हैरानी - Ateet ki Yaadein - 18 vishnupriya pandit द्वारा थ्रिलर में हिंदी पीडीएफ

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हैरानी - Ateet ki Yaadein - 18

Episode - 18 (जंजीरें और जुल्म)


रिया कमरे के कोने में सिमटी खड़ी थी । उसका पति , जिसे वह अपना रक्षक समझ रही थी , आज वह उसे एक शिकारी की तरह देख रहा था उसकी आंखों में प्यार की जगह एक इंतकाम की चमक थी । वह रिया की तरफ धीरे - धीरे बढ़ा । रिया की धड़कने इतनी तेज थी कि उसे खुद अपने कानों में सुनाई दे रही थी । उसने अपनी साड़ी के पल्लू को कसकर अपनी उंगलियों में भींच लिया ।

रिया डरते हुए "देखो मेरे पास न आना । म ... मै चिल्ला दूंगी ।" रिया का पति बोला " चिल्लाओ जितनी जोर से चिल्ला सको उतनी जोर से चिल्लाओ , मै भी तो देखू कौन आता है तुम्हे बचाने । ओह याद आया , कही तुम अपने आशिक को तो नहीं बुलाओगी , जिसके पास गई थी । चलो नाम लेके बुलाओ ... अरे बुलाओ न । " रिया का पति चिल्लाते हुए बोला, उसकी आवाज में इतनी नफरत झलक रही थी कि रिया की रूह तक कांप गई । 

रिया रोते हुए " मैंने आपका क्या बिगड़ा है ? मुझे माफ कर दीजिए ।" रिया का पति चौंकते हुए - "अरे रिया तुम कब से माफी मांगने लगी तुम तो माफी मंगवाना जानती हो मांगना नहीं ।" 

रिया हैरान आंखों से अपने पति को देखती है । रिया का पति गुस्से में हंसते हुए बोला - " हैरानी क्यों हो रही तुम्हे मेरी यह बात सुन कर ... " । रिया अपने पति से लड़खड़ाती जुबान में कहती है "मुझसे माफी तो सिर्फ आर्यन मांगता था वो भी बिना गलती किए !" 

रिया का पति और जोर से हंसता है "अरे वाह ! आशिक का नाम आर्यन है । इसका मतलब मुझे छोड़ कर तुम उस आर्यन के पास गई थी । क्या है ऐसा उस आर्यन में जो मुझमें नहीं है ?"

रिया गुस्से में "आप उसका नाम मत लो आप उसकी पैर की धूल के बराबर भी नहीं हैं । वह मुझे दुःख नहीं दे सकता था और आप मुझे दर्द पे दर्द दिए जा रहे है । आप मेरे पति जरूर है लेकिन मेरे मन के मालिक नहीं .... मेरे मन में मेरी रूह में सिर्फ और सिर्फ आर्यन है ।" 
रिया की यह बात सुनकर उसके पति का चेहरा दरिंदे जैसा हो गया । उसने रिया के बाल पकड़कर उसे झकझोर दिया ।

"भाग रही थी न तुम ? उस आर्यन के पास ? " उसने फुसफुसाते हुए रिया की ठुड्ढी को अपनी उंगलियों से जोर से भींचा । उसके हाथ ठंडे और खुरदरे थे । रिया ने घृणा से अपना चेहरा दूसरी तरफ मोड़ लिया , तो उसने और भी मजबूती से उसके मुंह को दबाया । "आज कोई आर्यन नहीं आएगा । आज तुम हो और मेरा यह कमरा ।" 

उसने अपनी गंदी नजरों से रिया के शरीर को ऊपर से नीचे तक नापा । रिया को ऐसा लगा जैसे कोई कीड़ा उसके शरीर पर रेंग रहा हो ।

अचानक, उसने झटके से रिया के कंधे से साड़ी का पल्लू अपने हाथ में पकड़ लिया । रिया का संतुलन बिगड़ गया । उसने अपनी आंखों में आसूं लिए उसे रोकने की कोशिश की " नहीं ! छोड़िए मुझे ... आप यह गलत कर रहे है ।" 

पर वह दरिंदा बन चुका था । उसने एक झटके के साथ साड़ी का पल्लू अपनी तरफ खींच लिया । रिया ने अपने शरीर को छुपाने के लिए अपनी बाहों को सीने पर कस लिया । वह रो रही थी , गिड़गिड़ा रही थी , पर उस शैतान पर कोई असर नहीं हुआ । उसने रिया को अपनी मजबूत बाहों में कैद कर लिया । उसकी पकड़ इतनी मजबूत थी कि रिया की पसलियों में दर्द होने लगा । 

"आर्यन ... आर्यन कहा हो तुम बचाओ मुझे !" रिया के गले से एक दबी हुई चीख निकली ।

जैसे ही उसने आर्यन का नाम सुना , उसकी आंखों में खून उतर आया । " फिर वही नाम! " उसने रिया को बिस्तर पर पटक दिया । " जितना तुम उसे याद करोगी , उतना ही मैं तुम्हे तड़पाऊंगा।" वह रिया के ऊपर झुक गया , उसके चेहरे के करीब अपनी गंदी सांसे छोड़ते हुए । वह रिया को अपनी बाहों में कसकर भींचने लगा, जैसे उसे कुचल देना चाहता हो । 

रिया को महसूस हुआ कि अब अगर उसने कुछ न किया , तो वह सब कुछ खो देगी । एक तरफ आर्यन का पवित्र प्यार था और दूसरी तरफ यह नर्क । अचानक रिया के अंदर एक बिजली सी दौड़ी । उसने डर को पीछे छोड़ा और अपने दोनों हाथो से उसके सीने पर पूरी ताकत से प्रहार किया। उसने अपने दांतों से उसके हाथ पर जोर से काट लिया । वह चिल्लाया और उसकी पकड़ ढीली हुई। रिया तुरंत उठी , उसके बाल बिखरे हुए थे, साड़ी अस्त - व्यस्त थी , और आंखों में आंसुओं के साथ - साथ एक दहकती हुई आग थी । उसने पास पड़ा एक भारी गुलदस्ता उठा लिया ।

"अगर एक कदम भी आगे बढ़ाया तो , मै अपनी जान दे दूंगी, पर आपको अपने पास भटकने नहीं दूंगी !" रिया की आवाज में वो गूंज थी जिससे उस शैतान को भी एक पल के लिए ठिठकने पर मजबूर कर दिया ।
रिया गुलदस्ते की आड़ लेकर कमरे से भागती हुई , अस्त- व्यस्त हालत में अपनी सास के पैरों में जा गिरी । "मां जी , बचाइए मुझे ! वो... वो मुझे मार डालेंगे ।" 

पीछे से उसका पति जलती हुई आंखों के साथ आता है । सास उसे रोकती है , पर ममता से नहीं , बल्कि डर से । " रुक जा ! पागल मत बन । चल इधर आ मेरे साथ "
वह अपने बेटे को रिया से दूर लेकर जाती है और कहती है । "आज ही शादी हुई है , अगर ये मर गई तो पुलिस को क्या जवाब देगा ? जेल की हवा कहानी पड़ेगी । इसके बाप के पास बहुत पैसा और रसूख है, अभी इसे जिंदा रखना हमारे फायदे में है । मार - पीट कर , पर उतना ही जितने में इसकी जान न जाए !" 
रिया उसकी सास और उसके पति के घिनौने इरादों से बिल्कुल अनजान थी उसे यह न पता था कि जिस घर में वह सुरक्षा ढूंढ रही थी उस घर में उसकी जान की कीमत सिर्फ एक पुलिस केस के बराबर थी ।

कुछ दिन बीत जाते है । रिया ' जिंदा लाश ' बनकर घर के काम करती है । एक दिन स्टोर रूम की सफाई करते हुए , उसकी नजर एक पुराने संदूक में दबी एक धूल भरी तस्वीर पर पड़ती है । तस्वीर में एक छोटा बच्चा है जिसकी मुस्कान बहुत प्यारी है । 
रिया के हाथ कांपने लगते है । " ये ... ये तो वहीं...

आखिर वह तस्वीर किस बच्चे की थी ? आखिर रिया किसकी बात कर रही थी ? जानने के लिए बने रहे । अपनी राय कॉमेंट में जरूर बताएं। कहानी पसंद आए तो रेटिंग जरूर करें।