Mr. Ms. Fake - एपिसोड 16 kajal jha द्वारा हास्य कथाएं में हिंदी पीडीएफ

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Mr. Ms. Fake - एपिसोड 16

Mr. & Ms. Fake

Episode 16 – The Perfect Bride

अगले दिन...

सुबह के दस बजे।

सिंह हाउस में हर कोई किसी न किसी काम में व्यस्त था।

दादी ने पूरे घर को सिर पर उठा रखा था।

"जल्दी-जल्दी सब तैयार हो जाओ।"

आर्यवीर अख़बार पढ़ते हुए बोला,

"दादी, आज क्या है?"

दादी मुस्कुराईं।

"आज कुछ खास मेहमान आने वाले हैं।"

"कौन?"

"सरप्राइज़!"

आर्यवीर ने कंधे उचकाए और वापस अख़बार पढ़ने लगा।

उसे बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि यह "सरप्राइज़" उसकी ज़िंदगी बदलने वाला है।

उधर...

सान्वी अपने थिएटर ग्रुप में थी।

उसी समय दादी का फोन आया।

"बेटा, आज दोपहर का खाना हमारे साथ खाना।"

"लेकिन दादी..."

"कोई बहाना नहीं।"

सान्वी हँस पड़ी।

"ठीक है, मैं आ जाऊँगी।"

दोपहर...

सिंह हाउस के बाहर एक चमचमाती काली मर्सिडीज आकर रुकी।

उसमें से एक प्रतिष्ठित बिज़नेसमैन विक्रम मेहता, उनकी पत्नी और उनकी बेटी उतरे।

उनकी बेटी का नाम था...

अनन्या मेहता।

करीब पच्चीस साल की, आत्मविश्वासी, पढ़ी-लिखी और बेहद शालीन।

दादी ने मुस्कुराकर उनका स्वागत किया।

आर्यवीर नीचे आया तो सबको देखकर हैरान रह गया।

"अंकल... आप?"

विक्रम मेहता हँस पड़े।

"क्यों बेटा, हमें देखकर खुश नहीं हुए?"

"नहीं... ऐसी बात नहीं है।"

उसी समय दादी ने मुस्कुराते हुए कहा—

"आर्य... अनन्या को घर दिखाकर लाओ।"

आर्यवीर समझ नहीं पाया।

लेकिन वह उसे लेकर चला गया।

ऊपर...

अनन्या मुस्कुराकर बोली,

"तुम बहुत असहज लग रहे हो।"

आर्यवीर हल्का-सा हँसा।

"हाँ... क्योंकि मुझे समझ नहीं आ रहा कि हो क्या रहा है।"

अनन्या ने भी मुस्कुरा दिया।

"मुझे भी नहीं।"

दोनों की बातचीत सामान्य थी।

अनन्या घमंडी नहीं थी।

वह विनम्र और समझदार लड़की थी।

उसी समय...

सान्वी सिंह हाउस पहुँची।

जैसे ही वह अंदर आई...

उसने देखा कि हॉल में सब किसी मेहमान के साथ बैठे हैं।

दादी ने खुशी से कहा,

"आओ बेटा!"

फिर उन्होंने सान्वी का परिचय कराया।

"ये सान्वी है..."

लेकिन उससे पहले ही...

विक्रम मेहता मुस्कुराकर बोले,

"अरे, यही है?"

दादी ने गर्व से कहा,

"हाँ, हमारी..."

वे कुछ कहतीं, उससे पहले रिया अंदर आ गई।

रिया ने तुरंत बात संभाली।

"ये आर्यवीर की अच्छी दोस्त हैं।"

सान्वी ने रिया की तरफ देखा।

उसे महसूस हुआ...

रिया आज कुछ ज़्यादा ही शांत है।

कुछ देर बाद...

दादी सबको बैठाकर बोलीं,

"अब मैं असली बात बताती हूँ।"

आर्यवीर भी नीचे आ चुका था।

दादी ने मुस्कुराते हुए कहा,

"विक्रम जी, हमने आपके रिश्ते के बारे में बहुत सोचा।"

आर्यवीर चौंक गया।

"रिश्ता?"

दादी बोलीं,

"हाँ बेटा।"

"हम चाहते हैं कि तुम्हारी शादी अनन्या से हो जाए।"

पूरा हॉल एकदम शांत हो गया।

सान्वी के हाथ से पानी का गिलास लगभग छूट गया।

उसे लगा जैसे किसी ने उसके दिल पर ज़ोर से चोट मारी हो।

आर्यवीर भी अवाक रह गया।

"दादी... लेकिन..."

दादी मुस्कुराईं।

"अनन्या जैसी लड़की बार-बार नहीं मिलती।"

रिया एक कोने में खड़ी यह सब देख रही थी।

उसके चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान थी।

असल में...

यह रिश्ता उसी ने विक्रम मेहता के परिवार तक पहुँचाया था।

उसे भरोसा था कि अगर आर्यवीर के सामने इतना अच्छा रिश्ता आएगा...

तो सान्वी खुद पीछे हट जाएगी।

आर्यवीर ने गहरी साँस ली।

"दादी... मुझे अभी शादी नहीं करनी।"

दादी बोलीं,

"क्यों?"

आर्यवीर कुछ बोल ही रहा था कि...

सान्वी बीच में बोली,

"दादी सही कह रही हैं।"

सबकी नज़र उसकी तरफ चली गई।

उसने मुस्कुराने की कोशिश की।

"अनन्या जी बहुत अच्छी हैं।"

"अगर आर्यवीर उनसे शादी करें... तो सब खुश रहेंगे।"

ये कहते हुए उसके चेहरे पर मुस्कान थी...

लेकिन उसकी आँखों की चमक गायब हो चुकी थी।

आर्यवीर ने पहली बार महसूस किया...

सान्वी मुस्कुरा तो रही है...

लेकिन उसके दिल में दर्द है।

शाम...

मेहमान चले गए।

सान्वी भी बिना किसी से ज़्यादा बात किए जाने लगी।

गेट तक पहुँचते ही...

आर्यवीर ने पीछे से आवाज़ दी।

"सान्वी!"

वह रुक गई।

"तुम सच में चाहती हो कि मैं अनन्या से शादी कर लूँ?"

सान्वी कुछ पल चुप रही।

फिर बोली,

"हमारा रिश्ता तो सिर्फ़ कॉन्ट्रैक्ट था..."

"एक दिन तो खत्म होना ही था।"

उसने इतना कहा और तेज़ी से वहाँ से चली गई।

आर्यवीर उसे जाते हुए देखता रह गया।

आज पहली बार...

उसे एहसास हुआ कि सान्वी के दूर जाने का ख़याल भी उसे बेचैन कर रहा है।

दूसरी तरफ...

सान्वी ऑटो में बैठते ही खिड़की की तरफ मुँह करके चुपचाप रोने लगी।

वह खुद से सिर्फ़ एक ही सवाल पूछ रही थी—

"अगर यह रिश्ता नकली था... तो इसे खोने का दर्द इतना असली क्यों है?"

उसी समय...

रिया ने दूर से दोनों को देखा और धीमे से मुस्कुराई।

उसे लगा...

उसकी चाल सफल हो गई।

लेकिन उसे नहीं पता था...

यही रिश्ता दोनों को पहली बार अपने दिल की सच्चाई समझाने वाला था।