने तुरंत विराट को फोन लगाया। विराट पहले से ही संपूर्णा की मौत से टूटा हुआ था।
जैसे ही उसने फोन उठाया—

काजल (रोते हुए) बोली - 
भैया… विवान… विवान स्कूल से घर नहीं आया…

कुछ सेकंड के लिए दूसरी तरफ बिल्कुल खामोशी छा गई। फिर—

विराट बोला - 
क्या…?

उसकी आवाज़ जैसे गले में अटक गई। फोन उसके हाथ से लगभग छूट गया। उसकी आँखों में डर उतर आया। पहले पत्नी और अब बेटा। जैसे जिंदगी उससे सब कुछ छीनने पर उतर आई थी। विराट तुरंत घर पहुँचा। उसकी हालत बुरी थी। वो हर किसी पर चिल्ला रहा था।

विराट बोला - 
तुम लोगों ने उसे अकेला कैसे छोड़ दिया!

उसकी आँखें लाल हो चुकी थीं। वो पागलों की तरह पूरे घर में विवान का नाम पुकारने लगा।

विराट बोला - 
विवान!!

लेकिन जवाब में सिर्फ खामोशी मिली। विराट ने दोनों हाथों से अपना सिर पकड़ लिया। उसे लग रहा था जैसे उसका दिमाग फट जाएगा।

विराट (टूटती आवाज़ में) बोला - 
नहीं… नहीं… मैं उसे भी नहीं खो सकता…

उसकी साँसें तेज होने लगीं। अब वो सच में अपनी मानसिक हालत खोता जा रहा था। दूसरी तरफ एक काली SUV सुनसान सड़क पर दौड़ रही थी। उसके अंदर पीछे की सीट पर…छोटा विवान बैठा था। उसकी आँखों में आँसू थे।

विवान बोला - 
मुझे पापा के पास जाना है…

उसके सामने बैठे आदमी ने खतरनाक मुस्कान दी।

वो बोला - 
जल्दी ही… हमेशा के लिए।

एक पुरानी, बंद फैक्ट्री के अंदर कई छोटे-छोटे कमरे बने हुए थे। दीवारें गंदी थीं। हवा में डर और घुटन फैली हुई थी। वहीं कुछ आदमी विवान को अंदर घसीटते हुए लाए। विवान डरा हुआ था। उसकी आँखें लगातार अपने पापा और मम्मा को ढूंढ रही थीं। एक आदमी हंसते हुए उसके सामने झुका।

आदमी बोला - 
पापा के पास नहीं…

उसने विवान को जोर से धक्का दिया।

आदमी बोला - 
अब तुम अपनी mummy के पास जाओगे।

विवान नीचे गिर पड़ा। उसकी छोटी आँखों में आँसू भर आए।वहाँ और भी कई बच्चे बैठे हुए थे। कुछ डरे हुए…कुछ रो रहे थे…कुछ इतने सहमे हुए थे कि आवाज़ तक नहीं निकाल पा रहे थे। उस जगह पर इंसानियत मर चुकी थी। वहीं इस घिनौने crime का खेल चल रहा था। वहां child pornograffi चल रही थी।

ऊपर टूटी दीवारों की छाया में…संयोगिता सब देख रही थी। उसके साथ उसके कुछ भरोसेमंद लोग भी थे। उसकी आँखों में खतरनाक गुस्सा जल रहा था। उसकी मुट्ठियाँ इतनी कस चुकी थीं कि नसें उभर आई थीं। लेकिन वो अभी सही वक्त का इंतज़ार कर रही थी। मौका मिलते ही संयोगिता चुपके से बच्चों के पास पहुँची। उसने धीरे से विवान की तरफ देखा। चार साल का छोटा बच्चा…डर से काँप रहा था। लेकिन जैसे ही उसकी नजर संयोगिता पर पड़ी वो अचानक शांत हो गया।

विवान धीरे-धीरे उसके पास आया। उसकी मासूम आँखों में चमक लौट आई। उसने अपने छोटे-छोटे हाथों से संयोगिता का चेहरा छू लिया। संयोगिता एक पल के लिए बिल्कुल जम गई।
और फिर—

विवान फुसफुसाया—
मम्मा… आप आ गईं…

ये शब्द सुनते ही…संयोगिता के अंदर जैसे कुछ टूट गया। वो साइको killer…जो बिना पलक झपकाए लोगों को मार देती थी…उसकी आँखें पहली बार भर आईं।

विवान मासूमियत से उसे पकड़कर बोला—
मुझे पता था आप मुझे छोड़कर नहीं जाओगी…

संयोगिता की साँस अटक गई। क्योंकि उस पल…उसे लगा जैसे संपूर्णा खुद उसके सामने खड़ी हो। संयोगिता धीरे से घुटनों पर बैठ गई। उसने काँपते हाथों से विवान को अपनी बाँहों में भर लिया। विवान तुरंत उससे लिपट गया। और उसी पल संयोगिता की आँखों का दर्द फिर धीरे-धीरे मौत वाले गुस्से में बदलने लगा। उसने अंधेरे में खड़े उन दरिंदों की तरफ देखा। उसकी आवाज़ बेहद धीमी थी…

लेकिन उसमें मौत साफ सुनाई दे रही थी—
अब तुम में से कोई जिंदा नहीं बचेगा।

तभी पीछे से एक भारी आवाज़ गूंजी—
ए लड़की! तू यहाँ क्या कर रही है?

सभी गुंडों की नजर अचानक उसकी तरफ चली गई। कुछ सेकंड का सन्नाटा। फिर संयोगिता धीरे-धीरे खड़ी हुई। उसकी आँखों में अब सिर्फ आग थी। अगले ही पल पीछे के अंधेरे से संयोगिता के आदमी अंदर घुस आए। और पूरी फैक्ट्री में मारपीट शुरू हो गई। चीखें…घूंसे…टूटते सामान की आवाज़ें…हर तरफ अफरा-तफरी मच गई।

संयोगिता ने बिना पीछे देखे आदेश दिया—
सारे बच्चों को बाहर निकालो। अभी!

उसका एक आदमी तुरंत बच्चों को लेकर बाहर भागा। विवान जाते-जाते बार-बार पीछे मुड़कर उसे देख रहा था। जैसे सच में उसे अपनी मम्मा दिखाई दे रही हो। एक गुंडा भागने की कोशिश कर रहा था। लेकिन संयोगिता ने उसका collar पकड़कर उसे जोर से दीवार पर दे मारा।
धड़ाम!
उस आदमी के मुंह से दर्दभरी चीख निकल गई। संयोगिता ने बिना दया दिखाए उसकी गर्दन दबोच ली। फिर अपनी gun निकालकर सीधे उसके मुंह में घुसा दी। गुंडे की आँखें डर से फैल गईं। उसका पूरा शरीर काँपने लगा। संयोगिता उसके बिल्कुल करीब झुकी। उसकी आवाज़ बर्फ जैसी ठंडी थी।

संयोगिता बोली - 
बोल…

उसने gun और अंदर धकेली।

संयोगिता बोली - 
क्या करने वाला था तू उन बच्चों के साथ?

गुंडा डर के मारे रोने लगा।

गुंडा बोला - 
म… मैंने कुछ नहीं किया…

संयोगिता की आँखों में खून उतर आया।

संयोगिता (चीखते हुए) बोली - 
झूठ!

उस पल…वो पूरी तरह वही साइको killer बन चुकी थी…जिससे पूरा शहर डरता था।उसकी आँखों में इंसानियत नहीं थी। सिर्फ उन बच्चों का दर्द था। और संपूर्णा की मौत। फैक्ट्री के बाहर विवान डरते हुए बार-बार अंदर देख रहा था। उसके छोटे होंठ काँपे।

विवान बोला - 
मम्मा को चोट तो नहीं लगेगी ना…?

और अंदर संयोगिता ने gun की safety हटाई।वोउसकी उंगली trigger पर थी।बउसकी आँखों में सिर्फ एक फैसला था आज कोई दरिंदा जिंदा नहीं बचेगा।

संयोगिता अभी उस गुंडे पर gun ताने खड़ी थी।

तभी बाहर से किसी की दर्दभरी चीख सुनाई दी—
आआह्ह!

संयोगिता तुरंत पलटी। उसकी आँखें सिकुड़ गईं। वो तेजी से बाहर भागी। कॉरिडोर में उसका आदमी खून से लथपथ जमीन पर पड़ा था। बाकी सारे बच्चे बाहर निकल चुके थे।
लेकिन विवान वहीं था। छोटा सा बच्चा उस घायल आदमी को हिला रहा था।

विवान बोला - 
Uncle… uncle… क्या हुआ आपको?

उसकी मासूम आवाज़ सुनते ही संयोगिता का दिल बैठ गया।
उसी समय पीछे से कई गुंडे corridor में घुस आए। उनके हाथों में guns थीं।

गुंडा बोला - 
वो बच्चा वहीं है!

संयोगिता की आँखों में तुरंत मौत उतर आई। वो बिजली की तेजी से विवान तक पहुँची। और बिना एक सेकंड गंवाए उसे अपनी गोद में उठा लिया। विवान डरकर उससे कसकर चिपक गया।

विवान बोला - 
मम्मा…

ये शब्द फिर उसके कानों में पड़े।लेकिन इस बार रुकने का वक्त नहीं था। संयोगिता विवान को एक हाथ से पकड़े corridor में भागने लगी। और तभी—
धाँय! धाँय! धाँय!
पीछे से गोलियाँ चलने लगीं। दीवारों पर चिंगारियाँ उड़ने लगीं।
विवान डर के मारे आँखें बंद कर चुका था।
संयोगिता भागते-भागते दूसरे हाथ से अपनी gun निकालती है। बिना पीछे देखे—
धाँय!
एक गुंडा सीधे नीचे गिर पड़ा। फिर वो मुड़कर corridor के मोड़ पर घुटनों के बल फिसली और लगातार firing करने लगी। उसकी हर गोली जैसे गुस्से से भरी थी।

विवान उसके गले से चिपका काँप रहा था। संयोगिता ने भागते हुए उसे और कसकर पकड़ लिया। पहली बार…उसे किसी को खोने का डर महसूस हो रहा था। वो सिर्फ एक target नहीं था अब। वो…संपूर्णा की आखिरी निशानी था।

कॉरिडोर के आखिर में emergency exit का दरवाज़ा दिखने लगा। संयोगिता तेजी से उसकी तरफ भागी। लेकिन तभी सामने अंधेरे से एक आदमी बाहर आया। उसके हाथ में machine gun थी। और उसने सीधे विवान की तरफ निशाना साध दिया। संयोगिता की आँखें फैल गईं।

गुंडा बोला - 
अब खत्म!

और अगले ही पल Trigger दब गया। जैसे ही सामने वाले आदमी ने trigger दबाया संयोगिता तुरंत एक तरफ घूम गई।
धाँय!
गोली उसके पास से निकलकर दीवार में जा धँसी। लेकिन उसी पल ठक! Emergency exit का भारी gate अचानक बंद हो गया। संयोगिता रुक गई। उसकी आँखों में एक पल को झुंझलाहट चमकी। अब वो फिर से उसी मौत भरी फैक्ट्री में कैद हो चुकी थी।

वो फिर विवान को लेकर तेजी से भागने लगी। लेकिन तभी उसकी चाल लड़खड़ाई। उसकी बाँह से खून बह रहा था। गोली उसकी बाजू को छूकर निकल गई थी। दर्द इतना तेज था कि उसकी साँसें भारी होने लगीं। फिर भी उसने विवान को अपनी पकड़ से ढीला नहीं होने दिया।

कुछ दूर जाकर उसे एक टूटा हुआ storage room दिखा।
वो तुरंत अंदर घुसी। कमरा अंधेरा और धूल से भरा था। संयोगिता ने दरवाज़े के पीछे खुद को छुपा लिया। बाहर अब भी गुंडों के कदमों की आवाज़ गूंज रही थी। विवान उसकी गोद में बैठा काँप रहा था। उसने देखा संयोगिता की बाँह से लगातार खून निकल रहा है। उसकी छोटी आँखें भर आईं। वो धीरे से उसके और करीब खिसक गया।

फिर मासूम डर से बोला—
मम्मा… आप मुझे छोड़कर तो नहीं जाओगी ना?

ये सुनते ही…संयोगिता की साँस जैसे रुक गई।उसने पहली बार अपने दर्द से ज्यादा किसी और के डर को महसूस किया।विवान उसे उसी भरोसे से देख रहा था…जैसे वो सच में उसकी माँ हो। संयोगिता की आँखों में नमी उतर आई। लेकिन उसने तुरंत खुद को संभाला। उसने काँपते हाथ से विवान के आँसू पोंछे। फिर उसे अपने सीने से लगा लिया।

संयोगिता (धीरे, भारी आवाज़ में) बोली - 
नहीं…

उसने आँखें बंद कीं।

संयोगिता बोली - 
अब तुम्हें कोई अकेला नहीं छोड़ेगा।

विवान तुरंत उससे लिपट गया। जैसे उसे अपनी मम्मा की खुशबू महसूस हो रही हो।

उसी समय बाहर से आवाज़ आई—
ढूंढो उन्हें!

कदमों की आवाज़ तेजी से करीब आने लगी। संयोगिता ने तुरंत अपनी gun कसकर पकड़ ली। उसकी घायल बाँह काँप रही थी।

लेकिन उसकी आँखों में अब सिर्फ एक फैसला था—
अगर आज मौत आएगी…तो पहले उसे पार करना होगा।

अंधेरे कमरे में एक तरफ घायल संयोगिता बैठी थी…दूसरी तरफ उससे चिपका छोटा विवान। और बाहर दरिंदे उन्हें ढूंढते हुए करीब आते जा रहे थे। संयोगिता ने धीरे से विवान के सिर को चूमा। फिर gun reload की। उसकी आँखों में अब फिर वही साइको killer लौट आया था।