Her Silent Secret - 25 Sonam Brijwasi द्वारा महिला विशेष में हिंदी पीडीएफ

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Her Silent Secret - 25

गोदाम में सन्नाटा था, सिर्फ बाहर से आती हवा की सरसराहट और राहुल की भारी साँसों की आवाज़ गूंज रही थी। धूल के कण हवा में तैर रहे थे, जो टूटी हुई खिड़की से आती शाम की रोशनी में चमक रहे थे।

राहुल ने संयोगिता के सामने वह पेन ड्राइव लहराई। उसके चेहरे पर एक घृणित मुस्कान थी, उसे लगा कि उसने शेर को पिंजरे में बंद कर लिया है।

राहुल (घमंड से) बोला- 
देख लो... कल रात को तुम दोनों ने क्या किया। अब बताओ, वायरल कर दूँ? विराट भाई साहब की इज्जत का सवाल है। चौहान परिवार की प्रतिष्ठा... और तुम्हारी पार्टनरशिप और तुम्हारी कंपनी भी।

संयोगिता शांत खड़ी थी। उसने न तो पेन ड्राइव की तरफ देखा, न ही राहुल की आँखों में डर दिखाया। उसका चेहरा पत्थर जैसा सख्त हो गया था। वह 'CEO संयोगिता' नहीं थी अब। वह वो थी, जिसके बारे में दुनिया नहीं जानती थी।

संयोगिता (बिल्कुल ठंडी आवाज़ में) - 
क्या चाहते हो तुम?

राहुल की मुस्कान और चौड़ी हो गई। उसे लगा कि उसकी चाल सफल हो रही है।

राहुल बोला - 
वही जो तुमने उस रात विराट के साथ किया। एक रात... थोड़ी कंपनी। और हाँ, कुछ पैसा भी। मैं ज्यादा लालची नहीं हूँ, बस अपनी हिस्सेदारी चाहता हूँ।

संयोगिता ने धीरे से एक कदम आगे बढ़ाया। राहुल पीछे हटा, लेकिन फिर रुक गया, यह सोचकर कि वह डर गया है। लेकिन संयोगिता डरी नहीं थी। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी—वही चमक जो शिकारी की आँखों में होती है जब उसे अपना शिकार मिल जाता है।

संयोगिता बोली - 
गलत इंसान से पंगा ले लिया तुमने, राहुल।

राहुल हँसा।

राहुल बोला - 
अरे मैडम, ड्रामा मत करो। मैंने सब रिकॉर्ड कर लिया है। अगर मैं चाहूँ तो पूरे ऑफिस में ये ऑडियो चला सकता हूँ। विराट भाई तुम्हें पार्टनरशिप खत्म कर देंगे, पुलिस में केस करेंगे...

संयोगिता ने अपनी जेब से अपना फोन निकाला और उसे मेज पर रख दिया। फिर उसने अपने बैग से एक छोटा सा ब्लेड निकाला, जिसे वह हमेशा सुरक्षा के लिए रखती थी। लेकिन उसने ब्लेड नहीं खोला। बस उसे अपनी उंगलियों के बीच ऐसे घुमाया जैसे वह कोई खिलौना हो।

संयोगिता (मुस्कुराते हुए, लेकिन आँखों में बर्फ जमी हुई) - 
तुम्हें लगता है कि मुझे विराट की नौकरी या समाज की इज्जत की परवाह है? राहुल, तुमने मेरा अतीत नहीं देखा। तुमने वो चीजें नहीं देखीं जो मैंने अंधेरे कमरों में की हैं।

राहुल को अचानक एक अजीब सा खतरा महसूस हुआ। संयोगिता की आवाज़ में जो ठंडक थी, वह किसी सामान्य इंसान की नहीं हो सकती थी।

राहुल (हिचकिचाते हुए) - 
क...क्या मतलब?

संयोगिता ने धीरे से कहा—
मैंने उन लोगों को मारा है जिन्होंने मेरे साथ बुरा किया था। बिना किसी गवाह के। बिना किसी सबूत के। पुलिस आज तक उन्हें ढूंढ नहीं पाई क्योंकि वे लापता हो गए। हमेशा के लिए।

राहुल का गला सूख गया। उसने पेन ड्राइव को कसकर पकड़ लिया।

राहुल बोला - 
तुम... तुम झूठ बोल रही हो। तुम तो एक साधारण लड़की हो।

संयोगिता ने अचानक तेजी से कदम बढ़ाए और राहुल के बहुत करीब आ गई। इतना करीब कि राहुल उसकी साँसों की गर्मी महसूस कर सकता था।

संयोगिता (फुसफुसाते हुए) - 
साधारण लड़कियाँ रात भर रोती हैं, राहुल। मैं रात भर काम करती हूँ। और मेरा काम... सफाई करना है।

उसने राहुल के हाथ से पेन ड्राइव छीन ली। राहुल ने विरोध करने की कोशिश की, लेकिन संयोगिता ने उसकी कलाई पर एक ऐसा दबाव डाला कि राहुल दर्द से चीख पड़ा।

राहुल - 
आह! छोड़ो! पागल हो गई हो क्या?

संयोगिता ने पेन ड्राइव को जमीन पर गिरा दिया और अपने एड़ी के नीचे कुचल दिया। प्लास्टिक के टुकड़े चूर-चूर हो गए।

संयोगिता बोली - 
अगर तुमने फिर से मेरा या विराट का नाम लिया... तो अगली बार यह पेन ड्राइव नहीं, तुम्हारी जुबान कुचलेगी। समझे?

राहुल कांप रहा था। उसे पहली बार एहसास हुआ कि जिस महिला को वह कमजोर समझ रहा था, वह असल में एक शिकारी थी। संयोगिता ने उसे धक्का दिया और गोदाम से बाहर निकल गई।

राहुल वहीं जमीन पर बैठ गया, साँसें फूल रही थीं। उसे नहीं पता था कि संयोगिता ने सच बोला था या झूठ। लेकिन उसकी आँखों में जो खौफ था, वह असली था। और संयोगिता?...
वह बाहर निकलकर गहरी सांस ले रही थी। उसका हाथ कांप रहा था।

संयोगिता (मन में) - 
मैंने वादा किया था कि मैं बदल जाऊंगी। लेकिन आज... आज मैंने फिर वही रास्ता चुना। डराने का रास्ता।

लेकिन उसे यह भी पता था कि राहुल अब शांत नहीं बैठेगा। वह बदला लेगा। और इस बार, खेल और खतरनाक होने वाला था। संयोगिता कार से बाहर निकली। रात का अंधेरा गहरा था, और गोदाम के पास सन्नाटा इतना भारी था कि अपनी ही धड़कनें सुनाई दे रही थीं।

राहुल अभी भी सदमे में था। उसकी कलाई में दर्द था, और संयोगिता की उन आँखों ने उसे अंदर तक हिला दिया था। लेकिन जैसे ही संयोगिता कार से उतरी, राहुल के दिमाग में गुस्सा और बदले की भावना जाग उठी। उसे लगा कि संयोगिता सिर्फ डरा रही है, असल में वह कमजोर है।

राहुल (गुस्से में चिल्लाते हुए) - 
तू समझती क्या है अपने को? मैं तुझे छोड़ूंगा नहीं! मैं आज ही विराट को सब बता दूंगा!

राहुल ने झपट्टा मारा और संयोगिता की तरफ बढ़ा। उसका इरादा स्पष्ट था—वह संयोगिता को पकड़कर किसी तरह का नुकसान पहुँचाना चाहता था या शायद उसे ब्लैकमेल करने के लिए जबरदस्ती करना चाहता था। लेकिन राहुल को नहीं पता था कि वह किससे टकरा रहा है।

जैसे ही राहुल ने हाथ बढ़ाया, संयोगिता की आँखों में वह 'इंसानियत' गायब हो गई और वही 'शिकारी' जाग उठा। उसके हाथ में वह छोटा ब्लेड पहले से ही तैयार था।

एक तेज, बिजली जैसी हरकत।
*सर्र्र...*

राहुल की चीख अधूरी रह गई। संयोगिता ने चाकू सीधा उसके पेट में घोंप दिया था। राहुल की आँखें फटी की फटी रह गईं। वह अपना पेट देखने लगा, जहाँ से खून की धार फव्वारे की तरह निकल रही थी। वह लड़खड़ाया और जमीन पर गिर पड़ा।

राहुल (हांपते हुए, दर्द से बिलखते हुए) बोला - 
तु... तुमने... क्या किया...?

संयोगिता उसके ऊपर झुकी। उसके चेहरे पर कोई पछतावा नहीं था, कोई डर नहीं था। बस एक ठंडा, निर्मम संकल्प था।

संयोगिता (धीमी, भयानक आवाज़ में) - 
मैंने प्रतिज्ञा की है... जो मेरे रास्ते में आएगा, जो अपराध करेगा, उसे मैं खत्म कर दूंगी। तुमने ब्लैकमेलिंग की, राहुल। यह अपराध है।

राहुल ने हाथ जोड़ने की कोशिश की, माफी मांगने की कोशिश की, लेकिन संयोगिता रुकी नहीं। उसने चाकू निकाला और फिर से वार किया। और फिर एक बार। और फिर एक बार।

जब तक राहुल का शरीर ढीला नहीं पड़ गया। जब तक उसकी साँसें नहीं थम गईं। जब तक वह पूरी तरह शांत नहीं हो गया।संयोगिता खड़ी हुई। उसके हाथ और कपड़े खून से सने थे। उसकी साँसें थोड़ी तेज थीं, लेकिन चेहरा शांत था।

अब बारी थी उस 'पुराने तरीके' की। उसने राहुल के शरीर से चाकू निकाला और पास की दीवार की तरफ बढ़ी। दीवार पर लगी धूल और गंदगी के बीच, उसने अपने खून से सने अंगूठे और उंगलियों का इस्तेमाल करते हुए एक मुहावरा लिखा:

**"पाप का घड़ा अंत में फूटता ही है।"**

लिखने के बाद, वह वापस राहुल के पास आई। उसने जमीन से पेन ड्राइव के टूटे हुए टुकड़े इकट्ठा किए। साथ ही, राहुल की जेब से उसका फोन निकाला, जिसमें शायद और भी कॉपी हो सकती थी।

संयोगिता ने गोदाम के कोने में रखे कुछ सूखे कागजों और कचरे को इकट्ठा किया। उसने लाइटर जलाया और पेन ड्राइव के टुकड़ों, फोन के SIM कार्ड, और उन कागजों को आग लगा दी।

आग की लपटें तेजी से फैलीं। प्लास्टिक पिघलने की बदबू हवा में फैल गई। संयोगिता वहीं खड़ी रही, जब तक कि सब कुछ राख नहीं बन गया। जब आग बुझ गई, तो वहां सिर्फ काली राख बची थी। कोई सबूत नहीं। कोई गवाह नहीं।

संयोगिता ने अपने कपड़ों को झाड़ा, हाथों को साफ किया (जितना संभव था), और गोदाम से बाहर निकल आई। बाहर हवा ठंडी थी। उसने गहरी सांस ली।

संयोगिता (मन में) - 
एक और। एक और अपराधी समाप्त। लेकिन क्या मैं खुद अपराधी नहीं बन रही हूँ?

उसने इस सवाल को दिमाग से झटक दिया। अभी उसे घर जाना था। विवान का इंतजार कर रहा होगा। और विराट... विराट का सामना करना होगा।

लेकिन उसे नहीं पता था कि गोदाम के बाहर, अंधेरे में छिपे एक CCTV कैमरे ने, हालांकि धुंधला, लेकिन कुछ पलों की रिकॉर्डिंग जरूर की थी।

और शहर के दूसरे कोने में, पुलिस स्टेशन में एक इंस्पेक्टर को राहुल की 'मिसिंग' रिपोर्ट मिली थी। खेल अब और गहरा होने वाला था।