अगली सुबह, सूरज की किरणें चौहान हाउस के बड़े कमरों में झांक रही थीं। माहौल में एक नई ताजगी थी, लेकिन संयोगिता के मन में सतर्कता का पहरा अभी भी लगा हुआ था।
विवान अपने कमरे में खेल रहा था। संयोगिता उसके लिए यूनिफॉर्म तैयार कर रही थी। उसने ध्यान से उसकी शर्ट के बटन लगाए और बैग चेक किया।
तभी काजल कमरे में आई। वह नाश्ते की ट्रे लिए हुए थी, लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब सी जिज्ञासा और थोड़ी ईर्ष्या भी थी। उसने देखा कि कैसे संयोगिता विवान को प्यार से संवार रही है।
काजल बोली -
भाभी, विवान की बस का टाइम हो गया है। ड्राइवर नीचे इंतजार कर रहा है।
संयोगिता ने बिना सिर उठाए जवाब दिया। उसकी आवाज़ में एक स्पष्ट निर्देश था।
संयोगिता बोली -
अबसे विवान न तो बस में जाएगा और न ही आएगा। उसे मैं या विराट लेकर जाएंगे और लेकर आएंगे।
काजल हैरान रह गई। उसने ट्रे मेज पर रखी और भौंहें चढ़ाईं।
काजल बोली -
लेकिन भाभी... यह तो बहुत असुविधाजनक होगा। विराट भैया ऑफिस जाते हैं, आप भी CEO हैं। बस का ड्राइवर भरोसेमंद है। फिर क्यों...
संयोगिता ने अब सिर उठाया। उसकी आँखों में वह ठंडक थी जो काजल को पहले कभी नहीं दिखी थी।
संयोगिता (दृढ़ता से) बोली -
काजल, यह मेरा फैसला है। सुरक्षा के लिहाज से यह जरूरी है। विवान अब छोटा नहीं है, और दुनिया बदल रही है। हम रिस्क नहीं ले सकते। अगर विराट व्यस्त होंगे, तो मैं खुम जाऊंगी। लेकिन बस? नहीं।
काजल कुछ कहना चाहती थी, लेकिन संयोगिता के तेवर देखकर वह चुप हो गई। उसे लगा कि शायद शादी के बाद संयोगिता अपनी_authority_ दिखा रही है।
विवान यह सब सुन रहा था। जब उसे समझ आया कि अब उसे रोज़ स्कूल बस में नहीं जाना पड़ेगा, बल्कि मम्मा या पापा उसे छोड़ेंगे, तो वह खुशी से उछल पड़ा।
विवान बोली -
यय्य! मम्मा, आप मुझे स्कूल छोड़ोगी? और पापा भी?
संयोगिता ने मुस्कुराकर उसके गाल पर हाथ फेरा।
संयोगिता बोली -
हाँ बाबू। अब तुम्हारी सुरक्षा सबसे ज्यादा जरूरी है।
विवान ने संयोगिता को गले लगा लिया।
विवान बोला -
मम्मा आप बेस्ट हो!
काजल यह नजारा देखकर मुंह बनाते हुए कमरे से बाहर चली गई। उसके मन में शक पैदा हो रहा था। उसे लगा कि संयोगिता किसी बात को छिपा रही है या फिर वह विराट पर अपना वर्चस्व जमाना चाहती है।
काजल (मन में) बोली-
इतनी सख्ती? सिर्फ सुरक्षा के लिए? या कुछ और है? भाभी के पीछे कोई राज तो नहीं?
इधर, संयोगिता ने विवान का बैग उठाया और नीचे जाने लगी। उसका फोन बजा।
एक अनजान नंबर से मैसेज आया था -
बस का रास्ता बंद कर दिया? अच्छा किया। अब सीधा निशाना बनाना आसान होगा।
संयोगिता के हाथ रुक गए। उसने मैसेज को डिलीट कर दिया और चेहरे पर वही शांत मुस्कान ला ली। वह जानती थी कि खतरा बढ़ गया है। लेकिन वह भी तैयार थी। नीचे, विराट कार की चाबियां लेकर खड़ा था। उसने संयोगिता को देखा।
विराट बोला-
तैयार हो?
संयोगिता ने सिर हिलाया।
संयोगिता बोली-
हाँ। चलिए।
वे दोनों कार में बैठे। विवान बीच में बैठा था, गाना गा रहा था।
लेकिन संयोगिता की नजरें बार-बार साइड मिरर में पीछे देख रही थीं। क्या कोई उनका पीछा कर रहा है? और दूर, एक काली कार में बैठा वह अजनबी मुस्कुरा रहा था।
अजनबी बोला-
चलो, देखते हैं कि संयोगिता अपनी 'नई जिम्मेदारी' को कैसे निभाती है।
कार आगे बढ़ी। लेकिन यह सफर सामान्य नहीं होने वाला था।
काजल और वर्षा ड्राइंग रूम के सोफे पर बैठे चाय पी रहे थे। उनके चेहरों पर स्पष्ट नाखुशी और चिढ़ थी। काजल ने अपनी चाय का कप जोर से टेबल पर रखा।
काजल (गुस्से में) बोली -
देख रही हो भाभी? अब तो हद ही हो गई। विवान सुबह से संयोगिता के आगे-पीछे ही घूम रहा है। 'मम्मा यह लाओ', 'मम्मा वह देखो'... जैसे संपूर्णा कभी थी ही नहीं।
वर्षा ने भी सहमति में सिर हिलाया, हालांकि उसकी आवाज़ थोड़ी नरम थी।
वर्षा बोली-
हाँ भाई... बात तो सही है। विवान अब हमारी तरफ ध्यान भी नहीं देता। पहले वह मेरे साथ खेलता था, तुम्हारे के पास सोता था। अब तो बस संयोगिता... संयोगिता। लगता है उसने विवान को अपने जादू में फंसा लिया है।
काजल ने आँखें मटकते हुए कहा -
जादू नहीं, चालाकी है यह। उसे पता है कि विवान के दिल में जगह बना ली, तो विराट भैया को कंट्रोल करना आसान हो जाएगा। देखना, एक दिन यह पूरे चौहान हाउस की मालकिन बनकर बैठेगी।
तभी विवान दौड़ता हुआ नीचे आया। उसके हाथ में एक टॉय कार थी। वह सीधा संयोगिता की तरफ भागा, जो सीढ़ियों से उतर रही थी।
विवान बोला-
मम्मा! देखो, पापा ने यह नई कार लाई है!
संयोगिता मुस्कुराई और झुककर विवान को गले लगा लिया।
संयोगिता बोली-
वाह बाबू! कितनी सुंदर कार है। चलो, इसे गैरेज में रखते हैं।
विवान ने संयोगिता का हाथ पकड़ा और उसे खींचते हुए ले गया। काजल और वर्षा यह नजारा देखकर जलन से भर उठीं।
काजल (चुपके से) बोली -
देखो, कैसे इशारे पर नाच रहा है बच्चा।
लेकिन सच तो यह था कि विवान सिर्फ एक बच्चा था। और बच्चों की दुनिया बहुत सरल होती है। जो उन्हें प्यार देता है, सुरक्षा देता है, और उनके साथ समय बिताता है, वे उसी के प्रति आकर्षित होते हैं। संयोगिता ने पिछले कुछ दिनों में विवान को वो सब दिया था जो शायद व्यस्तता के कारण विराट या अन्य परिवार वाले नहीं दे पाए थे।
विवान के लिए संयोगिता अब 'अजनबी' नहीं, बल्कि 'मम्मा' थी। और एक बच्चे के लिए उसकी माँ ही उसकी पूरी दुनिया होती है। विराट यह सब देख रहा था। वह सीढ़ियों के पास खड़ा था। उसने काजल और वर्षा की फुसफुसाहट सुन ली थी। उसके चेहरे पर गंभीरता थी।
विराट (मन में) बोला-
काजल और वर्षा भी को इस बदलाव से ईर्ष्या हो रही है। लेकिन वे नहीं समझ पा रही हैं कि संयोगिता विवान के लिए कितनी जरूरी हो गई है। और शायद... मेरे लिए भी।
विराट नीचे उतरा और संयोगिता के पास गया।
विराट बोला-
संयोगिता, मैं ऑफिस जा रहा हूँ। तुम विवान को स्कूल छोड़ दोगी?
संयोगिता ने सिर हिलाया।
संयोगिता बोली-
हाँ। मैं खुद ले जाऊंगी।
विराट ने विवान के सिर पर हाथ फेरा।
विराट बोला-
बेटा, मम्मा की बात मानना। और स्कूल में अच्छे से पढ़ना।
विवान ने विराट को भी गले लगाया।
विवान बोला-
हाँ पापा। आप भी जल्दी आना।
विराट चला गया। संयोगिता और विवान भी कार की तरफ बढ़े। काजल ने वर्षा की तरफ देखा।
काजल बोली -
चलो देखते हैं, यह 'नई मम्मा' कितनी देर तक यह नाटक निभा पाती है।
लेकिन वे नहीं जानती थीं कि यह नाटक नहीं, बल्कि एक माँ का unconditional love था। और इसके पीछे छिपा एक खतरनाक सच, जो जल्द ही सबके सामने आने वाला था।
कार स्टार्ट हुई। संयोगिता ने रियरव्यू मिरर में देखा। पीछे कोई गाड़ी नहीं थी। लेकिन उसे एहसास था कि नजरें हमेशा उन पर हैं।
उसने विवान से पूछा -
बाबू, आज स्कूल में क्या नया सीखोगे?
विवान खुशी से बताने लगा। संयोगिता मुस्कुराती रही, लेकिन उसकी आँखें सड़क के हर मोड़, हर इंसान को स्कैन कर रही थीं। शिकारी अभी भी मौजूद था। और वह अपना अगला चल चलने वाला था।