शहरयार बिजली की सी तेज़ी से बाहर निकल गया।
“कुछ कम हुआ फीवर बेटे” ???
उन्होंने शिफ़ा को मुखातिब किया।
“जी अंकल काफी कम है पहले से तो , अब ले जाएं आप लोग”
कुछ देर की उसकी मेहनत के बाद बुखार थोड़ा कम हुआ तो दादू के मुंह से कराह निकली थी।
"अम्मां अम्मां उठे , आप ठीक हैं" ???
इम्तियाज़ साहब को उसने पहली बार इतना परेशान देखा था।
“पापा चलें जल्दी करें ” !!!
शहरयार जिस स्पीड से गया था उसी स्पीड से वापस कमरे में दाखिल हो कर दादी को उठाते हुए बाहर की तरफ पलट गया।
पीछे पीछे आमना बेगम और इम्तियाज़ साहब भी परेशान होते हुए निकले थे।
“फुप्पो आप परेशान ना हों दादू बिलकुल ठीक हो जाएंगी” वह उनके साथ साथ चलती हुई उनहें दिलासा दे रही थी
“दुआ करो बेटे बस कि सब ठीक हो” !!!
वह गाड़ी में बैठते हुए फिक्रमंदी से परेशान चेहरे के साथ बोलीं थी।
"इन्शाअल्लाह" !!!
उसने सच्चे दिल से दुआ मांगी।
☆ ☆ ☆
वह एकदम से घबरा कर उठ कर बैठी, चेहरा पूरा पसीने से भीगा हुआ था और दिल भी ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था उसने जल्दी से पास में रखी बॉटल उठा कर पानी पिया तो कुछ सुकून महसूस हुआ था।
“ उफ्फ यह ख्वाब था” ….…
उसने अपने चारो तरफ नज़र डाली।
फुप्पो वग़ैरह के हॉस्पिटल जाने के बाद वह कमरे में आई तो सोचते सोचते हुए ईज़ी चेयर पर बैठे बैठे ही सो गई थी।
“अल्लाह का शुक्र ख्वाब ही था , वरना क्या होता”
वह दोनो हाथों में सर थाम कर बैठ गई।
“नादिया को कॉल करती हूं”
उसे परेशानी में और कुछ नही सूझा तो फोन उठा कर नादिया का नम्बर डायल करने लगी।
“हां शिफ़ा खैरियत है, इतनी सुबह सुबह कैसे फोन किया”???
नादिया की नींद के खुमार में डूबी आवाज़ स्पीकर से उभरी थी।
“यार दादू की तबियत खराब हो गई थी रात बहुत ज़्यादा, सब लोग उन्हें हॉस्पिटल ले कर गए हैं”
वह परेशान सी आवाज़ में बोली ।
“क्या हुआ है दादू को” ???
नादिया उसका बात सुन कर परेशानी से पूछने लगी तो उसने उसे पूरी तफसील बताई़।
“अच्छा रिलैक्स , तुम परेशान नही हो मैं आती हूं थोड़ी देर में तुम्हारी साइड , आज यूनिवर्सिटी नही जाउंगी”
नादिया ने उसे दिलासा दिया।
“हाँ यार प्लीज़ आ जाओ मेरा बहुत दिल घबरा रहा है अकेले”
“शिफ़ा , और भी कोई बात है क्या”
उसके परेशान लहजे ने नादिया को भी ठिठका दिया था
“हाँ”
उसने एक हरूफ में जवाब दिया।
“क्या बात है” ???
“मैंने ख्वाब में अनस को देखा है आज सुबह”
उसने बताया
“क्या देखा ऐसा”??
नादिया ने हैरानी से पूछा।
“मैंने देखा कि वह मुझे एक बहुत ऊँची पहाड़ी पर ले कर गया है जहाँ मैं बहुत खुश थी हम लोग बातें कर रहे थे सब सही चल रहा था कि अचानक उस ने मुझे उस ऊँचाई से धक्का दिया और मेरा पाँव फिसल पड़ा , मैं गिरने लगी और मैंने अनस को आवाज़ भी दी लेकिन उस ने सुनी ही नही मैंने फिर मदद के लिये हाथ बढ़ाया तो उसने वह भी इग्नोर कर दिया बल्कि मुझे वहाँ से गिरते हुए देख कर वह मुस्कुरा रहा था। ”
वह बहुत खोये खोये अंदाज़ में अपना ख्वाब बयान कर रही थी।
“पागल हो तुम ,और आज कल कुछ ज़्यादा ही सोच भी रही हो अनस भाई को बस इसलिये टेंशन की वजह से ऐसे ख्वाब भी आ रहे हैं और कुछ नहीं है यह ”
नादिया उसको तसल्ली देते हुए बोल रही थी।
“पता नही”
वह अब तक गुमसुम थी
अच्छा तुम टेंशन मत लो मैं आती हूं थोड़ी देर में तुम्हारे पास , इतने तुम फ्रैश हो जाओ उस से भी माइंड को रिलैक्स मिलेगा”
नादिया ने उसे मशवरा दिया था
“ठीक है , मैं वेट कर रही हूं तुम्हारा आ जाओ”
“ठीक है अल्लाह हाफिज़”
नादिया ने फोन बंद करते हुए कहा तो उसने भी फोन रख दिया।
“ठीक कह रही नादिया , मैं कुछ ज़्यादा ही सोच रही हूं अनस के बारे में”
वह नादिया के बाद अब दादू की तबियत पूछने के लिये फुप्पो को फोन मिलाने लगी थी।
☆ ☆ ☆
नहा कर आने के बाद वह आइने में अपनी आँखो के ग़ौर से देखा जो रात नींद पूरी ना होने की वजह से सुर्ख हो रही थीं।
उसने दोनो हाथों से बेदर्दी के साथ आँखों को रगड़ डाला जिस से वह और ज़्यादा सुर्ख हो गयी थी।
“बीबी जी , नाशता लगा दूं आपका”….. .. ….??
मुलाज़िमा ने अंदर आ कर अदब के साथ पूछा।
“नहीं अभी रूको थोड़ी देर , शहरयार आने वाले हैं बस तब ही लगा देना नाशता भी"
वह ब्रश उठा कर गीले बाल सुलझाने लगी।
“जी ठीक है”
मुलाज़िमा कह कर जाने लगी थी।
“ बात सुनों” !!! १
उसने पीछे से आवाज़ दी
“जी बीबी जी” ??
वह पलट कर पूछने लगी
“दादू के लिये सूप और जूस तैयार कर दो , मैं हॉस्पिटल जाउंगी थोड़ी देर में तब ले जाउंगी”
वह कह कर फिर से अपने काम में लग गयी तो मुलाज़िमा अस्बात में सर हिला कर चली गई।
“शिफ़ा ”… .. …. .
वह अपनी सोचों में गुम थी कि नादिया की आवाज़ उसे होश की दुनियां में ले कर आई।
“हां”…. .???
वह चौंक कर उसकी शक्ल देखने लगी।
“ओफ्फोह!!!! तुम अब तक उसी वजह से परेशान हो”….. .. …
नादिया चादर उतार कर साइड में रखते हुए अफसोस से अपनी जान से अज़ीज़ दोस्त को देख रही थी।
जवाब में वह खामोश रही।
“कॉल किया तुम ने उन्हें”……..???
“हां रात किया था”…..
“तो बात हुई तुम लोगो की , क्या कहा उन्होंने क्यों नही रिसीव कर रहे थे फोन”…… . .
नादिया को उसकी बात सुन कर थोड़ी तसल्ली हुई थी।
“बिज़ी थे कल मीटिंग में थे सारा दिन कल भी और ज़्यादातर वही बिज़ी रहते हैं , क्योंकि अंकल कामरान उन्हें अपने स्टाफ से इन्ट्रोड्यूस कराने के साथ बिज़नेस की बारिकियां भी समझा रहे हैं क्योंकि न्यू ब्रांच ओपन होते ही वह अनस ने ही सम्भालनी है”
“देखा मैंने कहा था ना कि ज़रूर वह बिज़ी होंगे वरना तुमहें क्यों इग्नोर करेंगे वह”
नादिया ने उसे दिलासा दिया लेकिन वह मुतमइन नही हुई थी।
और क्या बात हुई…..? ? ?
“बस यही बात हुई थी , क्योंकि पूरा दिन काम की वजह से वह बहुत थके हुए थे इसलिये नींद आ रही थी ज़्यादा इसीलिये मैंने भी ज़्यादा रोकना सही नही समझा”
“अब तो कोई शक नही हैं ना तुम्हें “ ??
नादिया ने पूछा
“यार पता नही क्यों लेकिन मुझे समझ नही आ रहा कि मेरे थोड़ा सा देर से कॉल पिक करने पर जो शख्स बुरी तरह परेशान हो जाता था उसके पास अब मेरे लिये बिल्कुल भी वक़्त ही नही है”
वह उलझ कर बोली थी।
“बीबी जी छोटे साहब आ गए हैं”
वह दोनों बातें कर ही रही थी कि मुलाज़िमा ने आकर बताया।
“ठीक है , तुम ब्रेकफास्ट रेडी रखो लेकिन अभी लगवाना मत , पहले उनहें फ्रैश होने दो उसके बाद लगाना टेबल”
उसने कहा तो मुलाज़िमां भी वापस चली गई।
“कैसी है अब दादू की तबियत” ???
नादिया ने पूछा।
“फीवर तो उतर चुका है लेकिन वीकनैस है काफी, डॉक्टर ने बोला है कि यह फीवर उनके दिमाग की साइड हुआ था इसीलिये वह बेहोश थीं”
“तुम जाओगी हॉस्पिटल”???
“हां अभी शहरयार नाशते करने के बाद वापस जाऐंगे तब उनके साथ ही जाउंगी मैं दादू के लिये सूप वग़ैरह भी ले कर जाना है”
उसने तफसील से बताया।
“मैं भी चलूंगी तुम्हारे साथ , अम्मी से परमीशन ले ली थी मैंने जाने की , तुम वापस आते हुए मुझे घर ही छोड़ देना”
नादिया ने कहा तो वह भी तैयार हो गई।
“आओ नाशता करते हैं”……..
वह नादिया हाथ पकड़ कर उठाती हुई बोली।
“मैं तो घर से कर के आई हूं , तुम करो जा कर मैं यहीं हूं"
वह इतमीनान से दोनो पाँव उपर कर के बैड पर बैठ गई।
“यह मेहमानो वाला एटीट्यूड कम दिखाया करो , उठो फौरन” !!!
वह आँखे दिखाती हुई बोली।
“अच्छा घूरो तो नही , चल रही हूं ना इसी बहाने तुम्हारे हिटलर का भी दीदार हो जाएगा”
नादिया ने मुस्कुराते हुए उसकी तरफ देखा।
“मेरा तो किधर से भी नही है वह, हां अगर तुम्हे रखना है तो तुम रख सकती हो मुझे एतराज़ नही है”
वह शहाना अंदाज़ से बोली
“हां तुम्हारी पर्सनल प्रॉपर्टी है ना वह जो यूं दे रही हो”???
“ मेरी क्या वह तो फिल्हाल किसी की भी पर्सनल प्रॉपर्टी नही है” !!!
“क्या मतलब” ???
नादिया ने कुछ ना समझने वाले अंदाज़ में उसकी तरफ देखा।
“मतलब यह कि वह शुद्ध सिंगल है , कोई जी एफ तक नही है इतना अंदाज़ा हो गया है मुझे इसलिये अगर तुम चाहो तो.......
उसने शरारत से कहते हुए बात अधूरी छोड़ कर नादिया को देखा जो उसकी बात का मतलब समझने के बाद उसे लगातार घूर रही थी।
“अच्छा बस , यह बकवास बंद करो और चलो अगर चल रही हो तो”
नादिया ने झेंप कर उसकी कमर में एक धमोका जड़ दिया।
Muhabbat Ek Sabaq pr Webseries bani hai jo youtube pr hmare channel @Afariyas_Chronicles_Studio pr moujood hai.
Us Web series ke Kuchh shorts maine apne account par Matrubharti per upload kiye hue hain.
Video dekhie acchi Lage to channel ko subscribe kijiye or like share and comment karna na Bhulein. Aur Mohabbat Ek Sabaq ko Matru Bharati per Itna Sara Pyar dene ke liye aap sab ka tahe dil se Shukriya. 💖