Ishq ka Ittefaq - 17 Alok द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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Ishq ka Ittefaq - 17

मेहरा मेंशन की उस रात की हवाओं में एक अजीब सी भारीपन था. कबीर मेहरा, जो अपनी सफलता के शिखर पर बैठा था, आज एक अजीब सी बेचैनी से घिरा हुआ था. ऑफिस का काम खत्म करने के बाद जब वह अपनी काली लैंड रोवर की ओर बढा, तो उसे अहसास नहीं था कि आज की रात उसकी किस्मत का सबसे कठिन इम्तिहान लेने वाली है. कबीर ने गाडी स्टार्ट की और हाईवे की सूनी सडक पर निकल पडा.


उसके दिमाग में बार- बार सिया का वह चेहरा आ रहा था—वही सिया जिसे उसने शक की निगाहों से देखा था, और जिसने बदले में उसे उसकी असलियत का आईना दिखा दिया था. रात के करीब ग्यारह: तीस बज रहे थे. हाईवे का वह हिस्सा बेहद सुनसान था जहाँ अक्सर स्ट्रीट लाइटें खराब रहती थीं. अचानक, दो बडी काली एसयूवी गाडियों ने तेज रफ्तार से आते हुए कबीर की गाडी को आगे और पीछे से ब्लॉक कर दिया. कबीर ने झटके से ब्रेक मारे.


वह घबराया नहीं, क्योंकि कबीर मेहरा ने बरसों तक इसराइल और जापान के बेहतरीन उस्तादों से मार्शल आर्ट्स और' क्रव- मगा' की Training ली थी. वह जानता था कि जब दुश्मन सामने हो, तो बचाव ही सबसे अच्छा हमला है. कबीर गाडी से नीचे उतरा. उसने अपना कीमती कोट उतारकर बोनट पर फेंका और अपनी शर्ट की आस्तीनें चढा लीं. बाहर निकलो कायरों! अगर हिम्मत है तो सामने आकर बात करो, कबीर की आवाज उस खामोश रात में बिजली की तरह गूँजी.


गाडियों से करीब आधा दर्जन नकाबपोश गुंडे नीचे उतरे. उनके हाथों में लोहे की चेन, लाठियां और धारदार हथियार थे. जैसे ही पहले गुंडे ने कबीर पर चेन से वार किया, कबीर ने बिजली की फुर्ती से उसकी कलाई पकडी और उसे एक ही झटके में हवा में लहराते हुए सडक पर पटक दिया. कबीर की मार्शल आर्ट्स की Training अद्भुत थी; वह किसी प्रोफेशनल फाइटर की तरह अपने शरीर का संतुलन बनाए हुए था.


उसने एक साथ दो गुंडों पर' फ्लाइंग किक' से वार किया और उन्हें धूल चटा दी. करीब दस मिनट तक कबीर मौत का तांडव करता रहा. उसने अकेले ही उन सबको लहूलुहान कर दिया था. लेकिन तभी, अंधेरे का फायदा उठाकर रणविजय का सबसे वफादार शूटर कबीर के पीछे पहुँचा. कबीर जैसे ही अगले वार के लिए पलटा, उस आदमी ने क्लोरोफॉर्म से भीगा हुआ एक मोटा रुमाल कबीर के मुँह पर दबा दिया.


कबीर ने अपनी पूरी ताकत से उसकी कोहनी पर प्रहार किया, लेकिन दवा का असर इतना तेज था कि चंद सेकंडों में कबीर के पैर लडखडाने लगे. उसकी आँखों के सामने धुंध छा गई और वह विशाल शरीर बेजान होकर सडक पर गिर पडा.

रणविजय अंधेरे से बाहर निकला, उसके चेहरे पर एक वहशी मुस्कान थी. ले चलो इसे! आज मेहरा खानदान का गुरूर इस पुरानी मिल की राख में दफन होगा। उधर फार्महाउस पर सिया का दिल बुरी तरह धडक रहा था. कबीर का फोन बंद था और बाहर तेज बारिश शुरू हो चुकी थी. अचानक सिया के फोन की स्क्रीन चमक उठी. एक अनजान नंबर से Call था.


सिया ने जैसे ही फोन उठाया, दूसरी तरफ से रणविजय की रोंगटे खडे कर देने वाली आवाज आई. नमस्ते सिया! अगर अपने मसीहा कबीर मेहरा को कल का सूरज देखना चाहती हो, तो बिना पुलिस को खबर किए लखनऊ की उस पुरानी टेक्सटाइल मिल में पहुँच जाओ. अगर कोई और साथ दिखा, तो कबीर के टुकडों को गिनने के लिए भी कोई नहीं बचेगा। सिया के पैरों तले जमीन खिसक गई. उसने बिना एक पल गंवाए फार्महाउस की पुरानी जीप उठाई.


उसका दिमाग सुन हो चुका था, पर दिल सिर्फ कबीर के लिए धडक रहा था. वह पागलों की तरह जीप चलाते हुए लखनऊ की उस खंडहर मिल तक पहुँची.

मिल के भीतर का नजारा किसी डरावनी फिल्म जैसा था. चारों तरफ मकडी के जाले, टूटी हुई मशीनें और मशालों की लाल रोशनी थी. सिया जैसे ही अंदर दाखिल हुई, उसने देखा कि कबीर एक लोहे की कुर्सी से बंधा हुआ था.


उसके चेहरे पर खून के निशान थे और उसकी आँखें आधी खुली थीं. रणविजय एक ऊंचे मंच पर खडा होकर जोर- जोर से हंस रहा था. आ गई मौत की महबूबा! देख सिया, तेरा वो घमंडी कबीर आज मेरे जूतों के पास पडा है. लेकिन मैं इसे इतनी आसानी से नहीं मारूँगा. तुझे एक चुनौती देनी है। रणविजय ने इशारा किया और उसके गुंडों ने जमीन पर जलते हुए कोयलों का एक लंबा रास्ता बिछा दिया. अंगारे लाल दहक रहे थे.


अगर तू इस रास्ते को नंगे पैर पार करके कबीर तक पहुँचती है और बिना चीखे उसे छू लेती है, तो मैं इसे छोड दूँगा. ये तेरी अग्निपरीक्षा है सिया! कबीर ने अपनी भारी पलकें उठाईं. नहीं सिया. भाग जाओ यहाँ से. ये पागल है. मत करना. कबीर की आवाज कमजोर थी, पर उसमें बेपनाह दर्द था.

सिया ने कबीर की तरफ देखा. उसकी आँखों में नफरत नहीं, बल्कि एक ऐसा समर्पण था जो सदियों में किसी विरले को मिलता है. उसने अपनी सैंडल उतारी और धधकते अंगारों पर पहला कदम रखा.


चटाख' —मांस के जलने की आवाज आई. सिया का चेहरा दर्द से सफेद पड गया, उसके हाथ कांपने लगे, लेकिन उसने अपने होंठ दांतों के नीचे दबा लिए. वह एक- एक कदम आगे बढ रही थी. हर कदम के साथ उसके पैरों की खाल जलकर अंगारों पर चिपक रही थी।

कबीर ये मंजर देख अपनी जंजीरों को तोडने के लिए पागलों की तरह छटपटाने लगा, उसकी आँखों से बेपनाह आँसू बह रहे थे. कबीर मेहरा, जो कभी नहीं रोया था, आज एक लडकी के बलिदान को देख फूट- फूटकर रो रहा था.


जैसे ही सिया अंगारों को पार कर कबीर के पास पहुँची और उसे छुआ, रणविजय की हंसी और तेज हो गई. वाह! क्या वफादारी है. पर सिया, तू भूल गई कि मैं एक अपराधी हूँ. मैं अपना वादा नहीं निभाता। रणविजय के इशारे पर गुंडों ने सिया को दबोच लिया और कबीर के ठीक सामने वाली कुर्सी पर लोहे के कटीले तारों से बांध दिया। तुम दोनों यहाँ एक साथ मरोगे


रणविजय ने एक टाइम बम कबीर की कुर्सी के नीचे सेट किया. आधे घंटे में ये पूरी मिल मलबे में बदल जाएगी। रणविजय अपने गुंडों को बाहर पहरे पर छोडकर वहां से निकल गया.

मिल के उस सन्नाटे में सिर्फ बम की' टिक- टिक' सुनाई दे रही थी. कबीर और सिया एक- दूसरे के सामने थे. कबीर का गला रुंध गया था. क्यों किया तुमने ये सिया? मैं तो तुम्हारा गुनहगार था. मैंने तुम्हें जलील किया, तुम पर शक किया. सिया ने मुस्कुराते हुए अपनी दर्द से भरी आँखें उठाईं. मिस्टर मेहरा, आपने मुझे वो दिया जिसकी मुझे सबसे ज्यादा जरूरत थी—इंसाफ.


आज मेरी बारी थी. और वैसे भी, आपके बिना ये मेहरा मेंशन अधूरा है। कबीर ने देखा कि बाहर पहरे पर खडे गुंडे शराब पीने में मस्त हैं. कबीर ने अपनी मार्शल आर्ट्स की उस गुप्त तकनीक का इस्तेमाल किया जिसमें शरीर के जोडों को संकुचित करके बंधनों से निकला जाता है. उसने अपनी कलाई को इतनी जोर से मोडा कि हड्डियाँ चटकने लगीं और लोहे के तार उसकी खाल को चीरते हुए अंदर धंस गए. बेपनाह दर्द को सहते हुए उसने अपनी एक कलाई आजाद की.


उसने अपनी जेब में छिपे एक छोटे से' फाइटिंग ब्लेड' को निकाला (जो उसने हमेशा छिपाकर रखा था) और रस्सियों को काटना शुरू किया. पंद्रह मिनट के खूनी संघर्ष के बाद कबीर आजाद था. वह धीरे से उठा, उसके शरीर में जहर जैसी दवा का असर अब भी था, पर सिया को बचाने की जिद उससे कहीं बडी थी. वह दबे पाँव बगल वाले कमरे में गया जहाँ चार गुंडे शराब पी रहे थे.


कबीर ने बिजली की रफ्तार से हमला किया. उसने पहले गुंडे की गर्दन एक ही वार में मरोड दी और दूसरे के सीने पर ऐसा प्रहार किया कि उसका दिल धडकना बंद हो गया. मार्शल आर्ट्स के सटीक वारों से उसने चारों को मिनटों में ढेर कर दिया. वह वापस दौडकर सिया के पास आया और उसकी बेडियाँ काटीं. सिया बेहोशी की हालत में थी. कबीर ने उसे अपनी बाहों में उठाया और मिल से बाहर भागा.


जैसे ही वे कुछ मीटर दूर पहुँचे, मिल में एक जोरदार धमाका हुआ और वह पूरी इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई. कबीर ने तुरंत अपनी स्मार्टवॉच से पुलिस को' हाई- अलर्ट' सिग्नल भेजा और कमिश्नर को Call किया. कमिश्नर! रणविजय ने मुझ पर हमला किया. वह लखनऊ हाईवे की ओर भाग रहा है. मुझे वह जिंदा चाहिए, और इस बार कोई कानून उसे मेरी पहुँच से नहीं बचा पाएगा। कबीर का रुतबा वापस लौट आया था.


आधे घंटे के भीतर पूरे लखनऊ को पुलिस छावनी में बदल दिया गया. रणविजय को भागते समय पुलिस ने चारों तरफ से घेर लिया. कबीर ने बेहोश सिया को अपनी गोद में लिया हुआ था. तभी कबीर की नजर सिया के उसे जले हुए पैरों पर खडी उसे काफी दुख हुआ. तभी कबीर के फोन पर उसके सचिव का Call आया.


सर, आपके माता- पिता (Mom- Dad) को सब पता चल गया है. वे अमेरिका से अपने प्राइवेट जेट से भारत के लिए उडान भर चुके हैं. वे कल सुबह तक यहाँ पहुँच जाएंगे।

कबीर के माता- पिता का सिया के प्रति क्या व्यवहार होगा ?

काम्या बुआ का पर्दाफाश अब कैसे होगा? क्या सिया के जख्म कबीर और उसके बीच की दूरियों को मिटा पाएंगे ?

अपनी राय कमेंट्स में जरूर दें और इस रोमांचक सफर का हिस्सा बनें!