गंगा जी ने संयोगिता के माता-पिता से बात की। शुरू में वे बहुत हिचकिचाए। उन्हें लगा कि विराट अभी भी संपूर्णा के शोक में है और यह शादी जल्दबाजी में हो रही है। लेकिन गंगा जी के आग्रह और विवान की खुशी को देखते हुए, वे बड़ी मुश्किल से माने।
संयोगिता इस पूरे प्रस्ताव पर चुप रही। उसने न 'हाँ' कहा, न 'ना'। उसकी खामोशी को सबने सहमति समझ लिया। असल में, उसके पास कोई चारा नहीं था। वह अजनबी की धमकियों से घिरी हुई थी। अगर वह विराट से दूर जाती, तो विवान खतरे में पड़ सकता था। और अगर वह पास रहती, तो शायद वह विवान की रक्षा कर पाती। इसलिए, उसने इस 'सौदे' को स्वीकार कर लिया।
कुछ दिन बाद, सभी लोग कोर्ट पहुँचे। माहौल तनावपूर्ण था। न तो दुल्हन की तरह सजावट थी, न ही बारात का उत्साह। यह एक औपचारिकता थी। एक कागजी कार्रवाई। विवान संयोगिता की गोद में बैठा था, बेखबर कि आज उसकी जिंदगी बदलने वाली है।
वह बार-बार पूछ रहा था—
मम्मा, क्या अब हम तीनों हमेशा साथ रहेंगे?
संयोगिता ने उसे कसकर गले लगाया और उसके माथे को चूम लिया।
बोली -
हाँ बाबू... हमेशा।
कोर्ट के बाहर विराट खड़ा था। उसका चेहरा गंभीर था। उसकी आँखों में शादी की खुशी नहीं, बल्कि एक अजीब सा बोझ था। वह जानता था कि यह शादी प्यार से नहीं, बल्कि जरूरत और परिस्थितियों से हुई है। जज ने कागजात चेक किए। संयोगिता और विराट ने हस्ताक्षर किए।
जज बोला -
मुबारक हो। आप दोनों अब पति-पत्नी हैं।
इतना कहकर जज ने मुहर लगा दी। यह कोई रोमांटिक शादी नहीं थी। यह एक **कॉन्ट्रैक्ट मैरिज** थी।
एक ऐसा अनुबंध जिसमें:
1. संयोगिता विवान की माँ बनकर रहेगी।
2. विराट संयोगिता की सुरक्षा और सम्मान का ध्यान रखेगा।
3. दोनों एक-दूसरे की प्राइवेसी का सम्मान करेंगे।
4. और सबसे महत्वपूर्ण—यह रिश्ता तब तक चलेगा जब तक विवान बालिग न हो जाए, या जब तक दोनों में से कोई एक इसे खत्म न करना चाहे।
शादी के बाद, जब वे कोर्ट से बाहर निकले, तो विराट ने संयोगिता की तरफ देखा।
विराट बोला-
संयोगिता... मैं वादा करता हूँ, मैं तुम्हें कभी तकलीफ नहीं दूंगा। बस विवान को खुश रखना।
संयोगिता ने सिर हिलाया और बोली -
और मैं वादा करती हूँ, मिस्टर विराट... मैं इस घर की इज्जत की रक्षा करूंगी।
लेकिन उनके मन में अलग-अलग बातें चल रही थीं।
विराट सोच रहा था—
क्या मैं कभी संयोगिता को दिल से अपना पाऊंगा? या वह हमेशा संपूर्णा की याद बनी रहेगी?"
और संयोगिता सोच रही थी—
अब मेरे पास विवान की रक्षा का सबसे बड़ा हथियार है—विराट का नाम और चौहान परिवार की ताकत। जो भी मेरे बच्चे को छूने की हिम्मत करेगा, उसे इस परिवार की ताकत का सामना करना पड़ेगा।
तभी, कोर्ट के बाहर खड़ी भीड़ में से एक आदमी ने कैमरे से उनकी तस्वीर ली। वह वही अजनबी था।
उसने फोन पर मैसेज टाइप किया -
शादी हो गई। अब खेल असली शुरू होगा।
संयोगिता ने अनजाने में पीछे मुड़कर देखा, लेकिन वहां सिर्फ भीड़ थी। उसे एहसास हुआ कि उसकी जिंदगी अब एक जाल में फंस चुकी है। और इस जाल से निकलने का रास्ता सिर्फ एक ही था—उस शिकारी को ढूंढना और उसे मारना। लेकिन अब वह अकेली नहीं थी। उसके पास विराट था। और विराट के पास पुलिस और संसाधन थे। सवाल यह था कि क्या संयोगिता अपने अंधेरे राज विराट से छिपा पाएगी? या फिर विराट को सच पता चल जाएगा?
विवान की खुशी देखने लायक थी। उसकी आँखों में चमक थी और चेहरे पर एक ऐसी मुस्कान जो किसी भी गम को भुला सकती थी। वह संयोगिता का हाथ पकड़कर खींच रहा था, जैसे वह डरता हो कि कहीं यह सब सपना न हो और सुबह होते ही टूट जाए।
विराट पीछे-पीछे चल रहा था। उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान थी, लेकिन आँखों में अभी भी वह गंभीरता बनी हुई थी। वह इस नए रिश्ते को समझने की कोशिश कर रहा था।
जैसे ही वे विराट के बेडरूम में पहुंचे, विवान ने दौड़कर बिस्तर पर छलांग लगा दी।
विवान (उछलते हुए) बोला -
वाह! मम्मा, देखो यह बिस्तर कितना बड़ा है! आज हम तीनों इसी पर सोएंगे ना?
संयोगिता थोड़ी झिझकी। उसे याद आया कि यह वही कमरा है जहाँ कुछ दिन पहले रात भर की वह घटना घटी थी। Office के बिस्तर पर... एक ही चादर में...लेकिन विवान की मासूमियत देखकर वह अपना विरोध नहीं कर पाई।
संयोगिता (मुस्कुराते हुए) बोली-
हाँ बाबू... आज हम तीनों साथ में सोएंगे।
विराट दरवाजे के पास रुका। उसने संयोगिता की तरफ देखा।
विराट बोला-
संयोगिता, अगर तुम्हें असुविधा हो, तो मैं सोफे पर सो सकता हूँ। या फिर gaust रूम में...
संयोगिता ने सिर हिलाया।
संयोगिता बोली-
नहीं मिस्टर विराट। विवान चाहता है कि हम साथ रहें। और... यह मेरी जिम्मेदारी भी है।
विराट ने सिर हिलाया और कमरे में आ गया। उसने अपनी जैकेट उतारी और बिस्तर के दूसरी तरफ बैठ गया।विवान बीच में लेट गया। एक तरफ विराट और दूसरी तरफ संयोगिता।विवान ने दोनों के हाथ पकड़ लिए।
विवान बोला-
अब हम एक परिवार हैं। पापा, मम्मा और मैं। कोई हमें अलग नहीं कर सकता।
विराट ने विवान के सिर पर हाथ फेरा।
विराट बोला -
बिल्कुल नहीं, बेटा।
संयोगिता चुपचाप लेटी रही। उसकी पीठ विराट की तरफ थी। उसे विराट की गर्माहट महसूस हो रही थी, लेकिन वह अपने आपको सख्त रख रही थी। उसे पता था कि यह सिर्फ एक शुरुआत है। एक ऐसा खेल जिसमें जीतना जरूरी है। तभी, विवान नींद में बुदबुदाया।
विवान बोला-
मम्मा... मुझे डर लगता था। लेकिन अब नहीं लगता। क्योंकि आप यहाँ हैं।
संयोगिता की आँखों से एक आंसू निकलकर तकिए पर गिर गया। उसने धीरे से विवान के माथे को चूमा।
संयोगिता (मन में)बोली -
मैं वादा करती हूँ बाबू... जो भी तुझे नुकसान पहुँचाने की कोशिश करेगा, मैं उसे जिंदा नहीं छोड़ूंगी। चाहे वह इंसान हो या शैतान।
कमरे में सन्नाटा छा गया। तीनों की साँसें धीमी होने लगीं।लेकिन बाहर, अंधेरे में, वह अजनबी अभी भी मंडरा रहा था। उसने देखा कि कैसे विराट और संयोगिता एक छत के नीचे आ गए हैं। उसके लिए यह एक नया मौका था।
अजनबी (मन में) बोला -
अब जब वे करीब हैं, तो चोट भी गहरी लगेगी। विराट को तोड़ना आसान होगा अगर उसके सामने संयोगिता का राज खुल जाए।
उसने अपने फोन पर एक नया प्लान बनाया।
अगली सुबह, चौहान हाउस में एक नई दिनचाला शुरू होने वाली थी। लेकिन संयोगिता को नहीं पता था कि उसका अतीत अब उसके वर्तमान में दस्तक दे चुका है। और विराट... विराट को नहीं पता था कि जिस महिला के साथ वह सो रहा है, उसके हाथों में खून के ऐसे दाग हैं जो कभी धुल नहीं सकते।