Her Silent Secret - 6 Sonam Brijwasi द्वारा नाटक में हिंदी पीडीएफ

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Her Silent Secret - 6

सुनसान हाईवे – रात

कुछ देर पहले तक जो लड़की टूटकर रो रही थी…अब धीरे-धीरे शांत हो चुकी थी। संपूर्णा की lifeless body अब भी सड़क किनारे पड़ी थी। उस लड़की ने धीरे से अपनी आँखें उठाईं।
और उसी पल उसकी आँखों में वापस वही ठंडी चमक लौट आई। वही खतरनाक सन्नाटा…जिससे पूरा शहर डरता था। अब वहाँ कोई बेबस लड़की नहीं थी। अब वहाँ सिर्फ साइको killer मौजूद थी।बहवा उसके खुले बालों को उड़ा रही थी। वो धीरे-धीरे खड़ी हुई।

उसके होंठों से एक नाम निकला—
संयोगिता सिंह।

हाँ…यही उसका नाम था। वो लड़की…जो अपराधियों को मौत देती थी। जो कानून से बच निकले दरिंदों का आखिरी डर था। संयोगिता की नजर सड़क पर पड़े खून पर गई। संपूर्णा का खून। उसकी मुट्ठियाँ कस गईं।

संयोगिता (ठंडी आवाज़ में) बोली - 
उन्होंने गलत इंसान को छुआ है…

उसकी आँखों में अब इंसानी दर्द नहीं था। अब वहाँ सिर्फ बदला था। 

संयोगिता बोली - 
अब कोई नहीं बचेगा।

उसने अपनी gun उठाई। चेहरे पर कोई भावना नहीं थी। जैसे अंदर का इंसान फिर से मर चुका हो। आज…उसका साइको killer पूरी तरह जाग चुका था। वो उन लोगों को सिर्फ मारना नहीं चाहती थी वो चाहती थी कि वो डर-डर कर मरें। संयोगिता ने एक आखिरी बार संपूर्णा की तरफ देखा। कुछ पल के लिए उसकी आँखों में हल्का दर्द लौटा।

उसे संपूर्णा की आखिरी बात याद आई—
मेरे पति और बच्चे का ख्याल रखना…

लेकिन अगले ही पल उसका चेहरा फिर पत्थर जैसा हो गया।
वो मुड़ी…अपनी काली कार में बैठी…और तेज रफ्तार में वहाँ से निकल गई। शहर के बीचों-बीच एक ऊँची बिल्डिंग।

ऊपर बड़े अक्षरों में लिखा था—
L“Singh Global Tech”

कार सीधे basement में जाकर रुकी। संयोगिता अंदर उतरी। पूरी बिल्डिंग शांत हो गई। गार्ड्स तक उसकी तरफ देखने से डरते थे। क्योंकि वो सिर्फ कंपनी की owner नहीं थी वो एक ऐसा तूफान थी…जिसके अंदर अंधेरा बसता था।
और उस कंपनी की वो अकेली मालकिन थी।

संयोगिता अपने केबिन में जाकर रुकी। उसने शीशे में खुद को देखा। लेकिन उसे अपना चेहरा नहीं दिखा…उसे सिर्फ संपूर्णा दिखाई दी। उसकी आवाज़…उसका आखिरी वादा…संयोगिता ने धीरे से अपनी आँखें बंद कीं।

फिर बहुत ठंडी आवाज़ में बोली—
अब से… तुम्हारा बदला भी मेरा है।

कमरे की लाइट धीरे-धीरे बुझ जाती है। और अंधेरे में सिर्फ उसकी आँखें चमकती रह जाती हैं।

चौहान हवेली – रात 11 बजे

पूरा चौहान परिवार हॉल में बैठा था। गंगा जी बार-बार दरवाज़े की तरफ देख रही थीं। अर्जुन चौहान लगातार फोन मिला रहे थे। काजल की आँखों में डर साफ दिख रहा था। वर्षा हाथ जोड़कर भगवान से प्रार्थना कर रही थी। और विराट…वो बस चुप खड़ा था। लेकिन उसकी आँखों में बेचैनी हर पल बढ़ती जा रही थी।

विराट (धीरे, खुद से) बोला - 
उसने कहा था… 9 बजे तक आ जाएगी…

उसने फिर कॉल मिलाया।

लेकिन हर बार वही—
The number you are trying to call is switched off…

विराट की उंगलियाँ काँपने लगीं। उसे सुबह वाली बेचैनी याद आने लगी।

ऊपर कमरे में…विवान अपने छोटे teddy को पकड़े गहरी नींद में सो रहा था।उसे नहीं पता था उसकी दुनिया उससे दूर जा चुकी है।

तभी—
ठक…हवेली का बड़ा दरवाज़ा धीरे से खुला।बसभी की नजरें उधर चली गईं। दरवाज़े पर पुलिस खड़ी थी।और उनके पीछे…
एक dead body।सफेद कपड़े से ढकी हुई। पूरा हॉल अचानक सन्नाटे में डूब गया। एक पुलिस officer आगे बढ़ा।
उसकी आवाज़ धीमी थी।

पुलिस officer बोला - 
आप सबको… हिम्मत रखनी होगी…

गंगा जी के हाथ काँपने लगे। काजल रोते हुए पीछे हट गई।विराट बस उस body को घूर रहा था।जैसे उसका दिल सच जान चुका हो…लेकिन दिमाग अब भी मानने को तैयार न हो।
पुलिस वालों ने धीरे से body नीचे रखी। फिर सफेद कपड़ा हटाया गया। और अगले ही पल पूरा घर टूट गया।वो…संपूर्णा थी।बउसका चेहरा शांत था।लेकिन वो हमेशा के लिए खामोश हो चुकी थी।

विराट की आँखें फैल गईं। उसने जैसे सांस लेना ही भूल गया हो। एक पल में उसके पैरों ने जवाब दे दिया। वो लड़खड़ाकर नीचे गिर पड़ा।

विराट (टूटती आवाज़ में) बोला - 
न… नहीं…

उसकी आँखों से आँसू बहने लगे। वो घुटनों के बल रेंगते हुए संपूर्णा के पास आया। काँपते हाथों से उसने उसका चेहरा छुआ। उसकी त्वचा बर्फ जैसी ठंडी थी। गंगा जी जोर-जोर से रोने लगीं।

गंगा जी बोलीं - 
मेरी बच्ची…!

काजल फूट-फूट कर रो रही थी। प्रेम की आँखें लाल हो चुकी थीं। ऋषभ और अर्जुन चौहान भी खुद को संभाल नहीं पा रहे थे। पूरा घर चीखों से भर गया। विराट ने संपूर्णा को अपनी बाँहों में उठा लिया। उसका सिर अपने सीने से लगा लिया।

विराट (रोते हुए) बोला - 
उठो संपूर्णा… देखो मैं आ गया…

उसकी आवाज़ काँप रही थी।

विराट बोला - 
तुमने कहा था जल्दी आओगी… फिर क्यों नहीं आई…?

लेकिन अब जवाब देने के लिए संपूर्णा वहाँ नहीं थी। ऊपर कमरे में सोता हुआ विवान अचानक नींद में मुस्कुराया।

विवान (नींद में) बोला - 
मम्मा…

और नीचे हॉल में उसकी माँ की dead body पड़ी थी। उस रात…एक घर से सिर्फ एक इंसान नहीं गया था। उस घर की धड़कन चली गई थी।

विराट अभी भी ज़मीन पर बैठा था। संपूर्णा उसकी बाँहों में थी।
लेकिन शायद उसका दिमाग अब भी इस सच को मानने से इंकार कर रहा था। उसने काँपते हाथों से संपूर्णा का चेहरा पकड़ लिया।

विराट (टूटती आवाज़ में) बोला - 
देखो संपूर्णा… मुझे ऐसे मज़ाक बिल्कुल पसंद नहीं हैं…

उसकी आँखों से आँसू लगातार गिर रहे थे।

विराट बोला - 
मुझे पता है… तुम मज़ाक कर रही हो…

वो उसके माथे को बार-बार चूमने लगा।

विराट बोला - 
Please… उठो ना…

लेकिन संपूर्णा बिल्कुल शांत थी। विराट अब पूरी तरह टूट चुका था। वो बार-बार उसके चेहरे को चूम रहा था…उसके बाल सहला रहा था…जैसे वो उसे वापस जगा लेगा।

विराट बोला - 
तुम मुझे छोड़कर नहीं जा सकती… सुन रही हो ना?

उसकी साँसें तेज हो गईं। अचानक उसकी आँखों के आगे अंधेरा छाने लगा। और अगले ही पल वो वहीं लड़खड़ाकर गिर पड़ा। सब लोग घबरा गए।

काजल चिल्लाई -
भैया!

प्रेम और ऋषभ ने उसे संभाला। लेकिन कुछ ही सेकंड बाद विराट फिर उठ बैठा। जैसे उसे सिर्फ एक ही चीज़ याद थी—
संपूर्णा।
वो फिर घुटनों के बल उसके पास आ गया। उसकी हालत अब किसी टूटे हुए इंसान जैसी नहीं…बल्कि किसी ऐसे आदमी जैसी थी जिसकी पूरी दुनिया खत्म हो चुकी हो।

उसी समय ऊपर कमरे में…विवान की आँख खुली। उसे नीचे से रोने की आवाज़ें सुनाई दे रही थीं। वो घबराकर उठ बैठा।

विवान बोला - 
मम्मा…?

उसने इधर-उधर देखा। जब मम्मा कमरे में नहीं दिखीं…तो वो छोटे-छोटे कदमों से नीचे भागा। विवान नीचे हॉल में आया।
और वहाँ का माहौल देखकर रुक गया। सब रो रहे थे। पापा जमीन पर बैठे थे। वो धीरे-धीरे आगे बढ़ा।बफिर उसकी नजर संपूर्णा पर पड़ी। वो मासूमियत से मुस्कुराया।

विवान बोला - 
मम्मा!

वो दौड़कर उसके पास आ गया। विवान ने संपूर्णा का हाथ पकड़ लिया।

विवान बोला - 
मम्मा उठो ना… आप यहाँ क्यों सो रही हो?

कोई जवाब नहीं आया। विवान ने फिर धीरे से उसे हिलाया।

विवान बोला - 
मम्मा… देखो मैं उठ गया…
Mumma चलो ना room में सोते हैं ...आप जमीन पे क्यों सो रही हो ?

उसकी छोटी आवाज़ पूरे हॉल में गूंज गई। और वही आवाज़…
सबका दिल चीर गई। विराट अब और नहीं सह पाया। उसने विवान को कसकर अपनी छाती से लगा लिया। और पहली बार…वो जोर-जोर से रो पड़ा। ऐसा रोना…जो किसी आदमी का नहीं…एक टूटे हुए पति और बिखरे हुए पिता का था।

विराट (रोते हुए) बोला - 
तुम्हारी मम्मा… हमें छोड़कर चली गई बेटा…

लेकिन चार साल का विवान मौत का मतलब कहाँ समझता था।

वो सिर्फ बार-बार एक ही बात कह रहा था—
मम्मा उठ जाएंगी ना?

एक तरफ संपूर्णा की शांत body…दूसरी तरफ टूट चुका विराट…और बीच में रोता हुआ छोटा विवान। उस रात…एक बच्चे ने पहली बार दर्द देखा था।