Mr. & Ms. Fake
Episode 20 – One Day, One Heart
अगली सुबह...
सान्वी ने जैसे ही आँखें खोलीं, उसके मोबाइल पर एक मैसेज था।
आर्यवीर:"तैयार रहना। दस बजे लेने आ रहा हूँ।"
सान्वी ने मैसेज पढ़कर भौंहें सिकोड़ लीं।
"ये आदमी खुद को बॉस समझता है क्या?"
उसने फोन नीचे रखा।
दो सेकंड बाद फिर उठाया।
मैसेज दोबारा पढ़ा।
और फिर मुस्कुरा दी।
"दस बजे..."
उसने अलमारी खोली।
फिर एक ड्रेस निकाली।
उसे देखकर वापस रख दिया।
दूसरी निकाली।
फिर तीसरी।
आख़िरकार वह खुद ही परेशान हो गई।
"मैं तैयार होने में इतनी मेहनत क्यों कर रही हूँ?"
उसने आईने में खुद को देखा।
"बस एक दिन बाहर जाना है... डेट थोड़ी है!"
लेकिन उसके गालों की हल्की लाली उसकी बात से बिल्कुल सहमत नहीं थी।
दस बजे...
आर्यवीर की कार सान्वी के घर के बाहर रुकी।
सान्वी बाहर आई।
आर्यवीर ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा।
"क्या?"
सान्वी ने तुरंत पूछा।
"कुछ नहीं।"
"तो ऐसे क्यों देख रहे हो?"
आर्यवीर ने मुस्कुराकर कहा,
"सोच रहा हूँ... आज तुम्हें चुप कराने के लिए कितनी कॉफी खरीदनी पड़ेगी।"
सान्वी हँस पड़ी।
"बहुत मज़ाकिया हो।"
वह कार में बैठ गई।
कुछ देर बाद...
सान्वी ने पूछा,
"हम जा कहाँ रहे हैं?"
"सरप्राइज़।"
"मुझे सरप्राइज़ पसंद नहीं।"
"मुझे पता है।"
"फिर?"
"इसीलिए तो।"
सान्वी ने उसे घूरा।
"तुम बहुत परेशान करते हो।"
आर्यवीर हँस पड़ा।
पहला पड़ाव था...
एक छोटा-सा आर्ट स्टूडियो।
सान्वी ने अंदर जाते ही आँखें बड़ी कर लीं।
"ये जगह..."
आर्यवीर मुस्कुराया।
"तुमने एक बार कहा था कि तुम्हें पेंटिंग पसंद है।"
सान्वी कुछ पल उसे देखती रही।
उसे याद था...
उसने यह बात सिर्फ़ एक बार कही थी।
बहुत पहले।
"तुम्हें याद था?"
आर्यवीर ने कंधे उचकाए।
"तुम्हारी बातें याद रह जाती हैं।"
सान्वी का दिल एक पल के लिए रुक-सा गया।
दोनों ने कैनवास उठाया।
आर्यवीर ने पेंटिंग शुरू की।
सान्वी उसकी तरफ देखकर हँस पड़ी।
"तुम क्या बना रहे हो?"
"आर्ट।"
"ये आर्ट नहीं... दुर्घटना है।"
"बहुत बोल रही हो।"
"सच बोल रही हूँ।"
आर्यवीर ने ब्रश से उसके गाल पर हल्का-सा रंग लगा दिया।
सान्वी चौंक गई।
"आर्यवीर!"
वह हँसते हुए पीछे हट गया।
सान्वी ने भी ब्रश उठाया।
"अब देखो!"
कुछ ही सेकंड में दोनों एक-दूसरे के चेहरे पर रंग लगाने लगे।
पूरा स्टूडियो उनकी हँसी से भर गया।
आख़िरकार...
दोनों ने अपनी पेंटिंग पूरी की।
सान्वी ने कैनवास देखा।
दोनों ने मिलकर एक छोटा-सा घर बनाया था।
सामने दो लोग खड़े थे।
और उनके ऊपर एक सूरज।
आर्यवीर ने धीरे से पूछा,
"ये घर किसका है?"
सान्वी ने मुस्कुराकर कहा,
"पता नहीं..."
फिर उसने कैनवास की तरफ देखा।
"...लेकिन अच्छा है।"
दूसरा पड़ाव...
एक पुराने शहर की छोटी-सी स्ट्रीट।
वहाँ आर्यवीर उसे गोलगप्पे खिलाने ले गया।
सान्वी ने खुशी से कहा,
"तुम्हें पता है मैं कितने गोलगप्पे खा सकती हूँ?"
"जितने तुम चाहो।"
दस मिनट बाद...
सान्वी ग्यारहवाँ गोलगप्पा खाते ही खाँसने लगी।
आर्यवीर पानी लेकर दौड़ा।
"बस! अब और नहीं।"
सान्वी ने आँखों में पानी लिए कहा,
"मैं ठीक हूँ।"
"तुम्हारा मुँह लाल हो गया है।"
"मिर्च थी!"
आर्यवीर हँसने लगा।
"बहादुरी दिखाने की जरूरत नहीं।"
सान्वी ने उसे घूरा।
"तुम हँस क्यों रहे हो?"
"क्योंकि तुम बहुत क्यूट लग रही हो।"
सान्वी एकदम चुप हो गई।
आर्यवीर को भी एहसास हुआ कि उसने क्या कह दिया था।
दोनों ने एक-दूसरे से नज़रें चुरा लीं।
शाम होने लगी।
आर्यवीर उसे शहर के एक शांत पार्क में ले गया।
दोनों बेंच पर बैठ गए।
कुछ देर तक सिर्फ़ हवा की आवाज़ थी।
सान्वी ने धीरे से पूछा,
"आज इतना सब क्यों?"
आर्यवीर चुप रहा।
"कल तुमने कहा था कि तुम्हें डर है मुझे खोने का।"
सान्वी ने उसकी तरफ देखा।
"तो?"
"तो मैं चाहता हूँ..."
वह कुछ पल रुका।
"...कि तुम्हें मेरे साथ रहते हुए कभी ऐसा महसूस न हो कि तुम अकेली हो।"
सान्वी की आँखें नम हो गईं।
"आर्यवीर..."
"हाँ?"
"अगर एक दिन हमारा ये रिश्ता खत्म हो गया तो?"
आर्यवीर का चेहरा गंभीर हो गया।
उसने उसकी आँखों में देखकर कहा—
"मैं नहीं चाहता कि ये खत्म हो।"
सान्वी की साँस अटक गई।
"लेकिन हमारा रिश्ता तो..."
आर्यवीर ने धीरे से उसकी बात काट दी।
"शायद अब वो सिर्फ़ रिश्ता नहीं रहा जिसे हमने शुरू किया था।"
दोनों कुछ पल एक-दूसरे को देखते रहे।
उसी समय...
पास की सड़क पर एक कार रुकी।
रिया अंदर बैठी थी।
उसके हाथ में कैमरा था।
उसने दोनों की तस्वीरें देखीं।
"बहुत खुश हो रहे हो..."
"लेकिन ये तस्वीरें जल्द ही तुम्हारे खिलाफ़ जाएँगी।"
तभी उसके फोन पर मैसेज आया।
मीरा:"मैंने तुम्हारा प्लान समझ लिया है। अब मैं तुम्हारा साथ नहीं दूँगी।"
रिया का चेहरा कठोर हो गया।
उसने तुरंत जवाब दिया—
"तुम्हें लगता है तुम मेरे खिलाफ़ जा सकती हो?"
कुछ सेकंड बाद जवाब आया—
"मैं सिर्फ़ सच के साथ हूँ।"
रिया ने फोन बंद कर दिया।
लेकिन उसके चेहरे पर घबराहट नहीं थी।
बल्कि एक खतरनाक शांति थी।
"ठीक है..."
"तो अब मीरा भी मेरे रास्ते में है।"
रात...
आर्यवीर सान्वी को उसके घर छोड़ने आया।
कार रुक गई।
सान्वी उतरने लगी।
फिर वह रुकी।
"आर्यवीर..."
"हूँ?"
"आज का दिन..."
वह मुस्कुराई।
"बहुत अच्छा था।"
आर्यवीर ने मुस्कुराकर कहा,
"मेरे लिए भी।"
सान्वी कुछ कदम आगे बढ़ी।
फिर पीछे मुड़ी।
"गुड नाइट।"
"गुड नाइट, सान्वी।"
वह अंदर चली गई।
आर्यवीर ने कार स्टार्ट की।
लेकिन दोनों को नहीं पता था...
उसी रात रिया ने एक अनजान नंबर से सान्वी को एक वीडियो भेज दिया था।
वीडियो में...
आर्यवीर और मीरा की पुरानी तस्वीरें थीं।
और आख़िर में एक लाइन—
"कुछ रिश्ते खत्म होने से पहले अपने असली चेहरे दिखा देते हैं..."
सान्वी के हाथ काँपने लगे।
उसने वीडियो दोबारा चलाया।
उसकी आँखों में खुशी की जगह अब सवाल था।
"क्या आर्यवीर ने मुझसे कुछ छुपाया है?"
और पहली बार...
उनके बीच किसी तीसरे इंसान की वजह से नहीं...
बल्कि एक अधूरी सच्चाई की वजह से दूरी पैदा होने वाली थी।
क्रमशः...