विराट छिपकर सब देख रहा था। उसने देखा कि कैसे महक और उसके आदमी एक बंद कमरे के पास खड़े थे। अंदर से सिसकियों की आवाज़ आ रही थी—वर्षा की आवाज़।
विराट ने हिम्मत जुटाई और अंदर घुसने की कोशिश की। लेकिन तभी, पीछे से एक आदमी ने उसे पकड़ लिया। विराट ने संघर्ष किया, लेकिन दो अन्य आदमियों ने उसे जकड़ लिया और जमीन पर गिरा दिया। तभी संयोगिता आ धमकी। महक मुस्कुराते हुए आगे बढ़ी। उसके हाथ में एक चाकू था।
महक बोली-
ओह! तो आ गईं तुम, संयोगिता। मैं जानती थी कि तुम जरूर आओगी। तुम्हें अपने 'नए परिवार' की चिंता है, है ना?
विराट जमीन पर पड़ा हुआ था, उसके मुंह पर टेप लगा दिया गया था। वह गुस्से और बेबसी से संयोगिता की तरफ देख रहा था। तभी संयोगिता दरवाजे पर खड़ी थी। उसके चेहरे पर कोई डर नहीं था। उसकी आँखों में वही 'साइको किलर' वाला पागलपन जाग उठा था जो तभी प्रकट होता था जब कोई अपराध उसके सामने होता था। उसकी पुतलियां फैल गई थीं और चेहरे पर एक भयानक शांति थी। महक ने चाकू हवा में लहराया।
महक बोली -
अब बताओ, क्या करोगी? पुलिस बुलाओगी? तो वर्षा मर जाएगी। भागोगी? तो विराट मर जाएगा।
संयोगिता धीरे-धीरे आगे बढ़ी। उसके कदमों में एक अजीब सा वजन था, जैसे मौत चल रही हो।
संयोगिता (बिल्कुल ठंडी, कांपती हुई लेकिन खतरनाक आवाज में) बोली -
आखिरी बार बोल रही हूँ। छोड़ दो उन्हें। नहीं तो अंजाम इतना बुरा होगा कि तुम लोगों की रूह कांप जाएगी।
महक हँसी।
महक बोली-
डरावनी बातें मत करो, संयोगिता। तुम सिर्फ एक औरत हो।
संयोगिता ने अचानक तेजी से अपना हाथ बढ़ाया। उसकी जेब से वह छोटा ब्लेड निकला जो वह हमेशा रखती थी। लेकिन इस बार, उसने ब्लेड नहीं, बल्कि अपने बैग से एक छोटी सी ग्लास की शीशी निकाली और जमीन पर फेंक दी।
*छन!*
शीशी टूटी और उसमें से एक तीखी, नीली गैस फैलने लगी। यह एक स्ट्रॉंग स्लीपिंग एजेंट था जिसे संयोगिता ने अपनी सुरक्षा के लिए तैयार किया था। महक और उसके आदमी हैरान रह गए।
महक बोली -
यह क्या...?
लेकिन गैस तेजी से फैल रही थी। महक और उसके आदमी खांसने लगे। उनकी आँखें भारी होने लगीं। संयोगिता ने अपना मास्क पहले ही लगा लिया था। वह तेजी से आगे बढ़ी। उसने सबसे पहले उस आदमी को मारा जिसने विराट को पकड़ा था। एक तेज वार उसके गर्दन के नसों पर। आदमी बेहोश होकर गिर पड़ा। दूसरे आदमी ने हमला करने की कोशिश की, लेकिन संयोगिता ने उसके हाथ को मोड़ दिया और उसे जमीन पर गिरा दिया। महक अभी भी खड़ी थी, लेकिन गैस के असर से वह लड़खड़ा रही थी।
महक (हांपते हुए)बोली -
तुम... तुम पागल हो...
संयोगिता महक के करीब गई। उसकी आँखों में अब कोई इंसानियत नहीं थी।
संयोगिता बोली -
पागल? नहीं महक। मैं बस न्याय कर रही हूँ।
उसने महक के हाथ से चाकू छीन लिया और उसे जमीन पर फेंक दिया। फिर उसने महक के गले को जकड़ लिया। महक की साँसें अटकने लगीं।
संयोगिता (फुसफुसाते हुए) बोली-
राहुल की मौत का बदला लेना चाहती थी? अब तुम भी उसी रास्ते पर चलोगी।
लेकिन तभी, विराट ने टेप तोड़ने की कोशिश की और जोर से चीखा।
विराट बोला-
संयोगिता! रुको! उसे मत मारो!
संयोगिता रुक गई। उसने विराट की तरफ देखा। विराट की आँखों में डर नहीं, बल्कि संयोगिता के लिए चिंता थी।
विराट बोला-
अगर तुमने इसे मारा, तो तुम भी एक कातिल बन जाओगी। और विवान... विवान को अपनी माँ को जेल में नहीं देखना होगा।
संयोगिता का हाथ कांपने लगा। विराट की बात ने उसे झकझोर दिया।उसने महक को छोड़ दिया। महक जमीन पर गिर पड़ी, खांस रही थी। संयोगिता ने विराट की तरफ देखा।
संयोगिता बोली-
तो क्या करें? इसे छोड़ दें?
विराट ने सिर हिलाया।
विराट बोला-
नहीं। पुलिस को बुलाते हैं। लेकिन इसे जिंदा पकड़ते हैं। ताकि यह सब सच दुनिया के सामने ला सके।
संयोगिता ने गहरी सांस ली। उसने अपना ब्लेड वापस जेब में रख लिया। तभी, कमरे का दरवाजा खुला और वर्षा बाहर निकली। वह रो रही थी, लेकिन सुरक्षित थी।
वर्षा बोली-
संयोगिता... विराट ... शुक्रिया।
संयोगिता ने वर्षा को गले लगा लिया। लेकिन महक, जो जमीन पर पड़ी थी, अचानक हँसने लगी।
महक बोली-
तुम सोचती हो कि तुम जीत गईं? यह तो सिर्फ शुरुआत थी। मेरे पास और भी लोग हैं। और वे तुम्हारे विवान को ढूंढ लेंगे।
संयोगिता की आँखों में फिर वही खतरनाक चमक आ गई।
संयोगिता बोली-
अगर किसी ने विवान को हाथ लगाया, तो मैं पूरे शहर को जला दूंगी।
विराट ने तुरंत पुलिस को कॉल किया। लेकिन संयोगिता जानती थी कि महक सच बोल रही थी। खतरा अभी टला नहीं था। और अब, विराट को संयोगिता के असली चेहरे का पता चल चुका था।
संयोगिता को कभी पुलिस पर भरोसा नहीं था। उसके अतीत के अनुभव उसे सिखा चुके थे कि कानून की गति धीमी होती है और कई बार अपराधी तकनीकी खामियों या रिश्वत के चलते बच निकलते हैं। उसने देखा था कि कैसे उसके द्वारा मारे गए कई अपराधियों के साथी छूटकर फिर से समाज में घूम रहे थे।
इसलिए, वह बिल्कुल चुप थी।
उसने मन ही मन तय कर लिया था—
जब महक बाहर आएगी, जब पुलिस उसे ले जाने वाली होगी, तभी मैं उसे खत्म कर दूंगी। एक ऐसा हादसा जो आत्मरक्षा या भागने की कोशिश में हुआ लगेगा।
विराट को नहीं पता था कि संयोगिता शहर की वही 'फैंटम किलर' है, जिसकी पहचान आज तक कोई नहीं लगा पाया था। वह इतनी प्रोफेशनल थी कि उसने कभी कोई सबूत नहीं छोड़ा था। पुलिस के रिकॉर्ड में वह नाम भी नहीं था, सिर्फ अफवाहें थीं।
लेकिन विराट ने पहली बार संयोगिता की आँखों में वह पागलपन देखा था। वह जुनून, वह ठंडक, वह निर्णय... यह किसी साधारण गुस्से वाली महिला का व्यवहार नहीं था। यह किसी ऐसे शिकारी का व्यवहार था जो अपने शिकार को मारने के लिए पलों का इंतजार कर रहा है।
विराट ने सोचा -
शायद वह गुस्से में थी। शायद डर की वजह से।
लेकिन उसका दिल मानने को तैयार नहीं था। पुलिस की गाड़ियां सायरन बजाते हुए पहुंचीं। इंस्पेक्टर वर्मा सबसे आगे थे। उन्होंने देखा कि महक और उसके आदमी बेहोश पड़े हैं, और वर्षा सुरक्षित है। इंस्पेक्टर वर्मा ने संयोगिता और विराट की तरफ देखा।
इंस्पेक्टर वर्मा बोले -
क्या हुआ यहाँ? ये लोग कैसे बेहोश हैं?
विराट ने संयोगिता की तरफ देखा। संयोगिता ने शांत स्वर में जवाब दिया।
संयोगिता बोली-
उन्होंने हम पर हमला किया। मैंने अपनी सुरक्षा के लिए कुछ किया। गैस लीक हो गई और ये नशे में हैं।
इंस्पेक्टर वर्मा ने शक भरी नजरों से संयोगिता को देखा, लेकिन कोई सबूत नहीं था। महक और उसके आदमियों के पास हथियार थे, इसलिए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। महक को उठाते समय, उसने संयोगिता की तरफ देखा और मुस्कुराई।
महक (धीमी आवाज में) बोली-
तुम जीतीं, संयोगिता। लेकिन यह खेल खत्म नहीं हुआ। मेरे बॉस... वह तुम्हें ढूंढ लेगा।
संयोगिता ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। बस उसे घूरती रही।
जैसे ही पुलिस महक को गाड़ी में बैठा रही थी, संयोगिता ने अपना हाथ अपनी जेब में डाला। उसकी उंगलियां उस छोटे ब्लेड को छू रही थीं। वह बस एक मौके की तलाश में थी। एक ऐसा मौका जब पुलिस का ध्यान भटके और वह महक पर वार कर सके। लेकिन विराट ने संयोगिता का हाथ पकड़ लिया।
विराट (धीमे स्वर में) बोला -
संयोगिता... नहीं।
संयोगिता ने विराट की तरफ देखा। विराट की आँखों में प्रार्थना थी।
विराट बोला-
अगर तुमने अभी कुछ किया, तो सब खत्म हो जाएगा। विवान को अपनी माँ को जेल में नहीं देखना होगा। प्लीज... मेरे लिए रुक जाओ।
संयोगिता का हाथ कांप रहा था। विराट की बात ने उसे रोक दिया। नहीं इसलिए कि वह कानून का सम्मान करती थी, बल्कि इसलिए क्योंकि विराट ने 'विवान' का नाम लिया था।
उसने ब्लेड को जेब में वापस सरका दिया।
संयोगिता (मन में) बोली-
ठीक है विराट। आज के लिए रुक जाती हूँ। लेकिन अगर महक बच गई... तो अगली बार कोई नहीं रोकेगा मुझे।
पुलिस गाड़ी चली गई। महक को थाने ले जाया गया। विराट ने राहत की सांस ली। उसने संयोगिता के कंधे पर हाथ रखा।
विराट बोला-
शुक्रिया संयोगिता। तुमने हमारी जान बचाई।
संयोगिता ने विराट की तरफ देखा। उसके चेहरे पर कोई मुस्कान नहीं थी।
संयोगिता बोली-
मैंने सिर्फ अपनी जिम्मेदारी निभाई है, मिस्टर विराट। अब चलिए, वर्षा भाभी को घर ले चलते हैं।
वे वापस कार में बैठे। विराट ड्राइविंग कर रहा था। संयोगिता पीछे की सीट पर बैठी थी, लेकिन उसकी नजरें सड़क के हर मोड़ पर थीं। विराट ने रियरव्यू मिरर में संयोगिता को देखा।
विराट (मन में) बोली -
वह आँखें... वह पागलपन... क्या यह सिर्फ गुस्सा था? या कुछ और?
लेकिन वह इस सवाल का जवाब अभी नहीं जानता था। और संयोगिता? वह जानती थी कि महक का 'बॉस' कौन है। और वह उससे मिलने के लिए तैयार थी। क्योंकि अब खेल व्यक्तिगत हो चुका था।