Her Silent Secret - 3 Sonam Brijwasi द्वारा महिला विशेष में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

Her Silent Secret - 3

ऑफिस का शुरुआती माहौल

कांच के बड़े केबिन में विराट बैठा हुआ था।
फाइलें खुली थीं, लेकिन उसका ध्यान बार-बार दरवाज़े की तरफ जा रहा था। तभी दरवाज़ा खुलता है।
संपूर्णा अंदर आती है—स्मार्ट, pink colour की साड़ी, हाथ में फाइल्स।

विराट (हल्की मुस्कान के साथ) बोला - 
लगता है CEO मैडम आज फिर Owner Sir के केबिन में ही दिन बिताने वाली हैं।

संपूर्णा हल्का सा मुस्कुराती है और फाइल टेबल पर रख देती है।

संपूर्णा बोली - 
और Owner Sir को इससे कोई दिक्कत तो नहीं है ना?

विराट अपनी कुर्सी से उठकर उसके पास आता है।

विराट बोला - 
दिक्कत? नहीं… मुझे तो आदत हो गई है कि मेरी सबसे बड़ी ताकत हमेशा मेरे सामने ही रहती है।

संपूर्णा एक फाइल खोलकर दिखाती है।

संपूर्णा बोली - 
आज की मीटिंग में तीन नए प्रोजेक्ट approve होने हैं। टीम ready है।

विराट उसकी बात सुन रहा होता है, लेकिन उसकी आँखें फाइल से ज्यादा उस पर होती हैं।

विराट बोला - 
तुम काम भी करती हो… और हर चीज़ को इतनी perfection से संभालती हो कि मुझे कभी चिंता ही नहीं होती।

संपूर्णा हल्का सा सिर झुका लेती है।

संपूर्णा बोली - 
और आपके बिना ये सब possible भी नहीं है विराट… ये कंपनी हमने साथ बनाई है।

विराट धीरे से उसकी कुर्सी के पीछे आकर खड़ा हो जाता है।
संपूर्णा फाइल पढ़ रही होती है।

विराट झुककर धीरे से बोलता है—
लेकिन सच बताऊँ… तुम यहाँ ऑफिस में कम और मेरे केबिन में ज्यादा रहती हो।

संपूर्णा मुस्कुराती है।

संपूर्णा बोली - 
क्योंकि यहां काम भी होता है… और सुकून भी।

विराट हल्के से उसकी फाइल बंद कर देता है।

विराट बोला - 
काम बाद में… पहले तुम।

संपूर्णा उसे देखकर शर्म से मुस्कुरा देती है।

बाहर ऑफिस स्टाफ काम में लगा हुआ है।

कर्मचारी धीरे से बातें करते हैं—
CEO madam कितनी dedicated हैं…
और sir भी उन्हें कितना respect देते हैं…

वहीं विराट और संपूर्णा एक साथ बैठकर एक ही लैपटॉप देख रहे हैं। दोनों के बीच सिर्फ काम नहीं… एक गहरा भरोसा और प्यार भी है। विराट फाइल बंद करता है और संपूर्णा की तरफ देखता है।

विराट बोला - 
हम सिर्फ कंपनी नहीं चला रहे… हम अपनी दुनिया बना रहे हैं।

संपूर्णा हल्की मुस्कान के साथ जवाब देती है—
और ये दुनिया… तुम्हारे बिना अधूरी है।

दोनों एक पल के लिए चुप हो जाते हैं… लेकिन उस चुप्पी में भी प्यार बोल रहा होता है।।जहाँ प्यार और भरोसा साथ चलें… वहाँ काम भी इबादत बन जाता है।

मीटिंग के बाद का समय
संपूर्णा अपने केबिन में फाइल्स चेक कर रही थी। तभी इंटरकॉम बजता है।

विराट (इंटरकॉम पर) बोला - 
CEO मैडम… ज़रा Owner Sir के केबिन में आइए। अभी।

संपूर्णा हल्का सा मुस्कुराती है।

संपूर्णा बोली - 
जी Mr. Virat… अभी आई।

संपूर्णा जैसे ही विराट के केबिन में अंदर आती है…फटाक!
विराट तुरंत पर्दा खींच देता है। कमरे के अंदर हल्की रोशनी और प्राइवेसी बन जाती है। संपूर्णा चौंक जाती है। और अगले ही पल… विराट उसे हल्के से अपनी तरफ खींच लेता है। संपूर्णा उसकी छाती से लगकर हल्की सांस लेती है।

संपूर्णा (हल्की घबराहट और शर्म के साथ) बोली - 
अरे Mr. Virat… ये ऑफिस है, bedroom नहीं…

विराट मुस्कुराता है, उसे छोड़े बिना।

विराट बोला - 
ऑफिस है… लेकिन तुम तो मेरी हो ना। कहीं भी रहो, मेरे पास ही हो।

संपूर्णा हल्का सा उसे धक्का देने की कोशिश करती है, लेकिन मुस्कुरा देती है।

संपूर्णा बोली - 
अगर किसी ने देख लिया तो?

विराट (धीरे से) बोला - 
तो देख ले… उन्हें पता चल जाएगा कि CEO और Owner सिर्फ काम नहीं… एक दुनिया भी चलाते हैं।

विराट उसे कुर्सी पर बैठाता है और उसके सामने एक फाइल खोल देता है।

विराट बोला - 
अब सीरियस बात… ये नया प्रोजेक्ट तुम्हारी approval के बिना आगे नहीं जाएगा।

संपूर्णा उसकी तरफ देखती है।

संपूर्णा बोली - 
और आप ये सब ऐसे पकड़कर क्यों रखते हो मुझे?

विराट हल्का सा मुस्कुराता है।

विराट बोला - 
क्योंकि तुम्हारी राय मेरी सबसे बड़ी strength है।

संपूर्णा फाइल देखते हुए भी बार-बार विराट को देख रही होती है।
विराट धीरे से उसके हाथ पर अपना हाथ रख देता है।

विराट बोला - 
थक जाती हो ना तुम भी… हर चीज़ संभालते-संभालते।

संपूर्णा हल्के से सिर हिलाती है।

संपूर्णा बोली - 
लेकिन तुम्हारे साथ सब आसान लगने लगता है।

कुछ पल दोनों शांत रहते हैं…ऑफिस की दीवारों के बीच भी एक अलग ही दुनिया चल रही होती है। विराट खिड़की की तरफ देखता है, फिर संपूर्णा की तरफ।

विराट बोला - 
ये ऑफिस सबके लिए काम की जगह है… लेकिन हमारे लिए ये दिल की जगह है।

संपूर्णा हल्की मुस्कान के साथ फाइल बंद करती है।

संपूर्णा बोली - 
और दिल हमेशा आपके पास ही रहता है Mr. Virat।


शहर का अंधेरा हिस्सा – एक बंद, सुनसान कमरा
टपकती पानी की आवाज़, दूर गूंजती हवा, भारी सन्नाटा

कमरे में सिर्फ एक हल्की लाल रोशनी जल रही थी।

दीवारों पर एक वाक्य लिखा था—
न्याय वहाँ खत्म होता है जहाँ कानून सो जाता है।

पर यह शब्द साधारण स्याही से नहीं खून से लिखा था… एक डरावने संदेश के साथ लिखे गए थे। कमरे के बीचों-बीच एक कुर्सी पर एक लड़की बैठी थी। काले कपड़ों में लिपटी हुई। चेहरा अभी पूरी तरह दिखाया नहीं गया था। उसकी मौजूदगी में ही एक अजीब सी खामोशी थी—जैसे हवा भी रुक गई हो। दरवाज़ा धीरे से खुलता है। एक घबराया हुआ आदमी अंदर आता है।

गुंडा (डरते हुए) बोला - 
मैडम… हमने काम कर दिया है… लाश को ठिकाने लगा दिया गया है… जैसा आपने कहा था।

कुछ पल सन्नाटा रहता है। लड़की धीरे से अपना सिर थोड़ा झुकाती है।

लड़की (बहुत शांत लेकिन डर पैदा करने वाली आवाज़ में) बोली - 
अगला क्रिमिनल कौन है?

गुंडा एक पल रुकता है।

गुंडा बोला - 
मैडम… शहर में तीन नाम और हैं… लेकिन हम पुष्टि कर रहे हैं।

लड़की कुर्सी से धीरे से उठती है। उसके कदमों की आवाज़ पूरे कमरे में गूंजती है।

लड़की बोली - 
याद रखना… मैं किसी बेगुनाह को हाथ नहीं लगाती।

थोड़ा रुककर वह आगे कहती है—
लेकिन जिनको कानून भी सजा नहीं दे पाता… उनके लिए मैं आख़िरी दरवाज़ा हूँ।

गुंडा पसीने में भीगा हुआ खड़ा है।

गुंडा बोला - 
मैडम… लोग आपको साइको killer कह रहे हैं… कोई आपका नाम नहीं जानता…

लड़की हल्का सा सिर उठाती है। चेहरा अब भी छाया में है।

लड़की बोली - 
नाम मायने नहीं रखते… काम रखते हैं।

वह दीवार की तरफ देखती है, जहाँ वही रहस्यमयी वाक्य लिखा है। कैमरा धीरे-धीरे उसके चेहरे की तरफ बढ़ता है…लेकिन ठीक उससे पहले स्क्रीन अंधेरी हो जाती है।

सिर्फ उसकी आवाज़ गूंजती है—
अपराध का अंत… मेरे हाथों से लिखा जाता है।