Her Silent Secret - 7 Sonam Brijwasi द्वारा नाटक में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

Her Silent Secret - 7

चौहान हवेली – आधी रात
विवान अभी भी कुछ समझ नहीं पा रहा था। उसकी छोटी उंगलियाँ बार-बार संपूर्णा का हाथ पकड़ रही थीं। उसने मासूमियत से विराट की तरफ देखा।

विवान बोला —
पापा… मम्मा जमीन पे क्यों सो रही हैं?

विराट की आँखें फिर भर आईं।

लेकिन विवान वहीं बोलता रहा—
इनसे बोलो ना room में चलें…

उसकी आवाज़ बिल्कुल मासूम थी।

विवान बोला —
मुझे आप दोनों के साथ सोना है…

विवान फिर धीरे से संपूर्णा के पास बैठ गया। उसने अपनी छोटी हथेली से संपूर्णा का गाल छुआ।

विवान बोला —
मम्मा… उठो ना…

उसकी आँखों में अब हल्की नमी आने लगी थी।

विवान बोला —
मुझे मम्मा से सुबह वाली अधूरी कहानी सुननी है…

पूरे हॉल में सन्नाटा छा गया।काजल अपने आँसू रोक नहीं पा रही थी । गंगा जी मुंह पर हाथ रखकर रो रही थीं।

विवान ने फिर मासूमियत से कहा—
मम्मा बोल रही थीं वो मुझे chocolate देंगी…

उसने संपूर्णा का हाथ हिलाया।

विवान बोला —
मम्मा… उठो ना…

लेकिन अब वो हाथ कभी नहीं हिलने वाला था। विराट अब टूट चुका था। उसने अपने बेटे को देखा…जो अभी भी उम्मीद लगाए बैठा था कि उसकी मम्मा उठ जाएँगी। वो धीरे-धीरे विवान के पास आया। घुटनों के बल बैठ गया। फिर अपने बेटे को बाँहों में भर लिया।

विवान रोते हुए बोला—
पापा… मम्मा बात क्यों नहीं कर रहीं?

विराट की आवाज़ गले में अटक गई। उसने विवान के सिर को अपने सीने से लगा लिया।

विराट (टूटती आवाज़ में) बोला —
मम्मा… बहुत दूर चली गई हैं बेटा…

विवान तुरंत सिर उठाकर बोला—
तो हम उन्हें ले आएंगे ना!

बस…यही सुनकर विराट पूरी तरह बिखर गया। उसने पहली बार महसूस किया संपूर्णा सिर्फ उसकी पत्नी नहीं थी…उसके बेटे की पूरी दुनिया थी। विवान धीरे-धीरे रोते-रोते विराट की गोद में सो गया।

लेकिन सोते हुए भी उसके होंठों पर एक ही शब्द था—
मम्मा…

और दूसरी तरफ…संपूर्णा हमेशा के लिए खामोश पड़ी थी। उस रात…एक अधूरी कहानी हमेशा के लिए अधूरी रह गई।

पूरा चौहान परिवार जैसे अंदर से बिखर चुका था। जिस घर में कभी हँसी गूंजती थी…जहाँ संपूर्णा की आवाज़ हर कोने में जान भर देती थी…आज वही घर मौत की खामोशी से भरा था।
उनके घर की रौनक…आज सफेद चादर में ज़मीन पर निढाल पड़ी थी। यहाँ तक कि पुलिस वालों की आँखें भी नम थीं। एक महिला constable चुपके से आँसू पोंछ रही थी। क्योंकि उन्होंने सिर्फ एक dead body नहीं देखी थी उन्होंने एक परिवार को टूटते देखा था।

विराट अब भी संपूर्णा के पास बैठा था। उसकी आँखें लाल हो चुकी थीं। होंठ सूख चुके थे। लेकिन वो अब भी उसका हाथ पकड़े बैठा था…जैसे छोड़ देगा तो वो सच में चली जाएगी। गंगा जी काँपते कदमों से उसके पास आईं। उनकी आवाज़ रोते-रोते टूट रही थी।

गंगा जी बोलीं —
बेटा… अंतिम संस्कार का समय हो रहा है…

पूरा हॉल फिर रोने की आवाज़ों से भर गया। लेकिन तभी विराट धीरे-धीरे खड़ा हुआ। उसकी आँखों में अब आँसू कम…
और आग ज्यादा थी। उसने संपूर्णा की तरफ देखा।

फिर बहुत भारी आवाज़ में बोला—
पहले postmortem होगा।

सब उसकी तरफ देखने लगे। विराट की मुट्ठियाँ कस चुकी थीं।
उसकी आवाज़ अब ठंडी हो गई थी।

विराट बोला —
जिसने भी मेरी संपूर्णा को मारा है…

उसकी आँखों में खतरनाक गुस्सा उतर आया।

विराट बोला —
मैं उसे जान से मार दूँगा।

हॉल में सन्नाटा छा गया। आज पहली बार…सबको विराट से डर महसूस हुआ। वो अब सिर्फ टूटा हुआ पति नहीं था। वो एक ऐसा आदमी बन चुका था जिससे उसकी सबसे कीमती चीज़ छीन ली गई थी। और ऐसे इंसान के अंदर सिर्फ दो चीजें बचती हैं दर्द… और बदला। उन आँखों में अब प्यार नहीं था…सिर्फ खामोश गुस्सा था। 

और कहीं दूर संयोगिता अपनी कार में बैठी थी। उसके हाथों पर अब भी संपूर्णा का सूखा हुआ खून लगा था। उसने धीरे से वही हाथ देखा…और आँखें बंद कर लीं। दो लोग उस रात बदल चुके थे एक जिसने अपना प्यार खोया था। और एक जिसने एक वादा।

संयोगिता का गुप्त कमरा – आधी रात
पूरा कमरा अंधेरे में डूबा हुआ था। सिर्फ एक स्क्रीन जल रही थी। उस नीली रोशनी में संयोगिता का चेहरा आधा दिखाई दे रहा था। उसकी आँखों में वही खतरनाक ठंडापन था वही साइको killer वाली चमक। लेकिन आज…उन आँखों के पीछे कहीं दर्द भी छिपा था। स्क्रीन पर एक digital ID खुली हुई थी।

Name : Sampurnaa Chauhan
Position : CEO

संयोगिता चुपचाप उस फोटो को देख रही थी। वो चेहरा…जो बिल्कुल उसके जैसा था।

उसके कानों में फिर वही आखिरी शब्द गूंजने लगे—
मेरे पति और मेरे बच्चे का ख्याल रखना…

संयोगिता की उंगलियाँ धीरे-धीरे टेबल पर कस गईं। तभी उसकी स्क्रीन पर कुछ files flash हुईं। वही criminals…वही MLA connection…और एक voice recording।
संयोगिता ने तुरंत उसे play किया।

आवाज़ आई —
CEO तो मर गई… लेकिन उसका बच्चा जिंदा है।

संयोगिता की आँखें अचानक बदल गईं।

दूसरी आवाज़ —
अगर लड़का बड़ा हुआ तो सबूत बन सकता है… खत्म कर दो उसे।

संयोगिता एकदम खड़ी हो गई। उसकी साँसें तेज हो गईं।

संयोगिता बोली —
विवान…

उसे पहली बार एहसास हुआ खतरा अभी खत्म नहीं हुआ था।
संपूर्णा मर चुकी थी। लेकिन अब उसकी आखिरी निशानी…
उसका बेटा निशाने पर था। संयोगिता ने धीरे से अपनी gun उठाई। उसकी आँखों में अब मौत जैसा सन्नाटा लौट आया। लेकिन इस बार उसका गुस्सा अलग था। अब वो सिर्फ बदला नहीं लेना चाहती थी वो किसी को बचाना भी चाहती थी। उसने धीरे से स्क्रीन पर विवान की फोटो को छुआ। चार साल का छोटा बच्चा…मासूम मुस्कान के साथ।

संयोगिता की आवाज़ बहुत धीमी थी—
मैंने वादा किया था…

संयोगिता तेजी से कमरे से बाहर निकलती है। काली leather jacket…हाथ में gun…आँखों में मौत। उसकी कार अंधेरे में तेज रफ्तार से निकल जाती है। और दूसरी तरफ चौहान हवेली में छोटा विवान अपनी मम्मा की फोटो पकड़कर सो रहा था।
उसे नहीं पता था आज रात…मौत उसकी तरफ बढ़ रही है।