कुछ ही देर बाद, संयोगिता के अपार्टमेंट की घंटी बजी।
संयोगिता ने गहरी सांस ली और दरवाजा खोला। विराट बाहर खड़ा था। उसने एक साधारण पैंट शर्ट पहना था, जो उसे थका हुआ लेकिन गंभीर दिखा रहा था। उसके हाथ में कोई फाइल या काम का सामान नहीं था, सिर्फ वह खुद था।संयोगिता ने उसे अंदर आने का इशारा किया।
संयोगिता बोली-
आइए मिस्टर विराट। विवान सो रहा है, इसलिए कृपया धीमे बोलें।
विराट अंदर आया। उसकी नजरें सीधे संयोगिता पर थीं। कमरे की हल्की रोशनी में संयोगिता बहुत शांत लग रही थी, लेकिन उसकी आँखों में एक सतर्कता थी जिसे विराट पहले शायद नोटिस नहीं करता था। वे दोनों ड्राइंग रूम में बैठ गए। विराट ने तुरंत बात शुरू की, बिना किसी औपचारिकता के।
विराट बोला-
संयोगिता, मैं यहाँ किसी काम की बात करने नहीं आया। मेरी माँ... ने आज मुझसे कुछ कहा।
संयोगिता ने अपनी नजरें झुका लीं, जैसे वह जानती हो कि क्या आने वाला है।
संयोगिता बोली-
Aunty ने क्या कहा?"
विराट ने हिचकिचाते हुए, लेकिन स्पष्ट शब्दों में अपनी माँ की बात दोहराई।
विराट बोला-
उन्होंने कहा कि विवान को एक माँ की जरूरत है। और उन्होंने यह भी कहा कि तुम विवान से बहुत प्यार करती हो, और विवान भी तुम्हें अपनी माँ मानता है। उन्होंने सुझाव दिया कि... क्यों न हम तुमसे पूछ लें?
संयोगिता चुप रही। कमरे में सन्नाटा छा गया। सिर्फ दीवार पर लगे घड़ी की टिक-टिक सुनाई दे रही थी।
विराट ने आगे बढ़कर कहा -
देखो संयोगिता, मैं जानता हूँ कि हमारे बीच का रिश्ता सिर्फ प्रोफेशनल था। और उस रात... उस रात जो हुआ, वह मेरी गलती थी। मैं नशे में था और मैंने तुम्हें संपूर्णा समझ लिया था। मैंने तुम्हारा सम्मान नहीं किया। इसके लिए मैं माफी चाहता हूँ।
संयोगिता ने सिर उठाया। उसकी आँखों में नमी थी, लेकिन चेहरा पत्थर जैसा सख्त।
संयोगिता बोली-
माफी की जरूरत नहीं है, मिस्टर विराट। वह रात... वह एक भ्रम था। और भ्रम का कोई मतलब नहीं होता।
विराट ने गहरी सांस ली।
विराट बोला-
लेकिन मेरी माँ की बात में दम है। विवान तुम्हारे बिना अधूरा है। और सच कहूं तो... उस रात के बाद से, मैंने तुम्हें एक नई नजर से देखना शुरू किया है। तुम सिर्फ संपूर्णा की परछाई नहीं हो। तुम संयोगिता हो। एक मजबूत, समझदार महिला।
संयोगिता का दिल तेजी से धड़कने लगा। विराट की ये बातें उसके लिए नई थीं। क्या वह सच में उसे 'संयोगिता' के रूप में देख रहा था? या यह सब सिर्फ विवान के भविष्य के लिए एक समझौता था?
संयोगिता (धीमी आवाज़ में) बोली-
मिस्टर विराट, शादी सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं होती। यह दो परिवारों, दो अतीतों का मिलन होती है। और मेरा अतीत... वह इतना साफ नहीं है जितना आप सोचते हैं।
विराट ने उसके हाथ पर हाथ रखा। इस बार, संयोगिता ने हाथ नहीं खींचा।
विराट बोला-
हर इंसान का अतीत होता है, संयोगिता। महत्वपूर्ण यह है कि वर्तमान कैसा है। अगर तुम राजी हो, तो हम धीरे-धीरे शुरू कर सकते हैं। विवान के लिए। और... अगर तुम चाहो, तो हमारे लिए भी।
संयोगिता विराट की आँखों में देख रही थी। वहां ईमानदारी थी। लेकिन क्या वह अपनी असली पहचान छिपाकर इस रिश्ते में कदम रख सकती थी? क्या वह एक 'साइको किलर' बनकर एक अच्छी पत्नी और माँ बन सकती थी?
तभी, संयोगिता के फोन पर एक मैसेज आया।
स्क्रीन पर लिखा था -
**अगर तुमने 'हाँ' कहा, तो विवान की लाश मिलेगी।**
संयोगिता का चेहरा एक पल के लिए सफेद पड़ गया। उसने तुरंत फोन को उल्टा करके टेबल पर रख दिया। विराट ने इसे नोटिस किया।
विराट बोला-
क्या हुआ? सब ठीक तो है?
संयोगिता ने जबरदस्ती मुस्कुराने की कोशिश की, लेकिन उसकी मुस्कान में कंपन था।
संयोगिता बोली-
हाँ... सब ठीक है। बस... ऑफिस का एक अर्जेंट मैसेज था।
विराट को शक हुआ, लेकिन उसने ज्यादा जिद नहीं की।
विराट बोला-
ठीक है। तुम इस बारे में सोच लो। कोई जल्दबाजी नहीं है। मैं चलता हूँ।
विराट उठकर चला गया। जैसे ही दरवाजा बंद हुआ, संयोगिता ने फोन उठाया और उस मैसेज को देखा। नंबर फिर से 'Unknown' था। संयोगिता की आँखों में अब डर नहीं, बल्कि एक खतरनाक क्रोध था।
संयोगिता (मन में) बोली -
तुमने मेरी जिंदगी में विराट को शामिल करने की धमकी दी है? तुमने मेरे बच्चे को निशाना बनाया है? अब तुम्हारी मौत निश्चित है।
उसने अपने लैपटॉप को फिर से खोला। इस बार, वह सिर्फ ट्रैक नहीं कर रही थी। वह शिकार करने वाली थी। लेकिन उसे नहीं पता था कि विराट ने जाते समय अपना एक छोटा सा ब्लूटूथ डिवाइस संयोगिता के सोफे के पास छोड़ दिया था, ताकि वह यह जान सके कि क्या संयोगिता सच में सुरक्षित है। और उस डिवाइस ने संयोगिता के उन गुस्से भरे शब्दों को रिकॉर्ड कर लिया था जो वह मन में बोल रही थी।
विराट की कार में बैठा वह अब सिर्फ एक प्रेमी नहीं, बल्कि एक जासूस भी बन चुका था। संयोगिता ने फोन को कसकर पकड़ा। उसकी उंगलियां सफेद पड़ गई थीं। वह धीरे से बैलकनी की तरफ बढ़ी, ताकि विराट या अंदर सो रहा विवान उसकी आवाज न सुन पाए। बाहर हल्की ठंडी हवा चल रही थी, लेकिन संयोगिता के माथे पर पसीने की बूंदें थीं। उसने फोन कान से लगाया और एक गहरी सांस ली।
संयोगिता (बिल्कुल शांत, लेकिन बर्फीली आवाज में) बोली-
अगर तुमने विवान को हाथ भी लगाया... तो मैं तुम्हें इतनी बर्बरता से मारूंगी कि सुनते ही तुम्हारी रूह कांपने लगेगी।
उधर से कुछ पल की खामोशी रही। फिर वही मशीनी, विकृत हंसी सुनाई दी।
अजनबी आवाज बोली-
वाह! क्या जोश है। मुझे पता था कि तुम सिर्फ एक साधारण महिला नहीं हो। राहुल की मौत ने तुम्हारा असली चेहरा दिखा दिया है, संयोगिता। लेकिन याद रखना... मैं राहुल नहीं हूँ। मैं वो हूँ जो तुम्हारे हर कदम पर नजर रख रहा है।
संयोगिता की आँखों में क्रोध की चिंगारी जल उठी।
संयोगिता बोली-
तुम कौन हो? सामने आओ। छिपकर धमकियां देना कायरों का काम है।
अजनबी आवाज बोली -
कायर? नहीं संयोगिता। मैं तो बस खेल रहा हूँ। और इस खेल का नियम सरल है—जितना ज्यादा तुम विराट के करीब जाओगी, उतना ही विवान खतरे में होगा। अगर तुम चाहती हो कि तुम्हारा राजा बाबू सुरक्षित रहे, तो विराट से दूर रहो। शादी का ख्याल दिमाग से निकाल दो। और हाँ... पुलिस को मत बताना। वरना अगली बार फोन नहीं, विवान की एक उंगली आएगी।
इतना कहकर लाइन कट गई। संयोगिता फोन को घूरती रही। उसका शरीर गुस्से से कांप रहा था। उसे एहसास हुआ कि यह व्यक्ति उसके अतीत के बारे में जानता है। वह जानता है कि उसने राहुल को मारा है। इसका मतलब है कि वह या तो उस रात गोदाम के पास था, या फिर उसके किसी संपर्क के जरिए उसे जानकारी मिली है।
वह वापस अंदर आई। विराट अब जा चुका था। कमरे में सन्नाटा था। संयोगिता ने विवान के कमरे का दरवाजा खोला। विवान गहरी नींद में सो रहा था, उसके चेहरे पर एक मासूम मुस्कान थी। संयोगिता ने उसके माथे को चूमा और आंसू पीते हुए वापस अपने कमरे में आ गई।
उसने अपना लैपटॉप खोला। इस बार उसने ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि एक डार्क वेब फोरम खोला जहाँ वह पहले सक्रिय थी। उसने एक खास कोड टाइप किया—एक ऐसा कोड जो सिर्फ उसके पुराने 'संपर्कों' के लिए था।
संयोगिता (मन में) बोली-
अगर तुम मेरे अतीत से हो, तो मैं तुम्हें वहीं दफन कर दूंगी।
लेकिन उसे नहीं पता था कि विराट ने जो ब्लूटूथ डिवाइस छोड़ा था, वह अभी भी सक्रिय था। और विराट, अपनी कार में बैठे-बैठे, उस डिवाइस के जरिए संयोगिता की सांसों की तेज आवाज और उसके कंप्यूटर की कीबोर्ड टाइपिंग की आवाज सुन रहा था।
विराट के चेहरे पर गहरी चिंता थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि संयोगिता किससे बात कर रही थी और क्यों वह इतनी खौफनाक धमकी दे रही थी।
विराट (मन में) बोला-
संयोगिता... तुम आखिर कौन हो?