Muhabbat Ek Sabaq - 15 Afariya Faruqui द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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Muhabbat Ek Sabaq - 15

"बड़ी दुल्हन बात सुनो" !!! 

सुबह के वक़्त सब नाशता में मसरूफ थे कि बेगम शफ़ीक़ ने टेबल का मुआयना करने के बाद नाशता लाती बहू को मुखातिब किया था। 

"जी अम्मा कहें" ???

कौसर बेगम सास की तरफ मुतवज्जह हुईं। 

"यह ज़रा काम से फारिग़ हो कर तुम लोग मेरे कमरे में आना मुझे कुछ ज़रूरी बात करनी है सब से" !!! 

"क्या बात है अम्मां कोई खास काम है" ???

नाशता करते आसिम साहब ने हाथ रोक कर पूछा। 

"हां काम तो बहुत खास है , तुम लोग फारिग़ हो कर आओ फिर बताती हूं" !!! 

उन्होंने कह कर बात खत्म कर दी। 

यंग जेनरेशन भी कुछ क्यूरियस थी , लेकिन कोई भी कुछ भी समझ नही पा रहा था सिवाए अनस के एक वही था जो इतमीनान के साथ बेपरवाही दिखाते हुए नाशता करने में मगन था। 
☆ ☆ ☆

"जी अम्मां कहें क्या बात है" ??? 

नाशते से फारिग़ होने के बाद चारों मां के कमरे में मौजूद थे। 

"बैठो " !! 

 उन्होंने सब को बैठने का इशारा किया। 

"पहले आसिम तुम बताओ" !!! 

उन्होंने छोटे बेटे से पूछा। 

"जी कहिये" ??? 

"शिफ़ा के बारे में क्या सोचा है तुमने" ???? 

"किस बारे में अम्मां" ??? 

आसिम साहब को माँ की बात समझ में नहीं आई। 

"उसकी शादी के बारे में ,भई इतने रिशते आ रहे हैं सब को यूं ही मना करते रहोगे तो अच्छा रिशता भी हाथ से निकल जाएगा" !!! 

बेगम शफ़ीक़ ने बात शुरू की । 

"जी अम्मां आपकी बात बिल्कुल ठीक है , लेकिन अगर रिशता कर दिया जाए तो फिर ज़्यादा दिन कोई नही रूकता बस शादी की जल्दी मचा देते हैं। और ऐसे में बच्चो के ज़हन पर भी असर पड़ता है और उनकी पढ़ाई भी डिस्टर्ब होती है। और शिफ़ा की तो पढ़ाई भी आप जानती हैं य काफ़ी टफ़ है। तो हम लोगों ने सोचा है कि एक बार उसकी पढ़ाई पूरी हो जाए तो मंगनी और शादी जल्दी कर देंगे" !! 

आसिम साहब नें वजह बताई। 

"हम्मम, बहुत नेक ख्याल है" !! 

वह सर हिला कर अब दूसरे बेटे की तरफ मुतवज्जह हुईं थीं। 

"तुम बताओ मियां , तुम्हारा क्या ख्याल है बेटे के बारे में , बड़े तो दोनों सैट हो गए हैं" ? ? ? ?  

"जी अम्मां आखिरी साल है यह उसका बैकिंग का, इसके बाद मैंने कामरान साहब से बात की हुई है वह जो मेरे दोस्त हैं आप जानती हैं ना वह न्यी ब्रांच शुरू कर रहे हैं ,खुद तो वह बाहर होते हैं तो यहां की ब्रांच के लिये उनको एक भरोसेमंद आदमी की ज़रूरत है मैंने अनस के लिये उनको कह दिया है इतने इसका यह साल खत्म होगा उस्से पहले ही उनका काम शुरू हो जाएगा बाक़ी फिर इंशाअल्लाह आगे मेरा इरादा उनके साथ पार्टनरशिप का है" !!! 

असद साहब ने भी मां को तफसील के साथ अपना प्रोग्राम बताया था। 

"हम्मम, बहुत अच्छी बात है तुम लोगों नें बच्चो के मुस्तक़बिल के लिये पहले से ही सब सोचा हुआ है लेकिन मुझे शिफ़ा की तरफ से फिक्र है" !! 

उन्होंने कुछ सोचते हुए कहा । 

"कैसी फिक्र अम्मां" ???

असद साहब ने पूछा। 

"बेटा शिफ़ा तुम लोगों के हाथों ही पली बढ़ी है और तुम सब जानते हो कि हम ने कभी उसे फूलों की छड़ी से भी नहीं छुआ है। अब आगे ससुराल कैसी मिले ,कैसे लोग हों हमारी बच्ची को हमारी तरह रखें भी या नही" !!! 

"लेकिन यह तो दुनिया की रीत है अम्मां , बेटियां तो बादशाहों ने भी ब्याही हैं , यह तो होती ही पराया धन हैं " !!! 

नादिरा बेगम भी अफसुर्दा सी (अफसोस में) हो कर बोलीं। 

"इसलिये ही मैं यह चाहती हूं कि वह घर में ही रह जाए" !!! 

अब की उन्होंने असद साहब की तरफ रूख किया था। 

"क्या मतलब अम्मां, क्या कहना चाहती हैं आप" ??? 

वह वाक़ई नही समझे थे। 

"मतलब यह कि मैं चाहती हूं के तुम शिफ़ा को अपनी बेटी बना लो" !!! 

उन्होंने बात मुकम्मल की। 

"अम्मां आपका इरादा रज़ा के लिये है या अनस के लिये" ???? 

कौसर बेगम ने पूछा। 

"अनस का कह रही हूं मैं , रज़ा का भी अल्लाह कराएगा ही बंदोबस्त कहीं ना कहीं" !!! 

उन्होंने कहा तो सब को बहुत खुशी हुई थी। 

"अम्मां मुझे तो कोई ऐतराज़ नही है , शिफ़ा मेरी बेटी बन जाए हमेशा के लिये इस्से अच्छी और क्या बात हो सकती है" !!! 

असद साहब तो उनकी बात सुनकर बहुत खुश हुए थे। उन्हें भतीजी से बेटियों की ही तरह से मुहब्बत थी। 

"जी अम्मा असद बिल्कुल ठीक कह रहे हैं हमारी खुशनसीबी होगी अगर ऐसा हो जाए तो" !!! 

बेगम असद भी शौहर के फैसले से बहुत खुश हुईं। 

"हां भई अब तुम लोग बताओ तुम्हारा क्या फैसला है" ???? 

वह अब छोटे बेटे और बहु की तरफ मुतवज्जह हुईं। 

"हमें भी आपका यह फैसला दिल से क़ुबूल है अम्मां , क्योंकि मुझे भी यही फिक्र रहती है शिफ़ा की तरफ से" !!! 

आसिम साहब के लहजे में बेटी के लिये बेइंतेहा मुहब्बत बोल रही थी। 

"ठीक है बस फिर , तुम लोग बच्चों से बात कर लो फिर निकाह की तारीख़ फाइनल कर लेते हैं" !!! 

उनहोंने अपना अगला फैसला सुनाया। 

"लेकिन अम्मां इतनी जल्दी निकाह" ???? 

बेगम आसिम के तो सुनकर ही हाथ पांव फूल गए। 

"कोई बात नही नादिरा तुम फिक्र ना करो , घर की बात है शॉपिंग दोनों मिलकर कर लेना , अभी ज़्यादा लंबा चौड़ा फंकशन नही करेंगे बस खास लोगों को ही बुलाएंगे। बाक़ी शिफ़ा की पढ़ाई पूरी होने के बाद जब रूखसती होगी तब करेंगे इन्शाअल्लाह धूमधाम से सब की दावत" !!! 

असद साहब ने भावज को फिक्रमंद देख कर कहा। 

"हां छोटी दुल्हन, असद ने बिल्कुल ठीक कहा है अभी बस खास खास लोगों को बुला लेगे और हां बच्चों को भी कह देना वह अपने दोस्तो को कह देंगे जिस जिसको कहना होगा" !!! 

बेगम शफ़ीक़ ने भी तसल्ली दी तब जाकर उन्हें कुछ इतमीनान हुआ था।  
☆ ☆ ☆

"क्या !! मेरा निकाह, इतनी जल्दी ??? 

अम्मी ने जब से उसको बताया था कि दादू बड़े पापा और पापा ने मिलकर अनस और उसका निकाह तय कर दिया है तब से उसके दिल और दिमाग में भट्टे जल रहे थे। 
"हां तो इसमें इतना हैरान होने वाली कौन सी बात है , वैसे भी हम अभी रूखसती नही कर रहे हैं" !!! 

अम्मी ने इतमीनान से कहा तो वह और ज़्यादा किलस गई। 

"लेकिन निकाह भी क्यों , जब आपको रूखसती 2 साल बाद करनी है तो निकाह भी तब ही कर दीजियेगा ना अभी क्या जल्दी है" ??? 

वह किसी तौर इस निकाह के लिये तैयार नही थी
"तो तुम्हे मसला क्या है निकाह से" ??? 
"मसला निकाह से नही अनस से है" !!! 

उस ने दाँत पीस कर कहा
"क्यों उसने तुम्हारी कौन सी भैंस खोल दी , या फिर तुम्हारा इरादा कहीं और है" ???

अम्मी ने घूर कर पूछा तो वह गड़बड़ा गई। 
"मेरा कहीं कोई भी इरादा नही है आप लोग मुझे पढ़ने दें बस" !! 

उसने उनके आगे दोनो हाथ जोड़ दिए। 
"तो पढ़ लो , हम तुम्हें मना तो नहीं कर रहे हैं और अनस कौन सा तुम्हारी किताबें फाड़ रहा है ??

बेगम आसिम ने बेटी को घूर कर देखा। 

"चची जान आपको दादू बुला रही हैं" !! 
अनस ने दरवाज़े में ही खड़े खड़े इत्तेला दी थी। 
"ओफ्फोह अम्मा ने तो मुझे काफी देर पहले बुलाया था , तुम्हारी चक चक नें सब भुला दिया " !!!! 

वह सर पर हाथ मारती खड़ी हुई और जाते जाते उसको सुना कर भी गई थीं। 

"अब तुम क्या यहां खड़े यह दाँत दिखा रहे हो दफा हो जाओ फौरन " !!! 

अम्मी के जाने के बाद भी अनस को वहीं खड़ा देख कर वह दहाड़ी थी जिसका उस पर रत्ती भर भी असर नही हुआ ,वह उसी ढिटाई के साथ वहीं पर जमा हुआ था। 
"सच सच बताना दादू के यह निकाह वाली चाबियां तुमहीं ने भरी है ना" ??? 
वह अब उसकी खबर लेने के लिये उसकी तरफ बढ़ी थी। 
"निकाह वाली तो नही हां लेकिन यह चाबी ज़रूर भरी है मेरा मतलब है कि यह ज़रूर कहा है मैने उनको कि मैं तुमसे शादी करना चाहता हूं , यह निकाह वाला फैसला उनका अपना है" !!! 

वह बड़े फख्र से बता रहा था जैसे कोई बहुत बड़ा काम कर के आया हो। 
"तुम्हे शर्म नही आई ऐसी बेशर्मी की बातें करते हुए वह भी दादू से, बहुत ही जाहिल और बदतमीज़ हो" !!! 

उस का बस नही चल रहा था सामने खड़े इस शख्स का सर फाड़ दे। 

"इज़्ज़त से ज़रा , अब तुम्हारा होने वाला मजाज़ी खुदा हूं मैं" !!! 

वह इतमीनान से कहते हुए अंदर आ कर बैठ गया। 

"होने वाले मजाज़ी खुदा , तुम खुद दफा हो रहे हो या मैं खुद निकालूं तुम्हे यहां से" ??? 

"ओह्हो यानी कि तुमने भी मान ही लिया है मुझे होने वाला मजाज़ी खुदा" !!! 

अनस की मुस्कुराहट उसका दिल जलाने के लिये काफी थी। 

"रूक जाओ तुम" !!! 

वह वहां रखी पानी की बॉटल उठाती जम्प लगा कर उसकी तरफ आती इस्से पहले ही वह उसका इरादा भाँप कर वहा से भाग उठा। 
"उफ्फ खुदा" !!!!

शिफ़ा सर पकड़ कर वहीं बैठ गई। 

"अल्लाह जाने क्या होगा मेरे फ्यूचर का" !!! 

अनस ने एक बार फिर दरवाज़े से झांक कर कहा तो वह इंतेहाई खुंखार अंदाज़ में उसकी तरफ झपटी जबकि वह एक बार फिर पहले ही नौ दो ग्यारह हो चुका था। 


☆ ☆ ☆