झील सी आँखों
झील सी आँखों की गहराई में डूब गये हैं l
धड़कती सांसों की गहराई में डूब गये हैं ll
कातिल नजरों वाले की चिकनी चुपड़ी सी l
प्यारी सी बातों की गहराई में डूब गये हैं ll
जगमगाते सितारों से भरे आसमान की l
शीत चांदनी रातो की गहराई में डूब गये हैं ll
गहरी सी उल्फ़त ने कही का ना छोड़ा है l
नशेमन की यादों की गहराई में डूब गये हैं ll
दिल फेंक के वफ़ा का दम भरा है उसी के ही l
शिद्दत से किए वादों की गहराई में डूब गये हैं ll
११-५-२०२६
जुबाँ तक पहुंची
प्यार है आँखों में साफ़ दिखाई देता हैं l
बारहा एसा कुछ नहीं है सफाई देता हैं ll
दिल में छुपी हुईं बात जुबाँ तक पहुंची l
चले आओ चले आओ सुनाई देता हैं ll
वादा करते है ताउम्र साथ निभाएंगे l
मोहब्बत की क़सम देकर दुहाई देता हैं ll
नजरों के वार करके घायल तो किया है l
निगाहों से जाम पर जाम पिलाई देता हैं ll
अदाओं को देखकर भरता नहीं है ये दिल l
संजीदगी बात में मुस्कुराना हिलाई देता हैं ll
१२-५-२०२६
ओढ़नी
रूप यौवन को क़ातिल नजरों से बचाती ओढ़नी l
परिधान और परिवेश साथ तन सजाती
ओढ़नी ll
हर स्त्री की शोभा और ममता का आँचल
होती है l
सुन्दर मनमोहक रंगीली चार चांद लगाती
ओढ़नी ll
वस्त्रा भूषण को शोभायमान बढ़ाकर रूप
निखार के l
सुंदरता को ओर भी खूबसूरत है बनाती
ओढ़नी ll
अंगों को ढंकर लोलुपता के बचाकर गरिमा
में रख l
तीखी निगाहों के वार को सरहद्द बताती
ओढ़नी ll
अच्छे परिधान सज्जित होकर अस्मिता
को बचा l
सम्मान,आदर और विवेक बुद्धि बढ़ाती
ओढ़नी ll
१३-५-२०२६
एक मुलाकात
नशीली सी एक मुलाकात कब होगी बताओं तो l
मिलने का वादा किया है तो अभी निभाओ तो ll
घुमाफिरा के ना कहना जो है सीधी बात करना
l
बात दिल की कह देने का हौसला जुटाओ तो
ll
रात में आओ पर दिन के उजालों में जाना होगा l
धड़कनों ने क़सम दी है गर छोड़ कर जाओ तो ll
इतने भी नाजुक नहीं हो के क़त्ल हो जाओगे l
एक बार आकर बेशुमार जलवों को उठाओ तो ll
चाहे थोड़ी देर ही सही लेकिन खुद को साथ लाना l
प्यार के रंगी रंगों से सुबहशाम को सजाओ तो
ll
१४-५-२०२६
रूह का साया
रूह का साया भटकता फिरता है राहों में l
दीदार के लिए तड़पता फिरता है राहों में ll
उम्र गुज़र गई खुशी का इंतजार करते हुए l
निगहबानी को मचलता फिरता है राहों में ll
दिन तो कट जाता है खयालों में फिर रात को l
ख्वाबों मे दिल बहलाता फिरता है राहों में ll
एक अर्सा हो गया है ढूँढते हुए प्यारे लम्हे को l
सखी धडकनों से छलकता फिरता है राहों में ll
य़ह कुरबतें इन्तिहाँ लेकर जान निकालती कि l
हुस्न के जलवों को तरसता फिरता है राहों में ll
१५-५-२०२६
माँ गंगा
माँ गंगा की गोद में नहाकर पावन हो जाऊँ l
मन वचन कर्म को बहाकर पावन हो जाऊँ ll
बहती धारा में बहता जाऊँ दूर दूर तक और l
होशो हवास सब उड़ाकर पावन हो जाऊँ ll
युगों की थकान मिटाके धन्यता प्राप्त करके l
मन से पापो का मेल मिटाकर पावन हो जाऊँ ll
भारतवर्ष का पोषण करती विधाता है गंगा l
शीतल लहरों में समाकर पावन हो जाऊँ ll
केवल नदी नहीं संस्कार औ मुक्ति के द्वार की l
पवित्रता में डुबकी लगाकर पावन हो जाऊँ ll
१६-५-२०२६
रोज दोस्तों से मिलने की जरूरत क्या है l
यूँ किसी वास्ते निकलने की जरूरत क्या है ll
पागलों जैसे ही घूमते रहते हो शहरों में l
आम लोगों से उलझने की जरूरत क्या है ll
खुद को तो शृंगार करके खूबसूरत कर लो l
आईना फ़िर से सजाने की जरूरत क्या है ll
लब्जों की दीवार कैसे भी गिराना मत l
रूठे हुए को मनाने की जरूरत क्या है ll
जाने वालों को जरूरी है बस जाने देना l
बारहा ऐसे तड़पने की जरूरत क्या है l
१७-५-२०२६
रोटी
रोटी की है धमाल सारी l
पेट की भूख कमाल सारी ll
कोई मुफ्त में नहीं खिलाता l
ताउम्र होती बबाल सारी ll
दो रोटी के वास्ते दो घण्टे l
बैठी रहती है पंडाल सारी ll
जिंदगी भर मेहनत करो कि l
पापी पेट की जंजाल सारी ll
कभी न बुझने वाली तन में l
हमेशा जलती मशाल सारी ll
भूखे तन और मन दोनों देख l
रह जाती है मलाल सारी ll
जहां एक भी न मिले वहां l
दिखती प्रजा कंकाल सारी ll
१८ -५-२०२६
हरियाली
बागों की हरियाली में चिडियों बन चहकने को जी चाहता हैं l
फूलों की खुशबु, रंगीन तितली देख बहकने को
जी चाहता हैं ll
प्रकृति की खूबसूरती और सुन्दरता देख मन
प्रफुल्लित हो l
सावन की रितु में कोयल की तरह टहुकने को
जी चाहता हैं ll
चहु ओर सभी जीवो की प्यास बुझाने के लिए
दिल खोलके l
रिमझिम बूँदों की बारिस बनकर बरसने को
जी चाहता हैं l
नव पल्लवीत संसार को मनभावन रंगो से
उभरता देखके l
बहती कलकल सरिता में समाकर छलकने को
जी चाहता हैं ll
झरनों का लयबध्द संगीत में झुम झूम नाचते
हुए सखी l
सौगी मिट्टी की खुशबु से साँस को महकने को
जी चाहता हैं ll
१९-५-२०२६
अकेलापन
अकेलेपन का रूतबा निराला होता हैं l
अपनेआप से राब्ता निभाना होता हैं ll
कोई किसी को देखने के लिए राजी नहीं l
खुद के लिए खुद को सजाना होता हैं ll
चैन और सुकून की दुनिया अच्छी है l
दिल को ललचा कर मनाना होता हैं ll
मतलबी औ बहुरंगी जोकर दुनिया में l
आईने से दिल को लगाना होता हैं ll
रिश्तों में अपनापन रहा ही नहीं तो l
खुद का अलग ही ज़माना होता हैं ll
कोई क्या किसीको दे सकता है भला l
अपनेआप बेह्तरीन रचाना होता हैं ll
सदा ही होठों पे मुस्कान सजाये हुए l
हौसलों से डर को हराना होता हैं ll
२०-५-२०२६