Her Silent Secret - 31 Sonam Brijwasi द्वारा नाटक में हिंदी पीडीएफ

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Her Silent Secret - 31

वर्षा के चेहरे पर एक अजीब सी चमक थी, लेकिन उसकी आँखों में वही जलन और कड़वाहट भी झलक रही थी। वह ड्राइंग रूम में बैठी थी, हाथ में एक प्रेगनेंसी टेस्ट किट था जिस पर दो गहरी लाल लाइनें थीं। काजल उसके पास बैठी थी और खुशी से तालियां बजा रही थी।

काजल बोली- 
वाह भाभी! सच में? आप प्रेग्नेंट हो? यह तो बहुत बड़ी खुशखबरी है! अब घर में फिर से बच्चे की किलकारियां गूंजेंगी।

वर्षा ने मुस्कुराने की कोशिश की, लेकिन उसकी नजरें संयोगिता की तरफ गईं, जो विवान के साथ सोफे पर बैठी थी।

 वर्षा के मन में ख्याल आया—
मैं घर की सबसे बड़ी बहू हूँ, सालों से इंतजार कर रही थी, और आज जब मैं माँ बनने वाली हूँ, तो सबकी नजरें संयोगिता और विवान पर हैं।

शाम को जब विराट ऑफिस से लौटा, तो काजल ने उसे यह खुशखबरी सुनाई। विराट के चेहरे पर genuine खुशी दिखाई दी। वह दौड़कर वर्षा के पास गया।

विराट बोला- 
सच में भाभी? यह तो कमाल की बात है! हमारे परिवार में फिर से एक नया मेहमान आने वाला है।

विवान यह सब देखकर उत्साहित हो गया। वह दौड़कर वर्षा के पास गया।

विवान बोला- 
ताई जी! क्या मेरा छोटा भाई या बहन आएगा?

वर्षा ने विवान के सिर पर हाथ फेरा, लेकिन उसकी आँखें संयोगिता को घूर रही थीं।

वर्षा बोली - 
हाँ विवान... शायद।

तभी संयोगिता उठी। वह धीरे-धीरे वर्षा के पास आई। उसके चेहरे पर कोई ईर्ष्या नहीं, कोई जलन नहीं थी। बस एक गहरी समझदारी और सहानुभूति थी। संयोगिता ने वर्षा के कंधे पर हाथ रखा।

संयोगिता (कोमल स्वर में) बोली - 
भाभी... बधाई हो। यह आपके लिए बहुत खास समय है।

वर्षा ने संयोगिता की तरफ देखा, जैसे वह किसी चुनौती का इंतजार कर रही हो। लेकिन संयोगिता की आँखों में सिर्फ सच्चाई थी।

संयोगिता आगे बोली - 
भाभी, अगर आपको किसी भी चीज की जरूरत हो, तो मुझे बताइए। चाहे वो खाना हो, दवाई हो, या बस किसी से बात करने का मन हो... कितनी भी रात हो, आप मेरे पास आ जाना। मैं हमेशा उपलब्ध रहूंगी।

यह कहकर संयोगिता ने वर्षा के हाथ को हल्के से दबाया।
वर्षा स्तब्ध रह गई। उसने उम्मीद की थी कि संयोगिता ईर्ष्या करेगी, या ठंडा व्यवहार करेगी। लेकिन संयोगिता का यह व्यवहार उसकी सभी धारणाओं को तोड़ रहा था। विराट ने संयोगिता की तरफ देखा। उसे संयोगिता की इस परिपक्वता और दयालुता पर गर्व हुआ।

विराट (मन में) बोला - 
संयोगिता सिर्फ एक अच्छी पत्नी नहीं, बल्कि एक अच्छी इंसान भी है।

लेकिन वर्षा के मन में शक अभी भी बना हुआ था।

वर्षा (मन में) बोली- 
यह सब नाटक क्यों कर रही है? क्या वह मुझे कमजोर दिखाना चाहती है? या फिर वह विराट का दिल जीतने के लिए यह सब कर रही है?

वर्षा ने झूठी मुस्कान के साथ जवाब दिया।

वर्षा बोली- 
शुक्रिया संयोगिता। देखते हैं, आगे क्या होता है।

संयोगिता वापस विवान के पास बैठ गई। विवान अब वर्षा के पेट को देखकर खुश हो रहा था।

विवान बोला- 
मम्मा, क्या मैं अपने छोटे भाई या बहन को गोद में ले सकता हूँ?

संयोगिता मुस्कुराई।

संयोगिता बोली- 
जब वह आएगा, बाबू। तब तक तुम उसकी देखभाल के लिए तैयार रहो।

लेकिन संयोगिता को नहीं पता था कि वर्षा की यह प्रेगनेंसी सिर्फ एक खुशखबरी नहीं थी। यह उस अजनबी के प्लान का हिस्सा थी। क्योंकि उस अजनबी को पता था कि अगर वह विवान को नुकसान पहुँचाता है, तो संयोगिता टूट जाएगी। लेकिन अगर वह वर्षा के बच्चे को नुकसान पहुँचाता है, तो पूरा चौहान परिवार टूट जाएगा। और संयोगिता को इसका जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

अजनबी (दूर से यह सब देखते हुए) बोला- 
खेल अब और दिलचस्प हो गया है। एक नया शिकार... और एक नया बहाना।

रात गहराई। घर में खुशियां मनाई जा रही थीं, लेकिन अंधेरे में एक साजिश रची जा रही थी। और संयोगिता, जो सबकी रक्षा करना चाहती थी, अनजाने में उस जाल के बीच में फंस चुकी थी।

वर्षा ने एक दिन दोपहर में संयोगिता से कहा, उसके चेहरे पर एक अजीब सी बेचैनी थी।

वर्षा बोली - 
संयोगिता! मुझे कहीं घूमने जाने का मन है। घर में मेरा दम घुटता है। विराट भाई ऑफिस में हैं, काजल दीदी अपने काम में व्यस्त हैं... बस तुम ही हो जो फ्री लग रही हो। चलो कहीं चलते हैं?

संयोगिता ने तुरंत हाँ कर दिया। उसे लगा कि शायद वर्षा अकेलेपन महसूस कर रही है और प्रेगनेंसी के हार्मोनल बदलाव की वजह से वह चिड़चिड़ी हो गई है।

संयोगिता बोली - 
जरूर भाभी। बताइए, कहाँ चलना है?

वर्षा ने एक सुनसान जगह का नाम लिया जो शहर से काफी दूर थी। संयोगिता को थोड़ा अजीब लगा, लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। उसने कार निकाली और दोनों निकल पड़ीं।

शाम ढलते-ढलते वे शहर से बाहर निकल चुकी थीं। रास्ता धीरे-धीरे सुनसान होता जा रहा था। आसपास घने पेड़ और झाड़ियां थीं। हवा में एक अजीब सी सन्नाटा था।

आधी रात का समय हो चुका था। कार हाईवे पर तेज रफ्तार से चल रही थी। दोनों के बीच बातें हो रही थीं, लेकिन वर्षा की बातों में एक अजीब सा खिंचाव था। वह बार-बार पीछे मुड़कर देख रही थी, जैसे कोई उनका पीछा कर रहा हो।

तभी अचानक...
*धड़ाम!*
कार झटके के साथ रुक गई। इंजन से धुआं निकलने लगा।
संयोगिता ने स्टेयरिंग व्हील कसकर पकड़ा।

संयोगिता बोली - 
क्या हुआ? कार क्यों रुक गई?

उसने कार स्टार्ट करने की कोशिश की, लेकिन इंजन ने सिर्फ खरखराहट की आवाज दी और फिर शांत हो गया। संयोगिता ने कार से बाहर निकलकर बोनट खोला। अंधेरे में उसे कुछ समझ नहीं आया। उसने अपना फोन निकाला टॉर्च जलाने के लिए, लेकिन नेटवर्क गायब था। 'No Service' लिखा आ रहा था।

संयोगिता (घबराहट से) बोली - 
भाभी, फोन चेक करें। शायद आपके पास नेटवर्क हो।

वर्षा ने फोन निकाला। उसका फोन भी 'No Service' दिखा रहा था। लेकिन वर्षा के चेहरे पर घबराहट नहीं, बल्कि एक अजीब सी संतुष्टि थी।

वर्षा (धीमी आवाज में) बोली- 
कोई बात नहीं संयोगिता। हम यहीं रुक सकते हैं।

संयोगिता ने चारों तरफ देखा। वे एक घने जंगल के बीचों-बीच खड़ी थीं। यह वही जगह थी... वह हाईवे का वह मोड़, जहाँ एक साल पहले संपूर्णा की हत्या हुई थी। जिस दिन संयोगिता ने अपनी आँखों के सामने संपूर्णा को मरते हुए देखा था।

संयोगिता का दिल जोर से धड़कने लगा। उसके रोंगटे खड़े हो गए। इस जगह की हर झाड़ी, हर पेड़ उसे उस रात की याद दिला रहा था। खून की गंध, चीखें, और वह अंधेरा...

संयोगिता (कांपती आवाज में) बोली - 
भाभी... यह जगह... यह तो...

वर्षा कार से नीचे उतर आई। उसने संयोगिता की तरफ देखा और मुस्कुराई। लेकिन यह मुस्कान वैसी नहीं थी जैसी पहले कभी थी। यह ठंडी और क्रूर थी।

वर्षा बोली - 
हाँ संयोगिता। यह वही जगह है। जहाँ संपूर्णा मरी थी। और जहाँ तुमने कुछ नहीं किया।

संयोगिता पीछे हटी।

संयोगिता बोली- 
आपको कैसे पता? आप यहाँ क्यों लाईं मुझे?"

तभी, जंगल के अंधेरे से कई लाल बिंदु दिखने लगे। मोटरसाइकिल की हेडलाइट्स। तीन-चार बाइक्स तेजी से उनकी तरफ बढ़ रही थीं। वर्षा ने अपनी जेब से एक सीटी निकाली और जोर से बजाई।

वर्षा (ऊंची आवाज में) बोली- 
अब खेल शुरू होता है, संयोगिता। तुमने राहुल को मारा, लेकिन क्या तुम इन सबको मार पाओगी? और सबसे बड़ी बात... क्या तुम विवान को बचा पाओगी जब उसकी 'माँ' यहाँ फंस जाएगी?

संयोगिता समझ गई। यह कोई संयोग नहीं था। यह एक योजनाबद्ध हमला था। और वर्षा... वर्षा इसमें शामिल थी।संयोगिता ने अपनी जेब से वह छोटा ब्लेड निकाला जो वह हमेशा रखती थी। उसकी आँखों में अब डर नहीं, बल्कि एक खतरनाक शांति थी।

संयोगिता (ठंडी आवाज में) बोली- 
वर्षा, तुमने गलती की। तुमने मुझे उस जगह लाकर खड़ा कर दिया है जहाँ मैंने मौत को करीब से देखा है। और अब... मैं मौत से नहीं डरती।

बाइक्स उनके पास आकर रुकीं। उनमें से उतरे लोग नकाबपोश थे। उनके हाथों में हथियार थे। लीडर ने आगे बढ़कर संयोगिता की तरफ देखा।

लीडर बोला- 
तो ये है वो 'साइको किलर'? चलो देखते हैं इसका असली चेहरा।

संयोगिता ने गहरी सांस ली। वह अकेली थी। कोई मदद नहीं थी। लेकिन उसके पास एक हथियार था—उसका गुस्सा, उसका दर्द, और अपनी जान बचाने की जिद्द। और दूर, शहर में, विराट का फोन बज रहा था। संयोगिता का फोन स्विच ऑफ था। विराट को एहसास हुआ कि कुछ बहुत गलत हो गया है।