Mr. & Ms. Fake
Episode 15 – Feelings Without Permission
सुबह के नौ बजे...
सिंह हाउस में आज अलग ही रौनक थी।
दादी हाथ में पूजा की थाली लिए पूरे घर में घूम रही थीं।
"सुनो सब लोग... अगले हफ्ते हमारी कुलदेवी की पूजा है। रिश्तेदार भी आएँगे।"
चिंटू ने तुरंत पूछा,
"दादी... भाभी भी आएँगी ना?"
दादी मुस्कुराईं।
"वो तो सबसे पहले आएँगी। आखिर घर की बहू है।"
आर्यवीर ने पानी पीते-पीते खाँसना शुरू कर दिया।
"दादी... धीरे-धीरे..."
दादी ने उसे घूरा।
"अब शर्माने से कुछ नहीं होगा।"
पूरा परिवार हँस पड़ा।
उधर...
सान्वी अपने थिएटर ग्रुप की रिहर्सल में थी।
डायरेक्टर ने कहा,
"आज रोमांटिक सीन है।"
सान्वी ने सामने खड़े अभिनेता का हाथ पकड़ने की कोशिश की...
लेकिन उसके दिमाग में बार-बार आर्यवीर का चेहरा आ रहा था।
"कट!"
डायरेक्टर ने माथा पकड़ लिया।
"सान्वी, आज तुम्हारा ध्यान कहाँ है?"
रिया ने धीरे से कान में कहा,
"लगता है मिस फेक... अब सच में किसी के प्यार में पड़ रही हैं।"
सान्वी ने बात टाल दी, लेकिन उसके गाल हल्के गुलाबी हो चुके थे।
दोपहर...
आर्यवीर अपने केबिन में बैठा था।
लैपटॉप खुला था...
लेकिन काम पर ध्यान नहीं था।
कबीर अंदर आया।
"भाई, पाँच मिनट से स्क्रीन को देख रहा है। फाइल खोली भी नहीं।"
आर्यवीर ने गहरी साँस ली।
"यार... मुझे समझ नहीं आ रहा कि मेरे साथ क्या हो रहा है।"
कबीर मुस्कुराया।
"सान्वी?"
आर्यवीर चौंक गया।
"तुझे कैसे पता?"
"जिस दिन आदमी बिना वजह मुस्कुराने लगे... समझ जाओ बीमारी प्यार वाली है।"
आर्यवीर ने कुशन उठाकर कबीर की तरफ फेंक दिया।
शाम...
दादी ने दोनों को फोन किया।
"आर्य... सान्वी... तुम दोनों अभी पार्क पहुँचो।"
दोनों हैरान थे।
जब वे पहुँचे...
तो देखा कि पूरा परिवार पहले से मौजूद था।
दादी ने घोषणा की,
"आज फैमिली पिकनिक है।"
चिंटू खुशी से चिल्लाया,
"और सबसे पहले तीन पैर वाली रेस होगी!"
सान्वी ने हैरानी से पूछा,
"तीन पैर वाली?"
कबीर हँस पड़ा।
"भाभी... आपका और आर्य का एक-एक पैर रस्सी से बाँधा जाएगा।"
दोनों एक साथ बोले,
"क्या?"
पाँच मिनट बाद...
दोनों का एक-एक पैर बाँध दिया गया।
एंकर बोला,
"रेडी... वन... टू... थ्री!"
सभी कपल दौड़ पड़े।
आर्यवीर बोला,
"लेफ्ट!"
सान्वी ने उसी समय राइट पैर आगे बढ़ा दिया।
धड़ाम!
दोनों घास पर गिर पड़े।
पूरा पार्क ठहाकों से गूँज उठा।
चिंटू पेट पकड़कर हँस रहा था।
"भाभी... पहले चलना सीख लो!"
सान्वी ने घास उठाकर उसकी तरफ फेंकी।
"शैतान!"
दूसरी बार...
दोनों ने एक-दूसरे की आँखों में देखा।
आर्यवीर बोला,
"इस बार मेरी बात सुनना।"
सान्वी मुस्कुराई।
"ठीक है... पार्टनर।"
"वन..."
"टू..."
"लेफ्ट..."
दोनों एक साथ चलने लगे।
धीरे-धीरे उनकी चाल सही होने लगी।
अब वे दौड़ भी रहे थे।
आख़िरी कुछ कदम बचे थे।
तभी सामने छोटा-सा गड्ढा आया।
सान्वी का संतुलन बिगड़ा।
आर्यवीर ने बिना सोचे उसका हाथ कसकर पकड़ लिया।
दोनों बच गए।
रेस खत्म हुई।
वे पहले नहीं आए...
लेकिन आख़िरी भी नहीं रहे।
दादी ने ताली बजाई।
"यही तो असली जोड़ी होती है..."
"जो गिरने से पहले एक-दूसरे को संभाल ले।"
सान्वी ने अनजाने में आर्यवीर की तरफ देखा।
उसके मन में दादी की बात गूँजने लगी।
पिकनिक खत्म होने के बाद...
सब लोग सामान समेट रहे थे।
चिंटू दौड़ते हुए आया।
"भैया... भाभी... एक फोटो!"
उसने दोनों को पास खड़ा कर दिया।
जैसे ही कैमरा क्लिक होने वाला था...
चिंटू ने पीछे से दोनों को हल्का-सा धक्का दे दिया।
सान्वी सीधे आर्यवीर से टकरा गई।
आर्यवीर ने उसे गिरने से पहले पकड़ लिया।
उसी पल...
क्लिक!
फोटो खिंच गई।
तस्वीर में दोनों की नज़रें एक-दूसरे पर थीं...
और दोनों मुस्कुरा रहे थे।
चिंटू खुशी से बोला,
"वाह! ये फोटो तो शादी वाले एल्बम में जाएगी!"
दोनों शर्म से लाल हो गए।
पूरा परिवार हँस पड़ा।
लेकिन...
दूर पार्किंग में खड़ी रिया ने यह सब देख लिया।
उसने पहली बार महसूस किया...
यह रिश्ता अब सिर्फ़ एक समझौता नहीं रहा।
उसने धीरे से कहा,
"अगर मैं अब भी कुछ नहीं करूँगी..."
"...तो ये दोनों सच में एक-दूसरे के हो जाएँगे।"
उसने अपना फोन निकाला और किसी का नंबर मिलाया।
"मुझे आर्यवीर की शादी का रिश्ता चाहिए..."
"ऐसा रिश्ता... जिसे उसका परिवार कभी मना न कर सके।"
फोन के दूसरी तरफ़ से जवाब आया,
"समझ गया मैडम।"
रिया की मुस्कान लौट आई।
"अब देखते हैं..."
"प्यार जीतता है..."
"...या परिवार का फैसला।"