में और मेरे अहसास - 153 Dr Darshita Babubhai Shah द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

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में और मेरे अहसास - 153

तस्वीर

आज फिर एक मुलाकात को दिल तरसता हैं l

फ़िर से पलभर को दीदार के लिए तड़पता हैं ll

 

रूह का साया तस्वीर की आँखों में दिखता है l

तेरे आ जाने से घड़ी भर के वास्ते बहलता हैं ll

 

बहुत नादाँ और कमसिन धड़कने क्या जाने?

भोला नादान तेरे समझाने से ही समझता हैं ll

 

आधुनिक तकनीक का में शुक्रगुज़ार हूँ कि l

मोबाईल में तस्वीर देख लम्हा भर महकता हैं ll 

 

भागती दौड़ती दुनिया किसीको फ़ुरसत कहां l

गमगीन पलों में तस्वीर के आगे छलकता हैं ll

२१-५-२०२६ 

 

इन्सान

बड़ा खुदगर्ज बन गया है इन्सान l

रिश्तों में उलझ गया है इन्सान ll

 

अकेला आया अकेले जाना है तो l

कोई नहीं समज गया है इन्सान ll

 

अपना ही अपने को मार रहा है तो l

ठोकर खाते सँभल गया है इन्सान ll

 

सभी रोबोट बन गये है जग में कि l

इन्सान को तरस गया है इन्सान ll

 

कुछ न पाने को सभी दौड़ रहे है सखी l

हालात देखके तड़प गया है इन्सान ll

२२-५-२०२६ 

बदल गया

साहिल की तलाश में दरिया बदल गया l

मंज़िल तक पहुंचने का ज़रिया बदल गया ll

 

जब से इन्सान का रास्ता बदल गया तब से l

पैसे आने से देखने का नजरिया बदल गया ll

 

पीने का नया निराला अंदाज ढूँढ लिया कि l

मयखाने तक जाती हुई गलिया बदल गया ll

 

लगता है शहर में उल्टी बयार चली हुई है l

दिल फेंक छेल छबीला छलिया बदल गया ll

 

बड़े खुद्दार और कहयगरा निकले सारे ही l

शजर के एक इशारे से पत्तियां बदल गया ll

२३-५-२०२६ 

पैसे 

इन्सान की कीमत नहीं पैसा ही पहचान हैं l

जग में रिश्तों की अहमियत से अनजान हैं ll

 

किसीके लिए नहीं रुकता चलता रहता है l

बात ये जान लो कि वक्त बड़ा बलवान हैं ll

 

समय का चक्र चलता जाता इतराता न फ़िर l

चार पैसे से नवाज़ा तो ईश का अहसान हैं ll

 

ऊपर कुछ साथ नहीं ले जा सकता है तो l

दान धर्म करता रहे भगवान का फरमान हैं ll

 

दो रोटी, कपड़ा और मकान जरूरी फ़िर भी l

सबसे ज्यादा रुपया सभी का अरमान हैं ll

२४ -५-२०२६ 

लिफ़ाफ़ा

जाते हुए एक बड़ा सा लिफ़ाफ़ा थमाया हैं l

जाने कौन से वाकिये को उसमे समाया हैं ll

 

सारा आगे पीछे का चिट्ठा जानते फिर भी l

क्यूँ बार बार एक ही प्रश्न को उठाया हैं ll

 

कई दिनों के बाद खुलकर उसने तो सखी l

दिल का सारा हाल लिखके बताया हैं ll

 

 

 

महक जिन्दगी में घुली जा रही हैं

प्यार की महक जिन्दगी में घुली जा रही हैं l

तब से चैन और सुकून की साँस पा रही हैं ll

 

खुशनुमा सुबह में चारो ओर खूबसूरती छाई l

आज बहारों की मल्लिका रंगत ला रही हैं ll

 

पहेले प्यार की पहली धड़कने बेकाबू हुई कि l

कहीं से बयारों के साथ सदाएं आ रही हैं ll

 

दिल को तसल्ली और तस्लीम हुई है जो l

खुशबु छलक रही है बहुत ही भा रही हैं ll

 

सीने में एक पुकार उठी ओ खुली फिजा में l

जिंदगी प्यार का नशीला नगमा गा रही हैं ll

२५-५-२०२६ 

हाथों मैं हाथ ले चलेंगे

हाथों मैं हाथ ले चलेंगे l

एक दूसरे के संग रहेंगे ll

 

शेह शर्म ना आएँगी बीच में l

हाल ए दिल खुलके कहेंगे ll

 

जहां खूबसूरती हो वहां जाएंगे l

हुस्न के साथ खुशी से बहेंगे ll

 

जिंदगी में सब से क़ीमती l

प्यार का गहना ही गहेँगे ll

 

रिश्तों की नजाकत देख l

मोहब्बत के लिए सहेंगे l

२६-५-२०२६ 

 

याद करते वो बहाने से

शुक्रगुजार है याद करते वो बहाने से l

लगाता है कि बहुत डरते है ज़माने से ll

 

आंख मिचकर कूदे इश्क़ के रोजगार में l

एक बार भी नहीं सोचा दिल लगाने से ll

 

लाख कोशिश करलो जाने वाला कभी l

कोई वापिस नहीं लौटता है मनाने से ll

 

याद आएँगे तो मिलने जरूर आ जाएंगे l

दिल नहीं मानता बार बार पटाने से ll

 

लिफ़ाफ़ा में लिखकर सब ब्यान करो l

कुछ भी बाकी ना रखना बताने से ll

२७-५-२०२६ 

इश्क

आवाज़ देकर वापिस बुला क्यूँ नहीं देते l

मोहब्बत की क़सम दे मना क्यूँ नहीं देते ll

 

इश्क जिसका भुला नहीं पाए कैसे भी अब l

उसने भुला दिया है तुम भुला क्यूँ नहीं देते ll

 

बारहा बुलाने पे भी मिलने न जाए उसकी l

उसकी यादों पर पर्दा लगा क्यूँ नहीं देते ll

 

खुद का अस्तित्व किसी पर नष्ट ना करो l

आत्मसन्मान से रिश्ता निभा क्यूँ नहीं देते ll

 

कायनात में बड़े कमज़र्फ होते इश्क़ वाले l

बेवफाओ को आईना दिखा क्यूँ नहीं देते ll

२८-५-२०२६ 

ग़ज़ब ही करेगी नजर धीरे धीरे l

ग़ज़ब ही करेगी नजर धीरे धीरे l

मोहब्बत करेगी असर धीरे धीरे ll

 

हौसलों को बनाये रखना सदा l

जिंदगी होगी बसर धीरे धीरे ll

 

मंजिल की ओर आगे बढ़ता जा l

सुहाना होगा सफ़र धीरे धीरे ll

 

वक्त ही है हर इंतजार का सिला l

फैलेगी हिना की महक धीरे धीरे ll

 

वो निकल चुका है आता ही होगा l

रूक ज़रा दिल छलक धीरे धीरे ll

२९-५-२०२६ 

झूठा ये प्यार रहने दो 

जानते हैं चालाकियां झूठा ये प्यार रहने दो l

बता दिल की आज खुलकर सबसे कहने दो ll

 

बड़ा बुजदिल निकला हाथ छोड़कर चल दिया l

तन्हा छोड़ गया तो तन्हाई का दर्द सहने दो ll

 

अब उदासियों को खुदा हाफ़िज़ कह दिया l

जिस तरफ़ तकदीर ले जाए वहां बहने दो ll

 

जानबूझ कर खुद चुना था रास्ता पथरीला  l

ढाई अक्षर का बोझ जिंदगी भर ढहने दो ll  

 

कोई भी हालात कमज़ोर ना करे इस लिए l

प्यारे जिगर को हौसलों का चोला पहने दो ll

३०-५-२०२६ 

राज

दिल में क्या राज छुपाया हैं l

रिश्ता शिद्दत से निभाया हैं ll

 

जिगर में तिश्नगी उठी और l

निगाहों ने अश्क बहाया हैं ll

 

मोहब्बत की ठंड उतारने को l

दर्द को तड़के सुकाया हैं ll

३१-५-२०२६