Mr. Ms. Fake - एपिसोड 19 kajal jha द्वारा हास्य कथाएं में हिंदी पीडीएफ

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Mr. Ms. Fake - एपिसोड 19

Mr. & Ms. Fake


Episode 19 – The Jealousy Game


अगली सुबह...


सिंह हाउस में माहौल बाकी दिनों जैसा ही था, लेकिन आर्यवीर के दिमाग में कल रात की बातें अब भी घूम रही थीं।


"क्या तुम्हें सच में कुछ भी महसूस नहीं होता?"


"तुम्हें खोने का डर लग रहा था..."


सान्वी के शब्द उसके दिल में अटक गए थे।


वह नाश्ते की टेबल पर बैठा था, लेकिन सामने रखे टोस्ट को पिछले दस मिनट से सिर्फ देख रहा था।


चिंटू ने उसकी प्लेट में देखा।


"भैया..."


आर्यवीर ने कोई जवाब नहीं दिया।


"भैया!"


"हूँ?"


"टोस्ट खा रहे हो या उसे घूरकर जला रहे हो?"


कबीर हँस पड़ा।


"इसे टोस्ट नहीं, प्यार दिखाई दे रहा है।"


आर्यवीर ने उसे घूरा।


"तुम दोनों सुबह-सुबह मेरा दिमाग मत खराब करो।"


दादी मुस्कुराते हुए बोलीं,


"दिमाग तो इसका कोई और ही खराब कर चुका है।"


आर्यवीर ने तुरंत पानी पी लिया।


पूरा परिवार हँस पड़ा।


उधर...


सान्वी अपने कमरे में आईने के सामने खड़ी थी।


वह बार-बार अनन्या की बात याद कर रही थी।


"कोई लड़का तुम्हें उस तरह देखता है जैसे दुनिया में उसके लिए सिर्फ तुम ही हो।"


सान्वी ने अपने सिर पर हाथ रख लिया।


"नहीं..."


"मैं इन बातों के बारे में नहीं सोचूँगी।"


तभी उसका फोन बजा।


आर्यवीर का नाम स्क्रीन पर चमक रहा था।


सान्वी का दिल अचानक तेज़ धड़कने लगा।


उसने फोन उठाया।


"हैलो?"


दूसरी तरफ कुछ सेकंड खामोशी रही।


फिर आर्यवीर बोला,


"आज फ्री हो?"


सान्वी चौंकी।


"क्यों?"


"कुछ काम है।"


"कैसा काम?"


"बताऊँगा नहीं।"


"तो मैं नहीं आ रही।"


"सान्वी..."


उसकी आवाज़ में हल्की-सी हँसी थी।


"बस एक घंटे के लिए।"


सान्वी मुस्कुराए बिना नहीं रह सकी।


"ठीक है।"


फोन कट गया।


सान्वी ने आईने में खुद को देखा।


"एक घंटे के लिए..."


फिर खुद ही बुदबुदाई,


"इतनी खुशी क्यों हो रही है?"


दोपहर...


आर्यवीर उसे एक पुराने कैफ़े में लेकर आया।


वही कैफ़े जहाँ दोनों की पहली मुलाकात हुई थी।


सान्वी ने चारों तरफ देखते हुए कहा,


"यहाँ क्यों लाए हो?"


आर्यवीर ने कुर्सी खींचकर उसके लिए जगह बनाई।


"याद है?"


सान्वी मुस्कुराई।


"कैसे भूल सकती हूँ?"


"यहीं तुमने पहली बार मेरे ऊपर कॉफी गिराई थी।"


"और तुमने मुझे पहली बार पागल कहा था।"


"क्योंकि तुम सच में पागल थीं।"


सान्वी ने आँखें तरेरीं।


"अच्छा?"


"हाँ।"


"तो मैं जा रही हूँ।"


वह उठने लगी।


आर्यवीर ने उसका हाथ पकड़ लिया।


दोनों कुछ पल के लिए चुप हो गए।


आर्यवीर ने धीरे से उसका हाथ छोड़ दिया।


"बैठो।"


सान्वी फिर बैठ गई।


उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी।


दोनों कॉफी पी रहे थे कि तभी...


एक लड़की उनके टेबल के पास आकर रुकी।


"आर्यवीर?"


आर्यवीर ने ऊपर देखा।


उसके चेहरे पर तुरंत पहचान की चमक आई।


"मीरा!"


लड़की खुशी से मुस्कुराई।


"ओह माय गॉड! इतने साल बाद!"


सान्वी चुप हो गई।


मीरा ने आर्यवीर को गले लगा लिया।


सान्वी ने अपनी कॉफी का कप थोड़ा ज़ोर से टेबल पर रख दिया।


आर्यवीर ने उसकी तरफ देखा।


"मीरा मेरी कॉलेज फ्रेंड है।"


मीरा ने सान्वी की तरफ देखा।


"ओह... ये?"


आर्यवीर कुछ बोलता, उससे पहले सान्वी ने मुस्कुराकर कहा,


"मैं..."


वह रुक गई।


पहले वह "गर्लफ्रेंड" कहने वाली थी...


लेकिन पता नहीं क्यों आज वह शब्द उसके गले में अटक गया।


आर्यवीर उसकी तरफ देखने लगा।


सान्वी ने आखिर कहा,


"मैं आर्यवीर की दोस्त हूँ।"


मीरा मुस्कुराई।


"अच्छा।"


लेकिन आर्यवीर का चेहरा बदल गया।


उसे नहीं पता क्यों...


लेकिन सान्वी का खुद को सिर्फ दोस्त कहना उसे अच्छा नहीं लगा।


मीरा कुछ देर उनके साथ बैठी।


वह लगातार कॉलेज की पुरानी बातें कर रही थी।


कभी आर्यवीर की तारीफ...


कभी उसकी पुरानी शरारतें...


और हर बार सान्वी बस मुस्कुराकर सुन रही थी।


लेकिन उसके अंदर कुछ जल रहा था।


उसे खुद समझ नहीं आ रहा था कि उसे इतना बुरा क्यों लग रहा है।


आख़िरकार मीरा ने कहा,


"आर्य, आज शाम मिल सकते हो?"


"क्यों?"


"कुछ जरूरी बात है।"


आर्यवीर ने कहा,


"ठीक है।"


सान्वी ने तुरंत उसकी तरफ देखा।


लेकिन कुछ नहीं बोली।


कैफ़े से बाहर निकलते ही...


आर्यवीर ने पूछा,


"तुम चुप क्यों हो?"


"मैं?"


"हाँ।"


"कुछ नहीं।"


"झूठ।"


सान्वी ने उसकी तरफ देखा।


"तुम्हें हर बार कैसे पता चल जाता है कि मैं झूठ बोल रही हूँ?"


आर्यवीर मुस्कुराया।


"क्योंकि अब मैं तुम्हें थोड़ा जानने लगा हूँ।"


सान्वी का दिल धड़क उठा।


लेकिन उसने बात बदल दी।


"वो लड़की बहुत अच्छी थी।"


"मीरा?"


"हाँ।"


"बहुत पुरानी दोस्त है।"


सान्वी ने सामान्य बनने की कोशिश की।


"तुम दोनों की अच्छी बॉन्डिंग है।"


आर्यवीर उसकी तरफ देखने लगा।


"तुम्हें जलन हो रही है?"


सान्वी ने तुरंत कहा,


"बिल्कुल नहीं!"


आर्यवीर हँस पड़ा।


"तुम्हारे चेहरे ने अभी कहा कि हाँ।"


सान्वी ने उसे घूरा।


"तुम बहुत ओवरकॉन्फिडेंट हो।"


"और तुम बहुत खराब झूठ बोलती हो।"


दोनों हँस पड़े।


उसी शाम...


रिया अपने ऑफिस में बैठी थी।


उसके सामने मीरा बैठी थी।


हाँ...


वही मीरा।


रिया ने उसे एक लिफाफा दिया।


"बस इतना करना है कि आर्यवीर के करीब रहो।"


मीरा ने पूछा,


"और सान्वी?"


रिया मुस्कुराई।


"उसे कुछ करने की जरूरत नहीं।"


"वो खुद जलने लगेगी।"


"और जब कोई इंसान प्यार में जलता है..."


"...तो वह अपने दिल की सच्चाई ज्यादा देर छुपा नहीं पाता।"


लेकिन रिया को एक बात नहीं पता थी।


मीरा उसकी बात मानने आई जरूर थी...


लेकिन उसने आर्यवीर के साथ पुरानी दोस्ती की वजह से रिया की असली मंशा समझ ली थी।


उसने लिफाफा बंद किया और मन ही मन कहा—


"तुम्हें लगता है मैं तुम्हारे खेल का हिस्सा बनूँगी?"


"देखते हैं, रिया..."


"किसका खेल किस पर भारी पड़ता है।"


रात...


सान्वी अपने कमरे में अकेली बैठी थी।


उसने मोबाइल उठाया।


आर्यवीर का चैट बॉक्स खोला।


कुछ टाइप किया...


फिर डिलीट कर दिया।


फिर लिखा—


"आज तुम मीरा से मिलने क्यों गए?"


फिर डिलीट।


उसने खुद को आईने में देखा।


"ये मुझे क्या हो रहा है?"


उसी समय फोन पर मैसेज आया।


आर्यवीर:"सो गई?"


सान्वी का चेहरा खिल उठा।


उसने तुरंत जवाब दिया—


"नहीं।"


कुछ सेकंड बाद...


आर्यवीर:"कल मेरे साथ पूरा दिन रहोगी?"


सान्वी कुछ पल स्क्रीन देखती रही।


फिर उसके होंठों पर मुस्कान आई।


"हाँ।"


लेकिन उसे नहीं पता था...


कल का वह दिन उनके रिश्ते का सबसे खूबसूरत...


और सबसे खतरनाक दिन बनने वाला था।


क्योंकि रिया ने उनके लिए एक ऐसा सरप्राइज़ तैयार कर रखा था...


जिसमें सिर्फ जलन नहीं...


बल्कि उनका नकली रिश्ता पहली बार असली परीक्षा में पड़ने वाला था।


क्रमशः...