विक्रम के जेल जाने के बाद मेहरा मेंशन के गलियारों में सन्नाटा तो पसर गया था, पर वह सन्नाटा किसी बडे तूफान के आने की आहट था. काम्या मेहरा अपने कमरे की बालकनी में खडी ठंडी हवा के बीच भी गुस्से से तप रही थीं. उनका इकलौता बेटा पुलिस की सलाखों के पीछे था, और कबीर. कबीर उस मामूली फिजियोथैरेपिस्ट के सामने नंगे पैर खडा होकर अपनी गलती मान चुका था ।.
एक मामूली डॉक्टर की छोरी ने मेरे बेटे को जेल भिजवा दिया और कबीर उसके आगे भीगी बिल्ली बन गया? नहीं. यह काम्या मेहरा इतनी आसानी से हार नहीं मानेगी. अब इस लडकी को इस मेंशन से ही नहीं, बल्कि कबीर की जिंदगी से भी ऐसा साफ करूंगी कि इसकी परछाई भी यहाँ नहीं दिखेगी, काम्या ने अपने होंठ चबाते हुए मन ही मन कसम खाई।.
अगली सुबह जब डाइनिंग टेबल पर नाश्ता लगा, तो माहौल कल से बिल्कुल अलग था. कबीर अपने ब्लैक सूट में तैयार होकर बैठा था. उसकी नजरें बार- बार रसोई की तरफ जा रही थीं, जहाँ सिया गायत्री दादी के लिए दलिया तैयार कर रही थी. आज कबीर के चेहरे पर वो पुराना गुस्सा नहीं था. कल जब सिया ने उसे उसके आत्मसम्मान की याद दिलाई थी, कबीर के दिल में उसके लिए एक अनजाना सा सम्मान और खिंचाव और गहरा हो गया था.
काम्या बुआ भी नाश्ते की टेबल पर आकर बैठ गईं. उनके चेहरे पर आज कोई शिकन नहीं थी, जो उनकी सबसे बडी चालाकी थी. वह कबीर और सिया के बीच के इस बदलते माहौल को भांप चुकी थीं और अंदर ही अंदर कुढ रही थीं. नाश्ता खत्म करके कबीर अपने ऑफिस के काम के लिए लिविंग Room के सोफे पर बैठकर कुछ फाइल्स Check करने लगा.
दादाजी बलराज मेहरा भी अपने कमरे में आराम कर रहे थे. पूरा घर दोपहर के इस सन्नाटे में शांत था। ठीक उसी वक्त, काम्या बुआ ने देखा कि सिया रसोई से निकलकर ऊपर की मंजिल पर गायत्री दादी के कमरे की तरफ जाने वाली है. काम्या दबे पांव सीढियों के ऊपरी हिस्से की तरफ बढीं.
उनके हाथ में एक छोटी सी कटोरी थी जिसमें बहुत ही गाढा और चिकना बॉडी ऑयल था। बहुत अकड है ना तुझमें लडकी? आज जब तू इन कांच जैसी सीढियों से फिसलकर नीचे गिरेगी और तेरी हड्डियां टूटेंगी, तब देखूंगी तेरी ये डॉक्टर वाली साख कहाँ जाती है. इस घर में कदम रखने का मजा चखाती हूँ तुझे,
काम्या ने एक शातिर मुस्कान के साथ सीढी के अंतिम मोडों पर वो तेल चुपके से गिरा दिया और वहां से तुरंत हट गईं. सिया ने गायत्री दादी के कमरे से उनकी मेडिकल रिपोर्ट की फाइल घेतली और बहुत ही सलीके से सीढियों से नीचे उतरने लगी. दोपहर का वक्त था, घर में हल्की सी खामोशी थी. सिया सीढियों के आखिरी मोड पर पहुँची ही थी कि अचानक उसका पैर उस अदृश्य चिकनाई पर पडा.
पैर के नीचे की वो भयानक फिसलन—सिया का संतुलन पूरी तरह डगमगा गया. उसके मुंह से एक तीखी चीख निकली, आह! उसका पैर छटका और वो सीधे पीछे की तरफ हवा में लहरा गई. नीचे संगमरमर का नुकीला फर्श था, अगर वो इस ऊंचाई से गिरती तो उसकी रीढ की हड्डी या सिर में बहुत गहरी चोट लग सकती थी.
लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. कबीर जो नीचे सोफे पर बैठा था, सिया की चीख सुनते ही उसके भीतर का सारा एटीट्यूड एक पल में गायब हो गया. उसका दिमाग सन्न रह गया. उसने अपने हाथ में पकडी फाइल वहीं टेबल पर फेंकी और वो चीते की रफ्तार से सीढियों की तरफ लपका.
इससे पहले कि सिया का शरीर उस बेरहम पत्थर से टकराता, कबीर ने अपनी लंबी और मजबूत बाहें आगे बढा दीं। एक जोरदार झटके के साथ, कबीर ने सिया को सीधे अपनी चौडी छाती से सटा लिया.
गति इतनी तेज थी कि कबीर का खुद का संतुलन भी बिगडा, पर उसने अपनी पकड ढीली नहीं होने दी. वह सिया को अपनी बाहों में पूरी तरह समेटकर सीढियों के आखिरी पायदान पर ही थम गया. पूरे हॉल में सन्नाटा जम गया.
सिया की आँखें डर के मारे कसकर बंद थीं, उसकी सांसें तूफान की तरह चल रही थीं और उसकी दोनों हथेलियों ने कबीर के कोट के कॉलर को इतनी मजबूती से भींच रखा था जैसे वही उसकी जिंदगी की आखिरी उम्मीद हो। सिया. आँखें खोलो. तुम ठीक हो, कबीर की गहरी, भारी आवाज सिया के कानों के बिल्कुल पास गूंजी. उसकी आवाज में एक अनजाना सा डर और फिक्र साफ महसूस हो रही थी।
सिया ने धीरे- धीरे अपनी पलकें उठाईं. कबीर का चेहरा उसके चेहरे से महज कुछ इंच की दूरी पर था. कबीर की वो भूरी, गहरी आँखें सीधे सिया की काली आँखों में झांक रही थीं. कबीर की कडक परफ्यूम की खुशबू और उसके जिस्म की गर्मी सिया को अपने भीतर तक महसूस हो रही थी.
इस बेहद करीबी फासले ने दोनों के बीच के सारे गिले- शिकवे, सारी नफरत को एक पल में सोख लिया था. कबीर का एक हाथ सिया की कमर को मजबूती से थामे हुए था, और दूसरा हाथ उसकी पीठ को सहारा दे रहा था. इस स्पर्श में कोई क्रूरता नहीं थी, सिर्फ एक अजीब सी हिफाजत और हक था.
दोनों के दिलों की धडकनें इतनी तेज थीं कि कमरे का सन्नाटा भी उसे सुन सकता था. दोनों के बीच की नफरत की जो दरार थी, वो इस इत्तेफाक के आगोश में आकर पूरी तरह मिट चुकी थी. हवा में एक अनकहा, गहरा एहसास सांस लेने लगा था, जिसे दोनों ही छुपाने की नाकाम कोशिश कर रहे थे।
मिस्टर. Mister मेहरा, मुझे नीचे उतारिए, सिया ने बहुत ही धीमी आवाज में कहा, उसका चेहरा कबीर की इस नजदीकी के कारण गुलाबी हो रहा था. कबीर ने धीरे से सिर हिलाया और बहुत ही सलीके से सिया को अपने पैरों पर खडा किया. पर खडा करते वक्त भी उसका एक हाथ सिया की कोहनी को थामे रहा, ताकि वो दोबारा न लडखडाए।
ध्यान कहाँ रहता है तुम्हारा ?
अगर मैं ऐन वक्त पर नहीं आता तो. कबीर ने अपने उसी कडक एटीट्यूड को वापस ओढते हुए कहा, पर उसकी आँखों की नरमी साफ पकडी जा रही थी। मैं तो देखकर ही आ रही थी, पर वहां सीढी पर कुछ बहुत ज्यादा चिकना. सिया ने पीछे मुडकर सीढी की तरफ देखा, जहाँ लाइट की रोशनी में वो तेल साफ चमक रहा था.
कबीर की तीखी नजरें भी उस चमकते हुए तेल पर पडीं. उसका माथा ठनका. मेहरा मेंशन की सीढियों पर इस तरह तेल का होना कोई इत्तेफाक नहीं हो सकता था. कबीर के भीतर का बब्बर शेर अब पूरी तरह जाग चुका था. उसका खून खौल उठा।
रामू! हरीश! सब के सब यहीं आओ!
कबीर की भयानक दहाड पूरे मेंशन की दीवारों से टकराकर गूंजी. उसकी आवाज में वो पुराना, खौफनाक गुस्सा वापस लौट आया था. घर के सारे नौकर, रसोइया और यहाँ तक कि सिक्योरिटी गार्ड्स भी डर के मारे कांपते हुए डाइनिंग हॉल में लाइन लगाकर खडे हो गए.
सबका सिर झुका हुआ था और सांसें थमी हुई थीं. काम्या बुआ भी ऊपर सीढियों के कोने से छुपकर कबीर के इस रूप को देख रही थीं और उनके माथे पर पसीना आने लगा था। यह सीढियों पर तेल किसने गिराया ?
किसके कहने पर यह सब हुआ है? कबीर ने अपनी जेब में हाथ डालते हुए कडक आवाज में पूछा. उसकी आँखें लाइन से खडे हर एक नौकर के चेहरे को चीर रही थीं.
छोटे मालिक. हमें नहीं पता. हम तो दोपहर से रसोई में काम कर रहे थे, मुख्य रसोइया रामू हाथ जोडकर थर- थर कांपने लगा।
,,,,चुप रहो !
कबीर ने टेबल पर हाथ मारते हुए कहा. मेहरा मेंशन की सिक्योरिटी और स्टाफ पर मैं करोडों रुपये खर्च करता हूँ ताकि इस घर में एक पत्ता भी मेरी मर्जी के बिना न हिले! और आज मेरी दादी की डॉक्टर इन सीढियों से गिरते- गिरते बची है.
अगर आज इसे कुछ हो जाता. तो मैं तुम सबको ऐसी सजा देता कि तुम्हारी पुश्तें याद रखतीं! कबीर का गुस्सा सातवें आसमान पर था. उसने तुरंत अपने सिक्योरिटी हेड शर्मा को फोन मिलाया.
शर्मा! घर के जितने भी सिक्योरिटी गार्ड्स सीढियों के आस- पास ड्यूटी पर थे, उन सबको इसी वक्त सस्पेंड करो. और मुझे अगले दस मिनट के भीतर ऊपर के कॉरिडोर और सीढियों का पूरा सीसीटीवी फुटेज मेरे लैपटॉप पर चाहिए! जैसे ही कबीर ने' सीसीटीवी फुटेज' का नाम लिया, ऊपर खडी काम्या बुआ के पैर कांपने लगे.
उन्हें अंदाजा हो गया था कि अगर कबीर ने फुटेज देख लिया, तो विक्रम के बाद उनका भी पर्दाफाश हो जाएगा. कबीर ने अपनी तीखी, बाज जैसी नजरें ऊपर सीढियों की तरफ घुमाईं. काम्या बुआ तुरंत दीवार के पीछे छिप गईं, पर कबीर को उनकी साडी का पल्लू साफ दिख गया था. कबीर का शक अब सीधे अपनी काम्या बुआ पर जा चुका था.
विक्रम की उस फाइल वाली साजिश के बाद कबीर को अच्छे से पता था कि इस घर में सिया का दुश्मन कौन है. कबीर ने अपनी आँखें सिकोडीं और मन ही मन कहा, अगर इस बार भी यह बुआ की साजिश निकली. तो कबीर मेहरा रिश्तों का लिहाज करना पूरी तरह भूल जाएगा.
क्या कबीर सीसीटीवी फुटेज देखकर काम्या बुआ को रंगे हाथों पकड पाएगा, या काम्या बुआ पहले ही फुटेज डिलीट करने का कोई नया गेम खेलेंगी?
क्या काम्या बुआ पर कबीर का यह शक मेहरा मेंशन में एक नए और बडे पारिवारिक युद्ध की शुरुआत करेगा?
और क्या सिया कबीर को इस तरह अपने लिए पूरे स्टाफ पर चिल्लाते देख उसके भीतर के इस छुपे हुए प्यार को पहचान पाएगी?
क्या मोड लेगी अब इन दोनों के इश्क के इत्तेफाक की कहानी?
जानने के लिए देखिए अगला अध्याय!
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