Mr. Ms. Fake - एपिसोड 18 kajal jha द्वारा हास्य कथाएं में हिंदी पीडीएफ

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Mr. Ms. Fake - एपिसोड 18

Mr. & Ms. Fake

Episode 18 – The Unexpected Ally

अनन्या की अचानक एंट्री से बगीचे में कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया।

आर्यवीर ने झेंपते हुए कहा,

"अनन्या... तुम यहाँ?"

अनन्या हल्के से मुस्कुराई।

"आंटी ने कहा था कि आप लोग बगीचे में हैं, इसलिए मैं यहीं आ गई।"

सान्वी ने तुरंत खुद को संभाला।

"मैं... मैं चलती हूँ।"

वह मुड़ने लगी, लेकिन अनन्या ने प्यार से उसका हाथ पकड़ लिया।

"अगर मेरी वजह से जा रही हो, तो मत जाओ।"

सान्वी उसकी तरफ हैरानी से देखने लगी।

अनन्या की आँखों में न गुस्सा था, न जलन...

बस एक सच्ची मुस्कान थी।

तीनों कुछ देर तक चुप रहे।

फिर अनन्या ने हँसते हुए कहा,

"वैसे... आप दोनों की एक्टिंग अच्छी है।"

आर्यवीर और सान्वी एक-दूसरे को देखने लगे।

उनके चेहरे का रंग उड़ गया।

आर्यवीर ने धीरे से पूछा,

"मतलब?"

अनन्या मुस्कुराई।

"मतलब... जो लोग सच में सिर्फ दोस्त होते हैं, वो एक-दूसरे को इस तरह नहीं देखते।"

सान्वी ने नज़रें झुका लीं।

अनन्या ने गहरी साँस ली।

"सच बताऊँ?"

"मैं यहाँ शादी करने नहीं आई थी।"

दोनों एक साथ चौंक पड़े।

"क्या?"

"हाँ।"

"पापा चाहते थे कि मैं तुम्हें देखूँ।"

"लेकिन मैंने आते ही समझ लिया कि तुम्हारे दिल में किसी और के लिए जगह है।"

आर्यवीर कुछ बोल नहीं पाया।

उसी समय...

दादी बगीचे में आ गईं।

"अरे! तुम लोग यहाँ हो?"

अनन्या मुस्कुराकर बोली,

"दादी, मैं आपसे एक बात करना चाहती हूँ।"

"हाँ बेटा, बोलो।"

"अकेले में।"

दादी उसे लेकर अंदर चली गईं।

ड्रॉइंग रूम...

अनन्या ने दादी के सामने बैठते हुए कहा,

"दादी, आप नाराज़ तो नहीं होंगी?"

दादी मुस्कुराईं।

"पहले बात तो बताओ।"

अनन्या ने धीरे से कहा,

"मैं ये रिश्ता आगे नहीं बढ़ाना चाहती।"

दादी का चेहरा थोड़ा उतर गया।

"कोई कमी रह गई क्या?"

अनन्या ने तुरंत उनका हाथ पकड़ लिया।

"बिल्कुल नहीं।"

"आपका परिवार बहुत अच्छा है।"

"लेकिन..."

"...शादी सिर्फ दो परिवारों का नहीं, दो दिलों का रिश्ता होती है।"

"और आर्यवीर का दिल कहीं और है।"

दादी चुप हो गईं।

उन्होंने कुछ पल सोचा।

फिर पूछा,

"क्या तुमने उससे कुछ सुना है?"

अनन्या मुस्कुराई।

"नहीं..."

"लेकिन उसकी आँखें सब बता रही थीं।"

उधर...

बाहर लॉन में...

सान्वी परेशान होकर टहल रही थी।

"अगर अनन्या ने सब बता दिया तो?"

आर्यवीर ने कहा,

"जो होगा, साथ में फेस करेंगे।"

सान्वी ने उसकी तरफ देखा।

आज पहली बार...

उसके शब्दों में सिर्फ़ जिम्मेदारी नहीं...

अपनापन भी था।

कुछ देर बाद...

दादी बाहर आईं।

उनके साथ अनन्या भी थी।

पूरा परिवार हॉल में इकट्ठा हो गया।

दादी ने कहा,

"अनन्या बेटा, तुम ही सबको बताओ।"

अनन्या मुस्कुराई।

"मैंने ये रिश्ता मना कर दिया है।"

पूरा घर हैरान रह गया।

विक्रम मेहता भी चौंक गए।

"लेकिन क्यों?"

अनन्या ने मुस्कुराकर कहा,

"क्योंकि मुझे ऐसा इंसान नहीं चाहिए..."

"...जिसका दिल पहले से किसी और के पास हो।"

पूररे हॉल में सन्नाटा छा गया।

आर्यवीर ने अनजाने में सान्वी की तरफ देखा।

और सान्वी ने भी...

लेकिन दोनों तुरंत नज़रें झुका गए।

दादी ने गहरी साँस ली।

"अगर यही तुम्हारा फैसला है..."

"...तो हमें मंज़ूर है।"

अनन्या ने उनके पैर छुए।

"थैंक यू।"

विक्रम मेहता भी मुस्कुराए।

"बेटी की खुशी से बढ़कर कुछ नहीं।"

माहौल फिर से हल्का हो गया।

सबके जाने के बाद...

अनन्या बाहर गाड़ी में बैठने लगी।

तभी उसने सान्वी को आवाज़ दी।

"एक मिनट।"

सान्वी उसके पास आई।

उसे लगा शायद अनन्या कुछ उल्टा कहेगी।

लेकिन...

अनन्या ने मुस्कुराकर कहा,

"तुम बहुत लकी हो।"

सान्वी चौंकी।

"मैं?"

"हाँ।"

"कोई लड़का तुम्हें उस तरह देखता है..."

"...जैसे दुनिया में उसके लिए सिर्फ तुम ही हो।"

सान्वी की आँखें फैल गईं।

"लेकिन..."

अनन्या ने उसकी बात काट दी।

"अब फैसला तुम्हें करना है।"

"डर जीतना है..."

"...या प्यार।"

इतना कहकर वह कार में बैठ गई।

गाड़ी धीरे-धीरे दूर चली गई।

दूसरी तरफ...

घर की दूसरी मंज़िल की खिड़की से रिया यह सब देख रही थी।

उसने सोचा था कि अनन्या के आने से आर्यवीर और सान्वी दूर हो जाएँगे।

लेकिन...

अनन्या तो उल्टा उनके और करीब ले आई थी।

रिया ने गुस्से में मेज़ पर रखा फूलदान गिरा दिया।

"हर बार..."

"हर बार कोई न कोई मेरी पूरी प्लानिंग खराब कर देता है।"

उसने आईने में खुद को देखा।

फिर धीमे से बोली—

"अब प्यार से नहीं..."

"...अब खेल दिमाग से होगा।"

उसकी आँखों में एक खतरनाक चमक थी।

इस बार...

वह कोई छोटी चाल नहीं चलने वाली थी।

क्रमशः...